सातवीं में फेल हो चुकीं बुरहानपुर की विनीता बाई अब प्राकृतिक खेती से कमा रहीं लाखों रुपये बुरहानपुर जिले के झिरमिठी गांव की विनीता बाई सातवीं कक्षा में फेल हो गई थीं, फिर भी प्राकृतिक और मिक्स खेती के जरिए हर साल 2 से 3 लाख रुपये कमा रही हैं और गांव की 8 से 10 महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले से 20 किलोमीटर दूर बसे झिरमिठी गांव की विनीता बाई सातवीं कक्षा में फेल हो गई थीं, लेकिन आज वे प्राकृतिक खेती के दम पर हर साल लाखों रुपये कमा रही हैं. यह साबित करता है कि पढ़ाई में पिछड़ जाने के बावजूद मेहनत और सही प्रशिक्षण से किस्मत बदली जा सकती है. गृहणी से किसान बनने का सफर विनीता बाई पहले पूरी तरह गृहणी थीं. घर से बाहर कोई काम नहीं करती थीं और ज्यादातर समय घर पर ही बिताती थीं. उनके परिवार के लोग पहले से केले की खेती करते थे. बदलाव तब आया जब विनीता स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं. समूह के जरिए उन्हें प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण मिला, जो उनका सबसे पहला प्रशिक्षण था. इसी प्रशिक्षण ने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी. पति के केले के खेत में नवाचार विनीता के घर पर कुल 10 एकड़ खेती है. उनके पति शिवप्रसाद पहले इसी जमीन पर केले की खेती करते थे. प्रशिक्षण लेने के बाद विनीता ने इस खेती में नवाचार किया और प्राकृतिक तरीके से खेती करना शुरू कर दिया. इस काम के लिए जिला प्रशासन भी उन्हें सम्मानित कर चुका है. विनीता बताती हैं, "मैं पहले गृहणी थी, कोई काम नहीं था, घर पर ही रहती थी." आज वही महिला पूरे इलाके के लिए मिसाल बन गई हैं. एक एकड़ में प्राकृतिक खेती, नौ एकड़ में मिक्स खेती विनीता अपनी 10 एकड़ जमीन में से 1 एकड़ में पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से खेती करती हैं, जबकि बाकी 9 एकड़ में मिक्स खेती करती हैं. इस मिक्स खेती में वे सोयाबीन के साथ कपास और सब्जी भाजी भी लगाती हैं. इसी संयोजन के दम पर वे हर साल 2 से 3 लाख रुपये कमा लेती हैं. उनके पति शिवप्रसाद इस मिक्स खेती में उनका पूरा साथ देते हैं. पति पत्नी दोनों मिलकर खेती के जरिए ही लाखों रुपये कमा रहे हैं. 8 से 10 महिलाओं को दे रहीं रोजगार खेती शुरू करने से पहले विनीता खुद घर पर ही रहती थीं, लेकिन अब वे 8 से 10 लोगों को रोजगार दे रही हैं. उनके खेत में रोजाना महिलाओं को काम मिलता है. विनीता का कहना है, "मेरा लक्ष्य और मेरा उद्देश्य महिलाओं को रोजगार देना है." यही सोच उन्हें बाकी किसानों से अलग बनाती है. आगे और महिलाओं को जोड़ने की योजना विनीता अभी 8 से 10 लोगों को रोजगार दे रही हैं, लेकिन आने वाले समय में वे और आगे बढ़ने की तैयारी में हैं. उनकी योजना है कि वे दूसरे किसानों की जमीन भी लेकर उस पर प्राकृतिक खेती करेंगी. इससे और ज्यादा महिलाओं को रोजगार मिलेगा और उनकी अपनी आमदनी भी बढ़ेगी. इसके लिए विनीता लगातार प्रयास कर रही हैं. इसका आप पर असर • भारत में: यह कहानी दिखाती है कि स्वयं सहायता समूहों से मिलने वाला प्रशिक्षण कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बना सकता है और सिर्फ 1 एकड़ जैसी छोटी जमीन पर प्राकृतिक खेती से भी अच्छी कमाई हो सकती है. • बुरहानपुर में: झिरमिठी गांव में विनीता के खेत से रोजाना 8 से 10 स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिल रहा है, जिससे गांव की महिलाओं की आमदनी और घर की अर्थव्यवस्था दोनों को सीधा फायदा हो रहा है. सवाल-जवाब 1. विनीता बाई कहां की रहने वाली हैं? वे मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले से 20 किलोमीटर दूर स्थित झिरमिठी गांव की रहने वाली हैं. 2. विनीता बाई ने कितनी पढ़ाई की है? वे सातवीं कक्षा में फेल हो गई थीं और इसके आगे पढ़ाई नहीं कर पाईं. 3. विनीता पहले क्या करती थीं? वे पहले पूरी तरह गृहणी थीं और घर पर ही रहती थीं, कोई काम नहीं करती थीं. 4. विनीता को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण कैसे मिला? यह प्रशिक्षण उन्हें स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद मिला. 5. विनीता कितनी जमीन पर खेती करती हैं? उनके परिवार के पास कुल 10 एकड़ जमीन है, जिसमें से 1 एकड़ पर वे प्राकृतिक खेती और 9 एकड़ पर मिक्स खेती करती हैं. 6. मिक्स खेती में वे क्या उगाती हैं? वे सोयाबीन के साथ कपास और सब्जी भाजी लगाती हैं. 7. विनीता की सालाना कमाई कितनी है? वे हर साल 2 से 3 लाख रुपये की कमाई कर लेती हैं. 8. क्या विनीता को इस काम के लिए कोई सम्मान मिला है? हां, जिला प्रशासन उन्हें इस काम के लिए सम्मानित कर चुका है. 9. विनीता कितने लोगों को रोजगार दे रही हैं? वे फिलहाल 8 से 10 लोगों को रोजगार दे रही हैं, जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं. 10. विनीता की आगे की क्या योजना है? वे दूसरे किसानों की जमीन भी लेकर उस पर प्राकृतिक खेती करने की योजना बना रही हैं, ताकि और महिलाओं को रोजगार मिल सके. प्रेरणा और सबक • पहला मौका गंभीरता से लें: विनीता ने स्वयं सहायता समूह से मिले अपने पहले ही प्रशिक्षण को गंभीरता से लिया और उसी को बदलाव की नींव बनाया. • मौजूदा संसाधनों में नवाचार करें: नई जमीन खरीदने के बजाय उन्होंने परिवार के केले के खेत में ही प्राकृतिक खेती का प्रयोग शुरू किया. • पूरा जोखिम एक साथ न लें: उन्होंने पूरी जमीन प्राकृतिक खेती में न झोंककर सिर्फ 1 एकड़ में प्रयोग किया और बाकी 9 एकड़ में मिक्स खेती जारी रखी. • परिवार का साथ मायने रखता है: पति शिवप्रसाद के सहयोग ने उनकी मिक्स खेती को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई. • सिर्फ खुद तक सीमित न रहें: कमाई के साथ-साथ उन्होंने 8 से 10 लोगों, खासकर महिलाओं को रोजगार देने का लक्ष्य रखा और अब और आगे बढ़ने की योजना बना रही हैं. https://trendkia.com/success-stories/satavin-men-phela-ho-chukin-burhanpur-ki-vinita-bai-aba-prakritika-kheti-se-kama-rahin-lakhon-rupaye-12541 TrendKia — Har trend, sabse pehle.