# मिर्जापुर के किसान योगेंद्र सिंह ने मात्र 3 हजार की लागत से कोहड़ी उगाई, एक ही महीने में कमाया 30 हजार से अधिक का मुनाफा

> उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में किसान योगेंद्र सिंह ने 3 हजार रुपये की लागत से 1 बीघा 20 बिस्वा जमीन पर कोहड़ी उगाकर एक महीने में 30 हजार रुपये से अधिक का लाभ कमाया है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-08-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/mirzapur-ke-kisana-yogendra-singh-ne-matra-3-hajara-ki-lagata-se-kohari-ugai-eka-hi-mahine-men-kamaya-30-hajara-se-adhika-ka-munap-19234 · **Language:** Hindi
**Tags:** मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश, योगेंद्र सिंह, कोहड़ी की खेती, कृषि समाचार, किसान मुनाफा

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में कृषि क्षेत्र से सफलता की एक शानदार कहानी सामने आई है, जहां एक स्थानीय किसान कम लागत वाली फसल से बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं। मिर्जापुर के रहने वाले किसान योगेंद्र सिंह ने अपनी 1 बीघा 20 बिस्वा जमीन पर कोहड़ी की खेती की शुरुआत की थी। इस खेती में उन्हें इतनी बढ़िया पैदावार मिली है कि महज एक महीने के भीतर वे 30 हजार रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ अर्जित कर चुके हैं। योगेंद्र सिंह का मानना है कि 3 से 4 महीने की अवधि वाली इस फसल में मामूली निवेश के जरिए कुल 50 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हासिल किया जा सकता है। आने वाले दो महीनों में उनका मुनाफा दोगुना होने की उम्मीद है, जिससे आसपास के अन्य किसानों को भी इस फसल को अपनाने की प्रेरणा मिल रही है।

## कम लागत में अधिक लाभ और बुआई का ब्योरा
किसान योगेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने 3 जून को अपने खेत में कोहड़ी के बीजों की बुआई की थी। इस खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शुरुआती लागत बेहद कम आती है। 1 बीघा 20 बिस्वा जमीन के लिए लगभग 100 ग्राम बीज की जरूरत पड़ी, जिसकी कीमत 1,000 रुपये आई। इसके बाद खेत की जुताई, बुआई, मेड़ बनाने और अन्य प्रारंभिक तैयारियों में लगभग 2,000 रुपये का खर्च आया। इस तरह पूरी जमीन पर फसल तैयार करने में कुल 3,000 रुपये (लगभग 3 से 4 हजार रुपये) की लागत आई है। हालांकि, बीच में हुई बारिश के कारण फसल को थोड़ा नुकसान भी झेलना पड़ा था, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा और वे अब तक 5,000 रुपये मूल्य की उपज बेच चुके हैं।

## मंडी तक माल की आपूर्ति और बाजार भाव की स्थिति
उत्पादित कोहड़ी की बिक्री के लिए योगेंद्र सिंह स्थानीय बाजारों के साथ-साथ पहाड़िया स्थित नवीन सब्जी मंडी का सहारा ले रहे हैं। खेत से प्रतिदिन एक गाड़ी माल लादकर मंडी के लिए रवाना होती है, जिसे आढ़त में जाकर बेचा जाता है। मौजूदा समय में बाजार में कोहड़ी के दाम काफी बेहतर मिल रहे हैं। इस समय मंडी में कोहड़ी का भाव 18 रुपये से 20 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास चल रहा है। योगेंद्र सिंह को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मांग बढ़ने के साथ ही यह कीमत 30 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है। वे अगले दो महीनों तक खेत से लगातार उत्पादन प्राप्त करते रहेंगे, जिससे प्रति बीघा औसतन 25 हजार से 30 हजार रुपये का औसत लाभ मिलना तय है।

## इसका आप पर असर
इस खबर का पाठकों पर प्रभाव:

- **भारत में:** कम लागत वाली कम अवधि की सब्जियों की खेती छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक कारगर साधन बन सकती है।
- **उत्तर प्रदेश में:** मिर्जापुर के स्थानीय किसान नवीन सब्जी मंडी पहाड़िया का लाभ उठाकर अपनी उपज का बेहतर बाजार भाव प्राप्त कर सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. योगेंद्र सिंह ने कितनी जमीन पर कोहड़ी की खेती की है?
योगेंद्र सिंह ने मिर्जापुर में 1 बीघा 20 बिस्वा जमीन पर कोहड़ी की खेती की है।

### 2. कोहड़ी की खेती में कुल कितनी लागत आई?
बीज, जुताई, बुआई और मेड़ बनाने समेत कुल लागत मात्र 3,000 रुपये (3 से 4 हजार रुपये) आई है।

### 3. एक महीने में किसान को कितना मुनाफा हुआ है?
फसल शुरू होने के एक महीने के भीतर योगेंद्र सिंह 30,000 रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ कमा चुके हैं।

### 4. कोहड़ी का वर्तमान बाजार भाव क्या चल रहा है?
सब्जी मंडी में कोहड़ी का वर्तमान भाव 18 रुपये से 20 रुपये प्रति किलोग्राम है, जिसके 30 रुपये तक जाने की संभावना है।

### 5. उपज की बिक्री किस मंडी में की जाती है?
उपज की बिक्री स्थानीय बाजारों और पहाड़िया स्थित नवीन सब्जी मंडी की आढ़त में की जाती है।

## प्रेरणा और सबक
योगेंद्र सिंह की सफलता से किसानों के लिए मुख्य सीख:

- **कम लागत में बड़ी सोच:** महज 3 हजार रुपये के छोटे निवेश से खेती शुरू करके बड़ा मुनाफा कमाना संभव है।
- **फसल का सही चुनाव:** 3 से 4 महीने की कम अवधि वाली फसलों का चयन करके जल्दी और बेहतर रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है।
- **दैनिक विपणन रणनीति:** अपनी उपज को रोजाना स्थानीय बाजार और नवीन सब्जी मंडी में भेजकर नियमित आय सुनिश्चित की जा सकती है।
- **मौसम की मार से उबरना:** बारिश से हुए थोड़े नुकसान के बावजूद हार न मानकर सही देखभाल से उत्पादन बनाए रखा जा सकता है।

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