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  "type": "article",
  "title": "रिक्शा चालक के बेटे से उपराज्यपाल के प्रधान सचिव तक, जानिए आईएएस गोविंद जायसवाल की संघर्ष भरी कहानी",
  "summary": "वाराणसी के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले गोविंद जायसवाल ने तमाम मुश्किलों को पार कर यूपीएससी परीक्षा पास की और अब उन्हें जम्मू-कश्मीर में बड़ी जिम्मेदारी मिली है।",
  "content": "देशभर में सिविल सेवा परीक्षा को सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार किया जाता है। आम तौर पर यह धारणा जुड़ी रहती है कि इस मुकाम को हासिल करने के लिए भारी-भरकम फीस देकर कोचिंग लेना अनिवार्य है। लेकिन इस सोच को पूरी तरह से गलत साबित कर दिखाया है आईएएस अधिकारी गोविंद जायसवाल ने। उनकी यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है जो सीमित संसाधनों के बावजूद आसमान छूने के सपने देखते हैं। एक रिक्शा चालक के घर से निकलकर देश के सर्वोच्च प्रशासनिक पदों तक पहुंचने का उनका सफर यह साबित करता है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो गरीबी और अभाव किसी भी सपने की रफ्तार को कम नहीं कर सकते।\n\nहाल ही में जम्मू-कश्मीर प्रशासन की तरफ से एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। इस बदलाव के तहत वर्ष 2007 बैच के एजीएमयूटी कैडर के अधिकारी गोविंद जायसवाल को उपराज्यपाल के प्रधान सचिव पद पर तैनात किया गया है। इसके अलावा उन्हें श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा गया है। शून्य से लेकर इस बुलंदी तक पहुंचने वाले गोविंद जायसवाल का रास्ता आसान नहीं था। उनके इस मुकाम के पीछे उनके पिता के अनगिनत त्याग और उनके खुद के कड़े अनुशासन की एक लंबी कहानी छिपी हुई है।\n\nवाराणसी की तंग गलियों से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक का सफर बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित अलईपुरा इलाके की एक बेहद छोटी और तंग कोठरी से निकलकर देश के शीर्ष प्रशासनिक पदों की कमान संभालने वाले गोविंद जायसवाल की जिंदगी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगती। उन्हें यह मुकाम रातों-रात नहीं मिला, बल्कि इसके पीछे आंसुओं, अपनों के त्याग और अंतहीन संघर्षों का एक लंबा इतिहास रहा है।\n\nउनके शुरुआती दिन काफी सामान्य तरीके से बीत रहे थे। उस दौर में उनके पिता के पास कुल पैंतीस रिक्शे हुआ करते थे, जिनकी आमदनी से परिवार का खर्च आराम से चल जाता था। लेकिन वक्त का पहिया घूमा और परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। गोविंद की मां को ब्रेन हेमरेज जैसी बेहद गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया। उनके इलाज का खर्च उठाने के लिए पिता को एक-एक करके अपने सारे रिक्शे बेचने पड़े। वर्ष 2005 में मां के निधन के बाद परिवार पर दुखों का दौर और गहरा गया। हालात इतने बदतर हो गए कि कई दिनों तक सिर्फ सूखी रोटी खाकर ही गुजारा करना पड़ता था। हालांकि इन तमाम आपदाओं के बीच उनके पिता नारायण जायसवाल ने अपने बच्चों की पढ़ाई की अलख को कभी बुझने नहीं दिया।\n\nजब गोविंद दिल्ली में रहकर अपनी यूपीएससी की तैयारी में जुटे थे, तब उन्हें हर महीने खर्च के लिए रुपयों की सख्त जरूरत होती थी। उन दिनों उनके पिता के पैरों में सेप्टिक और गंभीर जख्म हो चुके थे। डॉक्टरों की सख्त मनाही के बावजूद वह रिक्शा चलाना बंद नहीं करते थे। कई बार वह खुद भूखे रहकर पैसे बचाते थे ताकि उनका बेटा दिल्ली में अपनी पढ़ाई जारी रख सके। दूसरी तरफ गोविंद ने भी आर्थिक तंगी के चलते दिल्ली में किसी भी तरह की महंगी कोचिंग का सहारा नहीं लिया और न ही कभी आरामदायक जीवन शैली को अपनाया। अपने खर्चे पूरे करने के लिए वे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगे। पैसे बचाने के लिए उन्होंने यहां तक किया कि दिन में एक वक्त का खाना और चाय तक पीना छोड़ दिया।\n\nअपनी कड़ी मेहनत, पक्के इरादे और दर्शनशास्त्र तथा इतिहास जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ के बल पर गोविंद जायसवाल ने वर्ष 2006 की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। यह उनका पहला ही प्रयास था और इसी पहली कोशिश में उन्होंने 48वीं रैंक हासिल करके नया इतिहास रच दिया। हिंदी माध्यम से पढ़ाई पूरी करके इतनी बड़ी सफलता हासिल करना उस समय पूरे देश में चर्चा का बड़ा विषय बन गया था। उनकी इसी संघर्ष गाथा पर आधारित एक फिल्म भी बनाई जा चुकी है जिसका शीर्षक ‘अब दिल्ली दूर नहीं’ है।\n\nसिविल सेवा में आने के बाद से ही गोविंद जायसवाल ने अपनी प्रशासनिक कार्यकुशलता से हर मोर्चे पर बेहतरीन प्रदर्शन करके दिखाया है। उनकी शादी आईपीएस अधिकारी चंदना चौधरी के साथ हुई है और यह एक अरेंज्ड मैरिज थी। गोविंद की बहन ममता के अनुसार वर्ष 2011 में जब वे नागालैंड में अपनी सेवाएं दे रहे थे, तब उनके बहनोई के माध्यम से यह रिश्ता आया था। इसके बाद गोविंद ने एक साइबर कैफे में जाकर चंदना की सोशल मीडिया प्रोफाइल देखी और बात आगे बढ़ाई। चंदना की नानी ने खुद गोविंद से मुलाकात करके इस रिश्ते को पक्का किया था। उनका मानना था कि उस छोटी सी कोठरी में रहकर पढ़ाई करने वाला यह लड़का भविष्य में बहुत नाम कमाएगा। शुरुआती दौर में ट्रेनिंग में व्यस्त होने के कारण चंदना शादी के मूड में नहीं थीं, लेकिन अपनी नानी के विशेष आग्रह पर उन्होंने इस रिश्ते के लिए अपनी हामी भर दी थी।\n\nइसका आप पर असर\nइस प्रशासनिक फेरबदल और सफलता की कहानी से जुड़े व्यावहारिक और नीतिगत बदलावों का असर देश भर के प्रशासनिक ढांचे और सामान्य नागरिकों के जीवन पर पड़ता है।\n\n• भारत में: सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं को यह संदेश मिलता है कि महंगे संस्थानों के बिना भी कठिन परीक्षा पास की जा सकती है। यह नियुक्ति दर्शाती है कि देश के विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक पदों पर कर्मठ अधिकारियों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।\n• जम्मू-कश्मीर में: उपराज्यपाल के प्रधान सचिव और अमरनाथ श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में गोविंद जायसवाल की नियुक्ति से प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी। इससे क्षेत्र में विकास कार्यों और तीर्थयात्रा प्रबंधन से जुड़े निर्णयों में सुगमता आने की उम्मीद है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nप्रशासनिक फेरबदल के तहत उच्च पदों पर अधिकारियों की यह नई तैनाती सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। इस तरह के बदलाव शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए किए जाते हैं।\n\n• प्रशासनिक आवश्यकता: जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुशासन और प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए वर्ष 2007 बैच के अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं।\n• कैडर की भूमिका: एजीएमयूटी कैडर के अधिकारियों को विभिन्न संवेदनशील और महत्वपूर्ण पदों पर उनकी कार्यकुशलता के आधार पर तैनात किया जाता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गोविंद जायसवाल को हाल ही में कौन सी नई जिम्मेदारी मिली है?\nउन्हें जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है और साथ ही श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के सीईओ का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।\n\n2. गोविंद जायसवाल ने यूपीएससी परीक्षा किस वर्ष पास की थी?\nउन्होंने वर्ष 2006 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा अपने पहले ही प्रयास में पास की थी।\n\n3. यूपीएससी परीक्षा में गोविंद जायसवाल की कौन सी रैंक आई थी?\nउन्होंने अपने पहले ही प्रयास में 48वीं रैंक हासिल की थी।\n\n4. गोविंद जायसवाल के जीवन पर आधारित फिल्म का क्या नाम है?\nउनके संघर्ष पर आधारित फिल्म का नाम 'अब दिल्ली दूर नहीं' है।\n\n5. गोविंद जायसवाल की पत्नी का क्या नाम है और वे किस पद पर हैं?\nउनकी पत्नी का नाम चंदना चौधरी है और वे एक आईपीएस अधिकारी हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nगोविंद जायसवाल का जीवन संघर्ष और सफलता का एक ऐसा उदाहरण है जिससे युवा कई महत्वपूर्ण सबक सीख सकते हैं।\n\n• कड़ी मेहनत का विकल्प नहीं: विपरीत परिस्थितियों के बावजूद निरंतर प्रयास करने से हर बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है।\n• आर्थिक तंगी से न घबराएं: सीमित संसाधन और गरीबी कभी भी किसी के ऊंचे सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने में रुकावट नहीं बन सकते।\n• आत्मअनुशासन अपनाएं: लक्ष्य प्राप्ति के लिए जीवन में कड़ा अनुशासन और फोकस बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-10-17",
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    "आईएएस सफलता",
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    "वाराणसी न्यूज"
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