पूर्णिया के प्रियंक ने छोड़ा इंजीनियरिंग का ख्वाब, पिता की इच्छा पूरी कर बने डॉक्टर पूर्णिया के रहने वाले डॉ. प्रियंक कुमार साह ने अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा करने के लिए इंजीनियरिंग का रास्ता छोड़कर डॉक्टरी चुनी और अब अपने गृह जिले में मरीजों की सेवा कर रहे हैं. पूर्णिया: दृढ़ संकल्प और सच्ची मेहनत से किसी भी कठिन लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. इस बात को बिहार के पूर्णिया के रहने वाले युवा डॉक्टर प्रियंक कुमार साह ने सच साबित कर दिखाया है. शुरुआत में खुद एक इंजीनियर बनना चाहने वाले प्रियंक ने अपने दिवंगत पिता की ख्वाहिश का मान रखते हुए चिकित्सा के क्षेत्र को चुना. आज वे अपने गृह जिले पूर्णिया में अपना खुद का क्लीनिक चलाकर जरूरतमंद मरीजों की निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हैं और अपने पिता के उस सपने को जीवंत कर रहे हैं जो उन्होंने अपने बेटे के लिए देखा था. कोटा और लखनऊ से तय किया मेडिकल का सफर डॉ. प्रियंक कुमार साह की शुरुआती शिक्षा यानी दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई पूर्णिया के जाने-माने विद्या विहार स्कूल से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने आगे की स्कूली शिक्षा यानी बारहवीं कक्षा के लिए राजस्थान के कोटा शहर का रुख किया. अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने वर्ष 2016 की ऑल इंडिया लेवल की नीट परीक्षा में सफलता हासिल की और उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर से अपनी एमबीबीएस की डिग्री पूरी की. इसके बाद उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के तहत बिहार के किशनगंज स्थित माता गुजरी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज से तीन साल की अवधि में एमडी मेडिसिन की उपाधि प्राप्त की. दरभंगा में विशेष प्रशिक्षण लेकर पूर्णिया में शुरू किया क्लीनिक एमडी की पढ़ाई मुकम्मल होने के बाद डॉ. प्रियंक ने दरभंगा के ग्लोबल डायबिटीज रिसर्च सेंटर का रुख किया, जहां उन्होंने छह महीने तक मधुमेह के इलाज का विशेष प्रशिक्षण लिया. यह ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वे अपने गृह जिला पूर्णिया लौट आए. उन्होंने शहर के व्यस्त लाइन बाजार चौक के नजदीक ग्लोबल डायबिटिक केयर के नाम से अपने क्लीनिक का शुभारंभ किया और मरीजों का इलाज शुरू किया. पिता की प्रेरणा से तय की सफलता की राह अपनी इस प्रेरणादायक यात्रा के बारे में बात करते हुए डॉ. प्रियंक साझा करते हैं कि उनके पिता स्वर्गीय विनय कुमार साह की दिली इच्छा थी कि उनका बेटा डॉक्टर बनकर समाज के लोगों की सेवा करे. हालांकि प्रियंक के मन में खुद इंजीनियर बनने की चाहत थी, लेकिन अपने पिता के सपनों को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने अपनी राह बदल ली. इस दौरान उनके सामने कई तरह की परेशानियां और संघर्ष आए, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. डॉ. प्रियंक का कहना है कि आज उनके पिता उनके बीच नहीं हैं, लेकिन उन्हें इस बात का असीम गर्व है कि उन्होंने अपने पिता के देखे गए सपने को हकीकत में बदल दिया. इसका आप पर असर • पूर्णिया में: स्थानीय मरीजों को मधुमेह और अन्य आंतरिक बीमारियों के इलाज के लिए अब शहर में ही विशेषज्ञ चिकित्सक की बेहतर सुविधा मिलने लगी है। • व्यापक स्तर पर: यह कहानी युवाओं को अपने परिवार के सपनों और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के बीच सही संतुलन बनाने की प्रेरणा देती है। सवाल-जवाब 1. डॉ. प्रियंक कुमार साह ने अपनी स्कूली शिक्षा कहां से पूरी की? उन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई पूर्णिया के विद्या विहार स्कूल से और बारहवीं की पढ़ाई कोटा से पूरी की। 2. डॉ. प्रियंक ने एमबीबीएस और एमडी की पढ़ाई कहां से की? उन्होंने लखनऊ से एमबीबीएस और किशनगंज के माता गुजरी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज से एमडी की पढ़ाई की। 3. उन्होंने मधुमेह का विशेष प्रशिक्षण कहां से प्राप्त किया? उन्होंने दरभंगा स्थित ग्लोबल डायबिटीज रिसर्च सेंटर से छह महीने का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। 4. पूर्णिया में उनका क्लीनिक कहां स्थित है? उनका क्लीनिक पूर्णिया में लाइन बाजार चौक के पास ग्लोबल डायबिटिक केयर के नाम से संचालित है। प्रेरणा और सबक • परिवार की प्रेरणा: अपनों की खुशी और उनके अधूरे सपनों को पूरा करना जीवन में सबसे बड़ा संतोष देता है। • कठिनाइयों में डटे रहना: लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में आने वाली बाधाओं से घबराने के बजाय उनका डटकर मुकाबला करना चाहिए। • लक्ष्य बदलना: कभी-कभी अपनों की खातिर अपनी पसंद बदलने से मिलने वाली सफलता ज्यादा सार्थक होती है। • कड़ी मेहनत: नीट और एमडी जैसी कठिन परीक्षाओं को पास करने के लिए निरंतर और अनुशासित प्रयास जरूरी हैं। https://trendkia.com/success-stories/purnia-ke-priyank-ne-chhoda-engineering-ka-khwab-pita-ki-iccha-poori-kar-bane-doctor-15396 TrendKia — Har trend, sabse pehle.