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  "type": "article",
  "title": "शिवहर की रेनू कुमारी ने जीविका से ऋण लेकर शुरू किया ट्रॉली बैग निर्माण, हर महीने 2 लाख रुपये तक की कमाई",
  "summary": "शिवहर जिले के फतेहपुर कहतरवा गांव की रहने वाली रेनू कुमारी ने जीविका समूह से 1 लाख रुपये का कर्ज लेकर ट्रॉली बैग का कारोबार शुरू किया, जिससे आज उनका पूरा परिवार आत्मनिर्भर बन चुका है।",
  "content": "बिहार के शिवहर जिले में स्थित फतेहपुर कहतरवा गांव की निवासी रेनू कुमारी ने आर्थिक तंगी से बाहर निकलकर स्वावलंबन का एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। कभी दाने-दाने को तरसने वाले परिवार की इस महिला ने अपनी मेहनत और जीविका योजना के सहयोग से एक सफल ट्रॉली बैग निर्माण इकाई स्थापित की है। 1 लाख रुपये के प्रारंभिक ऋण से शुरू हुआ यह छोटा सा प्रयास आज एक बड़ा और समृद्ध व्यवसाय बन चुका है, जिससे उनका परिवार हर महीने लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहा है।\n\nआर्थिक तंगी से जीविका समूह से जुड़ने तक का सफर\nएक समय ऐसा था जब रेनू कुमारी के परिवार के सामने दैनिक गुजर-बसर और भोजन जुटाने का गंभीर संकट बना हुआ था। उनके पति दूसरों के यहां दिहाड़ी मजदूरी करके किसी तरह परिवार की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करते थे। हालांकि, मजदूरी से होने वाली सीमित आय के कारण आर्थिक तंगी बनी रहती थी और जीवन का निर्वाह करना बेहद कठिन था। इस विकट परिस्थिति में रेनू कुमारी ने हिम्मत नहीं हारी और खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का निश्चय किया। उन्होंने वर्ष 2014 में बिहार सरकार की जीविका योजना के तहत संचालित महिला समूह से जुड़ने का कदम उठाया।\n\nवर्ष 2024 में 1 लाख के कर्ज से शुरू किया ट्रॉली बैग निर्माण\nजीविका समूह में शामिल होने के बाद रेनू कुमारी ने आत्मनिर्भर बनने का अपना सपना साकार करने की दिशा में काम शुरू किया। वर्ष 2024 में उन्होंने समूह के माध्यम से 1 लाख रुपये का व्यावसायिक ऋण प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग करके उन्होंने घर पर ही ट्रॉली बैग निर्माण की एक छोटी सी इकाई शुरू की। शुरुआत में छोटे स्तर पर तैयार किए गए बैग्स की गुणवत्ता और डिजाइन को स्थानीय लोगों ने खूब सराहा। धीरे-धीरे उनके बनाए ट्रॉली बैग्स की मांग तेजी से बढ़ने लगी और यह व्यवसाय एक बड़े उद्यम में परिवर्तित हो गया।\n\nचार जिलों में सप्लाई और हर महीने 1 से 2 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा\nआज रेनू कुमारी द्वारा निर्मित ट्रॉली बैग्स का दायरा केवल शिवहर जिले तक सीमित नहीं है। उनके उत्पाद अब पड़ोसी जिलों सीतामढ़ी, मधुबनी और पिपराड़ी सहित आसपास के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर सप्लाई किए जा रहे हैं। बैग निर्माण की कच्ची सामग्री, बिजली, परिवहन और अन्य सभी निर्माण खर्चों को काटने के उपरांत वे वर्तमान में हर महीने 1 से 2 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा अर्जित कर रही हैं। इस शानदार कमाई ने उनके परिवार के जीवन की पूरी दिशा बदल दी है।\n\nदिहाड़ी मजदूर पति बने व्यवसाय के मालिक, धूमधाम से हुई बेटी की शादी\nव्यापार में मिली इस जबरदस्त सफलता का सबसे सकारात्मक प्रभाव उनके पारिवारिक जीवन पर पड़ा है। जो पति पहले दूसरों के यहां मजदूरी करने के लिए मजबूर थे, वे अब किसी अन्य के यहां काम पर जाने के बजाय अपने ही इस घरेलू व्यवसाय में पूरे परिवार के साथ हाथ बंटा रहे हैं और मालिक की भूमिका निभा रहे हैं। इससे न केवल परिवार की आय में भारी वृद्धि हुई है, बल्कि सदस्यों के बीच आपसी तालमेल और एकता भी मजबूत हुई है। बच्चों की शिक्षा-दीक्षा का खर्च अब बिना किसी कठिनाई के पूरा हो रहा है। हाल ही में रेनू कुमारी ने इसी व्यवसाय की कमाई से अपनी एक बेटी का विवाह भी बहुत धूमधाम के साथ संपन्न कराया है।\n\nसक्षम दीदी बनकर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता\nआर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने के बाद रेनू कुमारी अब समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। वे स्वयं एक सक्षम दीदी के रूप में कार्यरत हैं और दीदी अधिकार केंद्र के माध्यम से अन्य ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण में जुटी हुई हैं। वे नियमित रूप से विभिन्न महिला समूहों और ग्राम संगठनों में जाकर महिलाओं को घरेलू हिंसा एवं बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूक करती हैं। इसके अलावा, वे महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर उन्हें अपना उद्यम शुरू करने और स्वावलंबी बनने की निरंतर प्रेरणा दे रही हैं।\n\nइसका आप पर असर\nभारत भर में: ग्रामीण विकास योजनाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बैंक ऋण लेकर लघु उद्योग शुरू करने की अपार संभावनाएं सामने आती हैं।\n\nबिहार और शिवहर में: जीविका समूह से जुड़ी महिलाएं मात्र 1 लाख रुपये के ऋण से अपना खुद का उत्पाद तैयार कर मासिक 1 से 2 लाख रुपये तक की कमाई का मार्ग अपना सकती हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शिवहर की रेनू कुमारी ने कौन सा व्यवसाय शुरू किया?\nरेनू कुमारी ने शिवहर जिले में ट्रॉली बैग निर्माण का व्यवसाय शुरू किया है।\n\n2. रेनू कुमारी ने व्यवसाय शुरू करने के लिए कितना ऋण लिया था?\nउन्होंने वर्ष 2024 में जीविका समूह के माध्यम से 1 लाख रुपये का व्यावसायिक ऋण लिया था।\n\n3. ट्रॉली बैग व्यवसाय से रेनू कुमारी को हर महीने कितना शुद्ध मुनाफा होता है?\nसभी खर्च और लागत काटने के बाद उन्हें हर महीने 1 से 2 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा होता है।\n\n4. रेनू कुमारी द्वारा निर्मित ट्रॉली बैग्स कहां-कहां सप्लाई होते हैं?\nउनके ट्रॉली बैग्स शिवहर के अलावा सीतामढ़ी, मधुबनी और पिपराड़ी जैसे पड़ोसी इलाकों में सप्लाई किए जा रहे हैं।\n\n5. सक्षम दीदी के रूप में रेनू कुमारी क्या काम करती हैं?\nवे दीदी अधिकार केंद्र और ग्राम संगठनों के जरिए महिलाओं को घरेलू हिंसा व बाल विवाह के प्रति जागरूक करती हैं और उन्हें व्यवसाय शुरू करने का प्रशिक्षण देती हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nसंघर्ष से अवसर: अत्यंत विषम आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद हार मानने के बजाय सरकारी एवं सामाजिक योजनाओं (जैसे जीविका) का लाभ उठाकर आगे बढ़ें।\n\nपारिवारिक सहयोग: स्वयं के व्यवसाय में परिवार के सदस्यों की प्रतिभा और श्रम का उपयोग कर उन्हें मजदूरी के चक्र से निकालकर मालिक बनाएं।\n\nउत्पाद की गुणवत्ता: छोटे स्तर से शुरुआत करके गुणवत्ता और क्षेत्रीय मांग के बल पर 4 पड़ोसी जिलों तक बाजार का विस्तार किया जा सकता है।\n\nसामाजिक दायित्व: स्वयं सफल होने के बाद सक्षम दीदी बनकर अन्य महिलाओं को अधिकार और कुरीतियों के खिलाफ जागरूक करें।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-08-08",
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    "शिवहर समाचार",
    "रेनू कुमारी",
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    "बिहार जीविका ऋण"
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