मैकडॉनल्ड्स में बर्गर बनाने वाला लड़का कैसे बना दुनिया के तीन सबसे धनी लोगों में शामिल, जानें जेफ बेजोस का सफर मैकडॉनल्ड्स में महज 2.69 डॉलर प्रति घंटे पर बर्गर बनाने से शुरू हुआ जेफ बेजोस का सफर आज दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार होने तक पहुंच चुका है, जानिए उनके वो उसूल जो मुश्किल वक्त में हौसला देते हैं। बचपन में नाना के फार्महाउस पर हाथ बंटाना जेफ बेजोस के लिए महज एक शौक नहीं था, बल्कि वहीं से उन्होंने खुद अपनी समस्याएं सुलझाने और आत्मनिर्भर रहने का हुनर सीखा। मैकडॉनल्ड्स की नौकरी ने सिखाया ग्राहक का महत्व 16 बरस की उम्र में जेफ बेजोस ने मैकडॉनल्ड्स में महज 2.69 डॉलर प्रति घंटे की दर पर बर्गर तैयार करने का काम पकड़ा था। उसी नौकरी के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि किसी भी कारोबार में ग्राहक को खुश रखना और रोजमर्रा के काम को व्यवस्थित ढंग से निपटाना कितना जरूरी होता है। इंटरनेट के उभार ने बदली सोच 1994 का साल आते-आते वेब का दायरा बेतहाशा फैलने लगा था, हर बीतते साल के साथ इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की तादाद कई हजार फीसदी की छलांग लगा रही थी। इसी ट्रेंड को भांपते हुए जेफ बेजोस को यकीन हो गया कि आगे चलकर लोग सामान की खरीदारी के लिए भी वेब का सहारा लेंगे। खुद से यह पूछते हुए कि 80 की उम्र में पीछे मुड़कर देखने पर कहीं इस अवसर को न भुनाने का मलाल तो नहीं सताएगा, जवाब हां में मिलते ही उन्होंने अपनी बढ़िया नौकरी को अलविदा कह दिया और किताबों की ऑनलाइन दुकान खोलने के इरादे से सिएटल का रुख कर लिया। गैरेज से निकला अमेजन का सफर इस उद्यम को शुरुआत में कैडाब्रा नाम दिया गया था, जिसे कुछ समय बाद अमेजन के नाम से जाना जाने लगा। दफ्तर के तौर पर उनके पास बस एक गैरेज था और बजट इतना तंग था कि किताबों की पैकिंग के लिए ठीक-ठाक टेबल तक मुहैया नहीं थी। ऐसे में जेफ और उनकी नन्हीं टीम जमीन पर बैठकर ऑर्डर तैयार करती और अक्सर खुद पार्सल उठाकर डाकघर तक पहुंचा आती थी। मुश्किल घड़ी के लिए बेजोस के सूत्र जेफ बेजोस अक्सर याद दिलाते रहे हैं कि जिंदगी इतनी छोटी है कि उन साथियों पर वक्त जाया न किया जाए जो कठिन घड़ी में हाथ खड़े कर देते हैं, बल्कि हमेशा उन लोगों को तरजीह दें जो समस्या रोने के बजाय उसका निकास तलाशते हैं। उनकी नजर में किसी कंपनी की साख भी इंसान की प्रतिष्ठा जैसी ही होती है, यह रातों-रात नहीं बल्कि हर मुश्किल काम को ईमानदारी से निभाने की आदत से बनती है। साथ ही उनका यह भी मानना रहा है कि किसी भी अड़चन से बाहर निकलने की सबसे कारगर तरकीब नई सोच और ताजा आइडिया अपनाने में ही छुपी होती है। 112 अरब से 200 अरब डॉलर तक की उड़ान 2018 में 112 अरब डॉलर की दौलत के दम पर जेफ बेजोस धरती के सबसे धनी इंसान बन बैठे, और 2020 में कोरोना काल के दौरान उनकी नेटवर्थ 200 अरब डॉलर के पार निकल गई। 2019 में पत्नी मैकेन्ज़ी स्कॉट से तलाक जैसी निजी उठापटक झेलने के बावजूद उन्होंने अपने कारोबार की रफ्तार पर कभी आंच नहीं आने दी। सवाल-जवाब 1. जेफ बेजोस ने मैकडॉनल्ड्स में कब और कितनी तनख्वाह पर काम किया था? 16 साल की उम्र में उन्होंने मैकडॉनल्ड्स में 2.69 डॉलर प्रति घंटे की दर पर बर्गर बनाने की नौकरी की थी। 2. अमेजन का शुरुआती नाम क्या था? कंपनी की शुरुआत कैडाब्रा नाम से हुई थी, जिसे बाद में बदलकर अमेजन कर दिया गया। 3. जेफ बेजोस ने नौकरी छोड़ने का फैसला कैसे लिया? उन्होंने खुद से पूछा कि 80 साल की उम्र में इस मौके को न आजमाने का पछतावा होगा या नहीं, जवाब हां में मिलने पर उन्होंने नौकरी छोड़ दी। 4. अमेजन की शुरुआत कहां से हुई थी? अमेजन की शुरुआत सिएटल में जेफ बेजोस के गैरेज से हुई थी। 5. जेफ बेजोस कब दुनिया के सबसे अमीर इंसान बने और उनकी संपत्ति कितनी थी? 2018 में वे 112 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के सबसे अमीर इंसान बने। 6. 2020 में कोविड महामारी के दौरान उनकी नेटवर्थ कितनी हो गई थी? 2020 में कोविड महामारी के दौरान उनकी नेटवर्थ 200 अरब डॉलर के पार निकल गई। 7. जेफ बेजोस का तलाक कब और किससे हुआ था? 2019 में उनका तलाक पत्नी मैकेन्ज़ी स्कॉट से हुआ था। 8. मुश्किल वक्त में बेजोस किस तरह के लोगों के साथ रहने की सलाह देते हैं? वे उन लोगों के साथ रहने की सलाह देते हैं जो समस्या पर रोने के बजाय उसका समाधान तलाशते हैं। प्रेरणा और सबक जेफ बेजोस की कहानी बताती है कि छोटी शुरुआत और मुश्किल हालात भी बड़ी कामयाबी की राह में रुकावट नहीं बनते। • आत्मनिर्भरता जल्दी सीखें: बचपन में नाना के फार्महाउस पर खुद मुश्किलें सुलझाने की आदत ने आगे चलकर उन्हें बड़े फैसले खुद लेने का हौसला दिया। • छोटी नौकरी को भी गंभीरता से लें: मैकडॉनल्ड्स की मामूली नौकरी से उन्होंने ग्राहक संतुष्टि और अनुशासन जैसे सबक सीखे, जो आगे चलकर काम आए। • बड़े ट्रेंड को समय रहते पहचानें: इंटरनेट की तेज ग्रोथ को भांपकर उन्होंने सही वक्त पर बड़ा दांव खेला। • सही सवाल पूछें: 80 साल की उम्र में पछतावे वाला सवाल पूछकर उन्होंने बड़ा जोखिम लेने का साहस जुटाया। • मुश्किल वक्त में सही साथी चुनें: उनका मानना था कि समाधान खोजने वाले लोगों के साथ रहना ही तरक्की की राह आसान बनाता है। https://trendkia.com/success-stories/mcdonald-s-men-bargara-banane-vala-laraka-kaise-bana-duniya-ke-tina-sabase-dhani-logon-men-shamila-janen-jeff-bezos-ka-saphara-12854 TrendKia — Har trend, sabse pehle.