# प्लास्टिक को मात दे रहा भागलपुर का यह कारीगर, सोशल मीडिया से सीखकर बांस को बना दिया शानदार कमाई का जरिया

> बिहार के भागलपुर जिले के नवगछिया में रहने वाले चंदन सिंह ने सोशल मीडिया की मदद से बांस से आकर्षक सजावटी उत्पाद बनाना सीखा है, जिसकी बदौलत आज उनके इको-फ्रेंडली डिज़ाइनों की बाजार में भारी मांग है और तेतरी गांव को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिल रही है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-07-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/plastika-ko-mata-de-raha-bhagalpur-ka-yaha-karigara-social-media-se-sikhakara-bansa-ko-bana-diya-shanadara-kamai-ka-jariya-9684 · **Language:** Hindi
**Tags:** चंदन सिंह, बांस के उत्पाद, भागलपुर न्यूज़, हस्तशिल्प, सक्सेस स्टोरी, इको फ्रेंडली, नवगछिया

आज के दौर में जब दुनिया भर में प्लास्टिक के कचरे और पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई जा रही है, तब बिहार के भागलपुर से एक बेहद सकारात्मक बदलाव की कहानी सामने आ रही है। लोग अब अपने घरों को सजाने के लिए हानिकारक प्लास्टिक और कृत्रिम सामग्री की जगह पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को अपना रहे हैं। इसी कड़ी में भागलपुर जिले के नवगछिया इलाके में तैयार किए जा रहे बांस के खूबसूरत उत्पाद लोगों की पहली पसंद बन रहे हैं। बांस से बने ये सजावटी सामान न केवल घरों की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं में भी इनकी गहरी जड़ें हैं। सनातन धर्म में बांस को अत्यंत पवित्र माना गया है। ऐसी मान्यता है कि घर में बांस से बनी वस्तुएं रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वंश वृद्धि में कोई बाधा नहीं आती। यही कारण है कि आधुनिकता की दौड़ में भी लोग अब अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं और बांस की महीन कारीगरी को अपने लिविंग रूम का हिस्सा बना रहे हैं।

 

## सोशल मीडिया से मिली नई दिशा

इस अद्भुत बदलाव के पीछे नवगछिया के तेतरी गांव के रहने वाले एक होनहार कारीगर चंदन सिंह की मेहनत और विजन है। चंदन ने अपनी लगन और इंटरनेट की ताकत का सही इस्तेमाल करते हुए बांस की कलाकृतियों को एक नया आयाम दिया है। बचपन से ही चंदन को बांस की लकड़ियों के साथ खेलने और उनसे कुछ नया बनाने का शौक था। हालांकि, शुरुआत में उनके इस हुनर को वह पहचान और बाजार नहीं मिल पाया, जिसका वह हकदार था। कई बार उचित दाम न मिलने के कारण निराशा भी हाथ लगी। लेकिन चंदन ने हार नहीं मानी। उन्होंने सोशल मीडिया का रुख किया, जहां उन्होंने दुनिया भर में बांस से बन रहे आधुनिक डिज़ाइनों और सजावटी उत्पादों को देखा। मोबाइल स्क्रीन पर दिखने वाली उन मनमोहक आकृतियों ने चंदन को प्रेरित किया और उन्होंने उन डिज़ाइनों को खुद बनाने का मन बना लिया।

 

## कड़ी मेहनत और धैर्य का नतीजा

चंदन का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। आमतौर पर लोगों को लगता है कि बांस हर जगह आसानी से उपलब्ध है, तो इससे कोई भी आसानी से सामान बना सकता है। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। चंदन बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बांस को सही आकार देने, उसे छीलने और उसमें महीन नक्काशी करने में कई-कई घंटे लग जाते थे। कई बार लगातार विफल होने पर उनका मन विचलित हो जाता था कि वह अपना समय कहां बर्बाद कर रहे हैं। इस काम में अत्यधिक धैर्य, मेहनत और अटूट लगन की आवश्यकता थी। लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने अभ्यास जारी रखा, उनकी उंगलियों में जादू सा आ गया। धीरे-धीरे चंदन की रुचि इस कला में और गहरी होती गई और वे एक से बढ़कर एक डिजाइनर वस्तुएं तैयार करने लगे। उनकी इस मेहनत ने साबित कर दिया कि अगर सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो किसी भी साधारण चीज को असाधारण बनाया जा सकता है।

 

## आकर्षक डिज़ाइनों की बाजार में भारी मांग

अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए चंदन ने स्थानीय मेलों और प्रदर्शनियों का सहारा लिया। जब उन्होंने अपने हाथों से गढ़ी गई बांस की कलाकृतियों को लोगों के सामने पेश किया, तो उनकी भारी मांग निकलने लगी। लोग इन अनोखे उत्पादों की खूबसूरती देखकर हैरान थे। आज स्थिति यह है कि ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार विशेष ऑर्डर देने लगे हैं। चंदन के पास बांस की झालर, आकर्षक दीवार घड़ियां, खूबसूरत टेबल लैंप और ऑफिस के लिए डिजाइनर कलम स्टैंड की भारी मांग आ रही है। विशेष रूप से घरों के मुख्य द्वार और बालकनी को सजाने के लिए इस्तेमाल होने वाली बांस की झालर लोगों को खूब भा रही है। इसके अलावा, मजबूत और डिजाइनर जूता स्टैंड, आकर्षक कॉफी टेबल, रंग-बिरंगी लाइटों से सजी सजावटी सामग्री, और ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ाने वाली बांस की शानदार नाव की भी बड़े पैमाने पर बिक्री हो रही है। आधुनिक घरों के इंटीरियर डिज़ाइन में ये उत्पाद एकदम सटीक बैठ रहे हैं।

 

## तेतरी गांव को मिली नई राष्ट्रीय पहचान

चंदन की इस सफलता ने पूरे तेतरी गांव की तस्वीर बदल दी है। एक समय था जब नवगछिया का तेतरी गांव मुख्य रूप से अपने पारंपरिक लकड़ी के उत्पादों और फर्नीचर के लिए जाना जाता था। लेकिन अब इस गांव की पहचान बांस की अनूठी कलाकृतियों के केंद्र के रूप में हो रही है। इस नए उद्योग ने न केवल चंदन को एक सफल उद्यमी बनाया है, बल्कि गांव के अन्य कारीगरों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। अब गांव के कई लोग इस कला को सीखकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। बांस के ये उत्पाद पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश भी दे रहे हैं, क्योंकि ये पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल हैं और इनसे प्रदूषण नहीं होता। आज बाजार में इन उत्पादों की मांग और कीमत दोनों ही तेजी से आसमान छू रही हैं। चंदन सिंह जैसे कारीगरों की यह रचनात्मकता साबित करती है कि स्थानीय शिल्प कौशल को अगर आधुनिक तकनीक और इंटरनेट का साथ मिल जाए, तो वह न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है, बल्कि देश भर में अपनी एक अलग पहचान भी बना सकता है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** लोग अपने घरों की सजावट के लिए हानिकारक प्लास्टिक की जगह पर्यावरण के अनुकूल बांस के उत्पादों को अपना सकते हैं, जिससे प्रदूषण कम होगा।

- **भागलपुर में:** नवगछिया और तेतरी गांव के स्थानीय कारीगरों और युवाओं के लिए यह हस्तशिल्प रोजगार और आमदनी का एक शानदार नया जरिया बन रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. चंदन सिंह कौन हैं और वे कहां के रहने वाले हैं?
चंदन सिंह बिहार के भागलपुर जिले के अंतर्गत आने वाले नवगछिया क्षेत्र के तेतरी गांव के एक होनहार कारीगर हैं। वह बांस से आधुनिक सजावटी सामान बनाने के लिए जाने जाते हैं।

### 2. चंदन ने बांस के डिजाइनर उत्पाद बनाना कैसे सीखा?
बचपन से इस काम में रुचि रखने वाले चंदन ने सोशल मीडिया पर देश-दुनिया के खूबसूरत डिजाइनों को देखा। इंटरनेट से प्रेरणा लेकर उन्होंने खुद इन डिज़ाइनों को बनाने का अभ्यास किया।

### 3. बांस के किन सामानों की बाजार में सबसे ज्यादा मांग है?
बांस से बनी झालर, दीवार घड़ी, टेबल लैंप, कलम स्टैंड, जूता स्टैंड, डिजाइनर टेबल और नाव की बाजार में भारी मांग है।

### 4. लोग घरों में बांस के सामान को क्यों पसंद कर रहे हैं?
बांस के उत्पाद पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) होते हैं। इसके अलावा सनातन धर्म में भी बांस को अत्यंत पवित्र माना गया है और इसे वंश वृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।

## प्रेरणा और सबक
- **डिजिटल माध्यमों से सीखें:** कुछ नया सीखने के लिए संसाधनों की कमी अब कोई बहाना नहीं है। चंदन ने बिना किसी औपचारिक ट्रेनिंग के केवल सोशल मीडिया की मदद से आधुनिक कलाकारी सीखी।

- **धैर्य और निरंतरता:** शुरुआत में सफलता न मिलने और हताश होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार अभ्यास से ही उन्होंने बांस जैसी सख्त चीज पर बारीक कारीगरी में महारत हासिल की।

- **बाजार के अनुसार बदलाव:** केवल पुरानी और पारंपरिक वस्तुओं तक सीमित रहने के बजाय, उन्होंने आधुनिक घरों की जरूरत के हिसाब से डिजाइनर सामान बनाए, जिससे उनकी मांग तेजी से बढ़ी।

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