# पारंपरिक कुटाई तकनीक से चमका भोजपुर के दो युवाओं का मसाला उद्यम, सालाना कारोबार पहुंचा 1 करोड़ रुपये के पार

> आरा के शोभी डुमरा गांव निवासी रंजन और अक्षय ने भारी हथौड़े वाली कुटाई पद्धति से 'सास बहू मसाला' तैयार कर 35 लाख के निवेश को 1 करोड़ रुपये से अधिक के सालाना टर्नओवर में बदल दिया है.

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/parnparika-kutai-takanika-se-chamaka-bhojpur-ke-do-yuvaon-ka-masala-udyama-salana-karobara-pahuncha-1-karora-rupaye-ke-para-45107 · **Language:** Hindi
**Tags:** सास बहू मसाला, भोजपुर, आरा, युवा उद्यमी योजना, मसाला उद्योग, नीतीश कुमार

बिहार के भोजपुर जिले में स्थित आरा के शोभी डुमरा गांव के दो युवा मित्रों ने परंपरागत तरीके को आधुनिक उद्यमिता से जोड़कर एक नई मिसाल पेश की है. रंजन और अक्षय ने किसी निजी कंपनी में नौकरी तलाशने अथवा पुश्तैनी कामधंधे में हाथ बंटाने के बजाय अपनी मेहनत से कुछ नया करने का संकल्प लिया. दोनों ने स्वाद और सेहत के संगम को ध्यान में रखते हुए अपना मसाला उद्योग स्थापित करने का फैसला किया. उनके इस प्रयास को पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की युवा उद्यमी योजना से जरूरी आर्थिक सहारा मिला, जिससे उन्होंने 'सास बहू मसाला' नाम से अपने ब्रांड की नींव रखी. आज यह उद्यम अपनी विशिष्ट उत्पादन शैली और शुद्धता के चलते स्थानीय बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.

## पारंपरिक कुटाई और भारी हथौड़े की तकनीक
बाजार में उपलब्ध अधिकांश मसालों को आधुनिक ग्राइंडर मशीनों में तीव्र गति से पीसा जाता है, जिससे अत्यधिक गर्मी पैदा होती है और मसालों के प्राकृतिक तेल व पोषक तत्व प्रभावित हो सकते हैं. इसके विपरीत, इस उद्यम में मसालों को केवल सामान्य मशीनों में महीन पीसने के बजाय पारंपरिक कुटाई पद्धति से तैयार किया जाता है. इस प्रक्रिया के लिए विशेष कुटाई मशीनों को स्थापित किया गया है, जिनमें भारी वजन वाले हथौड़े गिरकर साबुत मसालों को धीरे-धीरे कूटते हैं. इसके पश्चात उन्हें बारीक पाउडर का रूप दिया जाता है. इस देसी विधि से मसालों की स्वाभाविक सुगंध, पोषक गुणवत्ता और मूल स्वाद पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं.

## कम मात्रा में भरपूर स्वाद का दावा
संस्थापकों का स्पष्ट कहना है कि नियमित रूप से बाजार में बिकने वाले आम पैकेटबंद मसालों के मुकाबले यह उत्पाद कम मात्रा में इस्तेमाल करने पर भी खाने को अधिक लजीज बना देता है. धीमी और भारी कुटाई के कारण मसालों का प्राकृतिक स्वरूप नहीं बदलता, जिससे व्यंजनों में स्वाद और सुगंध दोनों गहराई से उभरते हैं. कम मात्रा, बेहतर स्वाद और शुद्ध देसी कुटाई ही आज इस ब्रांड की मुख्य यूएसपी बन चुकी है. दोनों सहयोगियों का दावा है कि जो ग्राहक एक बार इस देसी पद्धति से तैयार मसाले का स्वाद चख लेता है, वह किसी अन्य कंपनी के पैकेटबंद मसाले का रुख नहीं करता.

## 35 लाख की लागत से 1 करोड़ से अधिक का टर्नओवर
इस पूरे उद्यम को धरातल पर उतारने में कुल 35 लाख रुपये का शुरुआती निवेश हुआ था. निरंतर लगन और गुणवत्ता के दम पर आज इस कारोबार का सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा के आंकड़े को पार कर चुका है. उत्पादन का केंद्र भले ही शोभी डुमरा गांव हो, लेकिन अब इसकी आपूर्ति केवल भोजपुर जिले तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बिहार के कई अन्य प्रमुख जिलों में भी इनके उत्पाद नियमित तौर पर भेजे जा रहे हैं. दोनों युवाओं की यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि अपनी मिट्टी की पुरानी परंपराओं को सही तकनीक से जोड़कर ग्रामीण स्तर पर भी करोड़ों का सफल उद्यम खड़ा किया जा सकता है.

## इसका आप पर असर
पारंपरिक विधि से तैयार मसालों की उपलब्धता से उपभोक्ताओं को शुद्ध स्वाद और ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार की नई प्रेरणा मिल रही है.

- **बिहार में:** राज्य के विभिन्न जिलों के उपभोक्ताओं को पारंपरिक कुटाई से बने शुद्ध मसाले मिल रहे हैं, जिनकी कम मात्रा ही भोजन में भरपूर स्वाद और सुगंध देती है. इससे स्थानीय उत्पादकों और ग्रामीण आपूर्ति श्रृंखला को सीधा व्यापारिक समर्थन प्राप्त हो रहा है.
- **भारत में:** स्वरोजगार की तलाश में जुटे युवा सरकारी उद्यमिता योजनाओं के जरिए खुद का मैन्युफैक्चरिंग कारोबार शुरू करने के व्यावहारिक मॉडल को समझ सकते हैं. 35 लाख के निवेश को 1 करोड़ के टर्नओवर में बदलने का यह उदाहरण साबित करता है कि देसी उत्पादों की मांग राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ रही है.

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक कुटाई विधि पर आधारित मसाला उद्योग शुरू करने की मुख्य वजह आधुनिक ग्राइंडिंग में मसालों के प्राकृतिक स्वाद और गुणों का नष्ट होना तथा ग्रामीण युवाओं में आत्मनिर्भर बनने की ललक थी.

- **गुणवत्ता की कमी:** आधुनिक तेज गति वाली ग्राइंडर मशीनों में मसाले पीसने से उत्पन्न गर्मी उनके स्वाभाविक तेल और पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचाती है. संस्थापकों ने इसी समस्या को पहचानकर भारी हथौड़े वाली धीमी कुटाई तकनीक अपनाई.
- **वित्तीय सहायता का मिलना:** रंजन और अक्षय को पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की युवा उद्यमी योजना के माध्यम से आवश्यक वित्तीय मदद मिली. इसी आर्थिक सहारे ने उनके 35 लाख रुपये के प्रोजेक्ट को वास्तविक धरातल पर स्थापित किया.
- **स्वरोजगार का संकल्प:** पारंपरिक नौकरियों या पारिवारिक पेशों के पीछे भागने के बजाय दोनों युवाओं ने अपने गृहक्षेत्र में रोजगार पैदा करने का रास्ता चुना. ग्रामीण पृष्ठभूमि में अनूठे देसी उत्पाद की बढ़ती मांग ने इस व्यवसाय को तेजी से विस्तार दिया.

## सवाल-जवाब

### 1. सास बहू मसाला की शुरुआत किसने और कहां की?
इसकी शुरुआत भोजपुर जिले के आरा स्थित शोभी डुमरा गांव के दो दोस्तों रंजन और अक्षय ने मिलकर की है.

### 2. इस मसाले को तैयार करने में कौन सी खास तकनीक इस्तेमाल की जाती है?
इसमें सामान्य पिसाई के बजाय भारी वजन वाले हथौड़े वाली विशेष कुटाई मशीनों से पारंपरिक तरीके से मसाले तैयार किए जाते हैं.

### 3. इस उद्योग को स्थापित करने में कितना निवेश हुआ और वर्तमान टर्नओवर क्या है?
इस कारोबार को 35 लाख रुपये की लागत से शुरू किया गया था और वर्तमान में इसका सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है.

### 4. इस उद्यम को किस योजना से आर्थिक सहायता मिली?
इस उद्यम को पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की युवा उद्यमी योजना से आर्थिक सहारा मिला.

### 5. पारंपरिक कुटाई से तैयार मसाले का क्या लाभ है?
इस प्रक्रिया से मसाले की प्राकृतिक सुगंध, स्वाद और पोषक तत्व बने रहते हैं, जिससे कम मात्रा में इस्तेमाल करने पर भी बढ़िया स्वाद मिलता है.

## प्रेरणा और सबक
आरा के दो युवा दोस्तों की यह सफलता दर्शाती है कि देसी ज्ञान और सरकारी सहयोग के मेल से जमीनी स्तर पर शानदार मुकाम हासिल किया जा सकता है.

- **पारंपरिक ज्ञान को पूंजी बनाना:** पुरानी कुटाई पद्धति जैसी देसी तकनीक आधुनिक बाजार में सबसे मजबूत विशिष्ट पहचान बन सकती है.
- **योजनाओं का सही उपयोग:** सरकारी उद्यमिता पहलों का रणनीतिक लाभ उठाकर युवा सीमित संसाधनों के बावजूद अपना उद्योग खड़ा कर सकते हैं.
- **गुणवत्ता पर अटूट भरोसा:** जब उत्पाद की शुद्धता और परिणाम बेहतर हों, तो कम लागत में भी ग्राहक निष्ठा और बड़ा टर्नओवर हासिल किया जा सकता है.

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