समस्तीपुर के आयुष अमन को BPSC में 756वीं रैंक, घड़ी बेचने वाले पिता की मेहनत आई काम बिहार के समस्तीपुर जिले के आयुष अमन ने BPSC 70वीं संयुक्त परीक्षा में 756वीं रैंक हासिल कर RDO पद पर चयनित हुए। उनके पिता एक छोटी सी दुकान में घड़ियां बनाते-बेचते हैं और इसी आय से उन्होंने बेटे की पढ़ाई जारी रखी। बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का परिणाम घोषित होते ही समस्तीपुर जिले में एक छोटी सी घड़ी की दुकान के पास उत्सव का माहौल बन गया। दुकानदार अनुज कुमार के बेटे आयुष अमन ने इस परीक्षा में 756वीं रैंक हासिल कर सबको चौंका दिया और उनका चयन विकास पदाधिकारी यानी RDO के पद पर हुआ है। यह केवल एक युवा की जीत नहीं, बल्कि उन लाखों परीक्षार्थियों के लिए जीती-जागती प्रेरणा है जो बार-बार नाकाम होने के बाद भी हार मानने को तैयार नहीं हैं। पटोरी में बनी नींव, इतिहास से मास्टर्स और UGC NET-JRF तक का सफर आयुष अमन ने शुरुआती पढ़ाई पटोरी में पूरी की। उसके बाद उन्होंने इतिहास विषय को चुना और उच्च शिक्षा हासिल की, फिर मास्टर्स की डिग्री भी पूरी की। उनकी मेहनत सिर्फ यहीं नहीं रुकी, UGC NET-JRF जैसी कठिन परीक्षा भी उन्होंने सफलतापूर्वक पास की। अगला कदम पीएचडी था, लेकिन कोविड महामारी ने यह राह बंद कर दी। उस वक्त उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि सिविल सेवा की तैयारी में पूरी तरह से जुट गए। UPSC मेंस दो बार, BPSC में कुछ अंकों की चूक और नहीं टूटा इरादा आयुष खुद बताते हैं कि उनका यह सफर कभी सरल नहीं रहा। उन्होंने UPSC मेंस परीक्षा दो बार दी। BPSC मेंस में भी दो बार सिर्फ दो से तीन अंकों के अंतर से अंतिम चयन से चूक गए। उत्तराखंड PCS की प्रारंभिक परीक्षा में भी उन्होंने सफलता हासिल की थी, लेकिन उस दौरान UPSC परीक्षा नजदीक होने की वजह से वहां की मेंस नहीं दे सके। इन सब मुश्किलों के बीच कई ऐसे पल भी आए जब उन्हें लगा कि शायद इतनी मेहनत व्यर्थ जा रही है। लेकिन परिवार का भरोसा उन्हें हर बार खड़ा कर देता था। जिस छोटे से कमरे में बैठकर उन्होंने सालों तक पढ़ाई की, वह कमरा उनका सबसे अच्छा दोस्त बन गया था। चाचा मनोज गुप्ता का अनुशासन और उनका मार्गदर्शन इस पूरी यात्रा में आयुष की सबसे मजबूत टेक बना रहा। घड़ी की दुकान की आमदनी पर टिका था पूरे परिवार का सपना आयुष के पिता अनुज कुमार अपनी छोटी सी दुकान पर घड़ियां बनाते और बेचते हैं, उसी कमाई से घर का खर्च चलता है। सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई कभी नहीं रोकी और उसका हौसला भी कभी डूबने नहीं दिया। जब BPSC का परिणाम आया तो पिता की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा पूरा विश्वास था कि उनका बेटा एक दिन जरूर अधिकारी बनेगा। मां को था अहसास, चाचा की तारीफ और भाई का बढ़ा हौसला मां मीरा कुमारी ने बताया कि इस बार नतीजा आने से पहले ही आयुष के चेहरे से उन्हें महसूस हो गया था कि वह इस बार जरूर सफल होंगे, और ऐसा ही हुआ। चाचा मनोज गुप्ता ने बताया कि आयुष बचपन से बेहद अनुशासित रहे हैं। सोशल मीडिया, शादी-ब्याह और मनोरंजन से हमेशा दूरी बनाकर उन्होंने सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दिया। परिवार की किरण देवी ने इस पल को पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण बताया। छोटे भाई सेतु नमन ने कहा कि बड़े भाई की इस जीत ने उनका भी मनोबल ऊंचा किया है और अब उन्हें भी दृढ़ विश्वास हो गया है कि जो सच्ची मेहनत करता है, वह एक दिन जरूर सफल होता है। इसका आप पर असर • भारत में: आयुष अमन की कहानी देशभर के उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार असफलता के बाद खुद पर से भरोसा खोने लगते हैं। • बिहार में: समस्तीपुर और बिहार के दूसरे जिलों के सीमित साधनों वाले परिवारों के बच्चों के लिए यह एक सीधा संदेश है कि BPSC जैसी परीक्षाओं में सफलता केवल पैसे या बड़े शहर पर निर्भर नहीं करती। सवाल-जवाब 1. आयुष अमन ने BPSC में कितनी रैंक हासिल की? आयुष अमन ने BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 756वीं रैंक हासिल की। 2. उनका चयन किस पद के लिए हुआ है? उनका चयन विकास पदाधिकारी यानी RDO के पद पर हुआ है। 3. आयुष अमन के पिता क्या काम करते हैं? उनके पिता अनुज कुमार एक छोटी सी दुकान में घड़ियां बनाने और बेचने का काम करते हैं और इसी से पूरे परिवार का खर्च चलता है। 4. आयुष ने कहां से शुरुआती पढ़ाई की और किस विषय में उच्च शिक्षा ली? उन्होंने शुरुआती पढ़ाई पटोरी से पूरी की और उच्च शिक्षा इतिहास विषय में ली, साथ ही मास्टर्स की डिग्री भी हासिल की। 5. क्या उन्होंने UGC NET-JRF पास किया था? हां, आयुष अमन ने UGC NET-JRF परीक्षा पास की थी, लेकिन कोविड महामारी के कारण उनकी पीएचडी की योजना अधूरी रह गई। 6. BPSC से पहले उन्होंने और कौन सी परीक्षाएं दीं? उन्होंने UPSC मेंस दो बार दी, उत्तराखंड PCS प्रारंभिक परीक्षा पास की, और BPSC मेंस में दो बार सिर्फ दो से तीन अंकों के अंतर से चयन से चूक गए। 7. चाचा मनोज गुप्ता की तैयारी में क्या भूमिका रही? चाचा मनोज गुप्ता के अनुशासन और मार्गदर्शन ने आयुष को पूरी तैयारी के दौरान सही राह पर बनाए रखा। 8. आयुष के छोटे भाई सेतु नमन ने इस सफलता पर क्या कहा? सेतु नमन ने कहा कि बड़े भाई की जीत ने उनका भी मनोबल बढ़ाया है और उन्हें यकीन हो गया है कि मेहनत करने वाला जरूर सफल होता है। प्रेरणा और सबक आयुष अमन की इस यात्रा से कुछ ठोस सबक मिलते हैं जो हर उस युवा के काम आ सकते हैं जो किसी बड़े लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है। • कुछ अंकों की चूक कभी अंतिम फैसला नहीं होती: आयुष BPSC मेंस में दो-दो बार सिर्फ दो से तीन अंकों के फर्क से रह गए, फिर भी वापस आए। एक छोटी हार को करियर की मौत मानना सबसे बड़ी गलती है। • एक रास्ता बंद हो तो दूसरा खोलें: कोविड ने पीएचडी की योजना रोक दी, तो उन्होंने सिविल सेवा पर पूरा ध्यान लगाया। परिस्थितियां बदलने पर रणनीति बदलना ताकत है, कमजोरी नहीं। • ध्यान भटकाने वाली हर चीज से दूरी बनाएं: सोशल मीडिया, शादी-ब्याह और मौज-मस्ती से दूर रहकर उन्होंने सालों तक एकाग्रता बनाए रखी। लंबी तैयारी में फोकस ही सबसे बड़ा हथियार होता है। • परिवार का भरोसा सबसे बड़ी पूंजी है: पिता ने सीमित आमदनी में भी पढ़ाई जारी रखवाई और चाचा ने अनुशासन दिया। यही साथ था जिसने उन्हें कठिन समय में टूटने नहीं दिया। • छोटी जगह में भी बड़े सपने पलते हैं: एक छोटे से कमरे में बैठकर उन्होंने वर्षों तक तैयारी की। संसाधनों की सीमा, सोच की उड़ान को नहीं रोक सकती। https://trendkia.com/success-stories/samastipur-ke-ayush-aman-ko-bpsc-men-756vin-rainka-ghari-bechane-vale-pita-ki-mehanata-ai-kama-2294 TrendKia — Har trend, sabse pehle.