# तंगहाली को पछाड़ आईआईटी बॉम्बे के शशांक अग्रवाल ने हासिल किया 1.5 करोड़ रुपये का सालाना पैकेज

> 3000 रुपये की मासिक आय वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाले शशांक अग्रवाल ने जेईई में शीर्ष रैंक हासिल कर आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई की और अब जांस्कर कॉरपोरेशन में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का पैकेज पा रहे हैं.

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/tngahali-ko-pachhara-iit-bombay-ke-shashank-agrawal-ne-hasila-kiya-1-5-karora-rupaye-ka-salana-paikeja-41191 · **Language:** Hindi
**Tags:** शशांक अग्रवाल, आईआईटी बॉम्बे, जेईई एडवांस्ड, सक्सेस स्टोरी, जांस्कर कॉरपोरेशन, इंजीनियरिंग, करियर

गंभीर आर्थिक संकट और अभावों के बीच जब रास्ते बंद नजर आने लगते हैं, तब संकल्प और लगन ही तकदीर बदलने का सबसे मजबूत जरिया बनते हैं. सीमित संसाधनों में पले-बढ़े शशांक अग्रवाल ने अपनी पढ़ाई और अटूट एकाग्रता के बल पर यह साबित कर दिखाया है. जहां परिवार का गुजर-बसर बेहद सीमित कमाई में होता था, वहीं से निकलकर उन्होंने इंजीनियरिंग के सबसे कठिन इम्तिहान में परचम लहराया और आज अंतरराष्ट्रीय स्तर के वित्तीय व तकनीकी क्षेत्र में करोड़ों का सालाना पैकेज हासिल किया है.

## 3000 रुपये की सीमित मासिक आय में बीता बचपन
शशांक अग्रवाल का प्रारंभिक जीवन गंभीर आर्थिक दिक्कतों के बीच गुजरा. उनके परिवार की पूरी आर्थिक धुरी उनके पिता की मासिक आय पर टिकी थी, जो महज 3,000 रुपये के करीब हुआ करती थी. इतने कम बजट में परिवार का भरण-पोषण करना और बुनियादी जरूरतों को पूरा करना ही एक बहुत बड़ी चुनौती साबित होता था. ऐसी तंगहाली में महंगे प्राइवेट कोचिंग संस्थानों में दाखिला लेने या बड़े संसाधनों की उम्मीद पालने की कोई गुंजाइश नहीं थी. इसके बावजूद उनके माता-पिता ने पढ़ाई के महत्व को समझा और तमाम वित्तीय संकटों को कभी भी अपने बेटे की शिक्षा के रास्ते में रुकावट नहीं बनने दिया. शशांक ने भी अपने परिजनों के इस त्याग और विश्वास को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा बना लिया.

## जेईई मेन में 330 अंक और जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 20
बचपन से ही असाधारण प्रतिभा के धनी शशांक ने अपनी तैयारी को पूरी तरह एकाग्र रखा. उन्होंने अपनी दिन-रात की मेहनत की बदौलत वर्ष 2018 की जेईई मेन परीक्षा में 330 अंक अर्जित किए. इसके फौरन बाद आयोजित हुई प्रतिष्ठित जेईई एडवांस्ड परीक्षा में उन्होंने पूरे देश में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 20 हासिल की. इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते उन्हें देश के शीर्ष तकनीकी संस्थान आईआईटी बॉम्बे में बीटेक पाठ्यक्रम में प्रवेश मिला. आईआईटी बॉम्बे के परिसर में रहते हुए उन्होंने कंप्यूटर साइंस, कोडिंग तकनीकों और क्वांटिटेटिव फाइनेंस से जुड़े गहन विषयों में विशेषज्ञता विकसित की.

## कॉलेज के दौरान इंटर्नशिप और पेशेवर सफर
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही शशांक ने खुद को कॉरपोरेट और वित्तीय बाजार की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करना शुरू कर दिया था. अपने बीटेक के दिनों में उन्होंने 'एपीटी पोर्टफोलियो प्राइवेट लिमिटेड' (A.P.T. Portfolio Pvt. Ltd.) जैसी प्रमुख फर्म में इंटर्नशिप की. इस अनुभव से उन्हें वित्तीय ट्रेडिंग और कॉरपोरेट रणनीतियों के व्यावहारिक पहलुओं की गहरी समझ मिली. इसके बाद उन्होंने क्वांटिटेटिव ट्रेडिंग फर्म 'क्वाडआई' (Quadeye) में बतौर सिस्टम इंजीनियर और क्वांटिटेटिव स्ट्रैटेजिस्ट जिम्मेदारी संभाली. इन तकनीकी भूमिकाओं ने उनके कौशल को तराशा और उन्हें हाई-एंड ट्रेडिंग टेक्नोलॉजी के दिग्गजों की कतार में ला खड़ा किया.

## जांस्कर कॉरपोरेशन में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का पैकेज
मौजूदा समय में शशांक अग्रवाल 'जांस्कर कॉरपोरेशन' (Zanskar Corporation) में एक एनालिस्ट के पद पर सेवाएं दे रहे हैं. संस्थान में उनका कुल सालाना पैकेज 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है. इस पैकेज संरचना के तहत 55 लाख रुपये की बेस सैलरी और 50 लाख रुपये का वेरिएबल पे या परफॉर्मेंस बोनस शामिल है, जिसके साथ अन्य वित्तीय लाभ और भत्ते भी जुड़े हैं. इस संरचना के आधार पर वे हर महीने लगभग 8.75 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं. अभावों को पीछे छोड़ते हुए हासिल की गई उनकी यह उपलब्धि दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दम पर पीढ़ियों की गरीबी को मात दी जा सकती है.

## इसका आप पर असर
यह प्रेरक यात्रा साबित करती है कि प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में गुणवत्तापूर्ण तैयारी और तकनीकी दक्षता आर्थिक सीमाओं को पूरी तरह समाप्त कर सकती है.

- **विद्यार्थियों के लिए:** यह यात्रा दिखाती है कि बिना महंगे कोचिंग संस्थानों के भी अनुशासित स्वाध्याय से प्रतियोगी परीक्षाओं में शीर्ष स्थान पाया जा सकता है. छात्र उपलब्ध बुनियादी पाठ्यपुस्तकों और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री की मदद से अपनी तैयारी को मजबूत कर सकते हैं.
- **अभिभावकों के लिए:** सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देना भविष्य के लिए सबसे बड़ा संबल बनता है. कठिन आर्थिक दौर में भी परिजनों का भावनात्मक समर्थन बच्चे के आत्मविश्वास को बनाए रखता है.
- **इंजीनियरिंग छात्रों के लिए:** कॉलेज के शुरुआती वर्षों से ही कोडिंग और वित्तीय विश्लेषण जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में कौशल विकसित करना बेहतरीन अवसर दिलाता है. प्रतिष्ठित फर्मों में इंटर्नशिप करने से स्नातक पूरा होते ही उच्च वेतन वाली भूमिकाओं के दरवाजे खुल जाते हैं.
- **करियर निर्माण के लिए:** मात्रात्मक वित्त और सिस्टम इंजीनियरिंग जैसे उच्च कौशल वाले क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर भारी मांग मौजूद है. इन उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में दक्षता हासिल करके युवा वैश्विक कंपनियों में शीर्ष पदों तक पहुंच सकते हैं.

## ऐसा क्यों हुआ
यह असाधारण उपलब्धि व्यक्तिगत प्रतिभा, पारिवारिक समर्थन और उच्च मांग वाले तकनीकी क्षेत्रों में रणनीतिक कौशल विकास के संयोजन से संभव हुई.

- **दृढ़ पारिवारिक संकल्प:** पिता की 3,000 रुपये की अत्यंत सीमित आय के बावजूद परिवार ने आर्थिक तंगी को पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दिया. परिजनों के इस अटूट विश्वास ने शशांक को लगातार मेहनत करने की आंतरिक ऊर्जा प्रदान की.
- **प्रारंभिक अकादमिक उत्कृष्टता:** जेईई मेन में 330 अंक और जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 20 प्राप्त करना उनकी मजबूत वैचारिक समझ का परिणाम था. इस शीर्ष रैंक ने देश के अग्रणी तकनीकी संस्थान आईआईटी बॉम्बे के दरवाजे खोले.
- **बाजारोन्मुख तकनीकी विशेषज्ञता:** कॉलेज के दौरान उन्होंने केवल पारंपरिक पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर कोडिंग और क्वांटिटेटिव फाइनेंस में विशेषज्ञता हासिल की. एपीटी पोर्टफोलियो और क्वाडआई जैसी फर्मों में किए गए व्यावहारिक कार्य ने उनके पेशेवर प्रोफाइल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना दिया.

## सवाल-जवाब

### 1. शशांक अग्रवाल कौन हैं?
शशांक अग्रवाल आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र हैं, जिन्होंने सीमित पारिवारिक आय के बावजूद जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की और वर्तमान में एक अंतरराष्ट्रीय फर्म में एनालिस्ट हैं.

### 2. शशांक अग्रवाल के परिवार की मासिक आय कितनी थी?
शशांक अग्रवाल के शुरुआती दिनों में उनके पिता की मासिक आय केवल 3,000 रुपये के करीब थी.

### 3. शशांक ने जेईई परीक्षाओं में क्या प्रदर्शन किया था?
उन्होंने वर्ष 2018 की जेईई मेन परीक्षा में 330 अंक अर्जित किए थे और जेईई एडवांस्ड परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 20 प्राप्त की थी.

### 4. शशांक अग्रवाल ने किस संस्थान से इंजीनियरिंग पूरी की?
उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी बॉम्बे से बीटेक की डिग्री पूरी की.

### 5. शशांक ने कॉलेज के दौरान किन कंपनियों में काम किया था?
उन्होंने एपीटी पोर्टफोलियो में इंटर्नशिप की और बाद में क्वाडआई में सिस्टम इंजीनियर व क्वांटिटेटिव स्ट्रैटेजिस्ट के रूप में कार्य किया.

### 6. वर्तमान में शशांक अग्रवाल किस कंपनी में कार्यरत हैं और उनका पैकेज क्या है?
वे जांस्कर कॉरपोरेशन में एनालिस्ट पद पर कार्यरत हैं, जहां उनका कुल सालाना पैकेज 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है.

### 7. शशांक के 1.5 करोड़ रुपये के पैकेज का ब्रेकअप क्या है?
उनके पैकेज में 55 लाख रुपये की बेस सैलरी और 50 लाख रुपये का वेरिएबल पे या परफॉर्मेंस बोनस शामिल है, जिससे उनकी मासिक कमाई लगभग 8.75 लाख रुपये बनती है.

## प्रेरणा और सबक
शशांक अग्रवाल का जीवन सफर अभावों से जूझ रहे हर उस युवा के लिए एक सशक्त मार्गदर्शन है जो बड़े सपने देखने का साहस रखता है.

- **शिक्षा ही सबसे बड़ा संबल:** आर्थिक तंगी या कमजोर पृष्ठभूमि कभी भी प्रतिभा के रास्ते की स्थायी रुकावट नहीं बन सकती. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और एकाग्रता के माध्यम से पीढ़ियों का आर्थिक ढांचा बदला जा सकता है.
- **कौशल में लगातार विस्तार:** औपचारिक डिग्री के साथ-साथ उद्योग की जरूरत के अनुसार कोडिंग और क्वांटिटेटिव विश्लेषण जैसी आधुनिक विधाओं में निपुणता हासिल करना आवश्यक है. बाजार की मांग के अनुरूप खुद को ढालने से करियर में अप्रत्याशित वृद्धि मिलती है.
- **व्यावहारिक अनुभव को प्राथमिकता:** पढ़ाई के दौरान ही इंटर्नशिप और तकनीकी परियोजनाओं पर काम करने से वास्तविक कॉरपोरेट दुनिया की समझ बनती है. व्यावहारिक अनुभव ही अकादमिक ज्ञान को उद्योग की कसौटी पर खरा उतारता है.
- **लक्ष्य के प्रति निरंतरता:** विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय अपनी कमजोरियों की पहचान कर उन्हें सुधारना सफलता की कुंजी है. निरंतर प्रयास और सकारात्मक दृष्टिकोण किसी भी असंभव दिखने वाले लक्ष्य को आसान बना देते हैं.

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