पटना की ऋतिका ने मोमबत्ती के कारोबार से खड़ा किया साम्राज्य, ₹40 लाख तक पहुंचा सालाना टर्नओवर बिहार की राजधानी पटना की रहने वाली ऋतिका ने मात्र 10 हजार रुपये से मोमबत्ती बनाने का काम शुरू किया था, जो आज सालाना 35 से 40 लाख रुपये के कारोबार में बदल चुका है। उनके द्वारा शुरू की गई क्राफ्ट एज कंपनी आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपने इको-फ्रेंडली सोया वैक्स उत्पादों के लिए जानी जाती है। बिहार की राजधानी पटना की रहने वाली ऋतिका ने अपने हुनर और कड़ी मेहनत के दम पर एक साधारण शुरुआत को बड़े कारोबार में बदल दिया है। उन्होंने मोमबत्ती के पारंपरिक रूप को पूरी तरह से बदल दिया है और उन्हें घर की सजावट से लेकर आकर्षक उपहारों का बेहतरीन विकल्प बना दिया है। क्राफ्ट एज के जरिए उन्होंने मोमबत्ती उद्योग में एक नया मुकाम हासिल किया है, जहां उनका सालाना टर्नओवर 35 से 40 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। इस सफर की शुरुआत बेहद छोटे स्तर पर हुई थी, लेकिन आज यह एक स्थापित ब्रांड बन चुका है। कोरोना काल में रखी गई थी कारोबार की नींव ऋतिका ने कोरोना महामारी के मुश्किल दौर में अपने घर से ही मोमबत्ती बनाने के काम की शुरुआत की थी। शुरुआती दिनों में यह सिर्फ एक छोटा सा घरेलू प्रयास था, लेकिन समय के साथ लोगों की पसंद और मांग में लगातार बढ़ोतरी होती चली गई। साल 2023 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) से वित्तीय और प्रशासनिक सहयोग मिलने के बाद इस काम को एक व्यावसायिक विस्तार मिला। इसके बाद बड़े पैमाने पर उत्पादन का काम शुरू हुआ, जिसके नतीजे आज सबके सामने हैं। उत्सव और त्योहारों के लिए खास वैराइटी दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के मौके पर बाजार में सजावटी सामानों की मांग में भारी उछाल आता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए क्राफ्ट एज इस सीजन में कई नए और आकर्षक डिजाइन बाजार में उतार रहा है। इस बार सबसे ज्यादा चर्चा उरली कैंडल्स की हो रही है, जिन्हें विभिन्न स्वरूपों जैसे सिंगल उरली, थ्री-लेयर उरली और रंगोली डिजाइन में तैयार किया जा रहा है। अलग-अलग आकारों और रंगों में मिलने वाली ये मोमबत्तियां घर के कोनों को रोशन करने के साथ उसकी खूबसूरती में चार चांद लगाती हैं। खाने-पीछे की चीजों जैसे अनोखे डिजाइन सामान्य आकारों से हटकर कंपनी कई ऐसे उत्पाद तैयार करती है जो पहली नजर में कुछ और ही लगते हैं। इनमें स्नेक कैंडल, टेपर कैंडल्स, शंख के आकार की मोमबत्तियां और चाय-बिस्किट के डिजाइन वाली कैंडल्स शामिल हैं। इसके अलावा देखने में बिल्कुल लड्डू, समोसा, रबड़ी और जलेबी जैसी लगने वाली मोमबत्तियां भी ऋतिका की कार्यशाला में तैयार की जाती हैं। दीपावली के पर्व को देखते हुए वाइन कैंडल्स और कई अन्य रोचक उत्पादों पर भी काम जारी है। हर साल बदलते आधुनिक रुझानों को ध्यान में रखकर नए प्रयोग किए जाते हैं, ताकि ग्राहकों को हमेशा कुछ नया और अलग मिल सके। सोया वैक्स से तैयार इको-फ्रेंडली उत्पाद क्राफ्ट एज के उत्पादों की सबसे बड़ी विशेषता उनमें इस्तेमाल होने वाला सोया वैक्स है। यह सोयाबीन के तेल से तैयार किया जाने वाला एक विशेष वैक्स होता है, जिसमें बेहतरीन खुशबू के लिए फ्रेगरेंस ऑयल मिलाया जाता है। इन मोमबत्तियों की खासियत यह है कि जलते समय कमरे में भीनी-भीनी खुशबू फैलती है और धुएं की समस्या लगभग न के बराबर होती है। सोया वैक्स के इस्तेमाल और सुंदर डिजाइनों के कारण ही ग्राहक इन उत्पादों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। महिलाओं और युवाओं को सिखा रही हैं आत्मनिर्भरता का हुनर ऋतिका का यह उद्यम केवल मोमबत्ती बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दूसरों को भी इस कला में पारंगत कर रही हैं। वह ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से लोगों को कैंडल मेकिंग का प्रशिक्षण देती हैं। इस ट्रेनिंग से देश के कोने-कोने से गृहिणियां, छात्र और युवा जुड़ रहे हैं जो पढ़ाई या अन्य कामों के साथ अतिरिक्त कमाई करना चाहते हैं। अब तक 1000 से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिनमें से कई महिलाएं अपने काम के लिए पुरस्कार भी जीत चुकी हैं। जो लोग सीधे तौर पर समय नहीं निकाल पाते, उनके लिए रीसेलिंग और ड्रॉपशिपिंग जैसे विकल्प भी दिए गए हैं ताकि वे बिना उत्पादन किए भी कमाई कर सकें. दस हजार रुपये से शुरू हुआ था सफर जब ऋतिका ने इस काम का श्रीगणेश किया था, तब उनके पास लगभग 10 हजार रुपये की शुरुआती पूंजी थी। निरंतर मेहनत, ग्राहकों की नब्ज पहचानने और नए प्रयोग करने की क्षमता ने इस छोटे से प्रयास को आज इस मुकाम पर पहुंचाया है कि इसका सालाना कारोबार 35 से 40 लाख रुपये तक पहुंच गया है। ऑनलाइन माध्यमों से आसानी से उपलब्ध हैं उत्पाद ग्राहक क्राफ्ट एज के उत्पादों को खरीदने के लिए ऑनलाइन जरियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। कंपनी देश के सभी हिस्सों में शिपिंग की सुविधा उपलब्ध कराती है। इसके उत्पाद आधिकारिक वेबसाइट और प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी मिल जाते हैं। त्योहारी सीजन के लिए खास मोमबत्तियां खरीदने या ट्रेनिंग से जुड़ी जानकारी के लिए ग्राहक craftedgeindia.com वेबसाइट पर जा सकते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप और मोबाइल नंबर 9546483598 के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। इसका आप पर असर यह सफलता दिखाती है कि छोटे निवेश और रचनात्मक सोच के साथ कोई भी व्यक्ति स्व-रोजगार की दिशा में कदम बढ़ा सकता है और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकता है। • बिहार में: स्थानीय स्तर पर युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं, जिससे लोग पारंपरिक नौकरियों के अलावा हस्तशिल्प और होम डेकोर के क्षेत्र में हाथ आजमा रहे हैं। • घरेलू बजट पर असर: त्योहारी सीजन में सजावट के सामान पर खर्च होने वाली राशि को घर पर बने इको-फ्रेंडली विकल्पों के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है। • कौशल विकास: कम पूंजी और न्यूनतम संसाधनों के साथ नया हुनर सीखकर अतिरिक्त आय अर्जित करने के अवसर मिल रहे हैं। • पर्यावरण अनुकूल विकल्प: सोया वैक्स से बनी मोमबत्तियों के उपयोग से पारंपरिक पैराफिन वैक्स से होने वाले प्रदूषण और धुएं की समस्या से राहत मिलती है। • व्यावसायिक अवसर: रीसेलिंग और ड्रॉपशिपिंग जैसे माध्यमों से बिना किसी बड़े इन्वेंट्री सेटअप के भी लोग ऑनलाइन व्यापार से जुड़ सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ इस कारोबार के विस्तार और सफलता के पीछे सरकार की वित्तीय सहायता, मौसमी मांग और नए उत्पादों के लगातार विकास की रणनीति मुख्य रूप से काम आई है। • सरकारी सहयोग: साल 2023 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) से मिलने वाली मदद ने इस घरेलू काम को एक बड़े व्यवसाय के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। • त्योहारी मांग: दीपावली और अन्य उत्सवों के दौरान घरों को सजाने के लिए नवीन और आकर्षक उत्पादों की बढ़ती मांग ने उत्पादन को गति दी। • बदलता ट्रेंड: सोया वैक्स जैसे पर्यावरण के अनुकूल घटकों का उपयोग और पारंपरिक डिजाइनों के अलावा खाद्य पदार्थों जैसी अनूठी आकृतियों ने ग्राहकों का ध्यान खींचा। • डिजिटल पहुंच: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों तक आसान शिपिंग ने बाजार के दायरे को व्यापक बनाया। सवाल-जवाब 1. ऋतिका ने अपने कैंडल कारोबार की शुरुआत कब और कैसे की थी? उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान लगभग 10,000 रुपये की शुरुआती पूंजी के साथ अपने घर से इस काम की शुरुआत की थी। 2. क्राफ्ट एज का वर्तमान सालाना टर्नओवर कितना है? इस कारोबार का सालाना टर्नओवर अब बढ़कर लगभग 35 से 40 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। 3. व्यवसाय को बढ़ाने में किस सरकारी योजना से मदद मिली? साल 2023 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत सहयोग मिलने के बाद इस कारोबार को बड़ा विस्तार मिला। 4. इन मोमबत्तियों को बनाने में मुख्य रूप से किस सामग्री का उपयोग होता है? इन मोमबत्तियों को सोयाबीन के तेल से बनने वाले सोया वैक्स और फ्रेगरेंस ऑयल से तैयार किया जाता है। 5. दिवाली के लिए इस बार कौन से डिजाइन खास चर्चा में हैं? इस दिवाली सिंगल उरली, थ्री-लेयर उरली और रंगोली डिजाइन वाली उरली कैंडल्स सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। 6. क्या ऋतिका दूसरों को भी कैंडल बनाना सिखाती हैं? हाँ, वह ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से लोगों को ट्रेनिंग देती हैं और अब तक 1,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित कर चुकी हैं। 7. उत्पादों को खरीदने के लिए आधिकारिक वेबसाइट कौन सी है? ग्राहक craftedgeindia.com वेबसाइट के जरिए उत्पादों की जानकारी ले सकते हैं और खरीदारी कर सकते हैं। प्रेरणा और सबक ऋतिका की यह कहानी दिखाती है कि किस तरह दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा में किए गए प्रयास बड़ी सफलता दिला सकते हैं। • कम पूंजी से शुरुआत: बड़े व्यापार के लिए हमेशा भारी-भरकम फंड की जरूरत नहीं होती, बल्कि छोटे निवेश और बड़े विजन से भी शुरुआत की जा सकती है। • संकट को अवसर बनाना: महामारी जैसे मुश्किल समय का सदुपयोग करके नए कौशल और व्यवसाय की नींव रखी जा सकती है। • नवाचार का महत्व: बाजार में टिके रहने के लिए पारंपरिक तरीकों से हटकर नए प्रयोग करना और ग्राहकों की पसंद को समझना जरूरी है। • ज्ञान बांटना: अपने हुनर को दूसरों तक पहुंचाकर और उन्हें प्रशिक्षित करके समाज में एक मजबूत नेटवर्क और आत्मनिर्भरता का निर्माण किया जा सकता है। https://trendkia.com/success-stories/patna-ki-ritika-ne-mombatti-ke-karobar-se-khada-kiya-samrajya-40-lakh-tak-pohancha-turnover-51364 TrendKia — Har trend, sabse pehle.