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  "type": "article",
  "title": "उफनते नाले से नहीं डरी पलजोम, बुलडोजर पर सवार होकर दुर्गम लाहौल में पहुंचाई पोलियो की खुराक",
  "summary": "हिमाचल प्रदेश की तोद घाटी में 28 जून को राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के दौरान लाहौल घाटी के दारचा में तैनात स्वास्थ्य कार्यकर्ता पलजोम बुट्टी ने बर्फ पिघलने से उफनते मयाड़ नाले को बुलडोजर की सहायता से पार किया और दुर्गम बस्तियों में बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई. उनके इस साहस और फर्ज की हर तरफ तारीफ हो रही है.",
  "content": "हिमाचल प्रदेश की लाहौल-स्पीति की तोद घाटी से फर्ज और हिम्मत की एक ऐसी कहानी सामने आई है जो हर किसी को प्रेरित करती है. 28 जून को जब पूरे देश में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान चल रहा था, उस दिन दारचा क्षेत्र में तैनात स्वास्थ्य कार्यकर्ता पलजोम बुट्टी के रास्ते में उफनता मयाड़ नाला आ गया. लेकिन वे रुकी नहीं — बुलडोजर चालक की मदद से नाला पार किया और दुर्गम इलाके के बच्चों तक पोलियो की जीवनरक्षक खुराक समय पर पहुंचाई.\n\nबर्फ पिघली, नाले उफाने पर आए, रास्ते हुए बंद\nहिमाचल के ऊंचाई वाले इलाकों में गर्मी का मौसम आते ही बर्फ पिघलने की रफ्तार बढ़ जाती है. इससे नदी-नाले खतरनाक स्तर तक भर जाते हैं. जब पलजोम बुट्टी अपनी ड्यूटी पर मयाड़ नाले के पास पहुंचीं तो उफान के कारण आगे बढ़ने का रास्ता पूरी तरह बंद था. किसी और के लिए शायद यही काम छोड़ने की वजह होती, लेकिन पलजोम ने वहां मौजूद बुलडोजर चालक से सहायता मांगी. चालक ने हामी भर दी और वे बुलडोजर पर सवार होकर उफनते नाले को पार कर गईं.\n\nएक-एक बच्चे तक पहुंचाई पोलियो की दो बूंद\nनाला पार करने के बाद पलजोम बुट्टी उस दुर्गम क्षेत्र में जा पहुंचीं जहां सामान्य हालात में भी पहुंचना आसान नहीं होता. वहां उन्होंने बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई और यह सुनिश्चित किया कि अभियान का एक भी बच्चा वंचित न रहे. उनकी इस कर्तव्यनिष्ठा और जज्बे की अब हर तरफ सराहना हो रही है. लोग उनके साहस को सलाम कर रहे हैं.\n\nकमला देवी की विरासत आगे बढ़ी\nयह पहली बार नहीं है जब हिमाचल की किसी स्वास्थ्यकर्मी ने इस तरह की मिसाल पेश की हो. बीते साल मंडी जिले की चौहारघाटी में स्थित सुधार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य कार्यकर्ता कमला देवी ने आपदा के दौरान उफनते नाले को पार कर बच्चों को वैक्सीन लगाई थी. उस घटना का वीडियो देशभर में वायरल हुआ था. बाद में उनके अदम्य साहस के लिए उन्हें सम्मानित किया गया और सीरम कंपनी की ओर से 5 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया.\n\nपलजोम बुट्टी ने उसी हौसले को जिंदा रखा है. उनकी कहानी याद दिलाती है कि देश के सबसे दुर्गम कोनों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए कुछ लोग हर दिन खुद को दांव पर लगाते हैं, बिना किसी शोर के, बस फर्ज की खातिर.\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह खबर दिखाती है कि राष्ट्रीय पोलियो अभियान देश के सबसे दुर्गम इलाकों तक पहुंच रहा है और हर बच्चे को खुराक मिल रही है.\n• हिमाचल प्रदेश में: पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों के माता-पिता को भरोसा मिलता है कि मौसमी बाधाओं के बावजूद सरकारी टीकाकरण अभियान उनके बच्चों तक जरूर पहुंचेगा.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पलजोम बुट्टी कौन हैं?\nपलजोम बुट्टी हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी के दारचा क्षेत्र में तैनात एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं.\n\n2. उन्होंने उफनता नाला कैसे पार किया?\nउन्होंने मयाड़ नाले के पास मौजूद बुलडोजर चालक से मदद मांगी और बुलडोजर पर सवार होकर उफनते नाले को पार किया.\n\n3. यह घटना कब हुई?\nयह घटना 28 जून को राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के दिन हुई.\n\n4. नाला क्यों उफान पर था?\nगर्मियों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ पिघलने की रफ्तार बढ़ जाती है, जिससे मयाड़ नाला खतरनाक स्तर तक भर गया था.\n\n5. कमला देवी कौन हैं और उनका इस खबर से क्या संबंध है?\nकमला देवी मंडी जिले की चौहारघाटी में सुधार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने बीते साल आपदा के दौरान उफनते नाले को पार कर बच्चों को वैक्सीन लगाई थी.\n\n6. कमला देवी को क्या पुरस्कार मिला था?\nकमला देवी को उनके अदम्य साहस के लिए सम्मानित किया गया और सीरम कंपनी की ओर से 5 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया.\n\n7. राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान क्या है?\nराष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत एक निश्चित तारीख को देशभर में बच्चों को एक साथ पोलियो की खुराक पिलाई जाती है ताकि इस बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके.\n\nप्रेरणा और सबक\nपलजोम बुट्टी की कहानी से कुछ ऐसे ठोस सबक मिलते हैं जो असल जिंदगी में काम आते हैं:\n\n• रुकावट आने पर रास्ता बदलें, इरादा नहीं: जब मयाड़ नाले ने रास्ता रोका तो उन्होंने मिशन नहीं छोड़ा, बल्कि बुलडोजर की मदद से नया रास्ता खोजा और आगे बढ़ीं.\n• फर्ज ही सबसे बड़ी प्रेरणा होती है: कोई बाहरी दबाव नहीं था, फिर भी उन्होंने जोखिम उठाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी की.\n• सही वक्त पर मदद मांगना अक्लमंदी है, कमजोरी नहीं: उन्होंने बुलडोजर चालक से सहायता मांगी और उस मदद को सही काम में लगाया.\n• एक व्यक्ति की हिम्मत पूरे समुदाय को बचा सकती है: उनके एक फैसले से पूरे दुर्गम इलाके के बच्चे पोलियो से सुरक्षित हो गए.",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-06-29",
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