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  "title": "पूर्णिया की 80 वर्षीय पतसिया देवी तड़के 5 बजे से बेचती हैं लिट्टी, संतानों पर निर्भर रहने के बजाए चुनी स्वाभिमान की राह",
  "summary": "पूर्णिया में 80 साल की पतसिया देवी सुबह 5 बजे से पॉलीटेक्निक चौक पर लिट्टी बेचकर अपनी आजीविका खुद कमाती हैं। 1 बेटे और 7 बेटियों की मां होने के बावजूद वे बच्चों पर बोझ बनने के बजाए कड़ी मेहनत और स्वाभिमान का रास्ता चुन रही हैं।",
  "content": "पूर्णिया शहर के पॉलीटेक्निक चौक के पास सुबह-सवेरे ही एक प्रेरणादायक और आत्मसम्मान से भरी तस्वीर देखने को मिलती है। ढलती उम्र की तमाम शारीरिक परेशानियों के बावजूद 80 वर्षीय पतसिया देवी अपने दैनिक जीवन की जिम्मेदारियां खुद उठा रही हैं। बढ़ती उम्र के इस मोड़ पर जहां लोग अक्सर सहारे की तलाश करते हैं, वहीं पतसिया देवी हर दिन तड़के उठकर अपने हाथों से तैयार की हुई लिट्टी बेचकर ईमानदारी की कमाई करती हैं।\n\nसुबह 5 बजे से शुरू होती है संघर्ष और स्वाभिमान की दिनचर्या\nपतसिया देवी की दिनचर्या हर दिन तड़के 5 बजे ही शुरू हो जाती है। पूर्णिया के पॉलीटेक्निक चौक स्थित पेट्रोल पंप के समीप वे अपनी लिट्टी की दुकान जमा लेती हैं। चेहरे पर साफ दिखती झुर्रियों और कमजोर होते शरीर की परवाह किए बिना वे पूरी निष्ठा से काम में जुट जाती हैं। वे खुद अपने हाथों से स्वादिष्ट और ताजी लिट्टी तैयार करती हैं और राहगीरों तथा नियमित ग्राहकों को परोसती हैं। उनके इस समर्पण को देखकर वहां से गुजरने वाला हर व्यक्ति उनकी इच्छाशक्ति की तारीफ करता है।\n\nपरिवार और संतानों की स्थिति के बावजूद खुद पर भरोसा\nपारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो पतसिया देवी का एक बेटा है जो पेशे से चालक का काम करता है, वहीं उनकी सात बेटियां भी हैं। इस तरह 8 बच्चों की मां होने के बावजूद वे अपनी जिंदगी के इस पड़ाव पर किसी भी संतान के सामने हाथ फैलाने या उन पर निर्भर रहने के सख्त खिलाफ हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि जब तक शरीर में सांस है और हाथ-पैर चल रहे हैं, तब तक अपनी मेहनत से पेट भरना ही सबसे बड़ा स्वाभिमान है। वे अपने परिवार या बच्चों पर किसी भी प्रकार का बोझ नहीं बनना चाहती हैं।\n\nबदलते सामाजिक परिवेश और पारिवारिक मूल्यों पर गहरे सवाल\nपतसिया देवी का यह संघर्ष केवल एक बुजुर्ग महिला की आजीविका की कहानी नहीं है, बल्कि यह वर्तमान दौर में बदलते सामाजिक ताने-बाने और पारिवारिक दायित्वों पर भी एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जिस मां ने अपनी पूरी जिंदगी बच्चों का पालन-पोषण करने और उन्हें सहारा देने में बिता दी, उसे 80 साल की उम्र में सड़क किनारे बैठकर रोजी-रोटी कमाने के लिए पसीना बहाना पड़ रहा है। हालांकि पतसिया देवी के मन में कोई शिकायत नहीं है, वे इसे अपनी स्वाभिमानी जीवनशैली का हिस्सा मानती हैं।\n\nअटूट ममता और कभी न हार मानने वाले जज्बे की मिसाल\nआज के समय में जब लोग छोटी-छोटी परेशानियों से हार मान लेते हैं, पतसिया देवी का जीवन समाज के लिए एक जीवंत सीख प्रस्तुत करता है। उनकी कहानी से यह स्पष्ट होता है कि आत्मसम्मान से जीने के लिए उम्र कभी आड़े नहीं आती। सड़क किनारे लगी उनकी छोटी सी दुकान केवल लिट्टी बेचने का स्थान नहीं है, बल्कि वह उनकी गरिमा, कड़ी मेहनत और जिंदगी के आखिरी पड़ाव तक आत्मनिर्भर बने रहने के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बन चुकी है।\n\nइसका आप पर असर\nबिहार में: यह कहानी समाज में बुजुर्गों की स्थिति और पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम करती है।\n\nसामान्य पाठकों के लिए: यह संघर्ष किसी भी कठिन परिस्थिति में बिना दूसरों पर निर्भर हुए आत्मसम्मान और मेहनत के साथ जीने की प्रेरणा देता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पतसिया देवी की उम्र कितनी है और वे कहां रहती हैं?\nउनकी उम्र 80 वर्ष है और वे बिहार के पूर्णिया जिले की रहने वाली हैं।\n\n2. पतसिया देवी पूर्णिया में किस स्थान पर अपनी दुकान लगाती हैं?\nवे पूर्णिया के पॉलीटेक्निक चौक पर स्थित एक पेट्रोल पंप के पास सड़क किनारे अपनी लिट्टी की दुकान लगाती हैं।\n\n3. उनके परिवार में कौन-कौन सदस्य हैं?\nपतसिया देवी का एक बेटा है जो पेशे से ड्राइवर है, और उनकी सात बेटियां हैं।\n\n4. पतसिया देवी की रोजाना की दिनचर्या क्या है?\nवे हर सुबह 5 बजे ही पॉलीटेक्निक चौक पहुंच जाती हैं और अपने हाथों से लिट्टी तैयार करके ग्राहकों को परोसती हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\n• स्वाभिमान सर्वोपरि: शारीरिक सीमाओं के बावजूद किसी के आगे हाथ फैलाने की जगह खुद मेहनत करना।\n• कड़ी दिनचर्या और अनुशासन: 80 साल की उम्र में भी रोज सुबह 5 बजे काम शुरू करने की अटूट प्रतिबद्धता।\n• आत्मनिर्भरता का संकल्प: जीवन के अंतिम पड़ाव पर भी किसी पर आर्थिक या मानसिक बोझ न बनने की सोच।\n• परिस्थितियों से न हारना: समस्याओं का रोना रोने के बजाए सक्रिय रहकर समाधान निकालना।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-08-14",
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