जलवायु परिवर्तन के बीच मिर्जापुर के योगेंद्र सिंह बने क्लाइमेट स्मार्ट किसान, एक एकड़ में एकीकृत खेती से पेश की मिसाल उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में किसान योगेंद्र सिंह ने जलवायु अनुकूल और जैविक एकीकृत खेती अपनाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जिससे उन्हें जिले में मॉडल किसान के रूप में चुना गया है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के अंतर्गत आने वाले सीखड़ विकास खंड स्थित खानपुर गांव निवासी किसान योगेंद्र सिंह ने खेती-बाड़ी के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए उन्होंने पारंपरिक कृषि तौर-तरीकों को पीछे छोड़ते हुए नवाचार और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाया है। जैविक खेती के साथ-साथ विविध फसलों के संयोजन से उन्होंने न केवल अपनी पैदावार बढ़ाई है, बल्कि उन्हें क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक मॉडल के रूप में 'क्लाइमेट स्मार्ट किसान' के तौर पर चुना गया है। एक एकड़ जमीन पर एकीकृत फार्म मॉडल का विकास किसान योगेंद्र सिंह ने अपनी एक एकड़ भूमि को एक पूर्ण एकीकृत कृषि मॉडल के रूप में विकसित किया है। उन्होंने इस खेत में मुख्य रूप से मूंगफली और अरहर का संयोजन लगाया है। मूंगफली के लिए उन्होंने 'गिरनार' प्रजाति का चयन किया है, जो मात्र दो से ढाई महीने के भीतर पककर तैयार हो जाती है। इस प्रजाति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कम बारिश या सीमित सिंचाई की स्थिति में भी यह बेहतर उत्पादन देती है। मूंगफली और अरहर की कटाई के तुरंत बाद वे रबी सीजन के लिए खेत को तैयार कर मटर तथा अन्य मौसमी फसलों की बुआई करते हैं। भूमि के इष्टतम उपयोग के लिए योगेंद्र सिंह ने मुख्य फसलों के साथ-साथ बहुस्तरीय सब्जी और मसाला खेती को भी शामिल किया है। वे अपने खेत में सूरन, सामान्य हल्दी, दुर्लभ काली हल्दी और अदरक की उपज ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त, जमीन की एक-एक इंच जगह का सदुपयोग करते हुए उन्होंने खेत की मेड़ों और चारों तरफ के किनारों पर कुंदरू तथा करेला जैसी बेलदार सब्जियों की सफल बागवानी की है। बागवानी, एग्रोफॉरेस्ट्री और पशुधन का बेहतरीन तालमेल एकीकृत मॉडल को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए योगेंद्र सिंह ने बहुवर्षीय बागवानी और वानिकी का समावेश किया है। उनके फार्म पर कटहल, बेल, अमरूद, आंवला, मौसमी और आम जैसे फलदार वृक्ष लगे हुए हैं। बागवानी के साथ-साथ उन्होंने एग्रोफॉरेस्ट्री (कृषि-वानिकी) को बढ़ावा दिया है और पशुपालन की जरूरतों को पूरा करने के लिए हरा चारा उत्पादन भी अपने खेत का हिस्सा बनाया है। इस बहुआयामी दृष्टिकोण से उन्हें साल भर नियमित आय प्राप्त होती रहती है और बाजार के जोखिम भी कम हो जाते हैं। 12 विकास खंडों में फार्मर परियोजना का विस्तार कृषि विभाग के उप निदेशक के अनुसार, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा संचालित 'फार्मर' (FARMER) परियोजना का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के कृषि पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से किसानों को सुरक्षित रखना है। इस योजना के माध्यम से 5 प्रमुख तकनीकी और प्रबंधन बिंदुओं को किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। मिर्जापुर जिले के सभी 12 विकास खंडों में एक-एक एकीकृत कृषि मॉडल फार्म विकसित किया जा रहा है, ताकि स्थानीय किसान प्रत्यक्ष देखकर इन तकनीकों को सीख सकें। इसी कड़ी में योगेंद्र सिंह के फार्म पर एक विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें क्षेत्र के 100 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया। उपस्थित किसानों ने उनके खेत का भ्रमण कर मूंगफली, अरहर, सब्जियों, एग्रोफॉरेस्ट्री और पशुधन चारे के एकीकृत प्रबंधन को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा। इसका आप पर असर • भारत में: जलवायु परिवर्तन के दौर में कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली फसलों का एकीकृत मॉडल अपनाकर किसान अपनी आय सुरक्षित कर सकते हैं। • मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) में: जिले के 12 विकास खंडों में बन रहे मॉडल फार्मों से स्थानीय किसानों को प्राकृतिक खेती, पशुपालन और बागवानी को एक साथ अपनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। सवाल-जवाब 1. मिर्जापुर के किस किसान को क्लाइमेट स्मार्ट किसान के रूप में चुना गया है? उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में सीखड़ विकास खंड के खानपुर निवासी किसान योगेंद्र सिंह को क्लाइमेट स्मार्ट किसान के तौर पर चुना गया है। 2. योगेंद्र सिंह ने मूंगफली की कौन सी प्रजाति लगाई है और इसकी क्या खासियत है? उन्होंने मूंगफली की 'गिरनार' प्रजाति लगाई है, जो केवल 2 से ढाई महीने में तैयार हो जाती है और कम बारिश या कम पानी की स्थिति में भी अच्छा उत्पादन देती है। 3. मिर्जापुर में कितने विकास खंडों में फार्मर परियोजना के मॉडल विकसित किए जा रहे हैं? कृषि विभाग द्वारा मिर्जापुर के सभी 12 विकास खंडों में एक-एक मॉडल फार्म विकसित किया जा रहा है। 4. योगेंद्र सिंह के एक एकड़ फार्म पर कौन-कौन सी फसलें और पेड़ लगाए गए हैं? फार्म पर मूंगफली, अरहर, मटर, सूरन, हल्दी, काली हल्दी, अदरक, कुंदरू, करेला के साथ-साथ कटहल, बेल, अमरूद, आंवला, मौसमी और आम के पेड़ लगाए गए हैं। 5. योगेंद्र सिंह के फार्म का अवलोकन करने कितने किसानों ने भाग लिया? आयोजित कार्यक्रम के दौरान 100 से अधिक किसानों ने उनके प्रक्षेत्र पर जाकर एकीकृत खेती प्रणाली का अवलोकन किया। प्रेरणा और सबक • जलवायु के अनुसार फसल चयन: मौसम के बदलाव को देखते हुए कम समय (2 से ढाई महीने) और कम पानी में पकने वाली 'गिरनार' जैसी मूंगफली प्रजातियों का चयन करना। • एकीकृत कृषि प्रणाली: केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय खाद्यान्न, सब्जी, बागवानी, पशुपालन और एग्रोफॉरेस्ट्री को एक साथ जोड़ना। • खेत के हर कोने का उपयोग: मेड़ों और किनारों पर कुंदरू और करेला जैसी बेलदार सब्जियां लगाकर जमीन के प्रत्येक हिस्से का अधिकतम उत्पादन हासिल करना। • जैविक पद्धतियों और नवाचार पर जोर: पारंपरिक तरीकों को छोड़कर जैविक खेती और समयबद्ध फसल चक्र अपनाना। https://trendkia.com/success-stories/mirzapur-ke-kisana-yogendra-singh-bane-klaimeta-smarta-kisana-eka-ekara-men-ekikrita-kheti-se-pesha-ki-misala-16193 TrendKia — Har trend, sabse pehle.