# राजस्थान की पिस्टल क्वीन लावण्या कंवर ने शूटिंग में रचा इतिहास, देहरादून में 25 मीटर स्पर्धा में जीता स्वर्ण पदक

> 15 वर्षीय निशानेबाज लावण्या कंवर ने देहरादून में आयोजित 45वीं नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप के 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल इवेंट में 284 अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीता।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-09-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/rajasthan-ki-pistala-kvina-lavanya-kanwar-ne-shutinga-men-racha-itihasa-dehradun-men-25-mitara-spardha-men-jita-svarna-padaka-27410 · **Language:** Hindi
**Tags:** लावण्या कंवर, राजस्थान शूटिंग, पिस्टल क्वीन, नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप, योगेश शेखावत, शूटिंग स्पोर्ट्स

राजस्थान की 15 वर्षीय युवा निशानेबाज लावण्या कंवर ने एक बार फिर अपनी अद्भुत निशानेबाजी का प्रदर्शन करते हुए खेल जगत में अपना दबदबा साबित किया है। उत्तराखंड की राजधानी में आयोजित 45वीं नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप-2026 के दौरान लावण्या ने 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल इवेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। प्रतियोगिता में 300 अंकों में से 284 अंक प्राप्त कर उन्होंने अपनी श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया और शीर्ष भारतीय निशानेबाजों की कतार में अपनी जगह और मजबूत कर ली।

## उत्कृष्ट प्रदर्शन और पिछली उपलब्धियां
25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल जैसी प्रतिस्पर्धी स्पर्धा में लावण्या का यह प्रदर्शन उनकी उच्च स्तरीय तैयारी को दर्शाता है। इससे पहले उन्होंने राजस्थान के सीकर शहर में आयोजित CBSE जोनल स्कूल टूर्नामेंट में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। वहां 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भाग लेते हुए उन्होंने 400 में से 386 अंक हासिल कर गोल्ड मेडल जीता था। लगातार मिल रही इन शानदार सफलताओं ने लावण्या को राज्य की सबसे प्रतिभाशाली और उदीयमान पिस्टल निशानेबाजों में शामिल कर दिया है।

## राष्ट्रीय मंच पर 8 से अधिक पदक और कड़ा अभ्यास
मात्र 15 वर्ष की आयु में लावण्या कंवर राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए अब तक 8 से भी अधिक पदक जीत चुकी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस निरंतर सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और दैनिक अनुशासन का बड़ा योगदान है। लावण्या रोजाना 6 से 8 घंटे शूटिंग रेंज में अभ्यास करती हैं। उनके परिवार के सदस्यों के अनुसार, लावण्या का ध्यान पढ़ाई से अधिक शूटिंग के अभ्यास पर ही केंद्रित रहता है और वह घर पर बिताए जाने वाले समय में भी अपनी ट्रेनिंग और तकनीक सुधारने पर ही ध्यान देती हैं।

## मानसिक संतुलन और तकनीक का सही संयोजन
निशानेबाजी में केवल लक्ष्य पर निशाना लगाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि अत्यधिक मानसिक दबाव के बीच खुद को शांत रखना बेहद जरूरी होता है। लावण्या के अनुसार, शूटिंग खेल में सटीक निशाने के साथ-साथ खिलाड़ी का धैर्य, उच्च स्तर की एकाग्रता और दबाव झेलने की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लावण्या इस समय अपने कोच योगेश शेखावत के कुशल मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। कोच योगेश शेखावत का मानना है कि किसी भी निशानेबाज के लिए तकनीकी कमियों को दूर करने के साथ-साथ उसकी मानसिक मजबूती को बेहतर बनाना सबसे अहम पहलू होता है। लावण्या की हालिया सफलताओं को देखते हुए उनके कोच अब उन्हें विशेष एडवांस ट्रेनिंग भी दे रहे हैं।

## 'पिस्टल क्वीन' और ओलिंपिक में पदक का सपना
कम उम्र में लगातार राष्ट्रीय और जोनल प्रतियोगिताओं में झंडे गाड़ने के कारण लावण्या कंवर को अब खेल प्रेमियों के बीच 'राजस्थान की पिस्टल क्वीन' के रूप में पहचान मिलने लगी है। लावण्या का मुख्य लक्ष्य भविष्य में ओलिंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करना और देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस युवा खिलाड़ी को लगातार उच्च स्तरीय कोचिंग और आवश्यक सुविधाएं मिलती रहीं, तो वह आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करेंगी। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न केवल राजस्थान के युवा एथलीट प्रेरित हो रहे हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी प्रशंसक उनकी इस सफलता की जमकर सराहना कर रहे हैं।

## इसका आप पर असर
यह उपलब्धि राजस्थान में जमीनी स्तर के खेल ढांचे और युवा निशानेबाजों के प्रोत्साहन में नए अवसर पैदा करती है।

- **भारत में प्रभाव:** राष्ट्रीय स्तर पर युवा एथलीटों के लिए अधिक छात्रवृत्ति और प्रशिक्षण संसाधन आवंटित किए जाने की संभावना है। इससे देश भर की बेटियों को पेशेवर निशानेबाजी अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
- **राजस्थान में प्रभाव:** राज्य सरकार और खेल अकादमियां निशानेबाजी सुविधाओं के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करेंगी। इससे स्थानीय खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय उपकरण और कोचिंग मिल सकेगी।
- **युवा एथलीटों के लिए:** कम उम्र में अनुशासित दिनचर्या और मानसिक संतुलन के महत्व का एक व्यावहारिक उदाहरण सामने आया है। युवा खिलाड़ी इस मॉडल को अपनाकर क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्पर्धाओं की तैयारी कर सकते हैं।
- **कोचिंग अकादमियों के लिए:** जमीनी स्तर पर मानसिक मजबूती और तकनीकी सुधार के एकीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रमों की मांग बढ़ेगी। अकादमियां अब युवा प्रतिभाओं की तलाश और तराशने पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगी।

## सवाल-जवाब

### 1. लावण्या कंवर ने 45वीं नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप में कौन सा पदक जीता?
लावण्या कंवर ने देहरादून में आयोजित 45वीं नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप-2026 की 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता।

### 2. 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में लावण्या ने कितना स्कोर किया?
लावण्या ने 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में 300 अंकों में से 284 अंक हासिल किए।

### 3. लावण्या कंवर के कोच कौन हैं?
लावण्या कंवर शूटिंग कोच योगेश शेखावत के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

### 4. लावण्या कंवर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अब तक कितने पदक जीत चुकी हैं?
लावण्या कंवर नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में राजस्थान के लिए अब तक 8 से अधिक मेडल जीत चुकी हैं।

### 5. लावण्या कंवर रोजाना कितने घंटे अभ्यास करती हैं?
लावण्या रोजाना 6 से 8 घंटे शूटिंग रेंज में अभ्यास करती हैं।

### 6. लावण्या का मुख्य खेल लक्ष्य क्या है?
लावण्या कंवर का मुख्य लक्ष्य भविष्य में ओलिंपिक खेलों में भारत के लिए पदक जीतना है।

## प्रेरणा और सबक
लावण्या कंवर का सफर यह साबित करता है कि कम उम्र में भी सही दिशा और अटूट लगन से राष्ट्रीय स्तर पर सफलता पाई जा सकती है।

- **अनुशासन और निरंतरता:** प्रतिदिन 6 से 8 घंटे का अभ्यास यह दिखाता है कि महारत हासिल करने के लिए समय और प्रयास देना जरूरी है।
- **दबाव में धैर्य बनाए रखना:** किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए केवल कौशल ही नहीं, बल्कि दबाव के क्षणों में मानसिक संतुलन और एकाग्रता भी अनिवार्य है।
- **मार्गदर्शन की महत्ता:** अपनी कमियों को स्वीकार कर कोच के मार्गदर्शन में उन पर लगातार काम करना प्रगति का सबसे बड़ा जरिया है।
- **लक्ष्य पर स्पष्ट ध्यान:** ओलिंपिक पदक जीतने के स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ काम करने से हर छोटे मील के पत्थर को हासिल करने की प्रेरणा मिलती है।

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