सुल्तानपुर के इसरार ने कम पढ़ाई के बावजूद पेंटिंग के हुनर से सजाए 8000 से ज्यादा घर सुल्तानपुर के इसरार ने पांचवीं तक की शिक्षा के बाद पेंटिंग के क्षेत्र में 35 साल की मेहनत से मिसाल कायम की है और हजारों घरों को नया रूप दिया है। सुल्तानपुर जिले के हसनपुर गांव के रहने वाले इसरार ने साबित कर दिया है कि किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए बड़ी डिग्रियां होना जरूरी नहीं है, बल्कि सच्ची लगन और मेहनत सबसे अहम होती है। उन्होंने अपनी जिंदगी के सफर में कई मुश्किलों का सामना करते हुए कला और हुनर के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। सिर्फ पांचवीं तक की पढ़ाई और पेंटिंग की शुरुआत इसरार ने अपनी स्कूली शिक्षा केवल पांचवीं कक्षा तक ही पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने अपने गांव में ही पेंटिंग का काम सीखना शुरू किया। शुरुआती दौर में उन्होंने इस कला की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे अनुभव हासिल करते हुए इस काम में पूरी तरह माहिर हो गए। उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि औपचारिक शिक्षा की सीमाएं इंसान के सपनों और उसकी तरक्की को नहीं रोक सकतीं। 35 सालों में 8 हजार से अधिक घरों को सजाया पिछले 35 वर्षों से इसरार लगातार पेंटिंग के पेशे से जुड़े हुए हैं। इस लंबी अवधि के दौरान उन्होंने करीब 8 हजार से अधिक घरों की दीवारों को अपने हाथों से पेंट करके नया रूप दिया है। लगातार तीन दशकों से अधिक समय तक एक ही क्षेत्र में पूरी निष्ठा के साथ काम करना आसान नहीं होता, लेकिन उनके लंबे अनुभव और बेहतरीन कला ने उन्हें क्षेत्र में खास पहचान दिलाई है। उनके लिए यह काम सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि उनकी पहचान का मुख्य आधार है। मासिक कमाई और युवाओं के लिए प्रेरणा अपनी मेहनत के बल पर इसरार आज अच्छी खासी आमदनी अर्जित कर रहे हैं और कई बार उनकी महीने की कमाई 50 हजार रुपये तक पहुंच जाती है, हालांकि यह पूरी तरह से काम की उपलब्धता और मिलने वाले नए ऑर्डर्स पर निर्भर करती है। उनका यह संघर्षशील सफर उन युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है जो कम पढ़े-लिखे होने की वजह से निराश हो जाते हैं। इसरार ने यह दिखा दिया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने भीतर छिपे हुनर को पहचान ले और पूरी ईमानदारी से प्रयास करे, तो वह जीवन में किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता है। सवाल-जवाब 1. इसरार कहां के रहने वाले हैं? इसरार सुल्तानपुर जिले के हसनपुर गांव के निवासी हैं। 2. इसरार ने कहां तक पढ़ाई की है? इसरार ने केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की है। 3. उन्होंने कितने वर्षों तक पेंटिंग का काम किया है? इसरार पिछले 35 सालों से पेंटिंग का काम कर रहे हैं। 4. उन्होंने अब तक कितने घरों की पुताई की है? वह अब तक 8 हजार से अधिक घरों की पुताई कर चुके हैं। 5. उनकी महीने की कमाई कितनी है? वह महीने में कभी-कभी 50 हजार रुपये तक की कमाई करते हैं, जो काम के ऑर्डर पर निर्भर करती है। प्रेरणा और सबक इसरार की सफलता की कहानी से कई महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सीख ली जा सकती हैं: • हुनर को पहचानना: औपचारिक शिक्षा की कमी होने के बावजूद अपने भीतर की कला और कौशल को पहचानकर उसे निखारना बेहद जरूरी है। • निरंतर मेहनत: किसी भी काम में लगातार 35 साल तक टिके रहकर लगन से काम करने पर ही बड़ी सफलता मिलती है। • आत्मविश्वास बनाए रखना: कम पढ़ाई के कारण खुद को कमजोर न समझें, बल्कि अपनी मेहनत के बल पर खुद की अलग पहचान बनाएं। • ईमानदारी से आजीविका: अपने काम के प्रति पूरी निष्ठा और ईमानदारी रखकर समाज में एक मिसाल कायम की जा सकती है। https://trendkia.com/success-stories/sultanpur-ke-israr-ne-kama-parhai-ke-bavajuda-pentinga-ke-hunara-se-sajae-8000-se-jyada-ghara-50330 TrendKia — Har trend, sabse pehle.