# शुद्धता को बनाया हथियार, रांची की बहनों ने खड़ा किया करोड़ों रुपये का कारोबार, 100 महिलाओं को मिला रोजगार

> रांची की दो बहनों गौरी और पूनम ने पॉकेट मनी से ऑर्गेनिक अफेयर नाम की कंपनी शुरू की, जो आज करोड़ों रुपये के सालाना टर्नओवर के साथ 100 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार दे रही है।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-07-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/shuddhata-ko-banaya-hathiyara-ranchi-ki-bahanon-ne-khara-kiya-karoron-rupaye-ka-karobara-100-mahilaon-ko-mila-rojagara-4849 · **Language:** Hindi
**Tags:** ऑर्गेनिक अफेयर, रांची बिजनेस, महिला उद्यमी, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी, स्टार्टअप सक्सेस स्टोरी, महिला रोजगार

झारखंड की राजधानी रांची में गौरी और पूनम नाम की दो बहनों ने अपनी पॉकेट मनी और बची हुई पूंजी को जोड़कर एक ऐसा कारोबार खड़ा किया है, जो आज सालाना करोड़ों रुपये का टर्नओवर दे रहा है। दोनों बहनों की कंपनी का नाम है ऑर्गेनिक अफेयर, और आज इसमें 100 से ज्यादा महिलाएं काम कर रही हैं।

## नौकरी के सहारे लिया बड़ा रिस्क
गौरी बताती हैं कि यह फैसला आसान नहीं था। उनके पास आजीविका के लिए सिर्फ एक ही नौकरी थी, फिर भी दोनों बहनों ने अपनी बचत को दांव पर लगाने की हिम्मत दिखाई। कारोबार शुरू करने से पहले उन्होंने बाजार को अच्छी तरह खंगाला। इस रिसर्च में उन्हें पता चला कि मसालों की खपत साल के हर दिन बनी रहती है, यानी यह ऐसा सेगमेंट है जिसमें मांग कभी थमती नहीं।

## आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों पर दांव
मसालों के साथ-साथ दोनों बहनों ने अश्वगंधा, आंवला, रीठा, शिकाकाई और त्रिफला जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के शुद्ध पाउडर पर भी फोकस किया, क्योंकि बाजार में इनकी मांग भी लगातार बनी रहती है। पूनम कहती हैं कि ग्राहकों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि जो आंवला पाउडर वे खरीद रहे हैं, वह असली है या उसमें मिलावट है। बाजार में बिकने वाले उत्पादों की प्रामाणिकता को लेकर यही शक ग्राहकों को परेशान करता रहा है।

## शुद्धता बनी सबसे बड़ी पहचान
दोनों बहनों ने ग्राहकों के इसी शक को खत्म करने पर पूरा जोर लगाया। ऑर्गेनिक अफेयर ने शुद्धता को ही अपनी सबसे बड़ी यूएसपी बना लिया। जब ग्राहकों को 100% शुद्ध उत्पाद और उसका असर दिखना शुरू हुआ, तो वे बार-बार खरीदारी करने लगे। धीरे-धीरे कंपनी के पास ग्राहकों का एक बड़ा और भरोसेमंद नेटवर्क तैयार हो गया।

## ऑर्डर बढ़े तो 100 महिलाओं को मिला काम
कंपनी की साख जैसे-जैसे बढ़ी, ऑर्डर्स की संख्या भी तेजी से बढ़ने लगी। इतने सारे ऑर्डर अकेले संभाल पाना दोनों बहनों के लिए मुमकिन नहीं रहा। ऐसे में उन्होंने आसपास की स्थानीय महिलाओं को अपने साथ जोड़ना शुरू किया। आज 100 से ज्यादा महिलाएं कंपनी में प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का काम संभाल रही हैं, और कंपनी इन्हें बाकायदा ट्रेनिंग भी देती है।

## ईमानदारी को बताया सफलता की जड़
पूनम गर्व से कहती हैं, "एक समय हम खुद रोजगार की तलाश में थे और आज हम दूसरी महिलाओं को रोजगार दे रहे हैं। पिछले 6 सालों के इस सफर में हमारी ईमानदारी ही हमारी सबसे बड़ी ताकत रही है।" इसी ईमानदारी और मेहनत की बदौलत आज कंपनी का सालाना टर्नओवर करोड़ों रुपये तक पहुंच चुका है। बाजार की मांग के हिसाब से यह आंकड़ा हर साल दो से चार करोड़ रुपये के बीच रहता है। रांची की इन दोनों बहनों की यह कहानी सिर्फ उनके परिवार के लिए ही गर्व की बात नहीं है, बल्कि समाज की दूसरी महिलाओं और युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता की एक मिसाल बन गई है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह कहानी दिखाती है कि सीमित पूंजी और सही मार्केट रिसर्च से महिलाएं ऑर्गेनिक और आयुर्वेदिक उत्पादों के कारोबार में करोड़ों रुपये तक का बिजनेस खड़ा कर सकती हैं।
- **रांची में:** स्थानीय महिलाओं के लिए यह सीधा रोजगार का मौका है, अभी 100 से ज्यादा महिलाएं इसी कंपनी में प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का काम करके कमाई कर रही हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. ऑर्गेनिक अफेयर की शुरुआत किसने की?
रांची की दो बहनों गौरी और पूनम ने पॉकेट मनी और बची हुई पूंजी से ऑर्गेनिक अफेयर की शुरुआत की।

### 2. कंपनी किन उत्पादों का कारोबार करती है?
कंपनी मसालों के साथ-साथ अश्वगंधा, आंवला, रीठा, शिकाकाई और त्रिफला जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के शुद्ध पाउडर बेचती है।

### 3. कंपनी में फिलहाल कितनी महिलाएं काम कर रही हैं?
फिलहाल 100 से ज्यादा महिलाएं कंपनी में प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का काम संभाल रही हैं।

### 4. कंपनी का सालाना टर्नओवर कितना है?
बाजार की मांग के अनुसार कंपनी का सालाना टर्नओवर दो से चार करोड़ रुपये के बीच रहता है।

### 5. कंपनी की सबसे बड़ी यूएसपी क्या है?
उत्पादों की 100% शुद्धता ही ऑर्गेनिक अफेयर की सबसे बड़ी पहचान है।

### 6. यह सफर कितने साल पुराना है?
पूनम के मुताबिक यह सफर पिछले 6 सालों से चल रहा है।

### 7. कंपनी महिलाओं को किस तरह की मदद देती है?
कंपनी से जुड़ी महिलाओं को प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के काम के लिए बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है।

## प्रेरणा और सबक
- **पहले मार्केट को समझें:** बिजनेस शुरू करने से पहले गौरी और पूनम ने रिसर्च करके पाया कि मसालों की मांग हर दिन बनी रहती है, इसी आधार पर उन्होंने सही सेगमेंट चुना।
- **एक मजबूत यूएसपी तय करें:** ग्राहकों के मन में मिलावट को लेकर उठते सवालों को समझकर उन्होंने शुद्धता को ही अपनी पहचान बना लिया।
- **सीमित संसाधनों से भी शुरुआत मुमकिन है:** दोनों बहनों ने सिर्फ पॉकेट मनी और बची पूंजी से यह सफर शुरू किया था।
- **ग्रोथ के साथ दूसरों को जोड़ें:** ऑर्डर बढ़ने पर अकेले संभालने के बजाय उन्होंने स्थानीय महिलाओं को ट्रेनिंग देकर टीम में शामिल किया।
- **ईमानदारी बनाए रखें:** पूनम के मुताबिक 6 साल के इस सफर में ईमानदारी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है।

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