सिरोही के आमथला में 21 साल की कॉलेज छात्रा संगीता गरासिया ने जीता सरपंच चुनाव सिरोही की आमथला ग्राम पंचायत में बीए फाइनल ईयर की 21 वर्षीय छात्रा संगीता कुमारी गरासिया सरपंच निर्वाचित हुई हैं। फैक्ट्री मजदूर की बेटी संगीता ने अपनी प्रतिद्वंद्वी को 47 वोटों के अंतर से मात दी। राजस्थान के सिरोही जिले में पंचायती राज व्यवस्था के भीतर युवाओं की भागीदारी की एक बेहद प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। आबूरोड पंचायत समिति के तहत आने वाली आमथला ग्राम पंचायत में 21 साल की आदिवासी युवती संगीता कुमारी गरासिया ने सरपंच पद का चुनाव जीतकर जिम्मेदारी संभाली है। संगीता वर्तमान में बीए तृतीय वर्ष की छात्रा हैं और उनके पिता एक स्थानीय औद्योगिक इकाई में दैनिक मजदूर के रूप में काम करते हैं। पढ़ाई जारी रखने के साथ ही उन्होंने अब अपने पूरे गांव के प्रशासनिक और विकास कार्यों की बागडोर अपने हाथों में ली है। आरक्षण और घर-घर जनसंपर्क से तय हुआ चुनावी सफर आमथला ग्राम पंचायत में जब सरपंच पद अनुसूचित जनजाति (एसटी) महिला वर्ग के लिए आरक्षित घोषित हुआ, तब संगीता कुमारी गरासिया और उनके परिजनों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का निर्णय लिया। नामांकन के पश्चात उन्होंने पारंपरिक रैलियां निकालने के अलावा प्रत्येक मोहल्ले में घर-घर जाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और समर्थन मांगा। चुनाव के दिन मतदाताओं ने उन पर गहरा भरोसा जताया। मतगणना संपन्न होने के बाद घोषित परिणामों में संगीता ने 47 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। चुनावी आंकड़ों के अनुसार, विजेता संगीता को कुल 836 वोट हासिल हुए, जबकि उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी के खाते में 789 वोट आए थे। कॉलेज की पढ़ाई के साथ बुनियादी ढांचा सुधारने का संकल्प संगीता आबूरोड स्थित राजकीय महाविद्यालय से कला वर्ग में स्नातक (बीए) के अंतिम वर्ष की पढ़ाई पूरी कर रही हैं। अपनी उच्च शिक्षा जारी रखने के साथ-साथ वह पंचायत के समग्र उत्थान के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करने का इरादा रखती हैं। उनका प्राथमिक ध्यान गांव की आवश्यक नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। इसमें ग्रामीण सड़कों की मरम्मत, जल निकासी के लिए पक्की नालियों का निर्माण, शुद्ध पेयजल की निरंतर आपूर्ति और निर्बाध बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है। जिन मजरों और बस्तियों में मार्ग क्षतिग्रस्त हैं, वहां नई सड़कों का निर्माण कराया जाएगा और जहां अब तक विद्युत लाइनें नहीं पहुंच पाई हैं, उन अंधेरे कोनों तक रोशनी पहुंचाना उनकी कार्ययोजना का मुख्य हिस्सा है। फैक्ट्री श्रमिक की बेटी की ग्रामीण नेतृत्व तक की यात्रा एक साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाली संगीता का यह सफर पूरे क्षेत्र के लिए उल्लेखनीय है। उनके पिता वीरमाराम गरासिया आमथला स्थित मॉडर्न इंसुलेटर फैक्ट्री में इंसुलेटर निर्माण का कार्य करते हैं। एक सामान्य कामकाजी परिवार से निकलकर पंचायत के सर्वोच्च पद तक पहुंचना उनके और समाज दोनों के लिए बड़ा बदलाव है। अपनी शिक्षा के दम पर संगीता उन सभी अटके हुए सार्वजनिक कार्यों को पूरा कराने का प्रयास करेंगी जो पहले नहीं हो सके। उनका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी और लाभ पंचायत के अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी ढंग से पहुंचे। इसका आप पर असर आमथला ग्राम पंचायत के निवासियों को अब एक युवा और शिक्षित जनप्रतिनिधि मिला है जो प्रशासनिक योजनाओं और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करेगा। • राजस्थान में: पंचायती राज संस्थाओं में शिक्षित ग्रामीण युवाओं और विशेष रूप से महिलाओं के नेतृत्व को बल मिलेगा। इससे राज्य की अन्य ग्राम पंचायतों में भी युवा वर्ग सार्वजनिक सेवा में आने के लिए प्रेरित होगा। • सिरोही में: आमथला ग्राम पंचायत के निवासियों को लंबे समय से प्रतीक्षित सड़क, नाली, बिजली और स्वच्छ पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का त्वरित समाधान मिलेगा। साथ ही सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंच सकेगा। • विद्यार्थियों के लिए: कॉलेज में अध्ययनरत अन्य युवाओं को यह संदेश मिलेगा कि औपचारिक शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी दोनों को एक साथ निभाया जा सकता है। इससे उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं में स्थानीय नेतृत्व के प्रति रुचि बढ़ेगी। • स्थानीय मतदाताओं के लिए: 47 मतों के मामूली अंतर की यह जीत दर्शाती है कि पंचायत चुनाव में प्रत्येक नागरिक के व्यक्तिगत मत का कितना निर्णायक महत्व होता है। ग्रामवासी अब सीधे अपने प्रतिनिधि से गांव के अधूरे कार्यों के निपटारे की मांग कर सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ आमथला ग्राम पंचायत में 21 साल की कॉलेज छात्रा का सरपंच पद पर चुना जाना पंचायती राज आरक्षण व्यवस्था और व्यक्तिगत जनसंपर्क का सीधा परिणाम है। • आरक्षण व्यवस्था का प्रभाव: आमथला ग्राम पंचायत में सरपंच की सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) महिला वर्ग के लिए आरक्षित घोषित हुई थी। इस संवैधानिक व्यवस्था के कारण सामान्य परिवार से आने वाली एक युवा और शिक्षित युवती के लिए चुनावी मैदान में उतरने का मार्ग प्रशस्त हुआ। • सघन व्यक्तिगत जनसंपर्क: केवल सार्वजनिक रैलियों पर निर्भर रहने के बजाय संगीता और उनके परिवार ने गांव के हर घर में जाकर सीधे मतदाताओं से मुलाकात की। इस जमीनी संपर्क और सीधा संवाद स्थापित करने की रणनीति ने मतदाताओं के बीच गहरा विश्वास पैदा किया। • कड़े मुकाबले में मतों का ध्रुवीकरण: चुनाव में कड़ा मुकाबला देखने को मिला जहां कुल मतदान में मुख्य प्रतिद्वंद्वी को 789 वोट मिले। संगीता 836 वोट हासिल करने में सफल रहीं, जिससे 47 मतों के स्पष्ट अंतर ने उनकी जीत सुनिश्चित कर दी। सवाल-जवाब 1. संगीता कुमारी गरासिया किस ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गई हैं? संगीता कुमारी गरासिया राजस्थान के सिरोही जिले में आबूरोड पंचायत समिति की आमथला ग्राम पंचायत से सरपंच चुनी गई हैं। 2. सरपंच चुनाव जीतने के समय संगीता की उम्र और शैक्षणिक योग्यता क्या है? संगीता की उम्र 21 वर्ष है और वह आबूरोड के राजकीय महाविद्यालय से बीए तृतीय वर्ष (अंतिम वर्ष) की पढ़ाई कर रही हैं। 3. संगीता कुमारी गरासिया के पिता क्या काम करते हैं? उनके पिता वीरमाराम गरासिया आमथला स्थित मॉडर्न इंसुलेटर फैक्ट्री में इंसुलेटर बनाने का काम करते हैं। 4. संगीता ने सरपंच का चुनाव कितने मतों के अंतर से जीता? संगीता ने अपनी प्रतिद्वंद्वी को 47 वोटों के अंतर से हराया; उन्हें कुल 836 वोट मिले थे जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी को 789 वोट मिले थे। 5. सरपंच बनने के बाद संगीता की गांव के विकास को लेकर क्या प्राथमिकताएं हैं? वह अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ गांव में टूटी सड़कों की मरम्मत, पक्की नालियों का निर्माण, पानी की आपूर्ति और बिजली से वंचित क्षेत्रों को रोशन करने पर काम करेंगी। प्रेरणा और सबक 21 साल की उम्र में एक साधारण परिवार की छात्रा का सरपंच बनना यह साबित करता है कि सीमित संसाधन कभी बड़े सामाजिक बदलाव की राह में बाधा नहीं बनते। • शिक्षा से सशक्तिकरण: कॉलेज में नियमित पढ़ाई करते हुए सामाजिक और प्रशासनिक दायित्वों की ओर कदम बढ़ाना दिखाता है कि शिक्षा युवाओं को नेतृत्व करने का साहस देती है। युवा अपने ज्ञान का उपयोग समाज के पिछड़ेपन को दूर करने में कर सकते हैं। • पारिवारिक पृष्ठभूमि की सीमाओं को तोड़ना: पिता के फैक्ट्री मजदूर होने के बावजूद पंचायत के सर्वोच्च पद तक पहुंचना दर्शाता है कि लगन और सेवा भाव से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि कभी बड़ी जिम्मेदारियां निभाने में रुकावट नहीं बनती। • जमीनी जुड़ाव की ताकत: चुनाव में बड़ी रैलियों की जगह घर-घर जाकर लोगों के सुख-दुख को सुनना मतदाताओं का अटूट भरोसा जीतने का सबसे प्रभावी तरीका है। विनम्रता और सीधा जनसंपर्क हर चुनौती को पार करने में मदद करता है। https://trendkia.com/success-stories/sirohi-ke-amathala-men-21-sala-ki-koleja-chhatra-sangeeta-garasiya-ne-jita-sarapncha-chunava-55703 TrendKia — Har trend, sabse pehle.