मुरादाबाद: मां शारदा समूह की महिलाओं ने कटी लाल मिर्च के अचार से खड़ा किया शानदार बिजनेस, कर रहीं बंपर कमाई उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में 10 महिलाओं का 'मां शारदा समूह' कटी हुई लाल मिर्च का अचार बनाकर हर महीने 12,000 से 18,000 रुपये की शानदार कमाई कर रहा है। खाने की बर्बादी रोकने के लिए शुरू किया गया उनका यह अनोखा उत्पाद बाजारों में भारी डिमांड में है। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद शहर में—जो पूरी दुनिया में अपने पीतल के पारंपरिक हस्तशिल्प के लिए मशहूर है—अब एक बिल्कुल अलग तरह का घरेलू उद्योग अपनी जड़ें जमा रहा है। यहां की स्थानीय महिलाएं अब पारंपरिक घरेलू दायरों से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की एक शानदार कहानी लिख रही हैं। घर के रोजमर्रा के कामों और सीमित दिनचर्या से आगे बढ़ते हुए, इन महिलाओं ने खुद को एक बेहद सफल कारोबार में स्थापित कर लिया है। उनकी इस प्रेरणादायक सफलता के केंद्र में एक बेहद साधारण लेकिन बेहद लोकप्रिय उत्पाद है: लाल कटी मिर्च का विशेष अचार। स्थानीय बाजारों में इस खास और स्वादिष्ट अचार की मांग में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे इसके निर्माण में जुटी महिलाओं को ना सिर्फ बड़ी आर्थिक आज़ादी मिली है बल्कि उनके चेहरों पर काफी खुशी भी है। एक घरेलू रेसिपी को मुनाफे वाले व्यवसाय में बदलकर, वे ना केवल अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रही हैं बल्कि आस-पड़ोस की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हैं। मां शारदा समूह की शानदार और मजबूत शुरुआत इस तेजी से बढ़ते हुए अचार कारोबार के पीछे 'मां शारदा समूह' नाम का एक बेहद मजबूत और संगठित समूह है। मुरादाबाद के व्यस्त इलाकों में काम कर रहे इस समूह में 10 मेहनती महिलाएं शामिल हैं, जिन्होंने अपने हुनर, समय और संसाधनों को एक साथ मिलाकर यह उद्यम शुरू किया है। समूह ने शुरुआत में पारंपरिक साबुत लाल मिर्च का अचार बनाना शुरू किया था, जो उत्तर भारत के कई घरों में खाने के साथ परोसा जाता है। हालांकि, जैसे-जैसे उन्होंने अपने शुरुआती ग्राहकों से बातचीत की, उन्होंने जल्द ही ग्राहकों की आदतों से जुड़ी एक बहुत ही व्यावहारिक समस्या पर ध्यान दिया। भोजन के दौरान एक व्यक्ति के लिए पूरी साबुत लाल मिर्च खाना अक्सर बहुत ज्यादा या बहुत तीखा हो जाता है। इस वजह से लोग आधी मिर्च ही खा पाते थे और बाकी की स्वादिष्ट मिर्च प्लेट में ही बेकार चली जाती थी। इस आम परेशानी को समझते हुए, समूह ने अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव करने का फैसला किया। भोजन की बर्बादी रोकने के लिए निकाला अनोखा तरीका अचार की इस बर्बादी को रोकने के लिए, समूह की महिलाओं ने आपस में विचार-विमर्श किया और एक बेहतरीन तथा व्यावहारिक उपाय निकाला। मिर्च को साबुत रखने और उसमें मसाला भरने के बजाय, उन्होंने अचार बनाने की प्रक्रिया से पहले ही मिर्च को छोटे टुकड़ों में काटना शुरू कर दिया। अब एक बड़ी लाल मिर्च को बहुत ही सावधानी से 5 से 6 छोटे पीस में काटा जाता है। इस छोटे लेकिन बेहद कारगर बदलाव से सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अब ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से थोड़ा सा अचार भी अपनी थाली में ले सकते हैं, जिससे अचार बिल्कुल भी बर्बाद नहीं होता। इस नए कटी मिर्च वाले तरीके ने ना केवल बर्बादी की समस्या को हमेशा के लिए सुलझाया बल्कि लोगों को बेहतरीन स्वाद भी दिया। यह उत्पाद हर मौसम और हर सीजन में लोगों को बेहद पसंद आ रहा है। अचार तैयार करने की व्यवस्थित और पारंपरिक प्रक्रिया इस शानदार अचार को तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से टीम वर्क और पारंपरिक तरीकों पर आधारित है। ताजी मिर्च को अच्छी तरह से धोने, सुखाने और 5 से 6 टुकड़ों में काटने के बाद, उसमें सभी शुद्ध पारंपरिक भारतीय मसाले अच्छी तरह से मिक्स किए जाते हैं और फिर उच्च गुणवत्ता वाला भरपूर तेल डाला जाता है। यह तेल अचार को लंबे समय तक खराब होने से बचाता है, जबकि मसालों का गुप्त मिश्रण इसे वो लाजवाब स्वाद देता है जिसकी लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं। मां शारदा समूह की अध्यक्ष रजनी विस्तार से बताती हैं कि 10 महिलाओं के इस समूह में सभी ने अपना रोजाना का काम बहुत ही व्यवस्थित तरीके से बांटा हुआ है। कुछ महिलाएं मिलकर मिर्चियों को छांटने और काटने का जिम्मा संभालती हैं, तो वहीं कुछ अन्य महिलाएं मसाले भूनने, उन्हें मिलाने और डिब्बे भरने का काम करती हैं। काम के इस बेहतरीन बंटवारे से उत्पादन भी तेजी से होता है और क्वालिटी भी शानदार बनी रहती है। स्टॉल और फोन ऑर्डर के जरिए हो रही जबरदस्त बिक्री मां शारदा समूह की बिक्री और मार्केटिंग की रणनीति भी उनके अचार की तरह ही एकदम असली और कारगर है। ये महिलाएं अपने लाल कटी मिर्च के अचार को बेचने के लिए अलग-अलग स्थानीय बाजारों और मेलों में अपने स्टॉल लगाती हैं। जो भी ग्राहक इन स्टॉलों पर इस अचार का स्वाद चखता है, वो इसके ताजे स्वाद, शानदार क्वालिटी और कटी हुई मिर्च के अनोखे तरीके की तारीफ किए बिना नहीं रह पाता। बहुत से संतुष्ट ग्राहक खरीदारी के बाद समूह का नंबर भी अपने साथ ले जाते हैं। इसके चलते अब उन्हें हर दिन फोन पर सीधा ऑर्डर मिलने लगा है। माउथ पब्लिसिटी से यह अचार इतना मशहूर हो गया है कि कुछ पक्के ग्राहक तो सीधा महिलाओं के घर आकर भी अचार खरीद कर ले जाते हैं। इससे उनका सारा माल हाथों-हाथ बिक जाता है। शानदार मुनाफा और रोजगार के नए सुनहरे अवसर इस छोटे से कारोबार से होने वाले मुनाफे ने मां शारदा समूह की महिलाओं की जिंदगी पूरी तरह से बदल दी है। समूह की अध्यक्ष रजनी ने बताया कि समूह की हर एक महिला इस काम से हर महीने 12 से 18000 रुपए तक की शानदार कमाई कर रही है। इतनी अच्छी आमदनी से महिलाओं को बड़ी आर्थिक सुरक्षा मिली है, जिससे वे अपने घर के खर्चों में मदद कर रही हैं, बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं और अपनी बचत भी कर रही हैं। वे पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन गई हैं। छोटे स्तर पर शुरू किया गया यह काम अब इस बात का सबूत है कि महिलाओं का समूह मिलकर कोई भी बदलाव ला सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि मां शारदा समूह अब मुरादाबाद की अन्य महिलाओं को भी अपने साथ इस रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रहा है। इसका आप पर असर • भारत में: यह कहानी दिखाती है कि कैसे छोटे और स्थानीय स्तर पर शुरू किए गए घरेलू उद्योग महिलाओं को बड़ी आर्थिक आज़ादी दिला सकते हैं। • मुरादाबाद में: स्थानीय महिलाओं के लिए यह एक सीधा अवसर है कि वे पीतल उद्योग के अलावा खाद्य प्रसंस्करण जैसे नए क्षेत्रों में स्वरोजगार के विकल्प तलाश सकती हैं। सवाल-जवाब 1. मुरादाबाद में लाल कटी मिर्च का अचार कौन बना रहा है? मुरादाबाद में 10 महिलाओं का एक संगठन 'मां शारदा समूह' लाल कटी मिर्च का विशेष अचार तैयार कर रहा है। 2. मां शारदा समूह की अध्यक्ष कौन हैं? इस महिला समूह की अध्यक्ष रजनी हैं, जो पूरे समूह के काम की देखरेख करती हैं। 3. समूह ने मिर्च को काटकर अचार बनाने का फैसला क्यों किया? अक्सर लोग पूरी साबुत मिर्च नहीं खा पाते थे और वह बर्बाद हो जाती थी, इसलिए बर्बादी रोकने के लिए उन्होंने एक मिर्च के 5 से 6 पीस करके अचार बनाना शुरू किया। 4. इस अचार के बिजनेस से महिलाएं कितनी कमाई कर रही हैं? समूह से जुड़ी प्रत्येक महिला इस अचार के कारोबार से हर महीने 12 से 18000 रुपए तक का मुनाफा कमा रही है। 5. लोग इस समूह का अचार कैसे खरीद रहे हैं? ग्राहक स्थानीय स्टॉल से, फोन पर ऑर्डर देकर, और सीधे महिलाओं के घर जाकर भी इस अचार की खरीदारी कर रहे हैं। प्रेरणा और सबक • समस्या को अवसर में बदलना: साबुत मिर्च के बेकार जाने की समस्या को देखकर समूह ने उसे छोटे टुकड़ों में काटने का विचार निकाला, जो ग्राहकों को बहुत पसंद आया। • टीम वर्क की ताकत: 10 महिलाओं ने एक साथ मिलकर काम को व्यवस्थित तरीके से बांटा, जिससे उत्पादन बढ़ा और काम आसान हुआ। • निरंतर प्रयास: घर के काम-काज से बाहर निकलकर बाजार में स्टॉल लगाना और खुद की मार्केटिंग करना उनकी आत्मनिर्भर बनने की मजबूत इच्छाशक्ति को दर्शाता है। https://trendkia.com/success-stories/moradabad-maa-sharda-group-ki-mahilaon-ne-kati-lala-mircha-ke-achara-se-khara-kiya-shanadara-bijanesa-kara-rahin-bnpara-kamai-9339 TrendKia — Har trend, sabse pehle.