# सीतामढ़ी में 3 बीघा ज़मीन से सालाना 4.50 लाख रुपये का मुनाफा, बाजिदपुर के किसान वृजनंदन मुखिया ने तय किया सफलता का सफर

> बिहार के सीतामढ़ी जिले स्थित बाजिदपुर गांव के किसान वृजनंदन मुखिया पिछले 30 सालों से सब्जियों की खेती कर रहे हैं। तीन बीघा जमीन में विभिन्न मौसमी फसलें उगाकर वह हर साल 4.50 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ कमा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-11-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/sitamarhi-men-3-bigha-zamina-se-salana-4-50-lakha-rupaye-ka-munapha-bajidpur-ke-kisana-brijnandan-mukhia-ne-taya-kiya-saphalata-ka-57883 · **Language:** Hindi
**Tags:** सब्जियों की खेती, सीतामढ़ी, किसान की सफलता, वृजनंदन मुखिया, बिहार कृषि, खेती से कमाई

ग्रामीण युवाओं के बीच खेती को लेकर अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि इसमें मुनाफा कम और जोखिम अधिक है। लेकिन बिहार के सीतामढ़ी जिले में स्थित बाजिदपुर गांव के किसान वृजनंदन मुखिया ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। वह पिछले 25 से 30 वर्षों से लगातार हरी सब्जियों की खेती कर रहे हैं। मात्र 3 बीघा जमीन पर योजनाबद्ध तरीके से काम करके वह हर साल ₹4 लाख से ₹4.50 लाख तक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। उनकी यह सफलता साबित करती है कि अगर सही मेहनत और देखभाल की जाए, तो सब्जियों की खेती परिवार की आजीविका का एक बेहद मजबूत आधार बन सकती है।

## नौकरी की मजबूरी से आगे बढ़कर खेती को बनाया आधार
वृजनंदन मुखिया बताते हैं कि उन्होंने स्कूली शिक्षा हासिल नहीं की थी, जिसके कारण उनके लिए बाहर जाकर नौकरी हासिल करना बेहद कठिन था। ऐसी स्थिति में उन्होंने दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपने पूर्वजों के पारंपरिक काम को आगे बढ़ाने का फैसला किया। उन्होंने पूरी लगन के साथ सब्जियों की खेती की शुरुआत की। आज इसी काम से घर का राशन-पानी, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और परिवार की तमाम दैनिक जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं।

लगभग 10 साल पहले खेती से इतनी अधिक कमाई नहीं होती थी। लेकिन बीते एक दशक में परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है। सब्जियों की मांग बढ़ने और बेहतर देखभाल से उत्पादन सुधरने के कारण उनकी आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। आज उनकी यह पहल न केवल उनके परिवार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना चुकी है, बल्कि गांव के अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा बनी है।

## 3 बीघा खेत में मौसमी सब्जियों का बेहतरीन प्रबंधन
सीमित जमीन से अधिकतम मुनाफा कमाने के लिए फसलों का सही चुनाव बहुत जरूरी होता है। वृजनंदन मुखिया अपनी 3 बीघा जमीन पर पूरे साल विविध प्रकार की मौसमी सब्जियां उगाते हैं। उनके खेतों में मुख्य रूप से गोभी, मूली, बैंगन, आलू और भिंडी जैसी रोजाना मांग वाली फसलें लहलहाती हैं।

विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगाने से उन्हें हर मौसम में बाजार से लगातार नकद आमदनी मिलती रहती है। यदि किसी एक फसल का दाम बाजार में कम भी मिलता है, तो दूसरी फसल से उसकी भरपाई हो जाती है। यह विविधता उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाती है और पूरे साल आय का जरिया बनाए रखती है।

## दिन-रात की मेहनत और खेती के मुख्य चरण
खेती से बेहतर पैदावार हासिल करना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए बुवाई से लेकर कटाई तक लगातार देखभाल की जरूरत होती है। फसल चक्र की शुरुआत खेत की जुताई और तैयारी से होती है, ताकि मिट्टी उपजाऊ और बीजों के अनुकूल बन सके।

बीज रोपने के बाद समय पर सिंचाई करना, आवश्यक खाद डालना और कीटनाशक दवाओं का संतुलित छिड़काव करना बेहद जरूरी होता है। वृजनंदन मुखिया के अनुसार, हर फसल पर बारीकी से नजर रखनी पड़ती है। सही समय पर पानी और पोषण न मिलने से पैदावार की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर बाजार में मिलने वाले दामों और कुल मुनाफे पर पड़ता है।

## युवाओं के लिए प्रेरणा और आत्मनिर्भरता का संदेश
वार्षिक ₹4.50 लाख तक का शुद्ध लाभ यह दर्शाता है कि छोटे स्तर पर की जाने वाली खेती भी एक व्यावसायिक रूप ले सकती है। वृजनंदन मुखिया का 25 से 30 सालों का समृद्ध अनुभव आज के उन युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है जो रोजगार की तलाश में शहरों की ओर भागते हैं।

उनका मानना है कि यदि पारंपरिक खेती के तरीकों में निष्ठा, मेहनत और सही समय प्रबंधन को जोड़ा जाए, तो जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा भी व्यक्ति को आर्थिक रूप से पूरी तरह सशक्त और आत्मनिर्भर बना सकता है।

## इसका आप पर असर
सब्जियों की व्यवस्थित खेती छोटे किसानों को आर्थिक आत्मनिर्भरता और बेहतर आजीविका प्रदान कर सकती है।

- **भारत में:** कम ज़मीन वाले किसान मौसमी फसलों के चक्र को अपनाकर पूरे साल स्थिर आय अर्जित कर सकते हैं। विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती करने से बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम हो जाता है।
- **बिहार में:** सीतामढ़ी और आसपास के जिलों के ग्रामीण युवा खेती में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर रोजगार के लिए पलायन की निर्भरता कम कर सकते हैं। स्थानीय स्तर पर सब्जियों के उत्पादन से क्षेत्रीय बाजारों में ताजी सब्जियों की आपूर्ति भी सुधरती है।

## ऐसा क्यों हुआ
छोटे आकार के खेतों से बेहतर मुनाफा हासिल होने के पीछे व्यवस्थित योजना और बाजार की बढ़ती मांग मुख्य कारक हैं।

- **रोजगार के विकल्पों का अभाव:** औपचारिक शिक्षा न होने के कारण बाहर नौकरी मिलना कठिन था, जिससे किसान ने अपनी पैतृक भूमि पर खेती को मुख्य व्यवसाय चुना।
- **फसलों की विविधता:** गोभी, बैंगन, मूली, आलू और भिंडी जैसी रोजाना मांग वाली सब्जियां उगाने से बाजार में लगातार आपूर्ति बनी रहती है।
- **नियमित देखभाल और प्रबंधन:** समय पर खेत की जुताई, संतुलित सिंचाई, खाद का प्रयोग और कीटनाशक छिड़काव से फसल की पैदावार और गुणवत्ता बेहतर हुई।
- **बाजार की स्थिति में सुधार:** पिछले 10 वर्षों में स्थानीय और क्षेत्रीय बाजारों में ताजी सब्जियों की बढ़ती मांग ने किसानों के लाभ मार्जिन को काफी बढ़ाया है।

## सवाल-जवाब

### 1. सीतामढ़ी के किस किसान ने सब्जियों की खेती में सफलता हासिल की है?
बिहार के सीतामढ़ी जिले स्थित बाजिदपुर गांव के किसान वृजनंदन मुखिया ने सब्जियों की खेती से यह मुकाम हासिल किया है।

### 2. वृजनंदन मुखिया कितने बीघा खेत में सब्जियों की खेती करते हैं?
वह लगभग 3 बीघा ज़मीन पर विभिन्न प्रकार की मौसमी सब्जियों की खेती करते हैं।

### 3. सब्जियों की खेती से उनकी सालाना शुद्ध कमाई कितनी है?
वह सब्जियों की खेती से सालाना लगभग ₹4 लाख से ₹4.50 लाख तक का शुद्ध मुनाफा कमाते हैं।

### 4. वह अपने खेतों में मुख्य रूप से कौन सी सब्जियां उगाते हैं?
उनके खेतों में मुख्य रूप से गोभी, मूली, बैंगन, आलू और भिंडी जैसी मौसमी सब्जियां उगाई जाती हैं।

### 5. उन्होंने खेती को ही अपनी आजीविका का मुख्य साधन क्यों चुना?
पढ़ा-लिखा न होने के कारण बाहर नौकरी मिलना मुश्किल था, इसलिए उन्होंने अपने पूर्वजों के काम को अपनाकर खेती की शुरुआत की।

## प्रेरणा और सबक
वृजनंदन मुखिया की 30 वर्षों की यात्रा छोटे किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए व्यावहारिक सीख प्रदान करती है।

- **सीमित साधनों को ताकत बनाएं:** औपचारिक डिग्री न होने पर भी व्यावहारिक कौशल और मेहनत के दम पर बड़ा आर्थिक मुकाम हासिल किया जा सकता है।
- **उत्पादन में विविधता लाएं:** एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय कई सब्जियां उगाने से नुकसान का जोखिम घटता है और आय बनी रहती है।
- **दैनिक कार्यों में अनुशासन रखें:** खेती में समय पर पानी, खाद और सुरक्षा का ध्यान रखकर ही पैदावार की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है।
- **समय के साथ बदलाव अपनाएं:** बाजार की मांग के अनुरूप खेती के तरीकों में सुधार करके छोटे खेत से भी बड़ा लाभ कमाया जा सकता है।

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