सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग छोड़ बस्ती निवासी सुजीत चौधरी ने रायबरेली में खड़ा किया 350 एकड़ का मछली पालन कारोबार बस्ती के सुजीत चौधरी ने अमेरिका की सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर रायबरेली में मछली पालन शुरू किया और आज 350 एकड़ में 23 तालाबों से सालाना 600 से 700 टन मछली का उत्पादन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के वाल्टरगंज में रहने वाले सुजीत चौधरी कभी अमेरिका की एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हुआ करते थे, लेकिन विदेश में उनका दिल नहीं लगा और वह अपने गांव लौट आए। आज वही सुजीत रायबरेली में 350 एकड़ जमीन पर मछली पालन का बड़ा कारोबार खड़ा कर चुके हैं और सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं। कंपनी से लेकर मछली पालन तक का सफर गांव लौटने के बाद सुजीत ने सबसे पहले अपने माता-पिता की देखभाल शुरू की और साथ ही अपनी खुद की सॉफ्टवेयर कंपनी बनाने की ठानी। साल 2016 में उन्होंने नोएडा में यह कंपनी खोली। कंपनी अच्छी तरह चलने लगी तो सुजीत ने सोचा कि क्यों न माता-पिता के पास रहकर कोई और कारोबार भी शुरू किया जाए। इसी सोच के साथ वह अपने माता-पिता से मिलने लखनऊ पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात रायबरेली की सहायक मत्स्य निदेशक सुनीता वर्मा से हुई। सुनीता वर्मा ने उन्हें मत्स्य पालन के बारे में विस्तार से बताया और यह भी समझाया कि घर पर रहकर ही मछली पालन के जरिए लाखों की कमाई की जा सकती है और साथ ही कई लोगों को रोजगार भी दिया जा सकता है। यह बात सुजीत के मन में गहरे तक उतर गई। 15 एकड़ से 350 एकड़ तक का विस्तार सुनीता वर्मा से मिली इस जानकारी के बाद सुजीत ने रायबरेली के महाराजगंज तहसील के बावन बुजुर्ग बल्ला गांव में जमीन किराए पर ली। शुरुआत में उन्होंने करीब 15 एकड़ में तालाब बनाकर मछली पालन शुरू किया। धीरे-धीरे यह कारोबार इतना बढ़ा कि आज सुजीत गांव में 350 एकड़ भूमि पर बने 23 तालाबों में मछली पालन कर रहे हैं। सुजीत के मुताबिक वह हर साल इस काम से लाखों रुपये कमा रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने दो दर्जन से ज्यादा लोगों को रोजगार भी दिया है, जो सीधे उनके तालाबों पर काम करते हैं। कौन-कौन सी मछलियां पालते हैं सुजीत सुजीत कुमार बताते हैं कि वह बड़े पैमाने पर आईएमसी यानी इंडियन मेजर क्रॉप के अंतर्गत आने वाली मछलियां जैसे रोहू, कतला और मृगल पालते हैं। इसके अलावा वह अमेरिकी प्रजाति की पंगेशियस मछली और समुद्री झींगा का भी पालन करते हैं। इन मछलियों की सप्लाई विदेशों तक की जाती है, जबकि समुद्री झींगा को मुंबई भेजा जाता है, जहां से इसका निर्यात होता है। कोरोना काल में मिली प्रेरणा और सरकारी सम्मान सुजीत बताते हैं कि कोरोना महामारी के दौरान जब सब कुछ बंद हो गया था, तब प्रधानमंत्री मोदी ने स्टार्टअप योजना के जरिए युवाओं को नया काम शुरू करने के लिए प्रेरित किया था। उन्हीं से प्रेरणा लेकर सुजीत ने मछली पालन का यह काम शुरू किया। उनकी इस मेहनत को सरकार ने भी पहचाना और उन्हें मत्स्य पालन के क्षेत्र में नेशनल बेस्ट फिश फार्मर अवार्ड से सम्मानित किया गया। सुजीत का सपना है कि वह रायबरेली को एक फिश हब के रूप में विकसित करें। मौजूदा समय में उनके तालाबों से हर साल 600 से 700 टन तक मछली का उत्पादन हो रहा है। आधुनिक तकनीक से मछलियों की देखभाल सुजीत चौधरी अपने मछली पालन के काम में आधुनिक तकनीक का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। तेज गर्मी के मौसम में मछलियों को नुकसान से बचाने के लिए उन्होंने तालाबों में एयरेटर सिस्टम भी लगवाया है, जिससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर बना रहता है और मछलियां भीषण गर्मी में भी सुरक्षित रहती हैं। इसका आप पर असर • भारत में: यह कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर गांव लौटकर भी मत्स्य पालन जैसे कारोबार से अच्छी आमदनी की जा सकती है, जो शहर की नौकरी पर निर्भर युवाओं को नई राह दिखा सकती है। • रायबरेली में: सुजीत के इस कारोबार से दो दर्जन से ज्यादा स्थानीय लोगों को सीधा रोजगार मिल रहा है, और रायबरेली को फिश हब बनाने की उनकी योजना से आने वाले समय में और नौकरियां बन सकती हैं। सवाल-जवाब 1. सुजीत चौधरी कौन हैं? सुजीत चौधरी उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के वाल्टरगंज के रहने वाले हैं, जो पहले अमेरिका की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और अब रायबरेली में मछली पालन का बड़ा कारोबार चलाते हैं। 2. सुजीत ने मछली पालन कैसे शुरू किया? लखनऊ में अपने माता-पिता से मिलने आए सुजीत की मुलाकात रायबरेली की सहायक मत्स्य निदेशक सुनीता वर्मा से हुई, जिन्होंने उन्हें मत्स्य पालन के फायदे बताए और इसी से प्रेरित होकर उन्होंने यह काम शुरू किया। 3. सुजीत का मछली पालन कारोबार कितना बड़ा है? सुजीत रायबरेली के बावन बुजुर्ग बल्ला गांव में 350 एकड़ भूमि पर बने 23 तालाबों में मछली पालन कर रहे हैं। 4. सुजीत किन-किन मछलियों का पालन करते हैं? वह रोहू, कतला और मृगल जैसी आईएमसी मछलियों के साथ-साथ अमेरिकी प्रजाति की पंगेशियस मछली और समुद्री झींगा का भी पालन करते हैं। 5. उनकी मछलियां कहां भेजी जाती हैं? उनकी मछलियां विदेशों तक सप्लाई की जाती हैं, जबकि समुद्री झींगा को मुंबई भेजा जाता है, जहां से इसका निर्यात होता है। 6. सुजीत के कारोबार से कितने लोगों को रोजगार मिला है? सुजीत के मछली पालन कारोबार से दो दर्जन से ज्यादा लोगों को सीधा रोजगार मिल रहा है। 7. सुजीत को कौन सा सम्मान मिल चुका है? सरकार की ओर से उन्हें मत्स्य पालन के क्षेत्र में नेशनल बेस्ट फिश फार्मर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। 8. सुजीत सालाना कितनी मछली का उत्पादन करते हैं? वर्तमान में सुजीत के तालाबों से हर साल 600 से 700 टन मछली का उत्पादन हो रहा है। प्रेरणा और सबक • बड़ा शहर या विदेश की नौकरी छोड़ना असफलता नहीं है, अगर वहां मन न लगे तो अपनी जड़ों की ओर लौटकर नया रास्ता तलाशना भी एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है। • सही व्यक्ति से मिली सही सलाह जिंदगी बदल सकती है, सुजीत की जिंदगी सहायक मत्स्य निदेशक सुनीता वर्मा से हुई एक मुलाकात से ही नई दिशा में मुड़ गई। • छोटी शुरुआत से न घबराएं, सुजीत ने महज 15 एकड़ के एक तालाब से शुरुआत की थी, जो आज 350 एकड़ और 23 तालाबों तक पहुंच चुकी है। • अपने काम के साथ-साथ दूसरों को भी रोजगार देने की सोच रखें, सुजीत ने अपने कारोबार से दो दर्जन से अधिक लोगों को सीधा रोजगार दिया है। • सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहन का फायदा उठाना सीखें, कोरोना काल में प्रधानमंत्री मोदी की स्टार्टअप योजना से प्रेरणा लेकर ही सुजीत ने यह काम शुरू किया था। https://trendkia.com/success-stories/sophtaveyara-injiniyaringa-chhora-basti-nivasi-sujeet-chaudhary-ne-raebareli-men-khara-kiya-350-ekara-ka-machhali-palana-karobara-8801 TrendKia — Har trend, sabse pehle.