# श्रीमांत फाउंडेशन ने बाढ़ पीड़ितों के बच्चों के लिए शुरू किया प्रोजेक्ट सारथी

> श्रीमांत फाउंडेशन ने असम के बाढ़ प्रभावित बच्चों की शिक्षा और देखभाल के लिए प्रोजेक्ट सारथी की शुरुआत की है, जिसके तहत वित्तीय मदद और व्यक्तिगत मेंटर दिए जाएंगे।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-08-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/srimanta-foundation-launches-project-sarathi-to-support-flood-affected-children-18139 · **Language:** Hindi
**Tags:** श्रीमांत फाउंडेशन, असम बाढ़, प्रोजेक्ट सारथी, बाल कल्याण, शिक्षा सहायता, शिवसागर

श्रीमांत फाउंडेशन ने असम में आई हालिया बाढ़ से भारी मुसीबतों का सामना करने वाले बच्चों के लिए एक लंबी अवधि की कल्याणकारी योजना शुरू की है। इस नए कार्यक्रम का नाम प्रोजेक्ट सारथी रखा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य आपदा की मार झेल चुके बच्चों को निरंतर शैक्षणिक और व्यक्तिगत संबल प्रदान करना है ताकि उनकी पढ़ाई और भविष्य सुरक्षित रह सके।

 

## चयनित बच्चों की पात्रता और दायरे

इस विशेष अभियान के शुरुआती चरण के तहत शिवसागर, जोरहाट और चaraideo जिलों के बाढ़ प्रभावित इलाकों से कुल 11 बच्चों को सहायता के वास्ते चुना गया है। इन बच्चों में वे बालक-बालिकाएं शामिल हैं जिन्होंने आपदा के दौरान अपने माता-पिता या उनमें से किसी एक को खो दिया है, जो बेहद कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं, या फिर जिनके परिवार इस भीषण आपदा के चलते पूरी तरह बेघर हो गए हैं।

 

## वित्तीय सहायता की संरचना

योजना के प्रावधानों के अनुसार, चुने गए प्रत्येक बच्चे को पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए हर महीने करीब 700 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस प्रकार यह मदद सालाना 8,400 रुपये बैठती है, जिसमें जरूरत पड़ने पर लगभग 1,600 रुपये तक की अतिरिक्त राशि और जोड़ी जाएगी। इस तरह हर बच्चे के लिए कुल प्रस्तावित वार्षिक सहायता करीब 10,000 रुपये तक पहुंच जाती है।

संस्था ने स्पष्ट किया है कि यह धन राशि केवल और केवल बच्चे की शैक्षणिक आवश्यकताओं पर ही खर्च की जाएगी और इसे किसी भी सूरत में घरेलू खर्चों या पारिवारिक जीवनयापन का साधन नहीं बनाया जा सकता है।

 

## मेंटर सिस्टम और निगरानी प्रक्रिया

प्रोजेक्ट सारथी की सबसे अनूठी विशेषताओं में इसका विशेष मेंटर सिस्टम शामिल है, जिसके अंतर्गत श्रीमांत फाउंडेशन द्वारा प्रत्येक बच्चे के लिए एक व्यक्तिगत मेंटर नियुक्त किया जाएगा। यह मेंटर संस्था और बच्चे के बीच नियमित संपर्क सूत्र की भूमिका निभाएगा तथा बच्चे व उसके परिवार के साथ एक सार्थक संबंध विकसित करने का प्रयास करेगा। मेंटर्स बच्चों के घर नियमित रूप से जाएंगे, उनकी शैक्षणिक प्रगति का आकलन करेंगे, उनकी जरूरतों को समझेंगे और उनकी सामान्य सेहत व कल्याण पर नजर रखेंगे। इसके अलावा, वे यह भी सुनिश्चित करेंगे कि दी जाने वाली वित्तीय मदद का उपयोग पूरी तरह से बच्चे की पढ़ाई पर ही हो रहा है या नहीं।

पारदर्शिता और निरंतर निगरानी बनाए रखने के उद्देश्य से सभी मेंटर्स को हर महीने फाउंडेशन के प्रधान कार्यालय को एक चाइल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस रिपोर्ट में बच्चे की शिक्षा, सामान्य स्थिति, वित्तीय सहायता के उपयोग और उसकी कुल प्रगति का पूरा ब्योरा दर्ज होगा। संस्था का मानना है कि इस व्यवस्था से केवल पैसा बांटने के बजाय प्रत्येक बच्चे के विकास का एक स्पष्ट और निरंतर चित्र सामने बना रहेगा।

 

## सामुदायिक सहयोग और दूरगामी दृष्टिकोण

इस पूरी पहल का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसके लिए आवश्यक धन को समाज के भीतर से ही जुटाया गया है। यह वित्तीय योगदान श्रीमांत फाउंडेशन के सदस्यों, दयालु नागरिकों और उन शुभचिंतकों से एकत्रित किया गया है जो यह दृढ़ता से मानते हैं कि किसी बच्चे की पढ़ाई जारी रखने में मदद करना आपदा से निपटने के सबसे सार्थक तरीकों में से एक है।

संस्था का कहना है कि प्रोजेक्ट सारथी मात्र एक साधारण छात्रवृत्ति योजना से कहीं बढ़कर है, क्योंकि इसका असली मकसद बाढ़ के तुरंत बाद के संकट से आगे बढ़कर भी इन बच्चों के साथ जुड़े रहना और उन्हें लगातार संबल देना है। संस्था समझती है कि बाढ़ जैसी आपदाओं का तात्कालिक असर तो मकान और सामान के नुकसान के रूप में दिखता है, लेकिन बच्चों को इसके दीर्घकालिक परिणामों का भी सामना करना पड़ता है, जिनमें उनकी शिक्षा में रुकावट और भावनात्मक परेशानियां शामिल हैं।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे सामुदायिक अभियानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

**असम में:** शिवसागर, जोरहाट और चराइदेव के बाढ़ पीड़ित परिवारों और अनाथ हुए बच्चों को सीधे तौर पर आर्थिक मदद और व्यक्तिगत मेंटरशिप का संबल मिलेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रोजेक्ट सारथी की शुरुआत किसने की है?
प्रोजेक्ट सारथी की शुरुआत श्रीमांत फाउंडेशन द्वारा की गई है।

### 2. इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य असम के बाढ़ प्रभावित बच्चों को निरंतर शैक्षणिक सहायता और व्यक्तिगत मेंटरशिप प्रदान करना है।

### 3. कितने बच्चों को इस योजना के तहत चुना गया है?
इस पहल के तहत शिवसागर, जोरहाट और चराइदेव से कुल 11 बच्चों को सहायता के लिए चुना गया है।

### 4. प्रत्येक बच्चे को कितनी वित्तीय सहायता मिलेगी?
प्रत्येक बच्चे को पढ़ाई के लिए हर महीने लगभग 700 रुपये यानी सालाना 8,400 रुपये दिए जाएंगे, जो कुल मिलाकर अतिरिक्त जरूरतों के साथ करीब 10,000 रुपये तक हो सकते हैं।

## प्रेरणा और सबक
**समाज की सामूहिक शक्ति:** आपदा राहत केवल सरकार का काम नहीं है, बल्कि समाज के लोग और संस्थाएं मिलकर भी बड़ा बदलाव ला सकती हैं।

**दीर्घकालिक सोच:** तात्कालिक राहत के बाद बच्चों की शिक्षा और भविष्य पर ध्यान देना किसी भी आपदा प्रबंधन का सबसे अहम हिस्सा होता है।

**व्यक्तिगत जुड़ाव और निगरानी:** सिर्फ आर्थिक मदद देना काफी नहीं है, बल्कि मेंटरशिप और नियमित रिपोर्टिंग से यह सुनिश्चित होता है कि सहायता सही जगह पहुंच रही है या नहीं।

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