# रामगढ़ में साड़ी पहनकर 1600 मीटर दौड़ीं ग्रामीण महिलाएं, होमगार्ड भर्ती ट्रायल में तय समय से पहले पूरी की रेस

> झारखंड के रामगढ़ में ट्रैकसूट के अभाव में ग्रामीण महिलाओं ने साड़ी पहनकर 1600 मीटर की दौड़ 7 मिनट में पूरी कर होमगार्ड बहाली का ट्रायल पास करने का जज्बा दिखाया।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-10-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/ramgarh-men-sari-pahanakara-1600-mitara-daurin-gramina-mahilaen-home-guard-bharti-trayala-men-taya-samaya-se-pahale-puri-ki-resa-44796 · **Language:** Hindi
**Tags:** रामगढ़, होमगार्ड भर्ती, सुनीता देवी, जागेश्वरी कुमारी, झारखंड भर्ती, सिद्धू कान्हू मैदान

झारखंड के रामगढ़ जिले में सरकारी नौकरी पाने के मजबूत इरादे की एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। रामगढ़ प्रखंड के दूरदराज स्थित बूढ़ा खुखरा गांव की ग्रामीण महिलाएं ट्रैकसूट जैसे बुनियादी खेल पोशाक के अभाव के बावजूद पारंपरिक साड़ी पहनकर ही होमगार्ड भर्ती के फिजिकल ट्रायल में दौड़ने मैदान में उतरीं। सीमित आर्थिक संसाधनों और अभावों के बीच इन महिलाओं ने मैदान पर न केवल अपना दम दिखाया, बल्कि तय सीमा से पहले दौड़ पूरी करके सबको चौंका दिया।

## सिद्धू-कान्हू मैदान में साड़ी पहनकर तय समय से पहले पूरी की दौड़
रामगढ़ स्थित सिद्धू-कान्हू जिला मैदान में होमगार्ड भर्ती के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी ट्रायल आयोजित किया जा रहा था। इसी भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने के लिए बूढ़ा खुखरा गांव की महिलाएं भी मैदान पहुंची थीं। इनमें 36 वर्षीय सुनीता देवी और 28 वर्षीय जागेश्वरी कुमारी शामिल थीं। दौड़ के लिए जरूरी ट्रैकसूट खरीदने की आर्थिक क्षमता न होने के कारण इन दोनों महिलाओं ने साड़ी पहनकर ही 1600 मीटर की रेस में उतरने का फैसला किया।

होमगार्ड बहाली के निर्धारित नियमों के तहत अभ्यर्थियों को 1600 मीटर की यह दौड़ अधिकतम 8 मिनट में पूरी करनी होती है। सुनीता देवी और जागेश्वरी कुमारी ने साड़ी पहने होने के बावजूद यह फासला करीब 7 मिनट में ही तय कर लिया। निर्धारित समय से लगभग एक मिनट पहले दौड़ पूरी करने का उनका यह प्रदर्शन और वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

## सुबह 4 बजे से अभ्यास और आर्थिक तंगी की चुनौतियां
अपनी इस तैयारी के बारे में जानकारी देते हुए सुनीता देवी और जागेश्वरी कुमारी ने बताया कि वे बेहद सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखती हैं और खेती-किसानी के जरिए अपने परिवार का जीवनयापन करती हैं। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से वे स्पोर्ट्स शूज, ट्रैकसूट या अन्य जरूरी खेल उपकरण खरीदने में असमर्थ हैं।

संसाधनों की इस भारी कमी के बावजूद उनके हौसले में कोई कमी नहीं आई। वे रोजाना तड़के 4 बजे उठकर गांव की सड़कों और रास्तों पर दौड़ने का नियमित अभ्यास करती हैं। उनके साथ गांव की कई अन्य युवतियां और महिलाएं भी इसी तरह होमगार्ड भर्ती परीक्षा की तैयारी में जुटी हैं। संसाधनों की अनुपलब्धता के कारण वे सभी रोजाना साड़ियों में ही दौड़ने का कड़ा अभ्यास करती हैं।

## रामगढ़ में 284 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया जारी
रामगढ़ जिले में होमगार्ड के कुल 284 रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया संचालित की जा रही है, जिसकी शुरुआत 24 अक्टूबर से होने की जानकारी दी गई है। कठिन पारिवारिक परिस्थितियों और आर्थिक तंगी से जूझते हुए गांव की ये महिलाएं सरकारी सेवा में चयनित होकर आत्मनिर्भर बनने के लिए लगातार पसीना बहा रही हैं।

## इसका आप पर असर
यह घटना साबित करती है कि इच्छाशक्ति और निरंतर अभ्यास से संसाधनों के अभाव के बावजूद सरकारी भर्ती की शारीरिक परीक्षा पास की जा सकती है।

- **भारत में:** यह घटना देश भर के ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को यह सीख देती है कि महंगे स्पोर्ट्स गियर के बिना भी फिटनेस हासिल की जा सकती है। इससे बुनियादी खेल सुविधाओं और सरकारी भर्तियों की जमीनी हकीकत पर भी विमर्श बढ़ता है।
- **रामगढ़ में:** रामगढ़ जिले के ग्रामीण इलाकों की अन्य महिलाओं को सरकारी नौकरी के लिए आगे आने और 284 पदों की बहाली में हिस्सा लेने की प्रेरणा मिलेगी। स्थानीय स्तर पर 24 अक्टूबर से शुरू प्रक्रिया में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए शारीरिक मानक स्पष्ट होते हैं।
- **शारीरिक तैयारी पर:** भर्ती के लिए 1600 मीटर की दौड़ 8 मिनट में पूरी करने का मानक है, जिसके लिए रोजाना सुबह अभ्यास जरूरी है। नियमित दौड़ की आदत बनाकर उम्मीदवार बिना किसी महंगे उपकरण के भी तय समय सीमा हासिल कर सकते हैं।
- **रोजगार के अवसर:** जिले में 284 होमगार्ड पदों पर चयन ग्रामीण परिवारों को नियमित आजीविका और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगा। इच्छुक उम्मीदवारों को समय पर मैदान पहुंचकर अपने सभी आवश्यक दस्तावेज और ट्रायल की तैयारी पूरी रखनी चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
रामगढ़ की इन ग्रामीण महिलाओं का साड़ी पहनकर दौड़ना आर्थिक मजबूरी और सरकारी नौकरी पाने के कड़े संकल्प का सीधा परिणाम था।

- **सीमित आर्थिक संसाधन:** अभ्यर्थियों के परिवार खेती-किसानी पर निर्भर हैं और उनकी आमदनी इतनी नहीं है कि वे ट्रैकसूट या रनिंग किट खरीद सकें। पैसों की इसी तंगी के चलते उन्होंने अपनी सामान्य पोशाक साड़ी में ही दौड़ने का फैसला किया।
- **सरकारी नौकरी की लालसा:** ग्रामीण क्षेत्रों में स्थाई रोजगार और आजीविका के अवसर सीमित हैं, जिससे होमगार्ड के 284 पदों की बहाली उनके लिए आत्मनिर्भरता का बड़ा मौका बनी। इसी वजह से महिलाओं ने किसी भी बाधा की परवाह किए बिना मैदान में उतरना जरूरी समझा।
- **लगातार सुबह की तैयारी:** महिलाओं ने बिना संसाधनों के बहाने बनाने के बजाय रोजाना सुबह 4 बजे उठकर दौड़ने का कड़ा अभ्यास किया। इसी निरंतर अभ्यास की बदौलत वे 8 मिनट की दौड़ 7 मिनट में पूरी करने में सफल रहीं।

## सवाल-जवाब

### 1. यह घटना किस जिले और किस मैदान में हुई?
यह घटना झारखंड के रामगढ़ जिले स्थित सिद्धू-कान्हू जिला मैदान में होमगार्ड भर्ती ट्रायल के दौरान हुई।

### 2. साड़ी में दौड़ने वाली महिलाओं के नाम और उम्र क्या है?
इनमें 36 वर्षीय सुनीता देवी और 28 वर्षीय जागेश्वरी कुमारी शामिल हैं, जो बूढ़ा खुखरा गांव की निवासी हैं।

### 3. होमगार्ड बहाली में 1600 मीटर दौड़ने के लिए कितना समय निर्धारित है?
भर्ती नियमों के अनुसार 1600 मीटर की दौड़ 8 मिनट में पूरी करनी होती है।

### 4. महिलाओं ने यह 1600 मीटर की दौड़ कितने समय में पूरी की?
उन्होंने साड़ी पहनकर ही यह दौड़ करीब 7 मिनट में पूरी कर ली।

### 5. महिलाओं ने ट्रैकसूट क्यों नहीं पहना था?
कमजोर आर्थिक स्थिति और खेती पर निर्भर होने के कारण उनके पास ट्रैकसूट खरीदने के पैसे नहीं थे।

### 6. वे दौड़ने की तैयारी किस समय करती हैं?
वे और गांव की अन्य महिलाएं रोजाना सुबह करीब 4 बजे उठकर दौड़ने का अभ्यास करती हैं।

### 7. रामगढ़ जिले में होमगार्ड के कुल कितने पदों पर भर्ती हो रही है?
रामगढ़ जिले में होमगार्ड के 284 पदों पर भर्ती प्रक्रिया 24 अक्टूबर से शुरू होने की जानकारी दी गई है।

## प्रेरणा और सबक
सीमित संसाधनों और सामाजिक बंधनों के बावजूद इन महिलाओं ने यह साबित किया कि समर्पण किसी भी आधुनिक सुविधा से बड़ा होता है।

- **संसाधनों की कमी को बहाना न बनाएं:** ट्रैकसूट न होने पर रुकने के बजाय महिलाओं ने साड़ी में ही लक्ष्य हासिल किया, जिससे सीख मिलती है कि शुरुआत उपलब्ध साधनों से ही करनी चाहिए।
- **कड़ी मेहनत और अनुशासन:** रोजाना सुबह 4 बजे उठकर नियमित अभ्यास करना यह सिखाता है कि सफलता के लिए निरंतरता सबसे जरूरी शर्त है।
- **रूढ़िवादिता और झिझक से मुक्ति:** पारंपरिक परिधान में सरकारी मैदान पर दौड़कर इन महिलाओं ने साबित किया कि संकोच छोड़कर आगे बढ़ना ही प्रगति का रास्ता है।

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