मोटरसाइकिल पर लदी चक्की से कोडरमा में रोज बन रहा ताजा सत्तू, महज 30 हजार में शुरू हुआ ये कारोबार झारखंड के कोडरमा में पिंटू कुमार ने अपनी मोटरसाइकिल पर मिनी आटा चक्की लगाकर एक अनोखा कारोबार शुरू किया है, जो गली-मोहल्लों में जाकर ग्राहकों के सामने ही ताजा और शुद्ध चना सत्तू तैयार करता है। खाने-पीने की चीजों में मिलावट की खबरें आम होती जा रही हैं, और चना सत्तू जैसी रोजमर्रा की चीज़ भी इससे अछूती नहीं है। इसी समस्या का हल झारखंड के कोडरमा जिले में एक शख्स ने अनोखे तरीके से निकाला है। उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल पर ही एक छोटी आटा चक्की मशीन फिट करवा ली है और अब गली-मोहल्लों में घूमकर लोगों की आंखों के सामने ही ताजा सत्तू पीसकर देते हैं। मोटरसाइकिल पर चलती-फिरती दुकान पिंटू कुमार नाम के इस युवक ने यह अनोखा जुगाड़ खड़ा किया है। रोज सुबह वह अपनी बाइक में लगी मिनी चक्की के साथ अलग-अलग इलाकों का रुख करते हैं। ग्राहक जैसे ही भुना हुआ चना लेकर पहुंचते हैं, वहीं मौके पर मशीन चालू कर दी जाती है और चंद मिनटों में ताजा, गरमागरम सत्तू तैयार होकर हाथ में आ जाता है। इसके बदले वह 130 रुपये प्रति किलो के हिसाब से पैसे लेते हैं। सिर्फ 30 हजार में खड़ा किया कारोबार इस पूरे सेटअप को तैयार करने में पिंटू को महज 30 हजार रुपये खर्च करने पड़े। मशीन देखने में भले छोटी लगे, लेकिन काम के मामले में यह किसी बड़ी चक्की से कम नहीं। एक घंटे के भीतर यह मशीन 15 से 20 किलो तक सत्तू पीस देती है, यानी दिनभर में कई ग्राहकों की मांग आसानी से पूरी हो जाती है। अब लाइन में लगने की जरूरत नहीं पिंटू बताते हैं कि पहले लोगों को चना लेकर पैदल या साइकिल से दूर की चक्की तक जाना पड़ता था, वहां घंटों कतार में खड़े रहना पड़ता था और बिजली गुल होने पर तो और मुसीबत बढ़ जाती थी। अब उनकी यह घूमने वाली मशीन सीधे घर की दहलीज तक पहुंच जाती है, जिससे न कतार लगानी पड़ती है और न बिजली की चिंता करनी पड़ती है। आंखों के सामने बनता सत्तू, भरोसा पक्का इस बिजनेस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यही है कि पूरी प्रक्रिया ग्राहक की मौजूदगी में होती है। चना पीसे जाने से लेकर सत्तू तैयार होने तक हर कदम सामने दिखता है, इसलिए मिलावट की कोई गुंजाइश नहीं बचती। यही वजह है कि आसपास के मोहल्ले के लोग अब बड़ी दुकानों की बजाय इसी चलती-फिरती चक्की पर भरोसा जताने लगे हैं, और पिंटू की यह देसी शुरुआत अच्छी कमाई का जरिया भी बन गई है। इसका आप पर असर • भारत में: यह मॉडल दिखाता है कि मिलावट की शिकायतों से जूझ रहे किसी भी शहर में मामूली पूंजी से ही भरोसेमंद, चलता-फिरता कारोबार खड़ा किया जा सकता है। • कोडरमा में: यहां के लोगों को अब सत्तू के लिए चक्की तक जाने, कतार में लगने या बिजली कटौती झेलने की जरूरत नहीं, वह भी 130 रुपये प्रति किलो की तय कीमत पर। सवाल-जवाब 1. यह मोबाइल सत्तू मिल किसने शुरू की? झारखंड के कोडरमा जिले में पिंटू कुमार ने अपनी मोटरसाइकिल पर मिनी चक्की मिल लगाकर यह कारोबार शुरू किया है। 2. इसे शुरू करने में कितना खर्च आया? पूरा सेटअप तैयार करने में करीब 30 हजार रुपये की लागत आई। 3. सत्तू किस दाम पर बेचा जाता है? शुद्ध चना सत्तू 130 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाता है। 4. यह मशीन एक घंटे में कितना सत्तू बना सकती है? यह मिनी चक्की एक घंटे में 15 से 20 किलोग्राम तक सत्तू तैयार कर सकती है। 5. लोग इस पर इतना भरोसा क्यों कर रहे हैं? क्योंकि पूरा सत्तू ग्राहक की आंखों के सामने पीसा जाता है, जिससे मिलावट की कोई गुंजाइश नहीं रहती। 6. पहले लोगों को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता था? उन्हें चना लेकर दूर की चक्की तक जाना पड़ता था, वहां कतार में इंतजार करना पड़ता था और बिजली न रहने पर परेशानी और बढ़ जाती थी। प्रेरणा और सबक • असली दिक्कत पहचानो: पिंटू ने मिलावट की आम शिकायत को सीधा मौका बना लिया। • बड़ी पूंजी जरूरी नहीं: महज 30 हजार रुपये में पूरा कारोबार खड़ा किया जा सकता है। • ग्राहक तक खुद पहुंचो: दुकान का इंतजार करने की बजाय वह खुद हर मोहल्ले में पहुंचते हैं। • पारदर्शिता से भरोसा बनता है: सामने बनता सत्तू ही उनकी सबसे बड़ी मार्केटिंग है। • छोटी मशीन, बड़ा असर: सीमित संसाधनों में भी एक घंटे में 15-20 किलो उत्पादन संभव है। https://trendkia.com/success-stories/motarasaikila-para-ladi-chakki-se-kodarma-men-roja-bana-raha-taja-sattu-mahaja-30-hajara-men-shuru-hua-ye-karobara-8871 TrendKia — Har trend, sabse pehle.