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  "title": "राजस्थान से अकेली महिला, 3 प्रयासों के बाद SAI नेशनल कुश्ती कोच बनीं भारती बिजारणियां",
  "summary": "सीकर के मालाकाली गांव की पहलवान भारती बिजारणियां ने तीसरे प्रयास में SAI नेशनल कुश्ती कोच चयन परीक्षा पास की। वह पूरे राजस्थान से चुनी गई एकमात्र महिला खिलाड़ी हैं।",
  "content": "स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने नेशनल कुश्ती कोच पद के लिए अंतिम चयन सूची जारी कर दी है, जिसमें राजस्थान के सीकर जिले की पहलवान भारती बिजारणियां ने ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। सीकर क्षेत्र के रींगस अंतर्गत मालाकाली गांव की रहने वाली भारती पूरे राजस्थान राज्य से चुनी जाने वाली एकमात्र महिला खिलाड़ी बनी हैं। कई वर्षों के कठिन अभ्यास और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने के बाद अब वह देश की भावी महिला पहलवानों को तराशने की जिम्मेदारी संभालेंगी।\n\nतीन बार दी परीक्षा, असफलता के बाद भी नहीं छोड़ा सपना\nभारती बिजारणियां के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कोच पद तक पहुंचने की राह आसान नहीं थी। उन्होंने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की नेशनल कोच चयन परीक्षा में कुल तीन बार हिस्सा लिया। शुरुआती दो प्रयासों में उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा था, परंतु उन्होंने अपनी कमियों को दूर करते हुए नियमित अभ्यास जारी रखा। तीसरे प्रयास में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सफलता हासिल की। भारती का मानना है कि असफलता से निराश होने के बजाय निरंतर प्रयास और अटूट आत्मविश्वास बनाए रखना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।\n\n10 महीने का कड़ा प्रशिक्षण और लखनऊ में स्थायी नियुक्ति\nराष्ट्रीय कुश्ती कोच बनने की प्रक्रिया के तहत भारती को अब एशिया के सबसे बड़े खेल प्रशिक्षण केंद्र में 10 महीने की विस्तृत ट्रेनिंग दी जाएगी। इस कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरा करने के पश्चात उनकी स्थायी तैनाती उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित राष्ट्रीय अकादमी में की जाएगी। लखनऊ की इस अकादमी में देश भर से आने वाली प्रतिभाशाली महिला पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, ओलंपिक और एशियाई खेलों के लिए तैयार करने की कमान भारती के हाथों में होगी।\n\nजिस अखाड़े में बहाया था पसीना, वहीं संभालेंगी कोचिंग की कमान\nभारती की इस सफलता का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि वह उसी प्रशिक्षण केंद्र में मुख्य कोच के रूप में वापसी कर रही हैं, जहां उन्होंने कभी स्वयं एक एथलीट के रूप में घंटों पसीना बहाया था। सीकर के रींगस स्थित एक कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने अंतर-कॉलेज और राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया था। इसी दौर में उनके करियर को एक नया मोड़ मिला, जिसमें उनके परिवार ने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन और समर्थन किया।\n\nगांव की पगडंडियों से राष्ट्रीय मंच तक का सफर\nमालाकाली गांव से आने वाली भारती बचपन से ही अच्छी शारीरिक बनावट और खेल के प्रति रुझान रखती थीं। स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों की सलाह पर उन्होंने कुश्ती के मैट पर कदम रखा था। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भारत के लिए कई पदक जीतने वाली भारती अब सीकर जिले की पहली महिला पहलवान बन गई हैं जिन्हें नेशनल कुश्ती कोच के पद पर नियुक्त किया गया है। उनकी यह उपलब्धि ग्रामीण भारत की अन्य बेटियों के लिए भी खेलों में आगे बढ़ने की नई राह प्रशस्त करेगी।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर महिला कुश्ती कोचों की नियुक्ति से देश भर की युवा महिला पहलवानों को बेहतर मार्गदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग मिलेगी।\n• राजस्थान और सीकर में: ग्रामीण क्षेत्र मालाकाली से निकली भारती की यह उपलब्धि सीकर और पूरे राजस्थान की बेटियों को पारंपरिक बंधनों से बाहर निकलकर खेलों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारती बिजारणियां किस पद पर चुनी गई हैं?\nभारती बिजारणियां का चयन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) द्वारा नेशनल कुश्ती कोच के पद पर हुआ है।\n\n2. भारती बिजारणियां राजस्थान के किस जिले से संबंध रखती हैं?\nभारती राजस्थान के सीकर जिले में स्थित रींगस क्षेत्र के मालाकाली गांव की रहने वाली हैं।\n\n3. उन्हें चयन परीक्षा में कितनी बार प्रयास करना पड़ा?\nउन्होंने नेशनल कोच चयन परीक्षा में तीन बार प्रयास किया, जिसमें शुरुआती दो असफलताओं के बाद तीसरे प्रयास में सफलता मिली।\n\n4. कोच बनने के बाद उनकी पहली नियुक्ति कहां होगी?\n10 महीने की राष्ट्रीय ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित स्थायी अकादमी में पदस्थ किया जाएगा।\n\nप्रेरणा और सबक\n• असफलता से न हारें: दो बार असफलता मिलने के बाद भी निराश होने के बजाय तीसरे प्रयास में सफलता हासिल करना यह सिखाता है कि लक्ष्य पर टिके रहना जरूरी है।\n• आत्मविश्वास और निरंतरता: कठिन परिस्थितियों में भी खुद पर भरोसा रखना और रोज अभ्यास करना ही बड़ी मंजिलों तक पहुंचाता है।\n• पारिवारिक समर्थन की अहमियत: कॉलेज के दिनों से ही परिवार के साथ और मार्गदर्शन ने भारती के करियर में बड़ा मोड़ लाया।\n• अपनी जड़ों को न भूलें: जिस जगह खुद पसीना बहाया, वहीं लौटकर नई पीढ़ी को तैयार करना सच्चे खिलाड़ी की पहचान है।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-07-31",
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    "महिला पहलवान"
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  "site": "TrendKia"
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