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  "type": "article",
  "title": "फिल्म से मिली राष्ट्रसेवा की सीख और दूसरे प्रयास में पाई 27वीं रैंक, ऐसी रही पुलकित गर्ग के आईएएस बनने की राह",
  "summary": "आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग करने के बाद पुलकित गर्ग ने प्रशासनिक सेवा की राह चुनी और यूपीएससी में 27वीं रैंक हासिल की। वर्तमान में चित्रकूट के जिलाधिकारी के रूप में तैनात पुलकित गर्ग के सफर में स्कूली दिनों की एक फिल्म ने अहम भूमिका निभाई।",
  "content": "प्रशासनिक सेवा में आने का फैसला कई बार जिंदगी के बेहद सामान्य पलों से तय होता है। चित्रकूट में जिलाधिकारी के रूप में कार्यभार संभाल रहे पुलकित गर्ग का सफर भी कुछ ऐसा ही है, जहां बचपन में देखी गई एक फिल्म ने उनके भीतर देश सेवा का जज्बा पैदा किया। हरियाणा की पृष्ठभूमि से आने वाले पुलकित गर्ग का परिवार इस समय दिल्ली में रहता है। उनके पिता हरियाणा ग्रामीण बैंक में बैंक मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। अपनी शुरुआती स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी दिल्ली का रुख किया और वहां से वर्ष 2014 में बीटेक की डिग्री पूरी की। तकनीकी शिक्षा के दौरान ही उन्होंने महसूस किया कि उनका वास्तविक झुकाव जनसेवा और प्रशासनिक दायित्वों की तरफ है।\n\nस्कूली दिनों की प्रेरणा और सिविल सेवा की ओर कदम\nपुलकित गर्ग जब आठवीं कक्षा के छात्र थे, तब उन्होंने 'चक दे इंडिया' फिल्म देखी थी। इस फिल्म ने उनके बाल मन पर गहरा प्रभाव छोड़ा और यहीं से उनके मन में यह विचार घर कर गया कि भविष्य में ऐसा पेशा चुनना चाहिए जिसके जरिए देश के लिए ठोस योगदान दिया जा सके। कॉलेज के दिनों में पहुंचते ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा को अपना मुख्य लक्ष्य बना लिया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के समानांतर ही उन्होंने व्यवस्थित तैयारी शुरू कर दी थी, जिससे कॉलेज पूरा होते ही वह इस कठिन प्रतियोगिता का सामना करने के लिए तैयार हो गए।\n\nदो प्रयासों का संघर्ष और उत्तर प्रदेश कैडर में चयन\nसंघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में उन्हें पहले ही प्रयास में अंतिम सफलता नहीं मिली। उन्होंने वर्ष 2014 में पहला प्रयास किया था। असफलता से निराश होने के बजाय उन्होंने अपनी कमियों को सुधारा और वर्ष 2015 में दूसरे प्रयास में पूरे देश में 27वीं रैंक हासिल करके भारतीय प्रशासनिक सेवा में अपनी जगह पक्की कर ली। इस शानदार सफलता के साथ वह वर्ष 2016 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी बन गए।\n\nफील्ड पोस्टिंग और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का दायरा\nप्रशासनिक सेवा में शामिल होने के बाद पुलकित गर्ग ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। शुरुआत में वह बुलंदशहर में सहायक मजिस्ट्रेट और बागपत में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात रहे। इसके बाद उन्हें सिद्धार्थनगर में मुख्य विकास अधिकारी यानी सीडीओ का दायित्व सौंपा गया। प्रशासनिक अनुभव के अगले चरण में उन्होंने झांसी नगर निगम में नगर आयुक्त और वाराणसी में विकास प्राधिकरण के पद पर अपनी सेवाएं दीं। वर्तमान में वह धर्मनगरी चित्रकूट के जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं और इस ऐतिहासिक क्षेत्र को आधुनिक बड़े शहरों की तर्ज पर विकसित करने की दिशा में योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।\n\nतैयारी कर रहे युवाओं के लिए सलाह\nप्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे अभ्यर्थियों के लिए पुलकित गर्ग का मानना है कि समसामयिक घटनाओं की समझ बेहद जरूरी है। वर्तमान समय में अखबार पढ़ने की आदत अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है और युवाओं को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है कि सिविल सेवा में केवल वही युवा कदम बढ़ाएं जो वास्तव में इस जिम्मेदारी को निभाना चाहते हैं। इस सेवा की चयन प्रक्रिया और फील्ड का काम दोनों ही काफी चुनौतीपूर्ण हैं। यही वजह है कि इसमें केवल वे ही अभ्यर्थी सफल हो पाते हैं जो पूरे समर्पण और सच्चे मन से इसकी तैयारी में जुटते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयह कहानी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और युवाओं को करियर चयन और अनुशासन को लेकर स्पष्ट संदेश देती है।\n\n• तैयारी की रणनीति: दैनिक समाचार पत्र पढ़ने की आदत को परीक्षा के लिए अनिवार्य बताया गया है। उम्मीदवारों को केवल रटने के बजाय नियमित रूप से अखबार पढ़कर समसामयिक मुद्दों की गहरी समझ बनानी चाहिए।\n• करियर का चुनाव: प्रशासनिक सेवा में आने का फैसला केवल ग्लैमर देखकर नहीं, बल्कि काम की प्रकृति को समझकर लेना चाहिए। फील्ड की चुनौतियां बेहद कठिन होती हैं, इसलिए मानसिक रूप से समर्पित युवा ही इस क्षेत्र में टिक सकते हैं।\n• असफलता से सीख: पहले प्रयास में विफलता मिलने के बावजूद दूसरे प्रयास में बेहतर रैंक हासिल की जा सकती है। 2014 के प्रयास के बाद 2015 में 27वीं रैंक लाना यह दर्शाता है कि निरंतर सुधार ही सफलता की कुंजी है।\n• स्थानीय विकास: चित्रकूट जिले के निवासियों के लिए प्रशासनिक नेतृत्व विकास के नए अवसर ला रहा है। धर्मनगरी को बड़े शहरों की तर्ज पर विकसित करने की पहल से स्थानीय बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपुलकित गर्ग का प्रशासनिक सेवा में चयन और चित्रकूट के डीएम बनने का सफर व्यक्तिगत प्रेरणा और सुनियोजित रणनीति का परिणाम रहा है।\n\n• प्रारंभिक प्रेरणा: स्कूली जीवन में देखी गई देशभक्ति आधारित फिल्म ने उनके भीतर सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में जाने की गहरी इच्छा पैदा की। इस प्रेरणा ने उन्हें कॉलेज में प्रवेश करते ही एक निश्चित लक्ष्य निर्धारित करने में मदद की।\n• तकनीकी पृष्ठभूमि और तैयारी: आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग करने के दौरान उन्होंने समय प्रबंधन पर ध्यान दिया। कॉलेज स्तर से ही सिविल सेवा की बुनियादी तैयारी शुरू करने से उन्हें परीक्षा के ढांचे को जल्दी समझने का अवसर मिला।\n• रणनीति में सुधार: वर्ष 2014 के पहले प्रयास में सफलता न मिलने के बाद उन्होंने अपनी कमियों का विश्लेषण किया। 2015 के दूसरे प्रयास में बेहतर तैयारी के बल पर उन्होंने 27वीं रैंक हासिल की और उत्तर प्रदेश कैडर प्राप्त किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं?\nपुलकित गर्ग मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं और उनका परिवार वर्तमान में दिल्ली में रहता है।\n\n2. पुलकित गर्ग ने अपनी उच्च शिक्षा कहां से और किस विषय में पूरी की?\nउन्होंने वर्ष 2014 में प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी दिल्ली से बीटेक की डिग्री पूरी की है।\n\n3. यूपीएससी परीक्षा में पुलकित गर्ग ने कौन सी रैंक हासिल की थी?\nउन्होंने वर्ष 2015 में अपने दूसरे प्रयास में 27वीं रैंक हासिल की और 2016 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस बने।\n\n4. पुलकित गर्ग को सिविल सेवा में जाने की प्रेरणा कब और कैसे मिली?\nकक्षा 8 में 'चक दे इंडिया' फिल्म देखने के बाद उनके मन में देश सेवा का विचार आया, जिसके बाद उन्होंने कॉलेज में इसकी तैयारी शुरू की।\n\n5. चित्रकूट से पहले वह किन पदों और शहरों में तैनात रह चुके हैं?\nवह बुलंदशहर में सहायक मजिस्ट्रेट, बागपत में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, सिद्धार्थनगर में सीडीओ, झांसी में नगर आयुक्त और वाराणसी विकास प्राधिकरण में तैनात रहे हैं।\n\n6. सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए उन्होंने क्या मुख्य सलाह दी है?\nउन्होंने नियमित रूप से अखबार पढ़ने की सलाह दी है और कहा है कि केवल वही युवा आएं जो पूरे मन और समर्पण से यह कठिन जिम्मेदारी निभाना चाहते हों।\n\nप्रेरणा और सबक\nपुलकित गर्ग का सफर यह दिखाता है कि सही समय पर लिया गया फैसला और लगातार किया गया अभ्यास किसी भी कठिन परीक्षा को आसान बना सकता है।\n\n• सच्चे समर्पण के साथ चयन: प्रशासनिक सेवा की तैयारी तभी करें जब आपका मन वास्तव में जनसेवा और इस कठिन दायित्व के लिए तैयार हो। केवल दूसरों को देखकर शुरू की गई तैयारी लंबे समय तक नहीं टिकती।\n• असफलता को अनुभव बनाना: पहले प्रयास में चयन न होने पर हताश होने के बजाय अपनी कमजोरियों पर काम करें। निरंतर सुधार ही दूसरे प्रयास में शीर्ष 30 में जगह दिला सकता है।\n• नियमित अध्ययन और अनुशासन: रोजाना अखबार पढ़ने और देश-दुनिया की घटनाओं से जुड़े रहने की आदत बनाएं। लगातार अध्ययन ही कठिन परीक्षाओं में निर्णायक बढ़त दिलाता है।",
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    "सफलता की कहानी"
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