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  "type": "article",
  "title": "पंचतत्व पर आधारित अनोखा फार्म: सीकर के किसान ने मिट्टी-गोबर से बनाए ऐसे कमरे, गर्मी में भी रहते हैं 10 डिग्री ठंडे",
  "summary": "सीकर के खोरी गांव के किसान शेरसिंह शेखावत ने एक हेक्टेयर के फार्म को भूमि, जल, वायु, अग्नि और आकाश के संतुलन पर आधारित प्रयोगशाला में बदल दिया है, जहां हर साल 2000 से ज्यादा पर्यटक और शोधार्थी पहुंचते हैं।",
  "content": "राजस्थान के सीकर जिले के खोरी गांव में रहने वाले किसान शेरसिंह शेखावत ने पर्यावरण की रक्षा को सिर्फ पेड़ लगाने तक नहीं रोका। उन्होंने प्रकृति के पांच मूल तत्वों — भूमि, जल, वायु, अग्नि और आकाश — के बीच संतुलन साधने वाला एक ऐसा मॉडल खड़ा किया है, जिसे देखने और समझने के लिए लोग दूर-दूर से उमड़ रहे हैं। उनका एक हेक्टेयर का फार्म हाउस अब किसी जीवंत प्रयोगशाला जैसा दिखता है, जिसे वेदों, पुराणों, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को एक साथ जोड़कर तैयार किया गया है।\n\nमिट्टी को जीवन देने वाला भूमि तत्व\nशेखावत बताते हैं कि सबसे पहले उन्होंने जमीन की ताकत पर काम किया। गोमूत्र, गोबर और पौराणिक औषधियों को किण्वित करके उन्होंने मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाई, ताकि भूमि अधिक उपजाऊ बने। जैविक खेती को अपनाकर वे लगातार इसी उर्वरता को बनाए रखने पर जोर देते हैं, जिससे रासायनिक खाद की जरूरत ही खत्म हो जाती है।\n\nहर साल 12 लाख लीटर पानी सहेजने की व्यवस्था\nजल तत्व के लिए उन्होंने फार्म पर वर्षा जल संचयन का असरदार इंतजाम किया है। खेत में गिरने वाले बारिश के पानी को नालों के जरिए कुंड तक पहुंचाया जाता है, और इसी तरह हर साल करीब 12 लाख लीटर पानी जमा हो जाता है। यह पानी पीने और सिंचाई, दोनों कामों में इस्तेमाल होता है। पानी के मामले में उनकी सोच अपने खेत तक सीमित नहीं रही — उन्होंने हर्ष पर्वत के बरसाती पानी को आसपास के गांवों तक ले जाने का मॉडल भी तैयार किया है।\n\nएग्रो टूरिज्म से सालाना लाखों की कमाई\nशेखावत ने अपने खेत को एग्रो टूरिज्म के रूप में भी विकसित किया है। यहां वातानुकूलित झोपड़ियां बनाई गई हैं, साथ ही फल और सब्जियों की खेती भी होती है। इन सब गतिविधियों से वे हर साल लाखों रुपए की आमदनी भी कमा रहे हैं।\n\n1750 पेड़ और प्रदूषण से लड़ता वायु तत्व\nहवा को साफ और संतुलित रखने के लिए उन्होंने फार्म पर करीब 1750 पेड़-पौधे लगाए हैं। खास बात यह है कि पौधों का चुनाव भी इसी सोच के साथ किया गया कि वे वायु प्रदूषण को ज्यादा बेहतर ढंग से रोक सकें।\n\nबिना बिजली के प्राकृतिक AC, गर्मी में 10 डिग्री ठंडक\nअग्नि तत्व के तहत उन्होंने मिट्टी और गोबर से चार प्राकृतिक वातानुकूलित कमरे बनाए हैं। यही उनके फार्म का सबसे बड़ा आकर्षण भी हैं। गर्मियों में इन कमरों का तापमान बाहर के मुकाबले करीब 10 डिग्री सेल्सियस कम रहता है, और सर्दियों में भी इनके भीतर का माहौल अनुकूल बना रहता है — वह भी बिना किसी बिजली से चलने वाले एयर कंडीशनर के।\n\nज्योतिष पर आधारित नवग्रह वाटिका\nआकाश तत्व की अहमियत को समझते हुए शेरसिंह ने ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक नवग्रह वाटिका भी तैयार की है। इसमें नौ ग्रहों और 27 नक्षत्रों से जुड़े अलग-अलग पेड़-पौधे लगाए गए हैं, जो भारतीय परंपरा और प्रकृति के गहरे रिश्ते को दर्शाते हैं।\n\nहर साल 2000 पर्यटक, 4500 लोगों को प्रशिक्षण\nउनके इस अनोखे फार्म हाउस पर हर साल दो हजार से ज्यादा पर्यटक और शोधार्थी अध्ययन के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा शेखावत अब तक 4500 से अधिक लोगों को जैविक खेती का प्रशिक्षण देकर पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती के प्रति जागरूकता फैला चुके हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह मॉडल दिखाता है कि किसान कम बिजली और रसायन के साथ जैविक खेती, वर्षा जल संचयन और एग्रो टूरिज्म से सालाना लाखों रुपए की अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं।\n• सीकर (राजस्थान) में: स्थानीय किसान और छात्र खोरी गांव के इस फार्म पर जाकर मुफ्त में टिकाऊ खेती और मिट्टी-गोबर से प्राकृतिक ठंडे कमरे बनाने की तकनीक सीख सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शेरसिंह शेखावत का फार्म कहां है और कितना बड़ा है?\nउनका फार्म राजस्थान के सीकर जिले के खोरी गांव में है और यह एक हेक्टेयर में फैला हुआ है।\n\n2. उनके मिट्टी-गोबर वाले कमरे गर्मी में कितने ठंडे रहते हैं?\nमिट्टी और गोबर से बने इन चार प्राकृतिक वातानुकूलित कमरों का तापमान गर्मियों में बाहर के मुकाबले करीब 10 डिग्री सेल्सियस कम रहता है।\n\n3. फार्म पर हर साल कितना पानी जमा होता है?\nवर्षा जल संचयन की व्यवस्था के जरिए हर साल करीब 12 लाख लीटर पानी जमा किया जाता है, जो पीने और सिंचाई दोनों में काम आता है।\n\n4. उनके फार्म पर कितने लोग आते हैं और कितनों को उन्होंने प्रशिक्षण दिया है?\nहर साल दो हजार से ज्यादा पर्यटक और शोधार्थी यहां पहुंचते हैं, और वे अब तक 4500 से अधिक लोगों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दे चुके हैं।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-06-15",
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    "शेरसिंह शेखावत",
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    "जैविक खेती",
    "एग्रो टूरिज्म",
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    "प्राकृतिक वातानुकूलन"
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