सुल्तानपुर के रूपेश साहू ने यूट्यूब से सीखी पेंटिंग, अब हुनर बना कमाई का जरिया और दूसरों को भी सिखा रहे कला सुल्तानपुर के रूपेश साहू ने बिना किसी महंगे संस्थान के, सिर्फ यूट्यूब और इंटरनेट से चित्रकारी सीखकर पहचान बनाई और अब ऑनलाइन ऑर्डर लेकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। हौसला और कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो साधनों की कमी रास्ता नहीं रोक पाती। सुल्तानपुर के रूपेश साहू इसी बात की मिसाल हैं। अपने हाथों के हुनर को ही उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया और आज पेंटिंग व बेहतरीन ड्राइंग के दम पर न सिर्फ अपने परिवार और जिले का नाम रोशन कर रहे हैं, बल्कि इसी कला से अच्छी कमाई भी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, चित्रकारी में दिलचस्पी रखने वाले स्थानीय छात्रों को वे ट्रेनिंग भी देते हैं ताकि वे भी इस फील्ड में आगे बढ़ सकें। रूपेश बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें तस्वीरें बनाने का गहरा शौक था। यही शौक बड़ा होकर उनके करियर की दिशा बन गया और उन्होंने पेंटिंग्स की दुनिया में ही अपना भविष्य तलाशना शुरू कर दिया। यूट्यूब को बनाया गुरु अपने हुनर को निखारने के लिए रूपेश ने किसी महंगे संस्थान का रुख नहीं किया और न ही भारी फीस भरी। उन्होंने सोशल मीडिया और इंटरनेट का सही इस्तेमाल किया। बिना किसी क्लास के, सिर्फ यूट्यूब के सहारे उन्होंने चित्रकारी की बारीकियां सीखीं और अपने हाथों के जादू को धीरे-धीरे तराशा। पोट्रेट से लेकर टी-शर्ट पेंटिंग तक, ऑनलाइन मिल रहे बड़े ऑर्डर इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म से सीखने के बाद आज रूपेश कई तरह के चित्र बनाकर खूब नाम कमा रहे हैं। वे पोट्रेट, लैंडस्केप, टी-शर्ट पेंटिंग और क्राफ्ट वर्क जैसी कई विधाओं में माहिर हैं। खास बात यह है कि अपने इन खूबसूरत चित्रों को वे अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बेचते हैं, जिससे उन्हें अच्छी खासी आमदनी होती है। ऑर्डर मिलने पर ग्राहकों की पसंद के मुताबिक कस्टमाइज्ड पेंटिंग और पोट्रेट भी तैयार करके देते हैं। कबाड़ को बना देते हैं कीमती कलाकृति रूपेश की कला की एक और बड़ी खूबी यह है कि वे बेकार और कबाड़ हो चुकी चीजों को भी बेहद खूबसूरत बना देते हैं। वे बताते हैं कि कहीं भी जाने पर अगर कोई बेकार वस्तु दिख जाए तो उसे फेंकने के बजाय संभालकर अपने पास रख लेते हैं। फिर उस पर अपनी कला और पेंटिंग का ऐसा रंग चढ़ाते हैं कि वही बेकार चीज एक कीमती शो-पीस में बदल जाती है। अब तक वे कई पुराने पत्थरों, फोम और मोबाइल के पुराने कवर्स जैसी तमाम चीजों पर बेहद सुंदर चित्रकारी कर चुके हैं, जिन्हें लोग खूब पसंद करते हैं। इसका आप पर असर • भारत में: रूपेश की कहानी बताती है कि बिना महंगे कोर्स या संस्थान के, सिर्फ यूट्यूब और इंटरनेट के सही इस्तेमाल से कोई भी अपने शौक को कमाई और करियर में बदल सकता है। • सुल्तानपुर में: यहां चित्रकारी सीखने के इच्छुक छात्रों को रूपेश से सीधे ट्रेनिंग का मौका मिल रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार का रास्ता खुल रहा है। सवाल-जवाब 1. रूपेश साहू कौन हैं? रूपेश साहू सुल्तानपुर के रहने वाले एक कलाकार हैं, जो पेंटिंग और ड्राइंग के दम पर पहचान और कमाई कर रहे हैं। 2. रूपेश ने चित्रकारी कहां से सीखी? उन्होंने किसी महंगे संस्थान में दाखिला लिए बिना, सिर्फ यूट्यूब और इंटरनेट के सहारे चित्रकारी सीखी। 3. रूपेश किस तरह की कला बनाते हैं? वे पोट्रेट, लैंडस्केप, टी-शर्ट पेंटिंग और क्राफ्ट वर्क जैसी कई विधाओं में माहिर हैं। 4. रूपेश अपनी कमाई कैसे करते हैं? वे अपने चित्रों को अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचते हैं और ऑर्डर मिलने पर कस्टमाइज्ड पेंटिंग व पोट्रेट भी बनाते हैं। 5. क्या रूपेश दूसरों को भी कला सिखाते हैं? हां, चित्रकारी में रुचि रखने वाले स्थानीय छात्रों को वे ट्रेनिंग देते हैं। 6. रूपेश बेकार चीजों के साथ क्या करते हैं? वे पुराने पत्थर, फोम और मोबाइल के पुराने कवर जैसी बेकार चीजों पर पेंटिंग कर उन्हें कीमती शो-पीस में बदल देते हैं। प्रेरणा और सबक • शौक को करियर बनाएं: रूपेश ने बचपन के ड्राइंग के शौक को गंभीरता से लिया और उसी में अपना भविष्य तलाश लिया। • मुफ्त संसाधनों का पूरा फायदा उठाएं: महंगे संस्थान के बजाय यूट्यूब और इंटरनेट से सीखकर उन्होंने साबित किया कि सीखने के लिए पैसा नहीं, इरादा जरूरी है। • हुनर को कमाई से जोड़ें: उन्होंने सिर्फ कला नहीं सीखी, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए उसे बेचकर आमदनी का जरिया भी बना लिया। • हर चीज में मौका देखें: कबाड़ और बेकार वस्तुओं में भी उन्होंने कीमत देखी और उन्हें कलाकृति में बदल दिया। • ज्ञान बांटें: कमाने के साथ वे दूसरों को भी सिखाते हैं, जिससे उनकी पहचान और प्रभाव दोनों बढ़ते हैं। https://trendkia.com/success-stories/sultanpur-ke-rupesha-sahu-ne-youtube-se-sikhi-pentinga-aba-hunara-bana-kamai-ka-jariya-aura-dusaron-ko-bhi-sikha-rahe-kala-2667 TrendKia — Har trend, sabse pehle.