# सरकारी अफसरी छोड़कर ₹10 लाख से शुरू की बेबी केयर कंपनी, मदर स्‍पर्श आज पहुंची ₹150 करोड़ के टर्नओवर तक

> प्रशासनिक अधिकारी की नौकरी छोड़ डॉ हिमांशु गांधी ने महज ₹10 लाख से बेबी प्रोडक्‍ट ब्रांड Mother Sparsh की नींव रखी, जिसका सालाना राजस्‍व अब ₹150 करोड़ तक पहुंच गया है और जिसमें ITC ने हिस्‍सेदारी बढ़ाकर 49.3 फीसदी कर ली है।

**Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-06-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/sarakari-aphasari-chhorakara-10-lakha-se-shuru-ki-bebi-keyara-knpani-madara-s-pa-478

## एक सुरक्षित नौकरी और एक बेचैन सपना
डॉ हिमांशु गांधी के पास वह सब कुछ था जिसे आमतौर पर लोग सुरक्षित भविष्‍य कहते हैं — एक प्रशासनिक अधिकारी की सरकारी नौकरी और उसके साथ मिलने वाली स्‍थिरता। लेकिन उनके भीतर का उद्यमी इस स्‍थिरता में सुकून नहीं ढूंढ पा रहा था। उन्‍होंने बाजार को गौर से देखा और पाया कि बेबी प्रोडक्‍ट बेचने वाली एक से बढ़कर एक कंपनियां मौजूद हैं, फिर भी इनमें से शायद ही कोई माता-पिता के असली भरोसे और उनकी चिंताओं को सही मायनों में समझ रहा था। उपभोक्‍ता और कंपनी के बीच का यही खालीपन उन्‍हें खटकता रहा।

इसी कमी को भरने के इरादे से उन्‍होंने रिसर्च शुरू की और अपनी टीम के साथ करीब 10 साल पहले एक जोखिम भरा सफर शुरू किया, जो आज एक बड़ी कामयाबी में बदल चुका है। हम बात कर रहे हैं भारतीय बेबी प्रोडक्‍ट कंपनी Mother Sparsh की, जिसके प्रोडक्‍ट पर आज लाखों उपभोक्‍ता भरोसा जता रहे हैं।

## सिर्फ ₹10 लाख से हुई शुरुआत
हिमांशु ने अपना काम महज ₹10 लाख रुपये के निवेश के साथ शुरू किया था। उनका साफ नजरिया था कि बेबी केयर का प्रोडक्‍ट खासतौर पर भारतीय बच्‍चों के मुताबिक होना चाहिए। यहां की जलवायु, बदलते मौसम, बच्‍चों की त्‍वचा और उसकी संवेदनशीलता — इन सबको ध्‍यान में रखकर ही उन्‍होंने प्रोडक्‍ट तैयार करने का सिलसिला शुरू किया। उनका पूरा जोर माता-पिता की वास्‍तविक परेशानियों के समाधान पर रहा, और गुणवत्‍ता व पारदर्शिता के दम पर उन्‍होंने जल्‍द ही उपभोक्‍ताओं का भरोसा जीत लिया।

## ग्‍लैमर नहीं, भरोसे पर लगाया दांव
कंपनी खड़ी करने से पहले डॉ हिमांशु ने एक अहम बात नोट की — ज्‍यादातर ब्रांड सुंदर पैकेजिंग, खुशबू और सेलिब्रिटीज के विज्ञापनों के सहारे बिकते हैं, न कि पैरेंट के असल भरोसे के दम पर। उन्‍होंने तय किया कि प्रोडक्‍ट को चमक-दमक से सजाने के बजाय उसकी क्‍वालिटी को सामने रखा जाए, क्‍योंकि भरोसा इसी से बनता है। इसके लिए उन्‍होंने बच्‍चों के इलाज से जुड़े डॉक्‍टरों के प्रेस्क्रिप्‍शन और सदियों पुरानी पारंपरिक चिकित्‍सा पद्धति को आपस में जोड़कर अपने उत्‍पाद बनाने का तरीका अपनाया।

## विज्ञापन की जगह सैम्‍पलिंग का रास्‍ता
हिमांशु मानते हैं कि बेबी केयर सेग्‍मेंट में प्रोडक्‍ट बनाना और कंपनी चलाना आसान काम नहीं है। शुरुआत में उनके पास सीमित निजी बचत थी और संसाधन भी बेहद कम थे। यही वजह रही कि उन्‍होंने पैसा विज्ञापनों में झोंकने के बजाय प्रोडक्‍ट की सैम्‍पलिंग और यूजर्स के अनुभव पर लगाया। उन्‍होंने अस्‍पतालों तक अपने सैंपल पहुंचाए और खुद लोगों के बीच जाकर माता-पिता के अनुभव समझे।

## रणनीति लाई रंग, ₹150 करोड़ तक पहुंचा राजस्‍व
यह रणनीति धीरे-धीरे असर दिखाने लगी और कुछ ही वर्षों में Mother Sparsh एक प्रीमियम और टॉक्सिक फ्री ब्रांड के रूप में पहचाना जाने लगा। वित्‍तवर्ष 2025 में कंपनी का राजस्‍व ₹150 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, अब तक 50 लाख से ज्‍यादा माता-पिता इससे जुड़ चुके हैं। कंपनी का अनुमान है कि वित्‍तवर्ष 2026 में उसकी ग्रोथ 40 से 50 फीसदी तक रह सकती है, और इसके लिए नई कैटेगरी तथा नए बाजारों तक पहुंच बनाने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है।

## बड़े निवेशकों का भरोसा, ITC की 49.3% हिस्‍सेदारी
ब्रांड की बढ़ती लोकप्रियता और भरोसे को देखते हुए बड़ी कंपनियां और निवेशक भी इस पर खुलकर दांव लगाने लगे हैं। FMCG सेक्‍टर की दिग्‍गज ITC ने Mother Sparsh में अपनी हिस्‍सेदारी बढ़ाकर 49.3 फीसदी कर ली है। कंपनी को पूरा यकीन है कि उसके प्रोडक्‍ट आने वाले समय में भारतीय बाजार में और तेजी से पैठ बनाएंगे।

## बेबी केयर से आगे फैमिली वेलनेस की ओर
डॉ हिमांशु अब इस ब्रांड को बेबी केयर से आगे ले जाकर एक फैमिली वेलनेस ब्रांड के रूप में स्‍थापित करना चाहते हैं। उन्‍होंने बताया कि मौजूदा कैटेगरी को और मजबूत करने के साथ-साथ कंपनी अब पर्सनल केयर और हाईजीन सेग्‍मेंट में भी कदम रखने की तैयारी में है। अब तक जहां जोर ऑनलाइन बाजार बनाने पर रहा, वहीं अब ऑफलाइन पहुंच बढ़ाने पर काम शुरू किया जा रहा है। उनका मानना है कि कंपनी आंख मूंदकर तेज ग्रोथ के पीछे भागने के बजाय क्‍वालिटी और भरोसे को प्राथमिकता दे रही है।

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