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  "title": "नोएडा के अनूप खन्ना ने दादी की रसोई से बदली हज़ारों की जिंदगी, जानिए 5 रुपये में भोजन उपलब्ध कराने की पूरी कहानी",
  "summary": "विगत 11 वर्षों से नोएडा निवासी अनूप खन्ना संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख लक्ष्यों पर काम करते हुए मात्र 5 रुपये में भरपेट भोजन, सस्ती दवाएं और शादी-ब्याह का सामान जरूरतमंदों तक पहुंचा रहे हैं।",
  "content": "नोएडा के निवासी अनूप खन्ना पिछले 11 वर्षों से समाजसेवा के क्षेत्र में मिसाल कायम कर रहे हैं। अपनी विशेष पहल 'दादी की रसोई' के माध्यम से वे रोजाना सैकड़ों जरूरतमंद लोगों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक और भरपेट भोजन उपलब्ध कराते हैं। भूख मिटाने के इस कार्य के अलावा वे गरीब परिवारों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं और शादी-ब्याह के लिए किफायती सामान भी प्रदान कर रहे हैं। उनके इस निरंतर प्रयास से अब तक हज़ारों लोग लाभान्वित हो चुके हैं।\n\nसंयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों पर जमीनी काम\nअनूप खन्ना ने अपने सामाजिक कार्यों को संयुक्त राष्ट्र के 17 प्रमुख सतत विकास लक्ष्यों में से शीर्ष 3 लक्ष्यों, गरीबी उन्मूलन (नो पॉवर्टी), भुखमरी की समाप्ति (जीरो हंगर) और बेहतर स्वास्थ्य (गुड हेल्थ), के साथ जोड़ा है। मात्र 5 रुपये में भोजन देकर वे यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी व्यक्ति को आर्थिक तंगी के कारण भूखा न सोना पड़े। इसके साथ ही, उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान देते हुए नोएडा में सबसे पहला जनऔषधि केंद्र संचालित किया था। इस केंद्र के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को अत्यंत कम कीमत पर आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे गरीब परिवारों पर इलाज का भारी आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।\n\n'दादी की रसोई' की शुरुआत और सेवाओं का विस्तार\nदादी की रसोई की शुरुआत 21 अगस्त 2015 को एक भावुक पारिवारिक घटना से हुई थी। अनूप खन्ना की मां की तबीयत खराब होने पर उन्होंने खाना खाने से मना कर दिया और कहा कि उनके हिस्से का खाना किसी गरीब को खिला दिया जाए। मां के इन शब्दों से प्रेरणा लेकर अनूप खन्ना ने इस रसोई की नींव रखी। भोजन वितरण के बाद उन्होंने देखा कि गरीब परिवारों के लिए शादी-ब्याह का खर्च उठाना बहुत कठिन होता है। लोग महंगे लहंगे और कपड़े खरीदकर केवल एक-दो बार ही पहनते हैं। इस समस्या को हल करने के लिए उन्होंने मात्र 10 रुपये के किराए पर शादी के कपड़े और बर्तन उपलब्ध कराना शुरू किया, जिससे कई परिवारों को बड़ी राहत मिली है।\n\nवैश्विक मंच पर सराहना और दूतावासों के साथ बैठकें\nअनूप खन्ना के इस जमीनी मॉडल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। उन्होंने लोकप्रिय शो केबीसी में भाग लिया, भारत के राष्ट्रपति से मुलाकात की और जी20 सम्मेलन में शामिल 6 प्रमुख वक्ताओं में स्थान पाया। जी20 में अपने प्रेजेंटेशन के दौरान उन्होंने जोर देकर कहा था कि दुनिया में भुखमरी की समस्या को हल करना असंभव नहीं है और इसे सामुदायिक रसोई के आसान तरीकों से दूर किया जा सकता है। उनके इस विचार की जापान, वियतनाम और सिंगापुर के दूतावासों ने काफी सराहना की और इसे अपने देशों में लागू करने में रुचि दिखाई। इसके अलावा चीन के दूतावास से भी उन्हें चर्चा के लिए बुलावा आया था।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: यह पहल दर्शाती है कि सामुदायिक प्रयासों से कम लागत में भुखमरी और गरीबी से निपटने का व्यावहारिक मॉडल तैयार किया जा सकता है।\n\nनोएडा में: स्थानीय जरूरतमंद परिवारों को रोजाना 5 रुपये में भोजन, 10 रुपये में शादी का सामान और सस्ती दवाएं आसानी से मिल रही हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अनूप खन्ना कौन हैं और वे क्या कार्य करते हैं?\nअनूप खन्ना नोएडा के एक समाजसेवी हैं जो 'दादी की रसोई' के माध्यम से गरीबों को 5 रुपये में भोजन, सस्ते कपड़े, बर्तन और दवाएं उपलब्ध कराते हैं।\n\n2. दादी की रसोई की शुरुआत कब और कैसे हुई?\nइसकी शुरुआत 21 अगस्त 2015 को हुई थी। अनूप खन्ना को इसकी प्रेरणा अपनी मां से मिली, जिन्होंने अपनी बीमारी के दौरान अपना खाना किसी गरीब को देने की बात कही थी।\n\n3. संयुक्त राष्ट्र के किन गोल्स पर यह पहल आधारित है?\nयह पहल संयुक्त राष्ट्र के 17 लक्ष्यों में से शीर्ष 3 लक्ष्यों—गरीबी उन्मूलन (नो पॉवर्टी), भुखमरी समाप्त करना (जीरो हंगर) और बेहतर स्वास्थ्य (गुड हेल्थ)—पर काम करती है।\n\n4. दादी की रसोई में शादी-ब्याह के लिए क्या सुविधाएं दी जाती हैं?\nशादी-ब्याह के लिए महंगे लहंगे-चुन्नी और बर्तन मात्र 10 रुपये के किराए पर जरूरतमंदों को दिए जाते हैं।\n\n5. अनूप खन्ना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या पहचान मिली है?\nउन्होंने जी20 सम्मेलन में 6 मुख्य वक्ताओं में शामिल होकर अपना प्रेजेंटेशन दिया, केबीसी में भाग लिया और राष्ट्रपति से मुलाकात की। जापान, वियतनाम और सिंगापुर के दूतावासों ने भी उनके मॉडल की सराहना की है।\n\nप्रेरणा और सबक\nप्रेरणादायक सबक:\n\n• मां की सीख से नई सोच: व्यक्तिगत जीवन के अनुभवों और बुजुर्गों की सीख से समाज सेवा की बड़ी पहल शुरू की जा सकती है।\n• किफायती और टिकाऊ मॉडल: मात्र 5 और 10 रुपये की न्यूनतम राशि रखकर गरिमा के साथ सहायता पहुंचाई जा सकती है।\n• संसाधनों का सही पुनर्चक्रण: शादी के महंगे कपड़ों और बर्तनों को जरूरतमंदों के लिए उपलब्ध कराकर बर्बादी को रोका जा सकता है।\n• निरंतरता और समर्पित प्रयास: 11 वर्षों तक लगातार काम करके छोटे विचार को वैश्विक मंच तक पहुंचाया जा सकता है।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-08-20",
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