# नालंदा की आकृति राजवंशी ने अंधेपन को दी मात, दिल्ली पहुंचकर सीख रहीं सिलाई और हुनरमंद बनने की राह

> बिहार के नालंदा जिले की रहने वाली आकृति राजवंशी ने आंखों की रोशनी जाने के बाद भी हार नहीं मानी। दिल्ली आकर वह अब सिलाई, हैंडीक्राफ्ट और कला के जरिए अपनी नई पहचान बना रही हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-11-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/nalanda-ki-akriti-rajvanshi-ne-andhepan-ko-di-maat-57592 · **Language:** Hindi
**Tags:** आकृति राजवंशी, नालंदा न्यूज, दृष्टिबाधित प्रशिक्षण, हैंडीक्राफ्ट ट्रेनिंग, बिहार समाचार, राजगीर

बिहार के नालंदा जिले के राजगीर की रहने वाली आकृति राजवंशी का शुरुआती जीवन काफी सामान्य रहा था। वह पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहती थीं और कॉलेज तथा यूनिवर्सिटी के टॉपर छात्रों में गिनी जाती थीं। लेकिन 12वीं की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कमजोर होने लगी और साल 2023 आते-आते वह पूरी तरह से दृष्टिहीन हो गईं। आकृति का कहना है कि उस दौर में उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि अब उनके जीवन का अगला कदम क्या होगा। उनके भीतर बार-बार यही असमंजस रहता था कि बिना देख सकने की क्षमता के वह क्या कर पाएंगी और समाज उनके बारे में क्या धारणा रखेगा। उनके परिवार को भी उनके भविष्य की गहरी चिंता सता रही थी। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी जिंदगी को शून्य से दोबारा शुरू करने की थी।

 

## दूसरों की बातों को नजरअंदाज कर खुद पर जताया पूरा भरोसा
 दृष्टि जाने के बाद आसपास के लोगों ने कई तरह की बातें करनी शुरू कर दी थीं। कुछ लोग उनके भविष्य और वैवाहिक जीवन को लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े करते थे। उन्हें ऐसा लगता था कि अब आकृति पहले की तरह अपनी शिक्षा जारी रखने या कोई अन्य कार्य करने में सक्षम नहीं रह पाएंगी। हालांकि, आकृति ने इन नकारात्मक बातों को कभी भी खुद पर हावी नहीं होने दिया। उनका मानना है कि पहले वह अपनी जिंदगी को लेकर उतनी गंभीर नहीं थीं, लेकिन इस कठिन परिस्थिति ने उन्हें खुद को गहराई से समझने का अवसर दिया। उन्होंने किताबें पढ़ने के बजाय ऑडियो बुक्स के माध्यम से मानव मनोविज्ञान और ह्यूमन साइकोलॉजी का अध्ययन किया तथा अपने संवाद कौशल पर खास मेहनत की। वह बताती हैं कि पहले उन्हें लोगों की बातें और उनका आचरण समझने में कठिनाई होती थी, लेकिन अब वह दूसरों को कहीं बेहतर ढंग से समझ लेती हैं और उनका आत्मविश्वास भी काफी मजबूत हो चुका है।

 

## मोबाइल पर खुद जानकारी तलाशकर बिहार से दिल्ली पहुंचीं
 आकृति ने इंटरनेट के जरिए दिल्ली में दृष्टिबाधित लोगों के लिए संचालित होने वाले ट्रेनिंग प्रोग्राम और ब्लाइंड फुटबॉल से जुड़े डेविड के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संबंधित वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के माध्यम से संपर्क सूत्र निकाला और बातचीत शुरू की। उन्होंने सबसे पहले जनवरी के महीने में संपर्क किया था, लेकिन उस समय दाखिला और प्रशिक्षण प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही थी। इसके बाद उन्होंने जुलाई में फिर से संपर्क साधा जिसके बाद उन्हें दिल्ली आने का अवसर मिल गया। यहां दाखिले के वक्त उनसे यह सवाल भी पूछा गया था कि क्या वह लंबे समय तक हॉस्टल या केंद्र पर रहकर अपना कोर्स पूरा कर पाएंगी, क्योंकि कई प्रशिक्षार्थी बीच में ही प्रशिक्षण छोड़कर वापस चले जाते हैं। लेकिन आकृति ने इस चुनौती को सहर्ष स्वीकार किया और दिल्ली आकर अपनी नई सीख की शुरुआत की।

 

## हाथों को बनाया आंखें और सीख रही हैं सिलाई व हस्तशिल्प
 दिल्ली आने के बाद आकृति ने जितना व्यावहारिक ज्ञान हासिल किया, उतना वह घर बैठे ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से नहीं सीख पाई थीं। यहां उन्हें प्रशिक्षण के दौरान सिलाई, हैंडीक्राफ्ट और अन्य कलात्मक विधाएं सिखाई जा रही हैं। सिलाई सीखने के अपने शुरुआती अनुभवों को साझा करते हुए वह बताती हैं कि शुरुआत में उनके टांके सीधे नहीं बैठते थे और कभी-कभी कपड़ा भी तिरछा हो जाता था। ऐसे समय में उनके प्रशिक्षक उनके हाथों को पकड़कर मशीन पर काम करने का अभ्यास कराते थे। मशीन में लगी रबर और अन्य तकनीकों की सहायता से उन्हें कपड़े की सही दिशा का अनुमान लगाया जाता है। आकृति का यह स्पष्ट मानना है कि जीवन में किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि वह संभव होगा या नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास करते रहना सबसे अधिक आवश्यक है।

 

## सरकारी नौकरी के बजाय कला के क्षेत्र में बनाना चाहती हैं मुकाम
 आकृति के परिजनों की यह इच्छा थी कि वह उच्च शिक्षा प्राप्त करके किसी सरकारी नौकरी से जुड़ जाएं ताकि उनका भविष्य पूरी तरह सुरक्षित हो सके। लेकिन आकृति की सबसे ज्यादा रुचि कला और रचनात्मक कार्यों में है। वह आभूषण निर्माण यानी ज्वेलरी मेकिंग और हस्तशिल्प के क्षेत्र में ही अपनी एक स्वतंत्र पहचान स्थापित करना चाहती हैं। वह अपने घर पर भी परिवार के सदस्यों के लिए विभिन्न प्रकार की ज्वेलरी तैयार करती रही हैं। इसके अलावा वह कैंडल मेकिंग का कोर्स भी सफलतापवूर्क पूरा कर चुकी हैं। आकृति का कहना है कि उन्हें अपने हाथों से नई और खूबसूरत चीजें गढ़ना बेहद पसंद है और वह इसी रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ना चाहती हैं।

 

## सच्ची खूबसूरती चेहरे में नहीं बल्कि इंसान के हुनर में बसती है
 जब बातचीत के दौरान आकृति से यह पूछा गया कि वह अपनी खूबसूरती को किस नजरिए से देखती हैं, तो उनका उत्तर बेहद प्रेरणादायक था। उन्होंने कहा कि सुंदरता केवल बाहरी रूप या चेहरे की बनावट तक सीमित नहीं होती है। आज मनुष्य का चेहरा जैसा है, आने वाले समय में वह वैसा नहीं रहेगा, लेकिन इंसान के अच्छे गुण, उसका आचरण, उसका ज्ञान और उसका हुनर उम्र भर उसके साथ बने रहते हैं। आकृति ने अपने जीवन के अनुभवों से यही सीखा है कि किसी भी व्यक्ति की असली पहचान उसके विचारों और उसके कर्मों से तय होती है, न कि उसकी शारीरिक दिखावट से।

## सवाल-जवाब

### 1. आकृति राजवंशी कहाँ की रहने वाली हैं?
आकृति राजवंशी बिहार के नालंदा जिले के राजगीर की रहने वाली हैं।

### 2. आकृति की आँखों की रोशनी कब पूरी तरह चली गई थी?
साल 2023 में आकृति की आँखों की रोशनी पूरी तरह से चली गई थी।

### 3. आकृति ने दिल्ली में किस तरह की ट्रेनिंग प्राप्त की?
दिल्ली में उन्होंने सिलाई, हैंडीक्राफ्ट और अन्य कलात्मक चीजों की ट्रेनिंग प्राप्त की।

### 4. आकृति भविष्य में क्या करना चाहती हैं?
वह सरकारी नौकरी के बजाय ज्वेलरी डिजाइनिंग और हैंडीक्राफ्ट के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहती हैं।

### 5. आकृति को दिल्ली में ट्रेनिंग की जानकारी कैसे मिली थी?
उन्हें इंटरनेट के जरिए वेबसाइट और यूट्यूब चैनल से दिल्ली के ट्रेनिंग प्रोग्राम की जानकारी मिली थी।

## प्रेरणा और सबक
आकृति राजवंशी की यह यात्रा दर्शाती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर नई शुरुआत की जा सकती है।

- **आत्मविश्वास बनाए रखें:** कठिन समय में लोगों की नकारात्मक बातों को अपनी कमजोरी न बनने दें, बल्कि खुद पर पूरा भरोसा रखें।
- **नया हुनर सीखें:** शारीरिक बाधाओं के बावजूद अपने पसंद के रचनात्मक कार्यों और कला में महारत हासिल करने का प्रयास करें।
- **निरंतर प्रयास:** किसी भी काम की शुरुआत में आने वाली असफलताओं से घबराए बिना लगातार कोशिश करते रहना चाहिए।
- **सोच बदलें:** बाहरी सुंदरता के बजाय अपने ज्ञान, व्यवहार और कौशल को अपनी असली पहचान बनाएं।

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