# राजस्थान के गांव से निकलकर भारत मंडपम तक, इंजीनियर सक्षम घोसल्या ने प्रधानमंत्री को दिखाया स्वदेशी 5G का दम

> जयपुर ग्रामीण के सुदर्शनपुरा गांव के रहने वाले युवा इंजीनियर सक्षम घोसल्या ने ESTIC 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश में विकसित 5G तकनीक और सैटेलाइट कनेक्टिविटी चिप का प्रदर्शन दिखाया।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-11-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/rajasthan-ke-ganva-se-nikalakara-bharat-mandapam-taka-engineer-saksham-ghoslya-ne-pm-modi-ko-dikhaya-svadeshi-5g-ka-dama-56821 · **Language:** Hindi
**Tags:** सक्षम घोसल्या, स्वदेशी 5G, नरेंद्र मोदी, ESTIC 2026, भारत मंडपम, सुदर्शनपुरा, IIT मंडी, वाईसिग नेटवर्क्स

जयपुर ग्रामीण की जालसू तहसील स्थित सुदर्शनपुरा गांव के युवा इंजीनियर सक्षम घोसल्या ने देश की वैज्ञानिक प्रगति के मंच पर एक विशिष्ट पहचान बनाई है। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC 2026) के दौरान उन्होंने देश में ही तैयार स्वदेशी 5G नेटवर्क तकनीक का सफल प्रदर्शन किया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में सक्षम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भारतीय तकनीकी नवाचार की पूरी कार्यप्रणाली प्रस्तुत की और देश के दूरसंचार क्षेत्र की आधुनिक क्षमताओं की जानकारी दी।

ESTIC 2026 में 27 से 29 अक्टूबर तक 13 मंत्रालयों की सहभागिता रही। सम्मेलन के उद्घाटन के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न वैज्ञानिक स्टॉलों और प्रदर्शनी का अवलोकन कर रहे थे, तब वे हैदराबाद स्थित डीप टेक कंपनी वाईसिग नेटवर्क्स के प्रदर्शनी स्थल पर पहुंचे। वहां कंपनी में प्रिंसिपल इंजीनियर पद पर कार्यरत सक्षम घोसल्या ने उनका स्वागत किया और स्वदेशी स्तर पर तैयार किए गए 5G बेस स्टेशन का लाइव प्रदर्शन किया। सक्षम ने प्रधानमंत्री को देश में निर्मित दूरसंचार उपकरणों के साथ सैटेलाइट से सीधे संपर्क साधने वाली अत्याधुनिक चिप और भविष्य की 6G तकनीक पर जारी अनुसंधान की विस्तृत रूपरेखा समझाई।

## दूरदराज के इलाकों को जोड़ने वाला बेस स्टेशन और कोआला चिप
प्रदर्शनी के दौरान सक्षम घोसल्या ने प्रधानमंत्री को स्पष्ट किया कि भारत में तैयार यह स्वदेशी 5G बेस स्टेशन किस तरह देश के ग्रामीण और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में उच्च गति का इंटरनेट पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। पारंपरिक विदेशी नेटवर्किंग उपकरणों की तुलना में यह समाधान भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल तैयार किया गया है। इसके जरिए उन इलाकों तक भी डिजिटल सेवाएं पहुंचाई जा सकेंगी जहां अब तक बुनियादी ढांचा खड़ा करना बेहद खर्चीला और जटिल माना जाता था।

इसी क्रम में सक्षम ने कंपनी द्वारा विकसित विशेष 'कोआला NB-IoT' चिप की खूबियां भी साझा कीं। यह विशेष चिप उन दुर्गम स्थानों पर भी इंटरनेट और डेटा कनेक्टिविटी बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम है, जहां सामान्य मोबाइल टावर या पारंपरिक नेटवर्क सिग्नल नहीं पहुंच पाते हैं। सैटेलाइट और गैर-पारंपरिक नेटवर्क से सीधे जुड़ने की क्षमता के कारण यह चिप आपातकालीन संचार, ट्रैकिंग और सुदूरवर्ती निगरानी तंत्र के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

## सरकारी स्कूल से IIT मंडी और उच्च शोध तक का सफर
सक्षम घोसल्या की यह उपलब्धि उनके वर्षों के अनुशासन और अकादमिक लगन का परिणाम है। सुदर्शनपुरा निवासी बालकिशन चौधरी और राजू देवी के परिवार में जन्मे सक्षम की शुरुआती पढ़ाई गांव के ही स्थानीय सरकारी स्कूल में पूरी हुई थी। ग्रामीण परिवेश में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की और IIT मंडी में दाखिला लिया। वर्ष 2016 में उन्होंने वहां से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विषय में बीटेक की डिग्री पूरी की। कॉलेज के दिनों में भी वे तकनीकी नवाचारों में सक्रिय रहे और संस्थान के इलेक्ट्रॉनिक्स क्लब के सह-संस्थापक बने।

स्नातक की पढ़ाई समाप्त करने के तुरंत बाद सक्षम रिसर्च असिस्टेंट के तौर पर IIT हैदराबाद से जुड़ गए। वर्ष 2017 में जब संस्थान में डीप टेक स्टार्टअप वाईसिग नेटवर्क्स की नींव रखी गई, तब वे इसके शुरुआती तकनीकी कर्मचारियों में शामिल हुए। शोध और तकनीकी विकास के साथ-साथ उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा जारी रखी और वर्ष 2021 में IIT हैदराबाद से ही कम्युनिकेशन एंड सिग्नल प्रोसेसिंग विषय में एमटेक की डिग्री भी हासिल की।

## राष्ट्रीय और वैश्विक फलक पर तकनीकी नेतृत्व
सक्षम घोसल्या इससे पहले भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई बड़े तकनीकी मंचों पर भारतीय नवाचार की अगुवाई कर चुके हैं। सितंबर 2026 के दौरान नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की विशेष प्रदर्शनी में उन्होंने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को कंपनी के स्वदेशी दूरसंचार उत्पादों की कार्यप्रणाली समझाई थी। इसके अतिरिक्त फ्रांस के नीस शहर में आयोजित 'भारत इनोवेट्स' अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भी उन्होंने भारतीय संचार तकनीकों का प्रतिनिधित्व किया था। देश की राजधानी में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में उनके इस प्रदर्शन के बाद सुदर्शनपुरा सहित पूरे जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।

## इसका आप पर असर
इस स्वदेशी तकनीक के सफल प्रदर्शन से भारत के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार और तकनीकी शिक्षा को नया प्रोत्साहन मिलेगा।

- **भारत में:** देश में तैयार 5G बेस स्टेशन और NB-IoT चिप से विदेशी दूरसंचार उपकरणों पर निर्भरता घटेगी। इससे दूरदराज के सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों तक कम लागत में तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाना संभव हो सकेगा।
- **जयपुर ग्रामीण में:** सुदर्शनपुरा गांव के छात्र की इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय उपलब्धि से स्थानीय युवाओं में इंजीनियरिंग और उच्च तकनीकी अनुसंधान के प्रति प्रेरणा बढ़ेगी। क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का तकनीकी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति विश्वास सुदृढ़ होगा।
- **दूरसंचार उद्योग के लिए:** घरेलू स्तर पर 5G और भविष्य की 6G तकनीक के पेटेंट विकसित होने से भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी। इससे हार्डवेयर डिजाइनिंग और सिग्नल प्रोसेसिंग के क्षेत्र में कुशल इंजीनियरों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
- **उपभोक्ताओं के लिए:** बिना पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क वाले इलाकों में भी कोआला चिप जैसी तकनीकों से आपातकालीन सूचनाएं और डेटा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। इससे आपदा प्रबंधन और रिमोट मॉनिटरिंग के क्षेत्र में नागरिकों को सीधे सुरक्षा और सुविधा मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह तकनीकी प्रस्तुति भारत सरकार के विज्ञान और नवाचार पर केंद्रित राष्ट्रीय सम्मेलन और डीप-टेक स्टार्टअप्स के स्वदेशी प्रयासों के संगम से संभव हुई।

- **सीधा कारण:** नई दिल्ली के भारत मंडपम में 27 से 29 अक्टूबर तक 13 मंत्रालयों के सहयोग से ESTIC 2026 का आयोजन किया गया था। इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशेष रूप से भारतीय तकनीकी स्टार्टअप्स द्वारा तैयार किए गए नवाचारों का निरीक्षण कर रहे थे।
- **कंपनी और शोध की पृष्ठभूमि:** IIT हैदराबाद में 2017 में इनक्यूबेट हुई कंपनी वाईसिग नेटवर्क्स ने स्वदेशी 5G बेस स्टेशन और कोआला चिप का सफल निर्माण किया। कंपनी में प्रिंसिपल इंजीनियर के रूप में कार्यरत सक्षम घोसल्या को इस तकनीक के मुख्य शोधकर्ता होने के नाते लाइव प्रदर्शन का दायित्व सौंपा गया।
- **पूर्व प्रस्तुतियां:** यह दल इससे पूर्व सितंबर 2026 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और फ्रांस के नीस में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के समक्ष भी इन संचार तकनीकों का प्रदर्शन कर चुका था। इन्हीं स्थापित शोध परिणामों के कारण उन्हें भारत मंडपम के राष्ट्रीय मंच पर शीर्ष नेतृत्व के समक्ष प्रदर्शन का अवसर मिला।

## सवाल-जवाब

### 1. सक्षम घोसल्या कौन हैं और वे किस गांव के निवासी हैं?
सक्षम घोसल्या जयपुर ग्रामीण की जालसू तहसील के सुदर्शनपुरा गांव के निवासी हैं और वर्तमान में वाईसिग नेटवर्क्स में प्रिंसिपल इंजीनियर हैं।

### 2. सक्षम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किस तकनीक की जानकारी दी?
उन्होंने भारत मंडपम में आयोजित ESTIC 2026 में स्वदेशी 5G बेस स्टेशन, सीधे सैटेलाइट से जुड़ने वाली कोआला चिप और 6G अनुसंधान का प्रदर्शन किया।

### 3. कोआला NB-IoT चिप की मुख्य विशेषता क्या है?
यह चिप उन दुर्गम और दूरदराज के क्षेत्रों में भी डेटा और इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करने में सक्षम है जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाते।

### 4. सक्षम घोसल्या की शैक्षणिक योग्यता क्या है?
उन्होंने वर्ष 2016 में IIT मंडी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और वर्ष 2021 में IIT हैदराबाद से कम्युनिकेशन एंड सिग्नल प्रोसेसिंग में एमटेक किया है।

### 5. सक्षम किस कंपनी से जुड़े हैं और इसकी शुरुआत कब हुई थी?
वे डीप टेक कंपनी वाईसिग नेटवर्क्स से जुड़े हैं, जो वर्ष 2017 में IIT हैदराबाद में स्थापित हुई थी।

### 6. सक्षम इससे पहले किन बड़े आयोजनों में तकनीक का प्रदर्शन कर चुके हैं?
वे सितंबर 2026 में नई दिल्ली के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और फ्रांस के नीस में 'भारत इनोवेट्स' कार्यक्रम में भाग ले चुके हैं।

## प्रेरणा और सबक
एक सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि और सरकारी स्कूल से निकलकर देश के शीर्ष तकनीकी मंच तक पहुंचने का यह सफर युवाओं को अपनी प्रतिभा पर विश्वास करने की सीख देता है।

- **लगन से संभव है बड़ा मुकाम:** संसाधनों की कमी किसी भी विद्यार्थी की प्रतिभा को सीमित नहीं कर सकती। सरकारी स्कूल से शुरुआत करने के बाद भी कठिन परिश्रम से IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में स्थान बनाया जा सकता है।
- **अनुसंधान और नवाचार को प्राथमिकता:** केवल पारंपरिक नौकरी तलाशने के बजाय गहन तकनीकी शोध और स्टार्टअप्स के निर्माण से जुड़ना देश के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। सक्षम ने बीटेक के बाद शोध और नवाचार का रास्ता चुनकर स्वदेशी तकनीक खड़ी की।
- **ज्ञान का निरंतर विस्तार:** उद्योग में काम करते हुए भी अपनी उच्च शिक्षा और एमटेक की पढ़ाई जारी रखना यह सिखाता है कि तकनीकी क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए लगातार सीखते रहना अनिवार्य है।
- **वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास:** सुदूर गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की वैज्ञानिक क्षमता का प्रतिनिधित्व करना यह साबित करता है कि स्थानीय प्रतिभाएं वैश्विक तकनीकी मंचों का नेतृत्व कर सकती हैं।

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