# सागर के युवा किसान ने बदला खेती का पारंपरिक तरीका, ड्रिप और मल्चिंग से 1 एकड़ बैंगन में ₹4 लाख तक मुनाफा

> मध्य प्रदेश के सागर जिले के खजुरिया टोला निवासी अभिषेक पटेल ने पारंपरिक खेती छोड़कर ड्रिप और मल्चिंग तकनीक अपनाई, जिससे बैंगन की फसल से उन्हें सालाना ₹2 लाख से ₹4 लाख तक की बचत हो रही है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-08-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/sagar-ke-yuva-kisana-ne-badala-kheti-ka-parnparika-tarika-dripa-aura-malchinga-se-1-ekara-baingana-men-4-lakha-taka-munapha-17634 · **Language:** Hindi
**Tags:** सागर खेती, अभिषेक पटेल, बैंगन की खेती, ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग तकनीक, कृषि मुनाफा, मध्य प्रदेश किसान

खेती के पारंपरिक तरीकों में बदलाव लाकर मध्य प्रदेश के युवा किसान नए प्रयोग कर रहे हैं। सदियों पुरानी खेती की तकनीकों को आधुनिक तकनीकों से बदलकर वे न केवल कम पानी और मेहनत में बेहतर फसल उगा रहे हैं, बल्कि अपने मुनाफे को भी कई गुना बढ़ा चुके हैं। इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के अन्य किसान भी प्रेरित होकर आधुनिक खेती का रुख कर रहे हैं। सागर जिले के खजुरिया टोला निवासी अभिषेक पटेल ऐसे ही एक युवा किसान हैं, जिन्होंने बैंगन की खेती में आधुनिक पद्धति अपनाकर अपनी कमाई को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। पिछले तीन से चार सालों से वे ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक के जरिए बैंगन का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उन्हें हर सीजन में दो लाख से चार लाख रुपये तक की शुद्ध बचत हो रही है।

## पारंपरिक खेती की पुरानी पद्धतियों से आगे की राह
सागर जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित खजुरिया टोला के रहने वाले अभिषेक पटेल बताते हैं कि उनके परिवार में दादा और पिता के समय से ही पारंपरिक तरीके से कृषि कार्य होता आ रहा था। शुरुआती दिनों में अभिषेक ने भी अपने पिता के साथ खेत में काम सीखा। उनके पिता पिछले लगभग 20 वर्षों से साधारण और सामान्य तरीके से बैंगन की फसल उगा रहे थे। पारंपरिक तरीके से बैंगन उगाने में सिंचाई के लिए बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती थी और खेत में शारीरिक मेहनत भी अत्यधिक लगती थी। इतनी कठिन मेहनत और अधिक संसाधन खर्च करने के बावजूद फसल से मिलने वाला मुनाफा बहुत सीमित रहता था और हजारों रुपये तक ही सिमट कर रह जाता था।

पिता के साथ दो से तीन साल तक पुरानी पद्धति से काम करने के बाद अभिषेक ने महसूस किया कि जब तक खेती में तकनीक का प्रयोग नहीं किया जाएगा, तब तक मुनाफा बढ़ाना संभव नहीं है। इसके बाद उन्होंने कृषि में बदलाव का फैसला लिया और अपने खेतों में ड्रिप सिंचाई और प्लास्टिक मल्चिंग पद्धति लागू की। हालांकि आधुनिक प्रणाली लगाने से शुरुआत में प्रति एकड़ लागत जरूर बढ़ गई, लेकिन इसके परिणाम स्वरूप मिलने वाला उत्पादन और मुनाफा चार गुना तक बढ़ गया। ड्रिप और मल्चिंग तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे पानी की भारी बचत होती है, खरपतवार नियंत्रण के कारण शारीरिक श्रम कम लगता है और मिट्टी की नमी तथा गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है।

## ड्रिप और मल्चिंग का गणित: लागत और निवेश का ब्योरा
ड्रिप और मल्चिंग प्रणाली से बैंगन की खेती शुरू करने के लिए शुरुआती निवेश की पूरी जानकारी देते हुए अभिषेक बताते हैं कि 1 एकड़ जमीन में ड्रिप पाइपलाइन और मल्चिंग शीट खरीदने में लगभग 30,000 रुपये का खर्च आता है। इसके अलावा बैंगन के उन्नत बीजों की खरीद पर 1,500 से 2,000 रुपये का व्यय होता है। फसल चक्र के दौरान कीट नियंत्रण के लिए कीटनाशक दवाओं, खाद और फल तुड़ाई के लिए मजदूरी का खर्च काफी महत्वपूर्ण होता है। इन सभी मदों को मिलाकर 1 एकड़ में कुल उत्पादन लागत लगभग 1 लाख रुपये बैठती है।

उचित देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ खेती करने पर 1 एकड़ खेत से कुल 300 से 400 क्विंटल बैंगन का उत्पादन प्राप्त होता है। जब सब्जी मंडियों में बैंगन के भाव अच्छे मिलते हैं, तो तमाम लागत घटाने के बाद भी एक सीजन में 4 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा अर्जित हो जाता है।

## 300 से 400 क्विंटल पैदावार और चार मंडियों तक पहुंच
फसल की तुड़ाई और विपणन की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए अभिषेक ने कहा कि 1 एकड़ खेत से वे चरणबद्ध तरीके से 20 से 25 बार बैंगन की तुड़ाई करते हैं। प्रत्येक तुड़ाई के दौरान लगभग 20 क्विंटल बैंगन निकलता है। शुरुआती मुख्य सीजन के बाद भी पौधा लगातार फल देता रहता है, हालांकि बाद के चरणों में धीरे-धीरे उत्पादन की मात्रा थोड़ी कम होने लगती है।

उत्पादित बैंगन को बेहतर दाम पर बेचने के लिए अभिषेक किसी एक मंडी पर निर्भर नहीं रहते। वे अपने माल को सागर, दमोह, cutni और रायसेन की प्रमुख सब्जी मंडियों में भेजते हैं। अलग-अलग मंडियों में फसल भेजने से उन्हें बाजार की मांग और सही कीमतों का लाभ मिलता है, जिससे उनकी आय स्थिर और सुरक्षित रहती है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर छोटे किसान कम पानी में 300 से 400 क्विंटल तक पैदावार लेकर अपनी शुद्ध आय को 4 गुना तक बढ़ा सकते हैं।
- **सागर और आसपास में:** सागर, दमोह, कटनी और रायसेन के किसान स्थानीय सब्जी मंडियों के नेटवर्क का फायदा उठाकर बैंगन और अन्य सब्जियों की खेती से प्रति एकड़ ₹2 से ₹4 लाख की बचत कर सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. सागर के युवा किसान अभिषेक पटेल बैंगन की खेती से कितना मुनाफा कमा रहे हैं?
अभिषेक पटेल 1 एकड़ जमीन में ड्रिप और मल्चिंग तकनीक से बैंगन उगाकर प्रति सीजन ₹2 लाख से ₹4 लाख तक की शुद्ध बचत करते हैं।

### 2. 1 एकड़ में ड्रिप और मल्चिंग लगाने पर कितना खर्च आता है?
ड्रिप और मल्चिंग सामग्री पर लगभग ₹30,000, बीजों पर ₹1,500 से ₹2,000 और दवा व तुड़ाई मिलाकर कुल लागत लगभग ₹1 लाख आती है।

### 3. ड्रिप और मल्चिंग पद्धति से बैंगन की कितनी पैदावार होती है?
उचित देखरेख करने पर 1 एकड़ खेत से 300 से 400 क्विंटल तक बैंगन का कुल उत्पादन प्राप्त होता है।

### 4. अभिषेक पटेल अपने बैंगन किन-किन मंडियों में बेचते हैं?
वे अपनी फसल सागर, दमोह, कटनी और रायसेन की सब्जी मंडियों में बेचते हैं।

## प्रेरणा और सबक
- **तकनीक को अपनाना:** दशकों पुरानी पारंपरिक आदतों को छोड़कर आधुनिक कृषि तकनीक अपनाना व्यावसायिक बढ़त देता है।
- **लागत का सही प्रबंधन:** शुरुआती लागत बढ़ने के बावजूद प्रति एकड़ पैदावार 300–400 क्विंटल तक पहुंचाकर मुनाफा 4 गुना किया जा सकता है।
- **बाजार का विविधीकरण:** अपनी फसल किसी एक बाजार के बजाय सागर, दमोह, कटनी और रायसेन की अलग-अलग मंडियों में भेजने से सही दाम मिलते हैं।
- **संसाधनों की बचत:** ड्रिप और मल्चिंग से पानी और मजदूरी दोनों की बचत होती है तथा मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।

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