# उत्तर प्रदेश के गोंडा में किसान विनोद कुमार उपाध्याय का प्रयोग, 0218 प्रजाति गन्ने की एक बार रोपाई से 10 वर्ष तक कटाई की योजना

> गोंडा के विकासखंड इटियाथोक के स्नातक किसान विनोद कुमार उपाध्याय ने गन्ने की 0218 वैरायटी की खेती की है। पहली बार में 6 से 7 लाख रुपये लागत लगाकर 17 से 18 लाख रुपये कमाने के बाद वह चौथी बार कटाई कर रहे हैं और 10 साल तक फसल लेने की तैयारी में हैं।

**Type:** article · **Category:** सक्सेस स्टोरी · **Published:** 2026-08-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/success-stories/uttar-pradesh-ke-gonda-men-kisana-vinod-kumar-upadhyay-ka-prayoga-0218-prajati-ganne-ki-eka-bara-ropai-se-10-varsha-taka-katai-ki--19221 · **Language:** Hindi
**Tags:** गन्ने की खेती, 0218 गन्ना वैरायटी, विनोद कुमार उपाध्याय, गोंडा समाचार, उत्तर प्रदेश कृषि, प्रगतिशील किसान

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले स्थित विकासखंड इटियाथोक के एक प्रगतिशील किसान विनोद कुमार उपाध्याय ने पारंपरिक खेती से हटकर गन्ने की 0218 वैरायटी के साथ एक अनूठा प्रयोग किया है। अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद कृषि क्षेत्र में कदम रखने वाले इस युवा किसान का लक्ष्य गन्ने की केवल एक बार बुवाई करके लगातार 10 वर्षों तक पैदावार हासिल करना है। कृषि लागत को न्यूनतम स्तर पर लाने और आमदनी को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया यह प्रयास क्षेत्र के अन्य किसानों के बीच भी खासी चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

## स्नातक की पढ़ाई के बाद पारंपरिक कृषि में नया प्रयोग
विनोद कुमार उपाध्याय की शैक्षणिक पृष्ठभूमि स्नातक तक की है। अपनी उच्च शिक्षा समाप्त करने के उपरांत उन्होंने अन्य नौकरियों की ओर रुख करने के बजाय सीधे खेती और किसानी के व्यवसाय को अपनाया। उनके पिता लंबे समय से पारंपरिक तरीकों से फसलों का उत्पादन करते आ रहे थे, जिनसे प्रेरणा लेकर विनोद ने भी कृषि क्षेत्र में अपनी यात्रा शुरू की। हालांकि, पिता के अनुभवों को आधार बनाते हुए उन्होंने पारंपरिक पद्धतियों तक ही सीमित रहने के बजाय आधुनिक तकनीकों और उन्नत किस्मों के साथ नए प्रयोग करने का निर्णय लिया।

## 0218 प्रजाति से 10 साल तक लगातार फसल लेने की योजना
अपने कृषि क्षेत्र में नवाचार करते हुए विनोद कुमार ने गन्ने की 0218 प्रजाति को चुना। आमतौर पर सामान्य गन्ने की फसल में कुछ सत्रों के बाद खेत की दोबारा जुताई और बुवाई करनी पड़ती है, जिससे किसानों का खर्च बढ़ जाता है। इसके विपरीत, गन्ने की 0218 किस्म पेड़ी प्रबंधन के मामले में दीर्घकालिक उत्पादन की संभावनाएं प्रदान करती है। वर्तमान में विनोद कुमार इसी खेत से चौथी बार गन्ने की फसल काटने की तैयारी कर रहे हैं। फसल की गुणवत्ता और लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए उन्होंने इसी एक बार की बुवाई से लगभग 10 वर्षों तक उत्पादन प्राप्त करने की रूपरेखा बनाई है। इसके लिए खेत में फसल का निरंतर और वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा रहा है ताकि पैदावार की गुणवत्ता बनी रहे।

## कम लागत में बंपर मुनाफा और वित्तीय आंकड़ा
लागत और मुनाफे के आंकड़ों को साझा करते हुए विनोद कुमार ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार 0218 किस्म के गन्ने की बुवाई की थी, तब शुरुआती तैयारी, बीज और उर्वरक मिलाकर करीब 6 से 7 लाख रुपये का कुल खर्च आया था। जब फसल तैयार होकर बिकी, तो उन्हें लगभग 17 से 18 लाख रुपये की कुल आय प्राप्त हुई। पहले ही चक्र में मिले इस बड़े वित्तीय लाभ ने उनके इस प्रयोग पर भरोसे को और मजबूत कर दिया। इस चालू सत्र में भी उन्हें फसल से लाखों रुपये का शुद्ध लाभ होने की पूरी उम्मीद है। एक ही फसल से बहुवर्षीय उत्पादन लेने की यह रणनीति बार-बार बुवाई की लागत को समाप्त कर किसान की शुद्ध आय को बढ़ाती है।

## क्षेत्रीय किसानों के लिए प्रेरणा और विशेषज्ञों की राय
विकासखंड इटियाथोक में विनोद कुमार का यह सफल प्रयोग आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के कृषकों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि गन्ने की किसी भी प्रजाति से बहुवर्षीय पेड़ी उत्पादन प्राप्त करना पूरी तरह से भूमि की स्थिति, मिट्टी के स्वास्थ्य, स्थानीय मौसम और उचित फसल प्रबंधन पर निर्भर करता है। इसलिए, विशेषज्ञों की सलाह है कि अन्य किसान किसी भी नई किस्म को बड़े पैमाने पर अपनाने से पहले अपनी मिट्टी की जांच कराएं और कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त करें।

## इसका आप पर असर
- **भारत भर के किसानों के लिए:** गन्ने की 0218 जैसी बहुवर्षीय किस्मों और सही पेड़ी प्रबंधन को अपनाकर सालाना जुताई तथा बीज की लागत में बड़ी कटौती की जा सकती है।
- **गोंडा और उत्तर प्रदेश में:** इटियाथोक के इस सफल कृषि मॉडल से स्थानीय किसान पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक और कम लागत वाली फसल तकनीकों की ओर प्रेरित होंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. गोंडा में 0218 गन्ने की सफल खेती करने वाले किसान कौन हैं?
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक निवासी स्नातक किसान विनोद कुमार उपाध्याय हैं।

### 2. विनोद कुमार उपाध्याय ने गन्ने की खेती में कितनी लागत लगाई और कितनी आमदनी प्राप्त की?
उन्होंने पहली बार में करीब 6 से 7 लाख रुपये की लागत लगाई थी, जिससे उन्हें 17 से 18 लाख रुपये की आमदनी हुई।

### 3. किसान विनोद कुमार एक ही बुवाई से कितने सालों तक फसल लेने की तैयारी कर रहे हैं?
वह एक बार बुवाई करके करीब 10 साल तक गन्ने की फसल लेने की तैयारी कर रहे हैं और वर्तमान में चौथी बार कटाई करने जा रहे हैं।

### 4. गन्ने की नई किस्म अपनाने से पहले कृषि विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?
कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि फसल का उत्पादन मिट्टी, मौसम और प्रबंधन पर निर्भर करता है, इसलिए नई प्रजाति लगाने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।

## प्रेरणा और सबक
- **शिक्षा और कृषि का तालमेल:** स्नातक शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी खेती को एक व्यावसायिक और आधुनिक अवसर के रूप में अपनाया।
- **परंपरा में नया प्रयोग:** पिता की पारंपरिक खेती की प्रेरणा को नींव बनाकर उसमें आधुनिक वैज्ञानिक किस्मों का समावेश किया।
- **दीर्घकालिक लागत नियंत्रण:** एक बार बुवाई करके 10 साल तक कटाई की योजना बनाकर कृषि लागत को न्यूनतम स्तर पर लाए।
- **सतत देखभाल और प्रबंधन:** बहुवर्षीय फसल से लगातार अच्छा उत्पादन लेने के लिए निरंतर और सतर्क देखभाल बनाए रखी।

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