# रांची की कालिंदी ने पांच हजार रुपये से शुरू किया था कारोबार, आज देश के कोने-कोने तक पहुंच रहे हैं हैंडमेड आभूषण

> झारखंड के रांची की रहने वाली कालिंदी ने महज पांच हजार रुपये की मामूली पूंजी से हैंडमेड ज्वेलरी का काम शुरू किया था। आज उनके बनाए आभूषणों की मांग कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक है और वह अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण दे रही हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-11-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/ranchi-ki-kalindi-ne-paanch-hazaar-rupaye-se-shuru-kiya-tha-karobaar-57253 · **Language:** Hindi
**Tags:** हैंडमेड ज्वेलरी, रांची समाचार, सफलता की कहानी, महिला उद्यमी, फैब्रिक ज्वेलरी, झारखंड स्टार्टअप

झारखंड की राजधानी रांची की निवासी कालिंदी हैंडमेड ज्वेलरी तैयार करने का काम करती हैं। वह कार्डबोर्ड से लेकर मिट्टी तक विभिन्न सामग्रियों को अपनी कला के माध्यम से आकर्षक कलाकृतियों में ढाल देती हैं। उनके आभूषणों की अनूठी शैली के कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर उनके हजारों की संख्या में फॉलोअर्स मौजूद हैं। इसके अलावा उनके उत्पादों के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से ऑर्डर प्राप्त होते हैं। वर्तमान समय में वह एक सौ महिलाओं को इसका प्रशिक्षण भी दे चुकी हैं।

## शुरुआत और प्रेरणा
अपने अनुभव साझा करते हुए कालिंदी बताती हैं कि उनकी आमदनी बहुत अच्छी हो रही है और इसके साथ ही वह अन्य महिलाओं को भी स्वावलंबी बना रही हैं, जिससे उन्हें बेहद संतोष मिलता है। उन्हें बचपन से ही रचनात्मकता का शौक था। शुरुआती दिनों में वह भगवान के वस्त्र और आभूषण तैयार करती थीं, लेकिन एक बार उन्होंने यूं ही फैब्रिक ज्वेलरी का प्रयोग किया। वह डिज़ाइन इतना बेहतरीन बना कि तुरंत ऑर्डर मिलने लगे और फिर इस सफर की शुरुआत हो गई।

## फैब्रिक ज्वेलरी की विशेषता
कालिंदी मुख्य तौर पर फैब्रिक ज्वेलरी बनाने के लिए जानी जाती हैं। इसके अलावा वह कपड़े, जूट और कार्डबोर्ड का इस्तेमाल करती हैं जो पूरी तरह से सौ प्रतिशत ऑर्गेनिक होते हैं, और इनमें से कुछ सामग्रियां मिट्टी की भी बनी होती हैं। इन पर सुंदर पेंटिंग की जाती है और मेटल के झुमके लगाए जाते हैं। वह कुंदन और बीड्स से जुड़े आभूषण भी तैयार करती हैं, हालांकि कपड़े से बने आभूषण ही उनका मुख्य कार्यक्षेत्र है। उन्होंने खुद भी इसकी ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त की थी।

## व्यवसाय का विस्तार और ब्रांड
उन्होंने इस व्यवसाय की शुरुआत केवल पांच हजार रुपये की छोटी राशि से की थी। उन्होंने बस यह देखने के लिए काम शुरू किया था कि लोगों की कैसी प्रतिक्रिया मिलती है। आज उनका यह कारोबार बढ़कर लाखों रुपये तक पहुंच चुका है। राजस्थान के कोटा से लेकर दिल्ली, कोलकाता, कन्याकुमारी और कश्मीर तक हर जगह से ग्राहक आर्डर देते हैं। उनके ब्रांड का आधिकारिक नाम फुलेरा है और उनका ऑनलाइन पोर्टल फुलेरा डॉट इन है।

## फैब्रिक आभूषणों की लोकप्रियता की वजह
फैब्रिक ज्वेलरी चुनने के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कालिंदी बताती हैं कि उनके ब्रांड का नाम फुलेरा है। उनके मन में कपड़े के आभूषण बनाने का विचार इसलिए आया क्योंकि कई लोगों को मेटल से एलर्जी की समस्या होती है या उन्हें भारी आभूषण पहनने में असहजता महसूस होती है। इसके विपरीत उनके द्वारा बनाए गए आभूषण पहनने में बेहद हल्के होते हैं। इनसे किसी भी प्रकार की एलर्जी का जोखिम नहीं रहता और न ही ये भारी महसूस होते हैं, जिससे इन्हें कितना भी लंबा या बड़ा पहनने पर भी पूर्ण आराम मिलता है। यही वजह है कि उन्होंने फैब्रिक ज्वेलरी को अपने मुख्य व्यवसाय के रूप में चुना।

## सवाल-जवाब

### 1. कालिंदी ने अपना ज्वेलरी बिजनेस कितने रुपये से शुरू किया था?
कालिंदी ने अपने इस कारोबार की शुरुआत केवल पाँच हजार रुपये की शुरुआती पूंजी से की थी।

### 2. उनके ब्रांड का नाम क्या है और आधिकारिक वेबसाइट क्या है?
उनके ब्रांड का नाम फुलेरा है और उनकी वेबसाइट फुलेरा डॉट इन है।

### 3. वह मुख्य रूप से किस प्रकार की ज्वेलरी बनाती हैं?
वह मुख्य रूप से फैब्रिक ज्वेलरी बनाती हैं, जिसमें कपड़े, जूट, कार्डबोर्ड और मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है।

### 4. उनके बनाए आभूषण कहां-कहां तक भेजे जाते हैं?
उनके उत्पादों के लिए कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी, कोटा, दिल्ली और कोलकाता तक देश भर से ऑर्डर आते हैं।

### 5. उन्होंने अब तक कितनी महिलाओं को प्रशिक्षित किया है?
कालिंदी अब तक लगभग एक सौ महिलाओं को इस कला का प्रशिक्षण दे चुकी हैं।

## प्रेरणा और सबक
कालिंदी की यह प्रेरणादायक यात्रा दिखाती है कि सीमित संसाधनों और कम निवेश के साथ भी अपने हुनर के दम पर एक सफल व्यवसाय की नींव रखी जा सकती है।

- किन बातों का ध्यान रखें: **शुरुआत छोटे स्तर से करें:** अपने हुनर को परखने के लिए न्यूनतम पूंजी से प्रयोग के तौर पर काम शुरू करें।
- किन बातों का ध्यान रखें: **ग्राहकों की जरूरत समझें:** बाजार की समस्याओं जैसे मेटल एलर्जी या भारीपन का विकल्प तलाशकर अनूठा उत्पाद बनाएं।
- किन बातों का ध्यान रखें: **कौशल साझा करें:** अपनी सफलता के साथ-साथ आसपास की अन्य महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें भी आत्मनिर्भर बनाएं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._