# रेडीमेड गारमेंट्स के कारोबार से बनाएं करोड़ों का टर्नओवर, जमुई के कारोबारी चंदन कुमार ने बताए जरूरी बिजनेस टिप्स

> कम पूंजी में रेडीमेड गारमेंट्स का काम शुरू करके सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक का टर्नओवर बनाया जा सकता है। जमुई के सफल कारोबारी चंदन कुमार ने बाजार की मांग, सही कैटेगरी और स्टॉक सोर्सिंग के तरीके साझा किए हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/redimeda-garamentsa-ke-karobara-se-banaen-karoron-ka-tarnaovara-jamui-ke-karobari-chandan-kumar-ne-batae-jaruri-bijanesa-tipsa-36956 · **Language:** Hindi
**Tags:** कपड़ा व्यापार, रेडीमेड गारमेंट्स, जमुई, खैरा बाजार, स्मॉल बिजनेस, बिजनेस आइडिया, चंदन कुमार, रिटेल स्टोर

स्वरोजगार और व्यापार के जरिए हर कोई आत्मनिर्भर बनकर बेहतर मुनाफा कमाना चाहता है। हालांकि कई बार लोग बिना सही रणनीति के पूंजी लगा देते हैं और घाटे का सामना करते हैं। यदि कोई व्यक्ति सीमित बजट में सुरक्षित और तेजी से बढ़ने वाला काम शुरू करने की योजना बना रहा है, तो रेडीमेड गारमेंट्स यानी बने-बनाए कपड़ों का क्षेत्र एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। जमुई जिले के खैरा बाजार में कपड़ों का बड़ा काम संभालने वाले व्यवसायी चंदन कुमार का कहना है कि उन्होंने खुद बेहद छोटे स्तर से यह काम शुरू किया था। आज उसी बाजार में उनकी कई दुकानें मौजूद हैं और उनका सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से भी आगे निकल चुका है।

## सीमित पूंजी से कैसे करें छोटे स्टोर की शुरुआत
अक्सर लोगों को लगता है कि कपड़ों का शोरूम या दुकान शुरू करने के लिए लाखों-करोड़ों रुपये की बड़ी धनराशि चाहिए। चंदन कुमार के अनुसार शुरुआती दौर में बहुत ज्यादा रकम जुटाने की जरूरत नहीं होती है। केवल 2 लाख से 3 लाख रुपये की कार्यशील पूंजी के साथ एक छोटी दुकान की नींव रखी जा सकती है। शुरुआत में 10 गुणा 10 फीट या 10 गुणा 20 फीट का कमरा किसी भी नए काम को जमाने के लिए पूरी तरह पर्याप्त रहता है। लगभग 2.5 लाख से 3 लाख रुपये के कुल बजट में दुकान का प्रारंभिक ढांचा और स्टॉक आसानी से व्यवस्थित हो जाता है। जब ग्राहक जुड़ने लगें और बिक्री की रफ्तार बढ़ जाए, तो उसी मुनाफे को दोबारा लगाकर दुकान का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

## एक ही कैटेगरी पर केंद्रित रहने से बचेगा बजट
नए व्यापारियों की सबसे बड़ी चूक यह होती है कि वे एक ही छत के नीचे पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के सभी तरह के कपड़े रखना चाहते हैं। कई दुकानदार सिलाई के लिए थान का कपड़ा भी साथ में रखने की गलती करते हैं। चंदन कुमार समझाते हैं कि जब कोई शुरुआती व्यापारी सभी कैटेगरी को एक साथ समेटने की कोशिश करता है, तो पूंजी तेजी से बिखर जाती है और वैरायटी अधूरी रह जाती है। इसका सीधा असर ग्राहक के अनुभव पर पड़ता है।

शुरुआती कारोबारी को केवल एक सेगमेंट पर पूरा ध्यान लगाना चाहिए। उदाहरण के लिए अगर बच्चों के कपड़ों यानी किड्स वियर का चयन किया गया है, तो दुकान पूरी तरह बच्चों के कपड़ों की ही होनी चाहिए। इससे कम लागत में उस एक वर्ग के कपड़ों की पूरी वैरायटी रखी जा सकती है। सीमित बजट में किसी एक खास श्रेणी पर पकड़ बनाना ज्यादा आसान और सुरक्षित होता है।

## स्थानीय बाजार और ग्राहकों की क्रय शक्ति की पहचान
दुकान खोलने से पहले स्थानीय बाजार के मिजाज को समझना सबसे महत्वपूर्ण शर्त है। हर कस्बे और इलाके के ग्राहकों की जेब और पसंद का एक निश्चित दायरा होता है। अगर किसी बाजार में महंगे और प्रीमियम कपड़ों की पूछ-परख ज्यादा है, तो वहां बहुत सस्ते कपड़े रखने से बिक्री प्रभावित होगी। इसके विपरीत जिन इलाकों में मध्यम और किफायती रेंज के कपड़ों की अधिक खपत है, वहां महंगे ब्रांडेड परिधान बेचने से दुकान चलना मुश्किल हो जाता है। ऐसी जगहों पर सामान्य और लोकल कपड़ों की बिक्री सबसे तेज होती है। चंदन कुमार की सलाह है कि कारोबार शुरू करने से पहले उस बाजार की अन्य दुकानों का जमीनी मुआयना करना चाहिए और वहां के बिकने वाले माल का सटीक अध्ययन करना चाहिए।

## दिल्ली और कोलकाता से माल लाकर बिक्री का तरीका
रेडीमेड गारमेंट्स में मुनाफे की सबसे बड़ी कुंजी सही मंडी से माल खरीदना है। चंदन कुमार बताते हैं कि नए दुकानदार कोलकाता और दिल्ली के थोक कपड़ा बाजारों से सीधे स्टॉक खरीद सकते हैं। इन बड़े थोक बाजारों से माल लाने पर लागत काफी कम बैठती है और खुदरा बिक्री में अच्छा मार्जिन मिल जाता है। जैसे-जैसे दुकान की साख जमती है और ग्राहकों का विश्वास बढ़ता है, वैसे-वैसे स्टोर के आकार और वैरायटी दोनों का विस्तार किया जा सकता है।

## इसका आप पर असर
यह जानकारी उन नए उद्यमियों के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन देती है जो कम पूंजी में खुदरा कपड़ों की दुकान शुरू करना चाहते हैं।

- **सीमित पूंजी से शुरुआत:** नए कारोबारी केवल 2 लाख से 3 लाख रुपये में 10 गुणा 10 या 10 गुणा 20 फीट के कमरे से कपड़े की दुकान खोल सकते हैं। इससे कम वित्तीय जोखिम में अपना खुदरा कारोबार स्थापित करने का रास्ता साफ होता है।
- **एक वर्ग पर केंद्रित स्टॉक:** सभी वर्गों के कपड़े एक साथ रखने के बजाय केवल बच्चों, पुरुषों या महिलाओं में से किसी एक पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई है। ऐसा करने से कम पैसे में भी ग्राहकों को भरपूर वैरायटी उपलब्ध कराई जा सकती है।
- **थोक मंडियों से खरीद:** दुकानदार दिल्ली और कोलकाता जैसे बड़े थोक केंद्रों से सीधे माल मंगा सकते हैं। इससे बिचौलियों की लागत कम होती है और खुदरा बिक्री में अधिक मुनाफा बचता है।
- **बाजार अध्ययन का लाभ:** स्थानीय बाजार का सर्वेक्षण करके ग्राहकों की बजट क्षमता के हिसाब से माल रखने पर नुकसान से बचा जा सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि उस इलाके में महंगे ब्रांड बिकेंगे या किफायती कपड़े।

## ऐसा क्यों हुआ
यह कारोबारी मार्गदर्शन इसलिए सामने आया है क्योंकि कई लोग बिना जमीनी तैयारी और सही रणनीति के खुदरा व्यापार में पैसा लगाकर घाटा उठा लेते हैं।

- **पूंजी के सही इस्तेमाल की जरूरत:** शुरुआती स्तर पर लोग एक साथ हर प्रकार के कपड़े रखने की कोशिश में अपना पूरा बजट खत्म कर देते हैं। इस वजह से किसी भी एक श्रेणी में पर्याप्त वैरायटी नहीं बचती और व्यापार रुक जाता है।
- **स्थानीय मांग का विश्लेषण न होना:** बाजार के मिजाज को समझे बिना गलत मूल्य वर्ग के कपड़े रख लेने से दुकानें नहीं चल पाती हैं। महंगे और सस्ते कपड़ों की सही मांग का अध्ययन करने के बाद ही दुकान सफल हो सकती है।
- **सफल अनुभव का व्यावहारिक उदाहरण:** जमुई के खैरा बाजार में बेहद छोटे पैमाने से काम शुरू करने वाले चंदन कुमार ने व्यावहारिक तरीकों से कई दुकानें और 1 करोड़ से अधिक का सालाना टर्नओवर खड़ा किया है। इसी सफल मॉडल के आधार पर उन्होंने नए दुकानदारों के लिए यह तरीका बताया है।

## सवाल-जवाब

### 1. कपड़े की दुकान शुरू करने के लिए कम से कम कितनी पूंजी की जरूरत होती है?
शुरुआती दौर में एक छोटी दुकान 2 लाख से 3 लाख रुपये की लागत में आसानी से शुरू की जा सकती है।

### 2. दुकान की शुरुआत के लिए कमरे का साइज कितना होना चाहिए?
शुरुआत के लिए 10 गुणा 10 फीट या 10 गुणा 20 फीट का कमरा पर्याप्त माना गया है।

### 3. नए दुकानदारों को सभी तरह के कपड़े एक साथ रखने से क्यों बचना चाहिए?
सभी प्रकार के कपड़े एक साथ रखने से पूंजी बिखर जाती है और किसी भी एक श्रेणी में ग्राहकों को पर्याप्त वैरायटी नहीं मिल पाती है।

### 4. कपड़े की दुकान के लिए नया स्टॉक कहां से खरीदा जा सकता है?
दुकानदार दिल्ली और कोलकाता की थोक कपड़ा मंडियों से सीधे माल खरीदकर अपनी दुकान पर बेच सकते हैं।

### 5. दुकान खोलने से पहले बाजार का मुआयना करना क्यों जरूरी है?
बाजार का अध्ययन करने से यह पता चलता है कि वहां महंगे ब्रांडेड कपड़े ज्यादा बिकते हैं या सस्ते व लोकल कपड़े, जिससे सही माल का चयन किया जा सके।

### 6. चंदन कुमार का कपड़ा कारोबार वर्तमान में कितना टर्नओवर दर्ज कर रहा है?
जमुई के खैरा बाजार में अपनी कई दुकानों के जरिए उनका सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है।

## प्रेरणा और सबक
जमुई के खैरा बाजार में छोटे स्तर से कपड़े का काम शुरू कर करोड़ों का टर्नओवर हासिल करने वाले चंदन कुमार की यात्रा नए उद्यमियों को व्यावहारिक सीख देती है।

- **छोटे कदम से बड़ा निर्माण:** व्यापार बड़ा करने के लिए शुरुआत में विशाल बजट का होना अनिवार्य नहीं है। केवल 2 से 3 लाख रुपये और छोटी जगह से भी अनुशासित ढंग से काम शुरू किया जा सकता है।
- **एक लक्ष्य पर पूर्ण एकाग्रता:** एक ही समय में सब कुछ बेचने के लालच से बचकर किसी एक श्रेणी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। विशेषज्ञता और केंद्रित वैरायटी से सीमित पूंजी में भी बाजार में पकड़ बनाई जा सकती है।
- **मुनाफे का पुनर्निवेश:** कारोबार के शुरुआती लाभ को खर्च करने के बजाय उसी व्यवसाय के विस्तार में लगाना चाहिए। इसी पुनर्निवेश की रणनीति से एक छोटी दुकान को कई बड़े स्टोर्स में बदला जा सकता है।
- **जमीनी अध्ययन का महत्व:** अपनी मर्जी से फैसला लेने के बजाय पहले ग्राहकों की जरूरत और स्थानीय बाजार के रेट को समझना चाहिए। बाजार की वास्तविक मांग के अनुरूप काम करने से सफलता की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

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