# नाविक के बेटे दीपक निषाद की अनूठी मिसाल, 12 वर्षों के सफर में सुल्तानपुर की 2,00,000 से अधिक तस्वीरें कैमरे में उतारीं

> सुल्तानपुर के दियरा गांव निवासी नाविक के बेटे दीपक निषाद ने तंगहाली के बावजूद अपने पैसों से ग्रेजुएशन की और 12 वर्षों में सुल्तानपुर की 2 लाख से अधिक तस्वीरें खींचकर युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-08-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/navika-ke-bete-deepak-nishad-ki-anuthi-misala-12-varshon-ke-saphara-men-sultanpur-ki-2-00-000-se-adhika-tasviren-kaimare-men-utari-22430 · **Language:** Hindi
**Tags:** दीपक निषाद, सुल्तानपुर, दियरा गांव, फोटोग्राफी, प्रेरणादायक कहानी, ग्रामीण भारत

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जनपद स्थित दियरा गांव के रहने वाले दीपक निषाद ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो अभाव भी रास्ते की रुकावट नहीं बन सकते। बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले दीपक के पिता नाव चलाने का पारंपरिक कार्य करते हैं। घर की तंगहाली और सीमित संसाधनों के बावजूद दीपक ने हार नहीं मानी। उन्होंने न केवल अपने कमाए पैसों से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की, बल्कि पिछले 12 वर्षों के लंबे सफर में पूरे सुल्तानपुर जिले का कोना-कोना छानकर 2 लाख से अधिक तस्वीरें अपने कैमरे में दर्ज कर लीं। आज उनकी यह मेहनत और कला क्षेत्र के तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा की एक मिसाल बन चुकी है।

## आर्थिक तंगी से ग्रेजुएशन तक का कठिन सफर
दीपक निषाद का शुरुआती जीवन चुनौतियों और आर्थिक विषमताओं से भरा हुआ था। पारिवारिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि आगे की पढ़ाई या किसी नए व्यवसाय के लिए आसानी से धन जुटाया जा सके। उनके पिता नाव चलाकर परिवार का गुजर-बसर करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के लिए दीपक ने खुद जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। उन्होंने अपनी पढ़ाई को बीच में छोड़ने के बजाय मेहनत की और खुद के कमाए पैसों से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही उनके मन में ऐसा काम करने की इच्छा जागी, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने परिवार का हाथ बंटा सकें। इसी तलाश के दौरान उनका रुझान फोटोग्राफी की ओर हुआ।

## संसाधनों की कमी और पत्नी का संबल
फोटोग्राफी को करियर या जुनून के रूप में अपनाना दीपक के लिए आसान नहीं था। एक अच्छा कैमरा और उससे जुड़े जरूरी उपकरण खरीदना उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। कई बार संसाधनों के अभाव और आर्थिक तंगी ने उन्हें निराश भी किया और उनका हौसला डिगने लगा। ऐसे कठिन वक्त में उनकी पत्नी ने उनका सबसे बड़ा सहारा बनकर उनका साथ दिया। जब भी परिस्थितियां प्रतिकूल हुईं, उनकी पत्नी ने उन पर अटूट भरोसा जताया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। पत्नी से मिले इस मानसिक और भावनात्मक संबल ने दीपक को नई ऊर्जा दी और वे अपने कैमरे के साथ सुल्तानपुर की सड़कों और पगडंडियों पर निकल पड़े।

## 12 साल की मेहनत और 2 लाख से ज्यादा तस्वीरें
अपनी पत्नी के प्रोत्साहन के बाद दीपक ने सुल्तानपुर जनपद के गांव, कस्बों, खेतों, नदियों के घाटों, ऐतिहासिक विरासतों और धार्मिक स्थलों का रुख किया। उन्होंने आम इंसान के रोजमर्रा के जीवन, खुशियों और संघर्ष से जुड़े अनगिनत खूबसूरत लम्हों को अपने कैमरे में कैद करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते तस्वीरें खींचना उनके जीवन का सबसे अहम हिस्सा और जुनून बन गया। बीते 12 सालों में उन्होंने 2,00,000 से भी अधिक तस्वीरें क्लिक की हैं। उनकी तस्वीरों का दायरा केवल कुदरती नजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनमें सुल्तानपुर की समृद्ध संस्कृति, ग्रामीण जीवन की वास्तविक झलकियां और लोक परंपराएं जीवंत हो उठती हैं।

## सीमित संसाधनों वाले युवाओं के लिए प्रेरणा
आज दीपक निषाद सुल्तानपुर और आसपास के इलाकों में एक जाने-माने फोटोग्राफर के रूप में पहचाने जाते हैं। वे उन अनगिनत युवाओं के लिए एक जीवंत उदाहरण बन चुके हैं, जो साधनों की कमी या आर्थिक तंगी का बहाना बनाकर अपने सपनों को बीच में ही छोड़ देते हैं। उनकी जीवन यात्रा यह सिखाती है कि किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमेशा बड़ी शुरुआत या भारी बजट की जरूरत नहीं होती। यदि व्यक्ति के पास दृढ़ इच्छाशक्ति, कड़ी मेहनत और परिवार का विश्वास हो, तो वह विपरीत से विपरीत परिस्थितियों से निकलकर भी समाज में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना सकता है।

## इसका आप पर असर
यह खबर समाज और स्थानीय स्तर पर प्रेरणादायक संदेश देती है:

- **भारत में:** यह कहानी देश भर के युवाओं को यह सीख देती है कि सीमित आर्थिक संसाधनों और अभावों के बावजूद दृढ़ संकल्प से अपनी पहचान बनाई जा सकती है।
- **सुल्तानपुर में:** दियरा और पूरे सुल्तानपुर जिले के स्थानीय इतिहास, धार्मिक स्थलों, नदियों और सांस्कृतिक धरोहरों का 2 लाख से अधिक तस्वीरों के जरिए एक अमूल्य डिजिटल दस्तावेज तैयार हो गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. दीपक निषाद कौन हैं और वे किस जिले से ताल्लुक रखते हैं?
दीपक निषाद उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के दियरा गांव के रहने वाले एक फोटोग्राफर हैं, जिन्होंने बेहद साधारण परिवार से निकलकर अपनी पहचान बनाई है।

### 2. दीपक के पिता क्या काम करते हैं और उनकी पृष्ठभूमि कैसी थी?
दीपक के पिता नाव चलाने का पारंपरिक काम करते हैं और उनका परिवार बेहद सीमित आर्थिक संसाधनों वाला साधारण परिवार रहा है।

### 3. दीपक निषाद ने अपनी पढ़ाई का खर्च कैसे पूरा किया?
दीपक ने आर्थिक तंगी के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और खुद मेहनत करके कमाए पैसों से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की।

### 4. पिछले 12 सालों में दीपक ने कितनी तस्वीरें खींची हैं और उनमें क्या खास है?
उन्होंने पिछले 12 वर्षों में 2 लाख से अधिक तस्वीरें खींची हैं, जिनमें सुल्तानपुर की संस्कृति, ग्रामीण जीवन, नदियां, धार्मिक व ऐतिहासिक स्थल और आम लोगों की कहानियां दर्ज हैं।

### 5. फोटोग्राफी के सफर में दीपक को किसका सबसे बड़ा सहयोग मिला?
कठिन दौर में उनकी पत्नी ने उनका हौसला बढ़ाया और उनके फैसले पर भरोसा जताया, जो दीपक के लिए सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ।

## प्रेरणा और सबक
दीपक निषाद के 12 वर्षों के संघर्षपूर्ण सफर से मिलने वाली मुख्य सीख:

- **अभावों को रुकावट न बनने दें:** शुरुआती साधनों की कमी के बावजूद अपने जुनून को प्राथमिकता देना सफलता का पहला कदम है।
- **आत्मनिर्भरता और शिक्षा:** अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाकर ग्रेजुएशन पूरा करना विपरीत परिस्थितियों में स्वावलंबन का बड़ा उदाहरण है।
- **पारिवारिक सहयोग की ताकत:** कठिन आर्थिक समय में जीवनसाथी और परिवार का संबल बड़ी से बड़ी चुनौती को आसान बना देता है।
- **निरंतरता और धैर्य:** 12 वर्षों तक लगातार 2 लाख से ज्यादा तस्वीरें खींचना यह दर्शाता है कि दीर्घकालिक लक्ष्य के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।

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