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  "title": "प्रोफेसर बनने की चाहत से आईपीएस तक: 24 वर्ष की उम्र में श्रुति श्रीवास्तव ने बिना कोचिंग हासिल की 82वीं रैंक",
  "summary": "दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली श्रुति श्रीवास्तव ने महज 24 साल की उम्र में यूपीएससी परीक्षा में 82वीं रैंक हासिल कर मिसाल पेश की।",
  "content": "अकादमिक क्षेत्र में एक सुरक्षित करियर बनाने का ख्वाब देखने वाली श्रुति श्रीवास्तव का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली श्रुति श्रीवास्तव का शुरुआती लक्ष्य कभी पुलिस सेवा या प्रशासनिक व्यवस्था में जाने का नहीं था। वह विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य करना चाहती थीं और प्रोफेसर बनकर छात्रों को मार्गदर्शन देने का इरादा रखती थीं। लेकिन कॉलेज के दिनों में मिले एक सुझाव ने उनके सोचने का नजरिया पूरी तरह बदल दिया। अपने मजबूत इरादों, नियमित स्वाध्याय और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने 24 वर्ष की उम्र में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर ली।\n\nशुरुआती जीवन और शानदार अकादमिक पृष्ठभूमि\nश्रुति श्रीवास्तव का जन्म 1 नवंबर 1995 को देश की राजधानी दिल्ली में हुआ था। उनके पिता का नाम संजय श्रीवास्तव है। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली के शीर्ष संस्थानों का रुख किया। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध हिंदू कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके उपरांत उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में दाखिला लिया और अंग्रेजी विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन यानी एमए की उपाधि अर्जित की।\n\nअपनी अकादमिक योग्यता को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (NET-JRF) भी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली थी। हालांकि, उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट uppolice.gov.in पर उनकी शैक्षणिक योग्यता बीएससी इन इंग्लिश के रूप में दर्ज है। इस मजबूत पृष्ठभूमि के साथ अकादमिक जगत में उनका भविष्य पूरी तरह सुरक्षित नजर आ रहा था।\n\nसीनियर के सुझाव से बदली करियर की राह\nकॉलेज के दिनों तक श्रुति श्रीवास्तव केवल अध्यापन के क्षेत्र में ही आगे बढ़ने का विचार कर रही थीं। इसी दौरान एक वरिष्ठ छात्र की सलाह ने उनके मन में नई सोच को जन्म दिया। उस सीनियर ने उन्हें समझाया कि प्रोफेसर की तुलना में सिविल सेवा के जरिए समाज में बदलाव लाने का दायरा और प्रभाव कहीं अधिक व्यापक होता है। इस बात ने उनके भीतर सिविल सेवा में जाने का मजबूत संकल्प पैदा किया।\n\nइसके बाद उन्होंने आत्मनिर्भर रहते हुए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का फैसला किया। उन्होंने लोकसभा सचिवालय में लगभग 2 वर्ष तक नौकरी की और अपने कामकाजी जीवन के साथ ही यूपीएससी की पढ़ाई को संतुलित किया। किसी भी महंगी कोचिंग संस्थान का सहारा लिए बिना, उन्होंने पूरी तरह सेल्फ-स्टडी पर भरोसा किया। अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी 2019 की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 82वीं रैंक हासिल कर ली।\n\nपुलिस सेवा में योगदान और उपलब्धियां\nसाल 2020 बैच की आईपीएस अधिकारी के तौर पर भारतीय पुलिस सेवा में शामिल होने के बाद उन्होंने तेलंगाना के हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) में अपना कड़ा प्रशिक्षण पूरा किया। ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने शारीरिक और मानसिक संतुलन का परिचय देते हुए योग के लिए प्रतिष्ठित ‘गांधी ज्ञान मंदिर योग केंद्र ट्रॉफी’ अपने नाम की थी।\n\nउत्तर प्रदेश कैडर आवंटित होने के बाद वह वर्तमान में प्रयागराज कमिश्नरेट में एडिशनल डीसीपी के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। वह न केवल अपनी प्रशासनिक कार्यशैली बल्कि अपने अनूठे अंदाज के लिए भी जानी जाती हैं। महाकुंभ 2025 की तैयारियों और आयोजनों के सिलसिले में जब अभिनेत्री रवीना टंडन काशी पहुंची थीं, तब आईपीएस श्रुति श्रीवास्तव ने उनका एक खास इंटरव्यू भी लिया था, जिसकी काफी चर्चा रही थी।\n\nइसका आप पर असर\nयह प्रेरणादायक यात्रा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को कार्यप्रणाली और स्वाध्याय के महत्व के बारे में व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करती है।\n\n• भारत में अभ्यर्थियों के लिए: यह साबित करता है कि बिना किसी महंगे कोचिंग संस्थान के भी स्वाध्याय से प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में शीर्ष रैंक हासिल की जा सकती है। पूर्णकालिक नौकरी करते हुए भी समय प्रबंधन के जरिए सिविल सेवा परीक्षा की प्रभावी तैयारी संभव है।\n• उत्तर प्रदेश में नागरिकों के लिए: युवा और उच्च शिक्षित अधिकारियों की तैनाती से प्रयागराज कमिश्नरेट में आधुनिक पुलिसिंग और कानून व्यवस्था को मजबूती मिलती है। यह महिलाओं और आम नागरिकों के लिए प्रशासनिक तंत्र तक पहुंच और संवाद को अधिक सुगम बनाता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nश्रुति श्रीवास्तव के करियर में यह बड़ा बदलाव एक महत्वपूर्ण सलाह और उनके व्यक्तिगत दृढ़ संकल्प के कारण आया। उन्होंने अपने सुरक्षित अकादमिक भविष्य को छोड़कर समाज पर व्यापक प्रभाव डालने वाले क्षेत्र को चुना।\n\n• वरिष्ठ छात्र की सलाह: कॉलेज के दौरान एक सीनियर ने उन्हें समझाया कि अध्यापन की तुलना में सिविल सेवा का दायरा और प्रभाव बहुत व्यापक होता है। इस अंतर्दृष्टि ने उनके करियर के लक्ष्य को प्रोफेसर से बदलकर प्रशासनिक सेवा की ओर मोड़ दिया।\n• नौकरी के साथ स्वाध्याय: उन्होंने लोकसभा सचिवालय में करीब 2 साल नौकरी करते हुए बिना किसी कोचिंग के निरंतर स्व-अध्ययन किया। अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने योजनाबद्ध तैयारी के बल पर 82वीं रैंक प्राप्त की।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. श्रुति श्रीवास्तव ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में कौन सी रैंक हासिल की थी?\nउन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2019 में ऑल इंडिया 82वीं रैंक हासिल की थी।\n\n2. श्रुति श्रीवास्तव ने किस उम्र में यूपीएससी परीक्षा पास की?\nउन्होंने महज 24 साल की उम्र में अपने तीसरे प्रयास में यह कठिन परीक्षा उत्तीर्ण की थी।\n\n3. आईपीएस बनने से पहले उनकी शैक्षणिक योग्यता क्या थी?\nउन्होंने हिंदू कॉलेज से ग्रेजुएशन और जेएनयू से अंग्रेजी में एमए किया था, साथ ही नेट-जेआरएफ परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी।\n\n4. वर्तमान में आईपीएस श्रुति श्रीवास्तव किस पद पर कार्यरत हैं?\nवह वर्तमान में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज कमिश्नरेट में एडिशनल डीसीपी के पद पर तैनात हैं।\n\n5. यूपीएससी की तैयारी के दौरान वह कहां नौकरी कर रही थीं?\nतैयारी के दौरान उन्होंने लोकसभा सचिवालय में लगभग 2 वर्ष तक नौकरी की थी।\n\nप्रेरणा और सबक\nश्रुति श्रीवास्तव की सफलता से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र कई महत्वपूर्ण सीख ले सकते हैं।\n\n• नजरिया बदलने का साहस: अपने पूर्व निर्धारित करियर को छोड़कर बड़े लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाने में संकोच न करें। जब नए अवसर और प्रभाव का दायरा समझ आए, तो नई दिशा चुनने का साहस रखना चाहिए।\n• स्वाध्याय की ताकत: महंगी कोचिंग के बिना भी केवल स्व-अध्ययन और अनुशासन के दम पर देश की सबसे कठिन परीक्षा उत्तीर्ण की जा सकती है। अपनी अध्ययन सामग्री और समय सारिणी पर विश्वास रखना आवश्यक है।\n• काम और पढ़ाई में संतुलन: नौकरी करते हुए भी सपनों को हासिल किया जा सकता है। लोकसभा सचिवालय में दो साल कार्यरत रहते हुए तैयारी करना यह सिखाता है कि इच्छाशक्ति हो तो व्यस्त दिनचर्या में भी समय निकाला जा सकता है।",
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  "publishedAt": "2026-10-09",
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