सीकर के रामदेव सिंह मील को स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति भवन से न्योता, जानिए किडनी ट्रांसप्लांट से वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स तक का प्रेरक सफर राजस्थान के सीकर निवासी और बिजली विभाग के टेक्नीशियन रामदेव सिंह मील 15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एट होम रिसेप्शन में शामिल होंगे। दोनों किडनी खराब होने के बाद खेलों में कई पदक जीतने वाले रामदेव का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात में भी कर चुके हैं। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित कंवरपुरा गांव के निवासी रामदेव सिंह मील के लिए आगामी 15 अगस्त का दिन बेहद ऐतिहासिक होने जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर उन्हें राष्ट्रपति भवन से आधिकारिक बुलावा भेजा गया है। बिजली विभाग में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत रामदेव सिंह को 15 अगस्त की शाम राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र (आरबीसीसी) में आयोजित होने वाले एट होम रिसेप्शन में भाग लेने का गौरव प्राप्त हुआ है। राष्ट्रपति भवन की ओर से मिले निमंत्रण पत्र में उनका नाम शामिल है और कार्यक्रम से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां उन्हें प्राप्त हो चुकी हैं। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस गरिमामय समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश भर से आए चुनिंदा अतिथियों की मेजबानी करेंगी और उनसे सीधा संवाद करेंगी। स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती और मां का अमूल्य समर्पण रामदेव सिंह का यह मुकाम आसान नहीं था, बल्कि इसके पीछे संघर्ष और अटूट इच्छाशक्ति की एक मिसाल छिपी है। वर्ष 2012 में उनका जीवन एक बहुत बड़े संकट से घिरा, जब उनकी दोनों किडनी अचानक फेल हो गईं। इसके बाद उनका जीवन अस्पताल की चौखट और इलाज के मुश्किल दौर के बीच सिमट कर रह गया था। ऐसे नाजुक समय में उनकी मां ने ममता और साहस का परिचय देते हुए अपनी एक किडनी दान की। मां के इस जीवनदायिनी उपहार और लंबे चले इलाज के बाद रामदेव सिंह धीरे-धीरे स्वस्थ हुए। रिकवरी के बाद उन्होंने अपनी बची हुई जिंदगी को सिर्फ सामान्य रूटीन तक सीमित रखने के बजाय खेल के मैदान में पसीना बहाने का फैसला किया और नए लक्ष्य निर्धारित किए। ट्रांसप्लांट गेम्स में पदकों की चमक और वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व स्वास्थ्य में सुधार आने के बाद रामदेव सिंह ने एथलेटिक्स और खेलों में कड़ी मेहनत शुरू की। उनकी यह तपस्या जल्द ही रंग लाई, जब उन्होंने मुंबई में आयोजित नेशनल ट्रांसप्लांट गेम्स में हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता में उन्होंने पहली बार में ही स्वर्ण और रजत पदक सहित कई पदक जीतकर अपनी खेल क्षमता का लोहा मनवाया। इसके बाद दोबारा मुंबई में आयोजित हुए नेशनल ट्रांसप्लांट गेम्स में भी उन्होंने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा और दो रजत पदक हासिल किए। राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस सफलता के बाद उनका चयन अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए हुआ, जहां उन्होंने वर्ष 2025 में जर्मनी के ड्रेसडेन शहर में आयोजित वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में भारतीय दल का प्रतिनिधित्व किया और तिरंगे का मान बढ़ाया। मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की सराहना असाधारण जिजीविषा और खेल के प्रति रामदेव सिंह के इस समर्पण का संज्ञान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लिया। प्रधानमंत्री ने अपने प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 131वें एपिसोड में रामदेव सिंह की जीवन यात्रा का विशेष रूप से उल्लेख किया था। उन्होंने देशवासियों के सामने रामदेव के संघर्ष, मां के बलिदान और खेल के मैदान में हासिल की गई उपलब्धियों को एक प्रेरणादायक मिसाल के रूप में प्रस्तुत किया था। प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम में चयन होने और खेल जगत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के कारण ही रामदेव सिंह को इस वर्ष राष्ट्रपति भवन के इस विशेष आयोजन के लिए आमंत्रित लोगों की सूची में जगह मिली है। जानिए क्या है राष्ट्रपति भवन का ऐतिहासिक एट होम रिसेप्शन राष्ट्रपति भवन का एट होम रिसेप्शन भारत का एक प्रतिष्ठित और पारंपरिक आधिकारिक स्वागत समारोह माना जाता है। इसकी मेजबानी स्वयं देश के राष्ट्रपति करते हैं। यह गरिमामयी आयोजन हर साल गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी और स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त जैसे बड़े राष्ट्रीय पर्वों पर आयोजित किया जाता है। इस समारोह में देश के प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों, अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों, विदेशी मेहमानों के साथ-साथ उन नागरिकों को विशेष रूप से निमंत्रित किया जाता है, जिन्होंने अपने असाधारण कार्यों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया हो। इस उत्सव के दौरान देश के विभिन्न राज्यों की लोक कला, हस्तशिल्प, पारंपरिक संगीत और विविध संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है, जहां सभी आगंतुकों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया जाता है। अंग प्रत्यारोपण करा चुके लोगों के लिए बन चुके हैं मिसाल आज भी रामदेव सिंह मील अपनी दैनिक ट्रेनिंग दिनचर्या को पूरी लगन के साथ जारी रखते हैं। वह न केवल खुद को शारीरिक रूप से फिट रख रहे हैं, बल्कि अंग प्रत्यारोपण करा चुके अन्य व्यक्तियों के बीच जाकर उनका हौसला भी बढ़ाते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना है कि किसी गंभीर बीमारी या ट्रांसप्लांट के बाद जिंदगी खत्म नहीं होती, बल्कि इंसान अपनी रुचि के अनुसार खेलों या अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़कर बड़ी सफलता हासिल कर सकता है। आगामी 15 अगस्त को शाम 6 बजे आरबीसीसी में होने वाले इस कार्यक्रम में रामदेव सिंह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे और अपने इस प्रेरक अनुभव को देश के अन्य विशिष्ट अतिथियों के साथ साझा करेंगे। इसका आप पर असर भारत में: यह कहानी देश भर में अंग प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को सामान्य जीवन जीने और खेलों में आगे बढ़ने की नई उम्मीद देती है। सीकर (राजस्थान) में: सीकर जिले के एक साधारण सरकारी कर्मचारी का राष्ट्रपति भवन के एट होम रिसेप्शन में चुना जाना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। सवाल-जवाब 1. रामदेव सिंह मील कौन हैं और उन्हें राष्ट्रपति भवन से बुलावा क्यों मिला है? रामदेव सिंह मील राजस्थान के सीकर जिले के कंवरपुरा गांव के निवासी हैं और बिजली विभाग में टेक्नीशियन हैं। खेलों में शानदार प्रदर्शन और सामाजिक प्रेरणा बनने के कारण उन्हें 15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन के एट होम रिसेप्शन में आमंत्रित किया गया है। 2. राष्ट्रपति भवन में एट होम रिसेप्शन कब और कहां आयोजित होगा? यह विशेष समारोह 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) की शाम 6 बजे राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र (आरबीसीसी) में आयोजित किया जाएगा, जिसकी मेजबानी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी। 3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामदेव सिंह का जिक्र किस कार्यक्रम में किया था? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 131वें एपिसोड में रामदेव सिंह के जीवन संघर्ष और खेल उपलब्धियों की सराहना की थी। 4. रामदेव सिंह ने खेल जगत में कौन-कौन सी उपलब्धियां हासिल की हैं? उन्होंने मुंबई में नेशनल ट्रांसप्लांट गेम्स में स्वर्ण और रजत पदक जीते हैं। इसके अलावा वर्ष 2025 में जर्मनी के ड्रेसडेन में आयोजित वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। 5. रामदेव सिंह की सेहत से जुड़ी क्या चुनौती थी और वह कैसे ठीक हुए? वर्ष 2012 में उनकी दोनों किडनी फेल हो गई थीं। इसके बाद उनकी मां ने अपनी एक किडनी दान देकर उन्हें नया जीवन प्रदान किया था, जिसके बाद वह ठीक होकर खेलों में आगे बढ़े। प्रेरणा और सबक संघर्ष को ताकत बनाना: साल 2012 में दोनों किडनी फेल होने जैसी जानलेवा स्थिति के बावजूद रामदेव सिंह ने हार नहीं मानी और ठीक होने के बाद एथलेटिक्स में खुद को साबित किया। परिवार का निस्वार्थ समर्थन: संकट के समय में मां द्वारा किडनी दान करना यह सिखाता है कि अपनों का निस्वार्थ सहयोग किसी भी बड़ी चुनौती को पार करा सकता है। सीमाओं से आगे सोचना: अंग प्रत्यारोपण के बाद केवल सामान्य जीवन तक सीमित न रहकर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों में पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। दूसरों का मार्गदर्शन: सफलता हासिल करने के बाद भी वह नियमित ट्रेनिंग करते हैं और अन्य ट्रांसप्लांट मरीजों को खेलों से जुड़ने के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं। https://trendkia.com/success-stories/sikar-ke-ramdev-singh-meel-ko-svatntrata-divasa-para-rashtrapati-bhavan-se-nyota-janie-kidani-transaplanta-se-world-transplant-gam-14293 TrendKia — Har trend, sabse pehle.