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  "title": "उत्तर प्रदेश के गोंडा में रिंग पिट और ट्रेंच तकनीक से गन्ने की फसल उगाकर शुक्ला प्रसाद कमा रहे सालाना लाखों रुपये",
  "summary": "उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के किसान शुक्ला प्रसाद ट्रेंच और रिंग पिट विधि से 24 एकड़ में गन्ने की खेती कर प्रति सीजन 7.2 से 8.4 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के अंतर्गत आने वाले इटियाथोक विकासखंड के ढोंगही गांव में रहने वाले प्रगतिशील किसान शुक्ला प्रसाद कृषि क्षेत्र में सफलता की एक नई मिसाल पेश कर रहे हैं। खेती में आधुनिक तरीकों के समायोजन, बेहतर फसल प्रबंधन और 45 वर्षों के व्यावहारिक अनुभव के दम पर उन्होंने क्षेत्र के सफल किसानों में अपनी जगह बनाई है। गन्ने की उन्नत खेती और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण उन्हें विभिन्न सरकारी आयोजनों और कृषि मेलों में कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।\n\nपारंपरिक खेती से आधुनिक तकनीकों का सफर\nशिक्षा के स्तर पर हाईस्कूल तक पढ़ाई पूरी करने के बाद शुक्ला प्रसाद शुक्ला ने खेती को ही अपने जीवन का मुख्य पेशा चुना। वह पिछले 40 से 45 वर्षों से निरंतर गन्ने की खेती से जुड़े हुए हैं। शुरुआती दौर में वह भी अन्य सामान्य किसानों की तरह पारंपरिक पद्धतियों से ही फसलों की बुआई करते थे। हालांकि, समय बीतने के साथ उन्होंने महसूस किया कि बेहतर उत्पादन के लिए नई तकनीकों को अपनाना बेहद जरूरी है। इसके बाद उन्होंने ट्रेंच विधि और रिंग पिट विधि जैसी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को अपनी खेती में शामिल किया, जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में व्यापक सुधार देखने को मिला।\n\n24 एकड़ में गन्ने का विस्तार और कृषि प्रबंधन\nवर्तमान समय में शुक्ला प्रसाद करीब 100 से 120 बीघा, यानी लगभग 24 एकड़ कृषि भूमि पर बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती कर रहे हैं। वह खेत में गन्ने की कई उन्नत किस्मों की बुआई करते हैं। खेती की सफलता में वह खेत की तैयारी, समय पर सिंचाई, संतुलित खाद प्रबंधन और नियमित निराई-गुड़ाई को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि सही तकनीक और समयबद्ध प्रबंधन अपनाया जाए, तो खेती में लगने वाली लागत को कम करके कुल उत्पादन को काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है।\n\nलागत, कमाई और शुद्ध मुनाफे का गणित\nगन्ने की इस वैज्ञानिक खेती से होने वाली आय का ब्योरा साझा करते हुए शुक्ला प्रसाद ने बताया कि एक एकड़ भूमि में गन्ने की फसल तैयार करने में लगभग 45 से 50 हजार रुपये की लागत आती है। इसके मुकाबले प्रति एकड़ फसल बेचने पर करीब 75 से 80 हजार रुपये का कुल टर्नओवर प्राप्त हो जाता है। पूरे 24 एकड़ के रकबे के हिसाब से देखा जाए तो एक सीजन में कुल लागत 10.8 लाख रुपये से 12 लाख रुपये के बीच बैठती है। वहीं, इस पूरी फसल का कुल टर्नओवर 18 लाख रुपये से 19.2 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। इस तरह तमाम खर्चे निकालने के बाद उन्हें हर सीजन 7.2 लाख रुपये से 8.4 लाख रुपये का शुद्ध अनुमानित मुनाफा प्राप्त होता है। तैयार गन्ने की बिक्री सीधे चीनी मिलों में की जाती है, जिससे उन्हें नियमित और सुरक्षित भुगतान मिलता है, जिसने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को काफी सुदृढ़ बनाया है।\n\nसम्मान और साथी किसानों का मार्गदर्शन\nकृषि क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने और क्षेत्र के अन्य किसानों को आधुनिक कृषि प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रेरित करने के उपलक्ष्य में शुक्ला प्रसाद शुक्ला को कई कृषि मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। आज स्थिति यह है कि आसपास के तमाम गांवों से किसान उनके खेतों पर आकर रिंग पिट और ट्रेंच विधि से गन्ने की खेती करने की बारीकियां सीखते हैं। शुक्ला प्रसाद का कहना है कि यदि किसान पारंपरिक ढर्रे को छोड़कर वैज्ञानिक तरीके, उन्नत बीज और सही फसल प्रबंधन अपनाएं, तो गन्ने की खेती एक अत्यंत लाभदायक व्यवसाय बन सकती है।\n\nइसका आप पर असर\nवैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर गन्ने की पैदावार बढ़ाना और लागत घटाना भारतीय किसानों के लिए एक आर्थिक मॉडल पेश करता है।\n\n• भारत में: ट्रेंच और रिंग पिट जैसी तकनीकों का प्रसार देश भर के गन्ना किसानों को प्रति एकड़ अधिक उत्पादन लेने में मदद कर सकता है। इससे कृषि लागत नियंत्रित रहने के साथ-साथ किसानों की मौसमी आय में शुद्ध मुनाफे का दायरा बढ़ता है।\n• गोंडा में: गोंडा जिले और आसपास के कृषक इटियाथोक के इस सफल मॉडल से सीख लेकर अपनी पारंपरिक तकनीकों में सुधार कर सकते हैं। चीनी मिलों को बेहतर गुणवत्ता का गन्ना मिलने से स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।\n• उत्पादन लागत पर प्रभाव: वैज्ञानिक प्रबंधन और संतुलित उर्वरक प्रयोग से प्रति एकड़ 45 से 50 हजार रुपये की सीमा में लागत बनी रहती है। इससे छोटे और मध्यम किसानों के लिए वित्तीय जोखिम कम होता है।\n• आय की नियमितता: फसल की सीधी बिक्री चीनी मिलों में होने से किसानों को एक निश्चित समय सीमा में भुगतान मिल जाता है। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिरता बेहतर होती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शुक्ला प्रसाद गोंडा जिले में कितनी जमीन पर गन्ने की खेती करते हैं?\nशुक्ला प्रसाद गोंडा जिले के ढोंगही गांव में लगभग 100 से 120 बीघा यानी करीब 24 एकड़ भूमि पर गन्ने की खेती करते हैं।\n\n2. वह गन्ने की खेती के लिए किन आधुनिक प्रणालियों का उपयोग करते हैं?\nवह गन्ने का उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से ट्रेंच विधि और रिंग पिट विधि का उपयोग करते हैं।\n\n3. गन्ने की खेती में प्रति एकड़ कितनी लागत और टर्नओवर आता है?\nएक एकड़ में खेती पर लगभग 45 से 50 हजार रुपये की लागत आती है, जिसके एवज में 75 से 80 हजार रुपये का टर्नओवर प्राप्त होता है।\n\n4. 24 एकड़ गन्ने की फसल से एक सीजन में कितना शुद्ध मुनाफा होता है?\n24 एकड़ से 18 से 19.2 लाख रुपये के कुल टर्नओवर पर 10.8 से 12 लाख रुपये का खर्च निकालने के बाद 7.2 से 8.4 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा होता है।\n\n5. शुक्ला प्रसाद अपने गन्ने की बिक्री कहां करते हैं?\nवह अपने तैयार गन्ने की बिक्री सीधे चीनी मिलों में करते हैं, जिससे उन्हें नियमित और निश्चित आय प्राप्त होती है।\n\nप्रेरणा और सबक\nशुक्ला प्रसाद की 45 वर्षों की यात्रा यह दर्शाती है कि लगातार सीखने और बदलाव को स्वीकार करने से खेती को एक लाभदायक उद्यम में बदला जा सकता है।\n\n• तकनीकी बदलाव को स्वीकार करना: दशकों पुराने अनुभव के बावजूद उन्होंने पुरानी पद्धतियों को छोड़कर आधुनिक ट्रेंच और रिंग पिट विधि को अपनाने में संकोच नहीं किया।\n• अनुशासित लागत प्रबंधन: प्रति एकड़ लागत और संभावित रिटर्न का सटीक हिसाब रखकर उन्होंने खेती को एक संगठित व्यवसाय की तरह संचालित किया।\n• निरंतर देखभाल और समयबद्धता: सिंचाई, खाद और निराई-गुड़ाई के समय का कड़ाई से पालन करके फसल की गुणवत्ता को उच्चतम स्तर पर बनाए रखा।\n• ज्ञान बांटने की प्रवृत्ति: अपनी सफलता के अनुभवों को अन्य किसानों के साथ साझा कर समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में काम किया।",
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  "category": "सक्सेस स्टोरी",
  "publishedAt": "2026-09-02",
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