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  "type": "article",
  "title": "रांची के रोशन शाही ने इंडोनेशिया में रचा इतिहास, 100 देशों के 1500 डांसरों को पछाड़कर बने वर्ल्ड ऑफ डांस के रनर अप",
  "summary": "झारखंड के रांची निवासी डांसर रोशन शाही ने इंडोनेशिया में हुए वर्ल्ड ऑफ डांस मुकाबले में करीब 100 देशों के 1500 डांसरों को पछाड़कर पहला रनर अप खिताब जीता, यह उपलब्धि हासिल करने वाले वे झारखंड के इकलौते डांसर हैं।",
  "content": "झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले डांसर रोशन शाही ने इंडोनेशिया में हुए वर्ल्ड ऑफ डांस मुकाबले में पहला रनर अप खिताब अपने नाम कर लिया है। इस मुकाबले में करीब 100 देशों के लगभग 1500 डांसरों ने हिस्सा लिया था, और इन सबको पीछे छोड़ते हुए रोशन ने यह मुकाम हासिल किया। इससे पहले वे जापान, वियतनाम समेत कई देशों में अपने डांस का हुनर दिखा चुके हैं।\n\nसंघर्ष से भरा बचपन\nरोशन का बचपन आसान नहीं रहा। पिता का साया उनके सिर से जल्दी उठ गया था, जिसके बाद घर चलाने की पूरी जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। मां ने परिवार पालने के लिए सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी तक की। कई बार तो हालात इतने खराब हुए कि घर में एक वक्त की रोटी तक नहीं होती थी। रोशन खुद बताते हैं कि इस मुकाम तक पहुंचने का सबसे बड़ा श्रेय उनकी मां को ही जाता है, जिन्होंने खुद अभावों में जीकर भी बच्चों को कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी।\n\nजापान से बॉलीवुड तक का सफर\nरोशन ने जापान में मशहूर कोरियोग्राफर सीन लीव का कड़ा ऑडिशन पास करके एक शॉर्ट डांस फिल्म में जगह बनाई थी। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड में बैकस्टेज डांसर के तौर पर भी काम किया। अब इंडोनेशिया में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वर्ल्ड ऑफ डांस में अपनी अलग पहचान बनाने वाले रोशन झारखंड के इकलौते डांसर हैं जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। रोशन कहते हैं कि वे हमेशा बैकस्टेज में सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि अपनी खुद की एक अलग पहचान बनाना चाहते हैं। सोशल मीडिया पर भी वे काफी सक्रिय हैं, इंस्टाग्राम पर उनके लाखों फॉलोअर हैं जहां वे अपने डांस के वीडियो शेयर करते रहते हैं।\n\nगुरु और मां के सहारे मिली उड़ान\nरोशन ने सिर्फ 7 साल की उम्र से डांस सीखना शुरू कर दिया था। बचपन से ही उन्हें डांस का जुनून था, और मां ने भी उनके इस जुनून को पूरा सहयोग दिया। उनके डांस गुरु ने ही उन्हें शुरुआत में डांस सिखाया। हालांकि जब वर्ल्ड ऑफ डांस जैसी बड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की बारी आई, तब उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वे मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों तक जा सकें, और वे किसी से पैसे मांगने की स्थिति में भी नहीं थे। ऐसे में उनके डांस गुरु ही आगे आए, उन्होंने पैसों का इंतजाम किया और रोशन को मुंबई व दिल्ली भेजा। रोशन खुद मानते हैं कि उनकी इस सफलता में मां के साथ साथ उनके डांस गुरु का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है।\n\nयुवाओं के लिए रोशन का संदेश\nअपनी इस उपलब्धि के बाद रोशन युवाओं को एक खास संदेश देते हैं। उनका कहना है कि इंसान को बहाने बनाने की बजाय मेहनत करनी चाहिए। जो भी संसाधन आपके पास मौजूद हैं, उसी में अपना सबसे बेहतरीन देना चाहिए, आराम करने की गुंजाइश नहीं छोड़नी चाहिए। रोशन के मुताबिक, यह जिंदगी आराम करने के लिए नहीं बल्कि मेहनत करने और कुछ कर दिखाने के लिए मिली है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रोशन शाही कौन हैं?\nरोशन शाही झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले डांसर हैं जिन्होंने इंडोनेशिया में हुए वर्ल्ड ऑफ डांस मुकाबले में पहला रनर अप खिताब जीता है।\n\n2. रोशन ने वर्ल्ड ऑफ डांस में क्या हासिल किया?\nउन्होंने करीब 100 देशों के 1500 डांसरों को पीछे छोड़ते हुए पहला रनर अप खिताब अपने नाम किया।\n\n3. यह प्रतियोगिता कहां आयोजित हुई थी?\nयह वर्ल्ड ऑफ डांस प्रतियोगिता इंडोनेशिया में आयोजित हुई थी।\n\n4. रोशन के करियर की शुरुआत कैसे हुई?\nरोशन ने महज 7 साल की उम्र से डांस सीखना शुरू कर दिया था और उनके डांस गुरु ने उन्हें पहले डांस सिखाया।\n\n5. प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए पैसों की समस्या कैसे हल हुई?\nउनके पास पैसे नहीं थे, तब उनके डांस गुरु ने पैसों का इंतजाम कर उन्हें मुंबई और दिल्ली भेजा।\n\n6. रोशन की सफलता में किसका सबसे बड़ा योगदान रहा?\nरोशन के मुताबिक उनकी मां और उनके डांस गुरु का इस सफलता में सबसे बड़ा योगदान रहा है।\n\n7. रोशन ने जापान में क्या हासिल किया था?\nउन्होंने जापान में मशहूर कोरियोग्राफर सीन लीव का कड़ा ऑडिशन पास करके एक शॉर्ट डांस फिल्म में जगह बनाई थी।\n\n8. रोशन का यह खिताब झारखंड के लिए क्यों खास है?\nयह उपलब्धि हासिल करने वाले रोशन झारखंड के इकलौते डांसर हैं।\n\n9. रोशन युवाओं को क्या संदेश देते हैं?\nवे कहते हैं कि इंसान को बहाने बनाने की बजाय मेहनत करनी चाहिए और जो संसाधन उपलब्ध हैं उसी में अपना बेस्ट देना चाहिए।\n\nप्रेरणा और सबक\nरोशन शाही की कहानी उन युवाओं के लिए एक सीख है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।\n\n• परिवार का साथ ही असली ताकत है: पिता के न होने के बावजूद मां ने सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करके परिवार संभाला, यही संघर्ष रोशन की सबसे बड़ी प्रेरणा बना।\n• छोटी उम्र से शुरुआत करें: रोशन ने महज 7 साल की उम्र से डांस सीखना शुरू कर दिया था, जिससे उन्हें लंबे समय तक अभ्यास और सुधार का मौका मिला।\n• सही गुरु का साथ मायने रखता है: जब पैसों की कमी आड़े आई, तब उनके डांस गुरु ने खुद इंतजाम कर उन्हें मुंबई और दिल्ली भेजा, जिससे पता चलता है कि एक भरोसेमंद मेंटॉर कितना फर्क डाल सकता है।\n• बड़ी चुनौतियों से पीछे न हटें: जापान में मशहूर कोरियोग्राफर सीन लीव का कड़ा ऑडिशन देकर रोशन ने साबित किया कि मुश्किल मौकों से घबराने के बजाय उन्हें आजमाना चाहिए।\n• उपलब्ध संसाधनों में ही बेस्ट दें: रोशन का मानना है कि बहाने बनाने की बजाय जो कुछ भी पास में है, उसी में पूरी मेहनत झोंक देनी चाहिए।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-07-15",
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