ओडिशा की संजुक्ता दास ने 62 साल की उम्र में रचा इतिहास, मामूली पूंजी से खड़ा किया लाखों का पशुपालन उद्यम ओडिशा के जगतसिंहपुर की संजुक्ता दास ने 62 वर्ष की उम्र में महज 10,000 रुपये से डेयरी और सुअर पालन शुरू कर 11 लाख रुपये सालाना टर्नओवर वाला कारोबार स्थापित किया है. जीवन के जिस पड़ाव पर अधिकांश लोग कामकाज समेटकर सुकून भरी सेवानिवृत्ति की योजना बनाते हैं, उसी उम्र में ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले की 62 वर्षीय संजुक्ता दास ने उद्यमिता की एक नई मिसाल पेश की है. उन्होंने मात्र ₹10,000 की मामूली लागत से पशुपालन के क्षेत्र में कदम रखा और अपनी अथक लगन के बलबूते ₹11 लाख के वार्षिक टर्नओवर वाला एक मजबूत व्यावसायिक ढांचा खड़ा कर दिया. आज उनके इस उपक्रम की पहुंच गृह राज्य की सीमाओं से आगे निकलकर मुंबई, कोलकाता और गोवा जैसे प्रमुख शहरों तक विस्तृत हो चुकी है. स्वयं सहायता समूह से शुरू हुआ संघर्ष भरा सफर संजुक्ता दास की व्यावसायिक यात्रा आसान नहीं रही. उन्होंने साल 2000 में 10 महिलाओं को एकजुट करके हरपार्वती स्वयं सहायता समूह की स्थापना की थी. इस समूह की सचिव की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने कई तरह की आजीविका गतिविधियों को संभाला. इनमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सरकारी राशन दुकान का संचालन, स्कूली बच्चों के लिए मिड-डे मील तैयार करना तथा अगरबत्ती, पापड़ और बड़ी जैसे पारंपरिक उत्पादों का निर्माण शामिल था. हालांकि स्थानीय मेलों और प्रदर्शनियों में उनके उत्पाद बिक जाते थे, लेकिन उनसे होने वाली आय सीमित और मौसमी थी. संजुक्ता लगातार एक ऐसे व्यवसायिक मॉडल की तलाश में थीं, जो पूरे 12 महीने निरंतर और स्थिर आमदनी दे सके. पशुपालन और डेयरी में रणनीतिक शुरुआत लंबे अनुभव के बाद साल 2024 में संजुक्ता ने एक साहसिक निर्णय लिया. उन्होंने ₹10,000 की प्रारंभिक पूंजी लगाकर व्यावसायिक डेयरी और सुअर पालन फार्म की नींव रखी. व्यवस्थित प्रबंधन, उचित देखभाल और निरंतर परिश्रम के चलते उनका यह छोटा सा उद्यम जल्द ही एक बड़े कमर्शियल फार्म के रूप में विकसित हो गया. वर्तमान में उनके फार्म से हर साल 40 से 50 सुअरों की बिक्री की जाती है. प्रत्येक पशु के आकार और वजन के आधार पर ₹18,000 से लेकर ₹20,000 तक की कीमत मिल जाती है. इन पशुओं की आपूर्ति न केवल स्थानीय स्तर पर होती है, बल्कि आंध्र प्रदेश, मुंबई, गोवा और कोलकाता के बाजारों में सीधे भेजी जाती है. दूध उत्पादन और ग्रामीण महिलाओं को समर्थन पशुधन व्यापार के साथ ही उनके फार्म की डेयरी यूनिट भी क्षेत्र में अत्यंत सक्रिय है. इस डेयरी से प्रतिदिन औसतन लगभग 150 लीटर ताजा दूध का उत्पादन होता है. संजुक्ता इस दूध को केवल खुले बाजार में व्यक्तिगत ग्राहकों को बेचने तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए आसपास के स्वयं सहायता समूहों को रियायती मूल्य पर उपलब्ध कराती हैं. उदाहरण के तौर पर, महालक्ष्मी स्वयं सहायता समूह उनके फार्म से रोजाना 100 से 120 लीटर दूध खरीदता है. इस आपूर्ति के आधार पर समूह अपना मिल्क कलेक्शन सेंटर चलाता है, जिसकी मदद से दर्जनों ग्रामीण महिलाओं को नियमित और टिकाऊ कमाई का साधन मिल रहा है. पूंजी नियोजन और स्थानीय रोजगार सृजन अपने व्यवसाय को विस्तार देने के लिए संजुक्ता दास ने वित्तीय प्रबंधन की योजनाबद्ध रूपरेखा तैयार की. अब तक उनके फार्म पर कुल ₹10.95 लाख का पूंजीगत निवेश किया जा चुका है. इस समग्र निवेश में ₹3.95 लाख का संस्थागत बैंक ऋण, ₹1 लाख की उनकी निजी बचत और ₹6 लाख फार्म के आधारभूत ढांचे के निर्माण पर खर्च किए गए हैं. इस उपक्रम ने न केवल संजुक्ता को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए. वर्तमान में उनके फार्म पर दो महिलाओं सहित कुल पांच कर्मचारी नियमित रूप से कार्यरत हैं. इसका आप पर असर यह उद्यम दिखाता है कि योजनाबद्ध पशुपालन और डेयरी से ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका तैयार की जा सकती है. • ओडिशा में: जगतसिंहपुर के आसपास के स्वयं सहायता समूहों को रियायती दर पर रोजाना 100 से 120 लीटर ताजा दूध मिल रहा है. इससे महालक्ष्मी स्वयं सहायता समूह के जरिए दर्जनों ग्रामीण महिलाएं घर बैठे दूध संकलन केंद्र चलाकर नियमित कमाई कर रही हैं. • भारत में: ग्रामीण उद्यमी मात्र ₹10,000 की शुरुआती पूंजी और संस्थागत बैंक ऋण की मदद से पशुपालन फार्मिंग मॉडल अपना सकते हैं. मुंबई, कोलकाता, गोवा और आंध्र प्रदेश जैसे बड़े बाजारों से जुड़कर स्थानीय पशुपालक बेहतर आय हासिल कर सकते हैं. • रोजगार के अवसर: संजुक्ता के फार्म पर दो महिलाओं सहित कुल पांच स्थानीय ग्रामीणों को सीधे नियमित रोजगार मिला हुआ है. स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से ग्रामीणों को काम के लिए दूरदराज के शहरों में नहीं जाना पड़ता. • पूंजी प्रबंधन: उद्यमी ₹3.95 लाख जैसे छोटे बैंक लोन और व्यक्तिगत बचत के संतुलन से ₹10.95 लाख तक की बुनियादी संरचना खड़ी कर सकते हैं. इस व्यवस्थित पूंजी निवेश से पहले ही साल में ₹11 लाख का टर्नओवर प्राप्त करना संभव हो जाता है. ऐसा क्यों हुआ संजुक्ता दास द्वारा इस बड़े व्यवसायिक मॉडल को अपनाने के पीछे पारंपरिक महिला स्वयं सहायता समूहों में सीमित और अनियमित आमदनी मुख्य वजह रही. • निरंतर आय की तलाश: पापड़, अगरबत्ती और बड़ी बनाने जैसे पुराने घरेलू उत्पाद केवल मौसमी प्रदर्शनियों और मेलों में बिकते थे, जिनसे पर्याप्त आमदनी नहीं हो पाती थी. इसके चलते संजुक्ता को पूरे 12 महीने लगातार कैश फ्लो देने वाले व्यवसाय की तलाश करनी पड़ी. • बाजार में पशुधन की मांग: आंध्र प्रदेश, गोवा, मुंबई और कोलकाता जैसे राज्यों में गुणवत्तापूर्ण पशुधन की निरंतर व्यावसायिक मांग मौजूद थी. संजुक्ता ने वजन और आकार के अनुसार ₹18,000 से ₹20,000 प्रति सुअर मिलने की संभावना को पहचानकर फार्मिंग का विस्तार किया. • संस्थागत वित्तीय सहायता: महज ₹10,000 से काम शुरू करने के बाद बुनियादी ढांचा खड़ा करने के लिए ₹3.95 लाख का बैंक ऋण और ₹1 लाख की निजी बचत जोड़ी गई. इस वित्तीय संबल ने छोटे प्रयास को ₹10.95 लाख के पूर्ण विकसित फार्म में तब्दील करने का मार्ग प्रशस्त किया. सवाल-जवाब 1. संजुक्ता दास किस राज्य और जिले की रहने वाली हैं? संजुक्ता दास ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले की निवासी हैं. 2. उन्होंने पशुपालन व्यवसाय किस उम्र और कितनी पूंजी से शुरू किया? उन्होंने 62 वर्ष की उम्र में महज ₹10,000 की शुरुआती पूंजी से पशुपालन की शुरुआत की. 3. उनके फार्म का वर्तमान सालाना टर्नओवर कितना है? वर्तमान में उनके फार्म का सालाना टर्नओवर ₹11 लाख तक पहुंच चुका है. 4. उनके फार्म से पशुओं की आपूर्ति किन राज्यों और शहरों में की जाती है? उनके फार्म से पशु सीधे आंध्र प्रदेश, मुंबई, गोवा और कोलकाता भेजे जाते हैं. 5. फार्म में प्रत्येक सुअर की बिक्री किस दर पर होती है? आकार और वजन के हिसाब से प्रत्येक सुअर ₹18,000 से ₹20,000 में बिकता है, और वे साल में 40 से 50 सुअर बेचती हैं. 6. उनके डेयरी फार्म से रोजाना कितना दूध उत्पादित होता है? उनके डेयरी फार्म से प्रतिदिन लगभग 150 लीटर ताजा दूध प्राप्त होता है. 7. महालक्ष्मी स्वयं सहायता समूह उनके फार्म से कितना दूध खरीदता है? महालक्ष्मी स्वयं सहायता समूह रोज 100 से 120 लीटर दूध खरीदकर अपना मिल्क कलेक्शन सेंटर चलाता है. 8. संजुक्ता के फार्म में कुल कितना निवेश हुआ है और कितने कर्मचारी काम करते हैं? फार्म पर बैंक लोन और बचत मिलाकर कुल ₹10.95 लाख का निवेश हुआ है, जहां दो महिलाओं समेत पांच कर्मचारी कार्यरत हैं. प्रेरणा और सबक संजुक्ता दास की व्यावसायिक यात्रा साबित करती है कि उम्र कभी भी नए संकल्प और उद्यम के आड़े नहीं आती. • उम्र की सीमाओं को नकारना: 62 वर्ष की आयु में जब लोग सेवानिवृत्ति की तैयारी करते हैं, तब संजुक्ता ने नया उद्यम शुरू किया. यह दर्शाता है कि सीखने और नया जोखिम उठाने के लिए कोई भी उम्र बाधा नहीं बन सकती. • छोटी पूंजी से बड़ा विजन: उन्होंने महज ₹10,000 की मामूली लागत से काम की शुरुआत की और चरणबद्ध तरीके से बैंक लोन लेकर विस्तार किया. सीमित संसाधनों के बावजूद अनुशासन और स्पष्ट कार्ययोजना से बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है. • सामूहिक विकास की सोच: अपनी व्यक्तिगत सफलता के साथ उन्होंने आसपास के स्वयं सहायता समूहों को रियायती दूध देकर दर्जनों महिलाओं को आय से जोड़ा. वास्तविक नेतृत्व वही है जो खुद आगे बढ़ने के साथ पूरे समाज को आत्मनिर्भर बनाए. https://trendkia.com/success-stories/odisha-ki-sanjukta-das-ne-62-sala-ki-umra-men-racha-itihasa-mamuli-punji-se-khara-kiya-lakhon-ka-pashupalana-udyama-46785 TrendKia — Har trend, sabse pehle.