सिर्फ 11 हजार रुपये में झारखंड के स्कूली बच्चों ने बना डाला ऑटोमैटिक सोलर ड्रायर, किसानों की बदल सकती है तकदीर बोकारो के कसमार के एक सरकारी स्कूल के चार छात्रों ने धूप से चलने वाला स्मार्ट सोलर ड्रायर तैयार किया है, जो फल, सब्जी और औषधीय पत्तियों को साफ-सुथरे तरीके से जल्दी सुखाता है और छोटे किसानों के लिए कमाई का नया रास्ता खोल सकता है। संसाधन कम हों तो भी हुनर रुकता नहीं, यह बात बोकारो जिले के कसमार प्रखंड के प्लस टू उच्च विद्यालय दांतू के चार बच्चों ने सच कर दिखाई है। 12वीं विज्ञान के पूनम पाल, आलोक कुमार, परी कुमारी और भीम नायक ने मिलकर एक स्मार्ट सोलर ड्रायर बनाया है, जो सूरज की ताकत से फल, सब्जियां, पत्तियों और खेती के उत्पादों को साफ और तेजी से सुखा देता है। गांव की रोजमर्रा की दिक्कत से निकला आइडिया इस ड्रायर को बनाने वाले आलोक कुमार बताते हैं कि उन्हें इसका ख्याल अपने ही दांतू गांव के हालात देखकर आया। यहां कई किसान और छोटे विक्रेता फल-सब्जी को सही-सलामत रखने के लिए जूझते रहते हैं। अक्सर उनका माल खराब हो जाता है, क्योंकि उन्हें खुले में धूल और गंदगी के बीच ही चीजें सुखानी पड़ती हैं। इसी परेशानी का हल ढूंढने के लिए चारों दोस्तों ने आपस में बात की और तय किया कि कुछ ऐसा बनाएंगे जो सूरज की ऊर्जा से उत्पादों को साफ-सुथरे और तेज तरीके से सुखा सके। स्कूल में पहले भी सीनियर छात्र सोलर ट्री जैसी कई सौर ऊर्जा वाली परियोजनाएं बना चुके थे, उन्हीं से इन बच्चों को हौसला मिला। कैसे काम करता है यह उपकरण कई महीनों की लगातार रिसर्च और प्रयोगों के बाद यह स्मार्ट सोलर ड्रायर बनकर तैयार हुआ। यह सूरज की रोशनी से मिलने वाली ऊर्जा और तापमान को संभालकर फल, सब्जियां, चिप्स, हर्बल पत्तियां और दूसरे उत्पादों को हाइजीनिक ढंग से सुखाता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह ऑटोमैटिक है। अलग-अलग चीजों के हिसाब से इसमें तापमान सेट करने की सुविधा भी है। मौसम खराब होने पर भी यह उत्पादों को सुरक्षित रखने में काम आता है। छोटे किसानों की कमाई बढ़ाने का मकसद पूनम पाल बताती हैं कि अभी जो मॉडल तैयार है, उसमें एक बार में करीब 5 से 6 किलोग्राम सामान सुखाया जा सकता है। इनका मकसद इस तकनीक को गांव के छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंचाना है। उन्होंने आगे कहा कि मोरिंगा यानी सहजन की पत्तियों, नीम की पत्तियों और दूसरे औषधीय पौधों को सुखाकर उनका पाउडर बनाया जा सकता है। इस पाउडर को आयुर्वेदिक उत्पाद के तौर पर बाजार में बेचा जा सकता है, जिससे किसानों के लिए कमाई का एक नया जरिया खुल सकता है। सोलर पैनल और सेंसर तकनीक का मेल आलोक कुमार के मुताबिक, इस स्मार्ट सोलर ड्रायर में 50 वाट का सोलर पैनल, पारदर्शी कांच वाला बॉक्स, सेंसर, आर्डुइनो, फैन, एलसीडी डिस्प्ले और कीपैड लगाया गया है। इन्हीं तकनीकों की मदद से उत्पादों को तय तापमान पर वैज्ञानिक तरीके से सुखाया जाता है। इस परियोजना को कामयाब बनाने में स्कूल के शिक्षक अनिमेष का अहम सहयोग रहा। बच्चों को इस नई खोज के लिए फेलोशिप के जरिए आर्थिक मदद भी मिली। पूरे मॉडल को बनाने में करीब 11 हजार रुपये का खर्च आया है। आगे AI वाला मॉडल बनाने की तैयारी बच्चों का कहना है कि वे भविष्य में इस स्मार्ट सोलर ड्रायर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित तकनीक से और उन्नत बनाना चाहते हैं, ताकि यह बड़े पैमाने पर हर किसी के काम आ सके। फिलहाल भी इन छात्रों की यह कोशिश काबिले-तारीफ है और किसानों के बड़े काम आ सकती है। इसका आप पर असर • भारत में: छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह सस्ती तकनीक फल-सब्जी और औषधीय पत्तियों को खराब होने से बचाकर सुखाने और बेचने का नया रास्ता दे सकती है। • बोकारो (झारखंड) में: कसमार और आसपास के किसान मोरिंगा-नीम जैसी पत्तियों का पाउडर बनाकर आयुर्वेदिक उत्पाद के तौर पर बेचकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। सवाल-जवाब 1. यह स्मार्ट सोलर ड्रायर किसने बनाया है? इसे बोकारो जिले के कसमार प्रखंड स्थित प्लस टू उच्च विद्यालय दांतू के 12वीं विज्ञान के चार छात्रों पूनम पाल, आलोक कुमार, परी कुमारी और भीम नायक ने मिलकर बनाया है। 2. यह ड्रायर एक बार में कितना सामान सुखा सकता है? अभी जो मॉडल तैयार है, वह एक बार में करीब 5 से 6 किलोग्राम सामग्री सुखा सकता है। 3. इस मॉडल को बनाने में कितना खर्च आया? पूरे मॉडल को तैयार करने में करीब 11 हजार रुपये की लागत आई है। 4. इस ड्रायर में किन तकनीकों का इस्तेमाल हुआ है? इसमें 50 वाट का सोलर पैनल, पारदर्शी कांच वाला बॉक्स, सेंसर, आर्डुइनो, फैन, एलसीडी डिस्प्ले और कीपैड लगाया गया है। 5. यह ड्रायर किसानों के लिए कैसे फायदेमंद है? यह फल-सब्जी और पत्तियों को साफ-सुथरे तरीके से सुखाता है, और मोरिंगा व नीम जैसी पत्तियों का पाउडर बनाकर आयुर्वेदिक उत्पाद के रूप में बेचने से किसानों को कमाई का नया जरिया मिल सकता है। 6. क्या आगे इसमें कोई बदलाव की योजना है? छात्रों का लक्ष्य भविष्य में इस ड्रायर को AI आधारित तकनीक से और उन्नत बनाना है, ताकि यह बड़े पैमाने पर हर किसी के काम आ सके। प्रेरणा और सबक • समस्या को पास से देखो: आलोक और उनके साथियों ने अपने ही गांव की दिक्कत को पहचाना और उसी का हल बनाने की ठानी, बड़े आइडिया अक्सर रोजमर्रा की परेशानी से ही निकलते हैं। • सीनियर से सीखो: स्कूल के सीनियर छात्रों के सोलर प्रोजेक्ट देखकर इन बच्चों को प्रेरणा मिली, यानी आसपास मौजूद उदाहरण ही सबसे बड़ी सीख बन सकते हैं। • लगातार मेहनत: कई महीनों की रिसर्च और बार-बार प्रयोग के बाद ही मॉडल तैयार हुआ, सफलता एक झटके में नहीं मिलती। • कम बजट में भी बड़ा काम: सिर्फ 11 हजार रुपये में उपयोगी उपकरण बनाकर इन्होंने दिखाया कि पैसे की कमी हुनर को नहीं रोक सकती। • सही मदद लो: शिक्षक अनिमेष के सहयोग और फेलोशिप की आर्थिक मदद का सही इस्तेमाल कर इन्होंने अपने विचार को हकीकत में बदला। https://trendkia.com/success-stories/sirpha-11-hajara-rupaye-men-jharkhand-ke-skuli-bachchon-ne-bana-dala-tomaitika-solara-drayara-kisanon-ki-badala-sakati-hai-takadir-2676 TrendKia — Har trend, sabse pehle.