# प्राइमरी स्कूल में अध्यापन और खाकी की ट्रेनिंग के बाद डॉ. विपिन कुमार कैसे बने कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर

> बरेली के एक सामान्य ग्रामीण परिवार से निकले डॉ. विपिन कुमार ने कई असफलताओं से उबरकर प्राथमिक शिक्षक और पुलिस दारोगा के बाद बलिया के डिग्री कॉलेज में रक्षा अध्ययन के असिस्टेंट प्रोफेसर का पद हासिल किया।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/praimari-skula-men-adhyapana-aura-khaki-ki-treninga-ke-bada-dr-vipin-kumar-kaise-bane-koleja-men-asistenta-prophesara-41036 · **Language:** Hindi
**Tags:** डॉ. विपिन कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, बलिया, बरेली, शिक्षा, सफलता की कहानी

कठिन परिश्रम और लगातार सीखते रहने की इच्छा इंसान को किस मुकाम तक पहुंचा सकती है, उत्तर प्रदेश के डॉ. विपिन कुमार की यात्रा इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। गांव की सामान्य पाठशाला से अक्षर ज्ञान पाकर शुरू हुआ उनका शैक्षणिक सफर कई अहम पड़ावों से गुजरा। जीवन में लगातार कई प्रतियोगी परीक्षाओं में नाकामी मिलने के बाद भी उनका मनोबल नहीं टूटा। पहले उन्होंने प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक की जिम्मेदारी संभाली, उसके बाद पुलिस सेवा में दारोगा के पद पर चुने गए। मगर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का लक्ष्य मन में संजोए रखने वाले डॉ. विपिन ने पुलिस ट्रेनिंग पूरी होने के बावजूद खाकी को अलविदा कह दिया और बलिया के प्रतिष्ठित कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर का पदभार संभाल लिया।

## गांव की प्राथमिक शाला से लेकर पीएचडी तक का शैक्षणिक सफर
डॉ. विपिन कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले हैं। उनकी बुनियादी पढ़ाई उनके पैतृक गांव के ही सरकारी प्राथमिक विद्यालय में संपन्न हुई। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने मीरगंज में स्थित राजेंद्र प्रसाद इंटर कॉलेज में दाखिला लिया, जहां से उन्होंने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं।

उच्च शिक्षा के शुरुआती चरण में उन्होंने मीरगंज के राजेंद्र प्रसाद डिग्री कॉलेज से बीए और इसके बाद बीएड की उपाधि प्राप्त की। शिक्षण विधा में गहरी रुचि होने के कारण उन्होंने हिंदू कॉलेज मुरादाबाद से एमएड की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने बरेली कॉलेज से रक्षा अध्ययन (डिफेंस स्टडीज) विषय में एमए की डिग्री हासिल की। अपनी उच्च शैक्षणिक योग्यताओं को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बलिया स्थित जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय से पीएचडी की शोध उपाधि भी प्राप्त की।

## पुलिस सब इंस्पेक्टर की ट्रेनिंग के बाद शिक्षण क्षेत्र में वापसी
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान डॉ. विपिन कुमार ने पुलिस विभाग की भर्ती परीक्षा में भी हिस्सा लिया था। उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन पुलिस उप निरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) के पद पर हो गया। उन्होंने तय समय के भीतर अपनी पुलिस ट्रेनिंग भी सफलता के साथ पूरी कर ली थी।

इसी बीच उच्चतर शिक्षा सेवा चयन के तहत श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलिया में रक्षा अध्ययन विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर उनका चयन हो गया। चूंकि उनकी पहली प्राथमिकता अध्यापन का क्षेत्र ही थी, इसलिए उन्होंने पुलिस उप निरीक्षक के पद से विधिवत इस्तीफा सौंप दिया और बलिया के महाविद्यालय में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर अपनी नई पारी की शुरुआत की।

डॉ. विपिन कुमार का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में अनगिनत प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरे थे और उन्हें इतनी बार असफलताएं मिलीं जिनकी कोई गिनती तक नहीं है। उनका मानना है कि हर परीक्षा में पहली बार में कामयाबी मिलना मुमकिन नहीं होता, लेकिन अगर अभ्यर्थी पूरी निष्ठा और लगन से किसी एक दिशा में तैयारी करता है तो अंततः सफलता जरूर कदम चूमती है।

## पिता के शिक्षक होने का असर और प्रतियोगी परीक्षाओं की सटीक रणनीति
डॉ. विपिन कुमार एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता भी एक शिक्षक थे, जिससे उन्हें बचपन से ही घर के भीतर पढ़ने-लिखने का सकारात्मक वातावरण मिला। वर्ष 2022 में उनके पिता का दिल का दौरा पड़ने (हार्ट अटैक) से अचानक देहांत हो गया था, जो उनके लिए एक निजी सदमा था।

शैक्षणिक करियर को लेकर डॉ. विपिन बताते हैं कि उनकी पहली पसंद शिक्षा शास्त्र विषय था, क्योंकि उन्होंने बीएड और एमएड दोनों किए थे और शिक्षा विषय में उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) भी पास कर रखी थी। हालांकि असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में उनका चयन रक्षा अध्ययन विषय में हुआ, इसलिए उन्होंने इसी विषय को अपना मुख्य करियर क्षेत्र बना लिया।

उच्च परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सुझाव देते हुए वे कहते हैं कि एमए के स्तर पर ही विषयों के बुनियादी सिद्धांतों (कॉन्सेप्ट्स) को गहराई से समझ लेना चाहिए। यदि नेट परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र पुराने प्रश्नों और मुख्य सिद्धांतों का नियमित अभ्यास करें, तो विषय पर मजबूत पकड़ बन जाती है। असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा का प्रारूप सामान्य परीक्षाओं से अलग होता है, लेकिन व्यवस्थित तैयारी से सफलता सुनिश्चित की जा सकती है। आज के दौर में इंटरनेट जैसे अनेक संसाधन सुलभ हैं, जिनका सदुपयोग करके छात्र कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच भी अपनी मंजिल हासिल कर सकते हैं।

## इसका आप पर असर
यह प्रेरक कहानी उन हजारों युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की अनिश्चितता से निपटने और अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्र रहने का व्यावहारिक मार्ग दिखाती है।

- **कॅरियर चयन में:** प्रतियोगी छात्र एक सरकारी नौकरी सुरक्षित करने के बाद भी अपने पसंदीदा शैक्षणिक लक्ष्य को जारी रखने का हौसला ले सकते हैं। इससे उन्हें बैकअप योजना के साथ बड़े लक्ष्य साधने की प्रेरणा मिलती है।
- **संसाधनों के इस्तेमाल पर:** वर्तमान में इंटरनेट पर उपलब्ध पाठ्य सामग्री का सही दिशा में इस्तेमाल कर छोटे शहरों के छात्र भी उच्च पद पा सकते हैं। नियमित अध्ययन से कोचिंग के अभाव को दूर किया जा सकता है।
- **असफलताओं के प्रबंधन में:** कई भर्तियों में असफल होने के बावजूद निरंतर फॉर्म भरने और परीक्षा देने की आदत अंततः चयनित कराती है। धैर्य बनाए रखकर छात्र निराशा के भंवर से बच सकते हैं।
- **असिस्टेंट प्रोफेसर की तैयारी:** एमए के दौरान ही मूलभूत अवधारणाओं पर ध्यान देकर और नेट प्रश्नों का अभ्यास कर कॉलेज स्तर की परीक्षाओं में सफलता की गुंजाइश बढ़ाई जा सकती है। इससे अंतिम समय में परीक्षा पैटर्न को समझना आसान हो जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
डॉ. विपिन कुमार की यह बहु-स्तरीय सफलता उनके पारिवारिक शैक्षणिक वातावरण, लगातार सीखने की ललक और व्यावहारिक करियर निर्णयों का परिणाम है।

- **पारिवारिक पृष्ठभूमि का असर:** उनके पिता स्वयं शिक्षक थे, जिसके कारण बचपन से ही उन्हें पढ़ाई-लिखाई का अनुकूल और गंभीर परिवेश प्राप्त हुआ। इसी माहौल ने शुरुआती दिनों से ही उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में बने रहने की प्रेरणा दी।
- **लगातार परीक्षाओं में भागीदारी:** उन्होंने अनगिनत प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन किए और बार-बार मिलने वाली विफलताओं को अपनी तैयारी में सुधार का जरिया बनाया। निरंतर प्रयास के चलते ही उनका चयन पहले प्राथमिक शिक्षक, फिर पुलिस उप निरीक्षक और अंत में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुआ।
- **लक्ष्य के प्रति स्पष्टता:** पुलिस उप निरीक्षक की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भी जब उन्हें उच्च शिक्षा में जाने का अवसर मिला, तो उन्होंने तुरंत निर्णय लेकर शिक्षण सेवा को चुना। अध्यापन में उनकी मूल रुचि ने उन्हें खाकी वर्दी छोड़कर कॉलेज जॉइन करने का साहस दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. डॉ. विपिन कुमार वर्तमान में किस पद पर कार्यरत हैं?
वे बलिया स्थित श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय में रक्षा अध्ययन के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।

### 2. डॉ. विपिन कुमार मूल रूप से कहां के निवासी हैं?
वे उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले हैं।

### 3. असिस्टेंट प्रोफेसर बनने से पहले वे किन पदों पर चयनित हो चुके थे?
वे प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक रह चुके थे और उन्होंने पुलिस उप निरीक्षक पद पर चयनित होकर अपनी ट्रेनिंग भी पूरी कर ली थी।

### 4. उन्होंने पुलिस उप निरीक्षक का पद क्यों छोड़ दिया?
ट्रेनिंग पूरी होने के दौरान ही उनका चयन कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हो गया था, जिसके बाद उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया।

### 5. डॉ. विपिन कुमार ने अपनी पीएचडी कहां से की है?
उन्होंने बलिया स्थित जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय से अपनी पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।

### 6. नेट परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए उनका क्या सुझाव है?
उनका सुझाव है कि एमए के दौरान ही सभी बुनियादी कॉन्सेप्ट्स स्पष्ट कर लेने चाहिए और पुराने प्रश्नों का नियमित अभ्यास करना चाहिए।

## प्रेरणा और सबक
डॉ. विपिन कुमार का जीवन यह सीख देता है कि पृष्ठभूमि चाहे ग्रामीण हो या संसाधन सीमित, निरंतर प्रयास से हर बाधा पार की जा सकती है।

- **असफलताओं से न घबराएं:** दर्जनों परीक्षाओं में अस्वीकृत होने के बाद भी प्रयास जारी रखने से ही बड़ी सफलता का द्वार खुलता है। नाकामी को सीखने का अवसर बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।
- **मूल विषय पर मजबूत पकड़:** स्नातकोत्तर स्तर पर बुनियादी सिद्धांतों को स्पष्ट रखने से कठिन से कठिन पात्रता परीक्षाएं भी उत्तीर्ण की जा सकती हैं। अवधारणाओं की स्पष्टता ही हर परीक्षा का मूल मंत्र है।
- **अपनी वास्तविक रुचि को पहचानें:** पुलिस उपनिरीक्षक जैसी प्रतिष्ठित सेवा मिलने के बाद भी अपने मनपसंद अध्यापन क्षेत्र को चुनना यह दिखाता है कि करियर का चयन दिल से करना चाहिए। अपनी प्राथमिकताओं के प्रति ईमानदार रहना आवश्यक है।
- **आधुनिक संसाधनों का सदुपयोग:** आज इंटरनेट और सूचना तकनीक के माध्यम से ज्ञान की कोई कमी नहीं है, बशर्ते छात्र उसका उपयोग सही दिशा में करें। मार्गदर्शन के अभाव को लगन से पूरा किया जा सकता है।

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