मध्य प्रदेश के सीधी में पीएम स्वनिधि से खुली जूते-चप्पल की दुकान, रोजाना 2 हजार तक कमाने लगे श्यामलाल कोरोना काल में आजीविका खोने के बाद सीधी के श्यामलाल जायसवाल ने पीएम स्वनिधि योजना की मदद से जूते-चप्पल की दुकान शुरू की। अब वे प्रतिदिन 1 से 2 हजार रुपये कमाकर परिवार को मजबूत सहारा दे रहे हैं। दृढ़ निश्चय और कठिन परिश्रम के बल पर साधारण शुरुआत भी एक मजबूत कारोबार का रूप ले सकती है। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में रहने वाले श्यामलाल जायसवाल ने इस बात को धरातल पर साबित कर दिखाया है। एक दौर ऐसा था जब वे दूसरों के यहां मजदूरी और नौकरी करने को मजबूर थे, लेकिन आज वे स्वाभिमान के साथ अपनी खुद की दुकान चला रहे हैं। उन्होंने मात्र 20 हजार रुपये की बेहद सीमित पूंजी जुटाकर फुटवियर का काम शुरू किया था, जिससे आज उन्हें प्रतिदिन 1,000 रुपये से लेकर 2,000 रुपये तक की आमदनी हासिल हो रही है। इस सतत प्रयास ने उनके समूचे परिवार के रहन-सहन और माली हालत को पूरी तरह बदल दिया है। महामारी के संकट में बिखर गई थी आजीविका सीधी जिले के नूतन कॉलोनी के निवासी श्यामलाल जायसवाल के जीवन में यह मोड़ अचानक नहीं आया, बल्कि इसके पीछे एक कड़ा संघर्ष रहा है। कोरोना काल की विषम परिस्थितियों के दौरान उनका पुराना काम-धंधा पूरी तरह ठप पड़ गया था। आमदनी का जरिया छिन जाने के कारण उनके सामने गहरा आर्थिक संकट पैदा हो गया था और रोजमर्रा के घरेलू खर्चे जुटाना भी बेहद कठिन हो गया था। ऐसे नाजुक दौर में मायूस होकर बैठ जाने के बजाय उन्होंने दोबारा हिम्मत जुटाई और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में नए सिरे से कदम बढ़ाने का पक्का इरादा किया। पीएम स्वनिधि से मिला सहारा और जुटाए 20 हजार रुपये नए सिरे से आजीविका शुरू करने की राह में सबसे बड़ी रुकावट पूंजी की कमी थी। इस समस्या को सुलझाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्राप्त की। सरकारी योजना से मिली आर्थिक मदद में उन्होंने अपनी बची-खुची जमा पूंजी को जोड़ा और कुल मिलाकर लगभग 20 हजार रुपये का शुरुआती फंड तैयार किया। इसी सीमित बजट से उन्होंने जूते और चप्पलों की एक छोटी सी रिटेल दुकान की नींव रखी। काम भले ही बहुत छोटे पैमाने पर शुरू हुआ था, लेकिन उन्हें अपनी कार्यक्षमता और लगन पर अटूट भरोसा था कि वे इसे आगे बढ़ाने में सफल होंगे। मानस भवन के निकट ग्राहकों की पसंद बना प्रतिष्ठान श्यामलाल जायसवाल ने सीधी जिले के मानस भवन के समीप अपनी दुकान स्थापित की। बाजार में खुद को स्थापित करने के लिए उन्होंने ग्राहकों की विभिन्न जरूरतों और उनके बजट को ध्यान में रखते हुए फुटवियर की कई वैरायटी उपलब्ध करानी शुरू कीं। किफायती दामों पर टिकाऊ और सुविधाजनक जूते-चप्पल मिलने के कारण धीरे-धीरे उनकी दुकान पर खरीदारों की तादाद में लगातार इजाफा होता गया। ग्राहकों का भरोसा बढ़ने से दुकान का पहिया चल पड़ा और बिक्री में नियमित तेजी आने लगी। मासिक 30 हजार और सालाना लाखों में पहुंची कमाई बिक्री बढ़ने के साथ ही दुकान से होने वाले मुनाफे ने रफ्तार पकड़ी। दुकान के संचालन से श्यामलाल अब हर रोज करीब 1,000 से 2,000 रुपये के बीच कमाई कर रहे हैं। इस दैनिक आमदनी के हिसाब से वे हर महीने लगभग 30 हजार रुपये अर्जित कर लेते हैं, जो साल भर में लाखों रुपये का कारोबार और आमदनी बन जाती है। कभी 20 हजार रुपये की न्यूनतम लागत से खड़ा किया गया यह प्रयास आज उनके घरेलू खर्चों और परिवार की खुशहाली की मुख्य धुरी बन चुका है। मजदूरी छोड़कर बने खुद के काम के मालिक अपने अतीत को याद करते हुए श्यामलाल बताते हैं कि पहले वे अपनी जरूरतों के लिए दूसरों के यहां मजदूरी करने पर निर्भर रहते थे, किंतु आज वे खुद के कारोबार के स्वतंत्र संचालक हैं। वे अपनी व्यक्तिगत मेहनत के दम पर सम्मानजनक कमाई कर रहे हैं और परिवार को एक सुरक्षित भविष्य दे रहे हैं। उनका यह सफर साफ संदेश देता है कि यदि इंसान सच्ची निष्ठा और लगन से काम में जुट जाए, तो साधनों की तंगी भी मंजिल की राह नहीं रोक सकती। इसका आप पर असर यह समाचार दर्शाता है कि सरकारी सूक्ष्म ऋण योजनाओं का सही इस्तेमाल करके कम पूंजी में भी आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है। • भारत में: यह उदाहरण साबित करता है कि पीएम स्वनिधि जैसी योजनाएं छोटे कारोबारियों के लिए संकटमोचक साबित हो सकती हैं। असंगठित क्षेत्र के कामगार मामूली पूंजी सहायता लेकर स्वतंत्र व्यापार की शुरुआत कर सकते हैं। • मध्य प्रदेश के सीधी में: स्थानीय निवासियों और छोटे दुकानदारों के लिए यह एक व्यावहारिक सीख है कि नजदीकी बाजार में बजट अनुकूल सामान बेचकर स्थायी आजीविका बनाई जा सकती है। आसपास के लोग भी ऐसी योजनाओं के माध्यम से अपने रोजगार के साधन खड़े कर सकते हैं। • सीमित पूंजी वाले युवाओं के लिए: 20 हजार जैसी छोटी रकम से भी खुदरा व्यापार शुरू किया जा सकता है। भारी बजट न होने पर भी सुनियोजित योजना से लाभप्रद दुकान चलाई जा सकती है। • दैनिक कमाई की संभावना: खुदरा फुटवियर जैसे नित्य उपयोग के उत्पादों में रोज 1,000 से 2,000 रुपये तक की नकदी कमाई संभव है। इससे पारिवारिक वित्तीय संकट को शीघ्रता से दूर किया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ कोरोना संकट के कारण पुराना काम बंद हो जाने के बाद उत्पन्न वित्तीय संकट ने श्यामलाल को नए सिरे से दुकान खोलने के लिए प्रेरित किया। • महामारी जनित व्यावसायिक ठहराव: कोरोना काल के दौरान श्यामलाल का पुराना काम-धंधा पूरी तरह बंद हो गया था। इसके चलते उनके पास आय का कोई नियमित स्रोत नहीं बचा और घर का खर्च चलाना कठिन हो गया। • पीएम स्वनिधि योजना का वित्तीय संबल: आर्थिक तंगी के बीच भारत सरकार की पीएम स्वनिधि योजना ने उन्हें जरूरी ऋण उपलब्ध कराया। सरकारी योजना की इस सहायता में उन्होंने अपनी बचत मिलाकर आवश्यक पूंजी तैयार की। • किफायती विकल्पों और सही स्थान का चयन: उन्होंने मानस भवन के निकट दुकान स्थापित की और हर बजट के ग्राहकों के लिए जूते-चप्पल उपलब्ध कराए। इस रणनीति ने ग्राहकों का विश्वास जीता और उनका व्यवसाय तेजी से चल पड़ा। सवाल-जवाब 1. श्यामलाल जायसवाल कहां के रहने वाले हैं? श्यामलाल जायसवाल मध्य प्रदेश के सीधी जिले की नूतन कॉलोनी के निवासी हैं। 2. उन्होंने जूते-चप्पल की दुकान कितनी पूंजी लगाकर शुरू की थी? उन्होंने पीएम स्वनिधि योजना से मिली सहायता और अपने पैसे मिलाकर कुल 20 हजार रुपये की पूंजी से दुकान शुरू की थी। 3. श्यामलाल की दुकान सीधी में किस स्थान पर स्थित है? उनकी जूते-चप्पल की दुकान सीधी जिले में मानस भवन के पास स्थित है। 4. दुकान से उनकी प्रतिदिन और महीने की कमाई कितनी होती है? उन्हें रोजाना 1 हजार से 2 हजार रुपये की कमाई होती है, जिससे महीने में लगभग 30 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। 5. नया कारोबार शुरू करने से पहले श्यामलाल क्या करते थे? अपना स्वतंत्र व्यापार शुरू करने से पहले श्यामलाल दूसरों के यहां मजदूरी और नौकरी किया करते थे। प्रेरणा और सबक श्यामलाल जायसवाल की यात्रा यह सिखाती है कि सीमित संसाधनों और गंभीर संकट के बीच भी हिम्मत और सही योजना से आत्मनिर्भर बना जा सकता है। • संकट को नई शुरुआत में बदलें: जब कोरोना काल में पुराना काम पूरी तरह ठप हो गया, तो उन्होंने हताश होने के बजाय नए सिरे से अपने पैरों पर खड़े होने का संकल्प लिया। • सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाएं: पूंजी के अभाव में रुकने के स्थान पर उन्होंने पीएम स्वनिधि योजना से मदद ली और अपने सीमित संसाधनों को जोड़कर व्यापार प्रारंभ किया। • शुरुआत के आकार से न घबराएं: मात्र 20 हजार रुपये की न्यूनतम राशि से दुकान शुरू करके उन्होंने दिखाया कि लगन और ईमानदारी से छोटा काम भी बड़ा व्यवसाय बन सकता है। • ग्राहकों की जरूरत को प्राथमिकता दें: मानस भवन के पास दुकान खोलकर उन्होंने हर वर्ग के बजट के अनुसार जूते-चप्पल रखे, जिससे ग्राहकों का भरोसा जीता जा सका। https://trendkia.com/success-stories/sidhi-men-pm-svanidhi-se-khuli-jute-chappala-ki-dukana-rojana-2-hajara-taka-kamane-lage-shyamlal-54060 TrendKia — Har trend, sabse pehle.