रायपुर में संगीता गेदाम के स्पेशल चावल वड़ा की धूम, हर दिन 10 हजार रुपये से अधिक का कारोबार छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बूढ़ापारा में संगीता गेदाम द्वारा शुरू किया गया रायपुर चावल वड़ा स्टॉल बेहद लोकप्रिय हो रहा है, जहां रोजाना 250 से ज्यादा प्लेटें बिक रही हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बूढ़ापारा इलाके में इन दिनों एक फूड स्टॉल खानपान के शौकीनों के बीच खासा लोकप्रिय हो रहा है। रायपुर चावल वड़ा नाम से मशहूर इस ठिकाने पर मिलने वाले खास और लजीज चावल वड़े लोगों को खूब भा रहे हैं। इस छोटे से कारोबार की शुरुआत संगीता गेदाम ने लगभग 5 से 6 महीने पहले अपने पति का आर्थिक रूप से साथ देने के लिए की थी। शुरुआत में एक छोटी सी पहल के रूप में स्थापित यह स्टॉल आज हर रोज बेहतरीन कमाई का जरिया बन चुका है और आसपास के इलाकों में अपनी खास पहचान बना चुका है। बाजार की जरूरत समझकर शुरू की नई पहल संगीता गेदाम के अनुसार रायपुर के खानपान बाजार में समोसे, पारंपरिक वड़े, चाट, कचौड़ी, पराठे और चाइनीज व्यंजनों के अनगिनत विकल्प आसानी से उपलब्ध थे। हालांकि, चावल वड़ा बेचने वाले स्टॉल शहर में न के बराबर दिखाई देते थे। इसी कमी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कुछ अलग और अनूठा करने की योजना बनाई। अपने इस विचार को धरातल पर उतारने के लिए उन्होंने अपने पड़ोस में रहने वाले एक ओडिया परिवार से संपर्क किया। पड़ोसियों से चावल वड़ा बनाने की पारंपरिक विधि सीखने के बाद संगीता ने अपने खास स्वाद और अंदाज के साथ इसे ग्राहकों के सामने पेश करना शुरू कर दिया। विशेष तैयारी और मानसून में बढ़ी मांग इस लजीज चावल वड़े को तैयार करने के लिए उसना चावल का उपयोग किया जाता है। चावल को पूरी रात पानी में अच्छी तरह भिगोकर रखा जाता है। अगली सुबह इसे बारीक पीसकर पेस्ट तैयार किया जाता है और इसमें आवश्यक मसाले तथा सामग्री मिलाई जाती है। इसके बाद गरमा-गरम वड़े तैयार किए जाते हैं। बारिश के मौसम में इस खास व्यंजन की मांग में जबरदस्त इजाफा देखा गया है। अलग स्वाद और कुरकुरेपन के कारण लोग इसे चखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। तीन चटनियों और मटर तरी के साथ 40 रुपये में प्लेट स्टॉल पर चावल वड़े को बेहद खास अंदाज में परोसा जाता है। ग्राहकों को एक प्लेट में वड़े के साथ तीन अलग तरह की चटनियां और मटर की तरी दी जाती है। इसमें तीखी लहसुन-लाल मिर्च की चटनी, ताजी धनिया-पुदीना चटनी और स्वादिष्ट दही की चटनी शामिल है। चटपटी मटर तरी और चटनियों का यह संयोजन ग्राहकों को बेहद पसंद आ रहा है। स्टॉल पर एक प्लेट चावल वड़ा की कीमत 40 रुपये तय की गई है। हर दिन यहां 250 से ज्यादा प्लेट वड़ा बिक जाता है, जिससे केवल चावल वड़ा की बिक्री से ही रोजाना 10,000 रुपये से अधिक की कमाई हो जाती है। स्टॉल का समय और अन्य लजीज व्यंजन संगीता का यह फूड स्टॉल सुबह 8 बजे खुलता है और रात 10 बजे तक ग्राहकों की सेवा में लगा रहता है। चावल वड़ा के अलावा यहां मेनू में कई अन्य व्यंजन भी शामिल हैं। लोग यहां मूंग वड़ा, बन-मस्का और गरमा-गरम चाय का स्वाद ले सकते हैं। इसके साथ ही ओडिशा की मशहूर पारंपरिक मिठाई छेना पोड़ा भी यहां आने वाले लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पति का हाथ बटाने के उद्देश्य से शुरू हुआ संगीता का यह प्रयास आज उनकी आत्मनिर्भरता और मजबूत पहचान का प्रतीक बन चुका है। इसका आप पर असर भारत में: यह कहानी दिखाती है कि कैसे पारंपरिक क्षेत्रीय व्यंजनों और कम लागत वाले स्ट्रीट फूड स्टार्टअप के जरिए आत्मनिर्भरता और रोजाना बेहतरीन आय हासिल की जा सकती है। रायपुर में: बूढ़ापारा के आसपास रहने वाले और काम करने वाले लोग अब 40 रुपये की किफायती कीमत पर ओडिया शैली में तैयार लजीज चावल वड़े और पारंपरिक छेना पोड़ा का आनंद ले सकते हैं। सवाल-जवाब 1. रायपुर चावल वड़ा का स्टॉल रायपुर में कहां स्थित है? यह स्टॉल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बूढ़ापारा क्षेत्र में स्थित है। 2. संगीता गेदाम के स्टॉल पर एक प्लेट चावल वड़ा की कीमत कितनी है? एक प्लेट चावल वड़ा की कीमत 40 रुपये है, जिसमें तीन तरह की चटनी और मटर की तरी शामिल है। 3. चावल वड़ा बनाने के लिए किस प्रकार के चावल का उपयोग किया जाता है? चावल वड़ा बनाने के लिए उसना चावल का उपयोग किया जाता है, जिसे रातभर पानी में भिगोकर सुबह पीसा जाता है। 4. स्टॉल के संचालन का समय क्या है? संगीता गेदाम का यह फूड स्टॉल रोजाना सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। 5. चावल वड़ा के अलावा स्टॉल पर और क्या-क्या मिलता है? स्टॉल पर चावल वड़ा के अलावा मूंग वड़ा, बन-मस्का, चाय और ओडिशा की मशहूर मिठाई छेना पोड़ा भी मिलती है। प्रेरणा और सबक संगीता गेदाम के सफल फूड वेंचर से मिलने वाली मुख्य प्रेरणाएं: • बाजार की कमी पहचानना: स्थापित खानपान विकल्पों के बीच नया व्यंजन पेश करके अपनी अलग जगह बनाई। • पड़ोस से हुनर सीखना: बिना किसी औपचारिक ट्रेनिंग के आसपास के लोगों के हुनर को सीखकर व्यवसाय शुरू किया। • पारिवारिक सहयोग की भावना: पति की मदद के इरादे से उठाया गया कदम एक सफल बिजनेस में बदल गया। • गुणवत्ता और विविधता: तीन तरह की चटनी, मटर तरी और अतिरिक्त व्यंजनों के साथ ग्राहकों को बेहतरीन स्वाद दिया। https://trendkia.com/success-stories/raipur-men-sangeeta-gedam-ke-speshala-chavala-vara-ki-dhuma-hara-dina-10000-rupaye-se-adhika-ka-karobara-19241 TrendKia — Har trend, sabse pehle.