{
  "type": "article",
  "title": "मुरादाबाद में मां शारदा समूह का कमाल, सजावटी झूमर-झालर बनाकर महिलाएं हर महीने कमा रहीं 15 हजार रुपये",
  "summary": "उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में मां शारदा समूह की 10 महिलाएं सजावटी झूमर और झालर बनाकर हर महीने 12,000 से 15,000 रुपये कमा रही हैं और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में महिलाओं का एक समूह अपने पारंपरिक घरेलू जीवन से आगे निकलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहा है। स्थानीय स्तर पर गठित मां शारदा समूह की महिलाएं आकर्षक झूमर और झालर बनाकर बाजार में अपनी खास पहचान बना चुकी हैं। सजावटी वस्तुओं के इस कारोबार के जरिए ये महिलाएं हर महीने शानदार कमाई कर रही हैं। हस्तकला और टीम वर्क के जरिए शुरू किए गए इस प्रयास ने न केवल उनकी वित्तीय स्थिति को मजबूती दी है, बल्कि पूरे इलाके में महिला सशक्तिकरण का एक सफल संदेश भी पहुंचाया है।\n\nमां शारदा समूह का गठन और काम का विभाजन\nमुरादाबाद में संचालित इस पहल की रीढ़ 'मां शारदा समूह' है, जिसमें कुल 10 महिलाएं एक साथ संगठित होकर कार्य कर रही हैं। समूह की अध्यक्ष रजनी के अनुसार, इस पूरे काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए सदस्यों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा किया गया है। निर्माण प्रक्रिया में सबसे पहले बाजार से गुणवत्तापूर्ण सजावटी फूल और अन्य कच्ची सामग्री खरीदी जाती है। इसके बाद समूह की कुछ महिलाएं फूलों को व्यवस्थित कर सुंदर डिजाइन तैयार करती हैं, वहीं अन्य महिलाएं उसमें झूमर और झालरों की माला पिरोने का काम संभालती हैं। यह उत्पाद छोटे से लेकर बड़े, हर आकार में तैयार किए जाते हैं, जिससे हर तरह के ग्राहकों की पसंद को पूरा किया जा सके।\n\nसावन और त्योहारों में बढ़ती मांग\nइन हस्तनिर्मित झूमर और झालरों को ग्राहकों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। हालांकि पूरे साल इनकी बिक्री बनी रहती है, लेकिन सावन के पवित्र महीने में इनकी मांग अत्यधिक बढ़ जाती है। सावन के दौरान धार्मिक आयोजनों और घरों की सजावट के लिए लोग इन झूमरों को विशेष रूप से खरीदते हैं। सजावट की सुंदरता और बारीकी के कारण मुरादाबाद मंडल के साथ-साथ आसपास के जिलों से भी ग्राहक इनके मुरीद बन चुके हैं।\n\nबिक्री का मॉडल और घर-घर से ऑर्डर\nसमूह अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए विभिन्न स्थानों और मेलों में प्रदर्शनी स्टॉल लगाता है। स्टॉल पर आने वाले लोग इन सजावटी झालरों को देखकर इतने प्रभावित होते हैं कि वे सीधे संपर्क नंबर नोट कर लेते हैं। इसके बाद ग्राहक फोन करके नए-नए ऑर्डर दर्ज कराते हैं। कई ग्राहक ऐसे भी हैं जो सीधे महिलाओं के घर पहुंचकर अपनी पसंद का झूमर खरीदकर ले जाते हैं। प्रत्यक्ष बिक्री और फोन ऑर्डर के इस संयोजन ने इनके व्यापार को काफी सहज और विस्तृत बना दिया है।\n\nकमाई और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम\nइस कुटीर उद्योग का सबसे सुखद पहलू महिलाओं की व्यक्तिगत आर्थिक प्रगति है। मां शारदा समूह की प्रत्येक महिला सदस्य इस काम से हर महीने 12,000 रुपये से 15,000 रुपये तक का मुनाफा कमा रही है। इस नियमित आमदनी ने उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुधारने में बड़ी भूमिका निभाई है। समूह अब पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन चुका है और आसपास की अन्य महिलाओं को भी इस तरह के स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह मॉडल दर्शाता है कि छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योग महिलाओं के वित्तीय सशक्तीकरण का सशक्त साधन बन सकते हैं।\n• मुरादाबाद/यूपी में: हस्तशिल्प निर्माण से जुड़कर स्थानीय महिलाएं हर महीने 12,000 से 15,000 रुपये की स्थिर आय अर्जित कर रही हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मुरादाबाद का मां शारदा समूह क्या काम करता है?\nयह 10 महिलाओं का एक समूह है जो फूलों और सजावटी सामग्रियों से विभिन्न आकारों के सुंदर झूमर और झालर बनाता है।\n\n2. समूह की प्रत्येक महिला सदस्य को इससे कितनी कमाई होती है?\nइस कुटीर उद्योग से समूह की हर महिला सदस्य प्रतिमाह 12,000 रुपये से 15,000 रुपये तक कमा लेती है।\n\n3. मां शारदा समूह की अध्यक्ष का नाम क्या है?\nइस समूह की अध्यक्ष रजनी हैं, जो अन्य सदस्यों के साथ मिलकर उत्पादन और बिक्री का प्रबंधन करती हैं।\n\n4. इन झूमरों और झालरों की सबसे ज्यादा मांग कब होती है?\nइन सजावटी झूमरों की मांग पूरे साल रहती है, लेकिन सावन के महीने में और त्यौहारों पर इनकी मांग सबसे अधिक होती है।\n\nप्रेरणा और सबक\n• संगठित कार्य प्रणाली: 10 सदस्यों के बीच स्पष्ट काम के बंटवारे ने बड़े पैमाने पर उत्पादन को आसान बनाया।\n• त्योहारों के अनुरूप उत्पाद: सावन और उत्सवों की मांग को ध्यान में रखकर सजावटी सामान तैयार किया गया।\n• लचीला बिक्री मॉडल: स्टॉल प्रदर्शनी, फोन बुकिंग और direct बिक्री के तालमेल से व्यापार का विस्तार किया।",
  "url": "https://trendkia.com/success-stories/moradabad-men-maa-sharda-group-ka-kamala-sajavati-jhumara-jhalara-banakara-mahilaen-hara-mahine-kama-rahin-15-hajara-rupaye-20200",
  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-08-22",
  "tags": [
    "मुरादाबाद",
    "उत्तर प्रदेश",
    "मां शारदा समूह",
    "सशक्तीकरण",
    "महिला रोजगार",
    "कुटीर उद्योग",
    "झूमर",
    "सावन"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}