वैज्ञानिक तरीके से सब्जी उगाकर आत्मनिर्भर बनीं पलामू की सुनीता देवी, हर माह ₹60,000 तक बढ़ा मुनाफा झारखंड के पलामू की महिला किसान सुनीता देवी ने मचान विधि, मल्चिंग और जैविक खाद अपनाकर सब्जी उत्पादन में शानदार सफलता हासिल की है। वे मेदिनीनगर के बाजार में सीधे फसल बेचकर हर महीने 50 से 60 हजार रुपये तक की आमदनी कर रही हैं। झारखंड के पलामू जिले में कृषि के क्षेत्र में पारंपरिक ढर्रे से हटकर काम कर रहीं सुनीता देवी ने यह साबित कर दिया है कि सही तकनीक और कड़ी मेहनत से खेती को बेहद मुनाफेदार व्यवसाय बनाया जा सकता है। चैनपुर प्रखंड के चेडावार गांव की रहने वाली सुनीता देवी पिछले करीब 30 वर्षों से लगातार खेती से जुड़ी हुई हैं। शादी के बाद जब वे अपने ससुराल आईं, तभी से उन्होंने सब्जी उत्पादन को अपनी आजीविका का मुख्य आधार बनाया। शुरुआत में वे पारंपरिक रूप से मुख्य रूप से बैंगन उगाती थीं। हालांकि, समय बीतने के साथ उन्होंने अपनी कृषि पद्धतियों में बदलाव किया और अब सालभर अलग-अलग मौसमों में कई तरह की सब्जियों की सफल खेती कर रही हैं। पारंपरिक बैंगन की खेती से विविध सब्जी उत्पादन का सफर सुनीता देवी ने बाजार की मांग और जलवायु अनुकूलता को समझते हुए खेती के स्वरूप में बड़ा बदलाव किया। पिछले करीब 3 वर्षों से वे विविध प्रकार की सब्जियों के उत्पादन पर विशेष ध्यान दे रही हैं। आज उनके खेतों में सालभर नेनुआ, भिंडी, करेला, कद्दू और टमाटर समेत विभिन्न सब्जियों की पैदावार होती है। वे भूमि के अलग-अलग हिस्सों में योजनाबद्ध तरीके से फसलों का चुनाव करती हैं। उदाहरण के लिए, उन्होंने करीब 5 कट्ठे में नेनुआ, 1 कट्ठे में करेला और 1 कट्ठे में टमाटर लगा रखा है, जिसके साथ अन्य मौसमी सब्जियों का भी उत्पादन नियमित रूप से किया जा रहा है। मचान तकनीक, मल्चिंग और जैविक खाद का प्रभावी इस्तेमाल सब्जी उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने और फसलों को नुकसान से बचाने के लिए सुनीता देवी ने आधुनिक कृषि तकनीकों का सहारा लिया है। वे बेलदार सब्जियों के लिए मुख्य रूप से मचान विधि का उपयोग करती हैं। इस तकनीक के तहत बांस और मजबूत रस्सियों के सहारे एक ढांचा तैयार किया जाता है, जिस पर सब्जियों की बेलों को चढ़ाया जाता है। मचान पर फल लगने से वे सीधे जमीन और नमी के संपर्क में नहीं आते, जिससे सब्जियों के सड़ने और खराब होने की आशंका नाममात्र रह जाती है। इस नवाचार से फसल की चमक, आकार और कुल पैदावार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसके अतिरिक्त, वे नमी बनाए रखने और खरपतवार पर नियंत्रण के लिए कुछ फसलों में मल्चिंग तकनीक का प्रयोग करती हैं। मिट्टी की सेहत और उर्वरता बनाए रखने के लिए वे रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खाद का बहुतायत से इस्तेमाल करती हैं। मेदिनीनगर के बाजार में सीधी बिक्री और रोजाना की मेहनत सुनीता देवी के लिए खेती केवल दैनिक खर्च चलाने का जरिया नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का एक सशक्त माध्यम है। वे प्रतिदिन खेतों में खुद पसीना बहाती हैं। सुबह और शाम मिलाकर वे रोज करीब 2 से 4 घंटे अपने खेतों की देखभाल और प्रबंधन में लगाती हैं। सुबह-सुबह वे खेतों से ताजी सब्जियां तोड़ती हैं और बिना किसी बिचौलिए के सीधे मेदिनीनगर शहर के बाजार में बेचने के लिए ले जाती हैं। खुद बाजार में जाकर सब्जियां बेचने के कारण उन्हें अपनी उपज का सही और पूरा मूल्य मिलता है। इस डायरेक्ट मार्केटिंग व्यवस्था से वे रोजाना करीब 2,500 से 3,000 रुपये तक की नकदी अर्जित कर लेती हैं। हर महीने 50 से 60 हजार रुपये की कमाई और सामाजिक प्रेरणा आधुनिक तकनीकों के समावेश और सीधे बाजार संपर्क के बल पर सुनीता देवी अब हर महीने 50,000 से 60,000 रुपये तक की शानदार आमदनी कर रही हैं। सब्जी की बिक्री से होने वाली इस स्थिर आय से वे अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा और घर के तमाम जरूरी खर्चों को बिना किसी वित्तीय तनाव के आसानी से पूरा कर पा रही हैं। सुनीता देवी का मानना है कि यदि लगन, सटीक तकनीक और सीधे बाजार से जुड़कर काम किया जाए, तो खेती में अपार मुनाफा संभव है। पलामू के ग्रामीण इलाकों में उनकी यह सफलता की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए एक मिसाल और प्रेरणा बन चुकी है जो कृषि के माध्यम से स्वावलंबी बनना चाहती हैं। इसका आप पर असर • भारत में: यह कहानी दर्शाती है कि कैसे छोटे किसान मचान विधि और मल्चिंग जैसी कम लागत वाली तकनीकों को अपनाकर बिना बड़े निवेश के अपनी आय दो से तीन गुना बढ़ा सकते हैं। • पलामू (झारखंड) में: स्थानीय महिला किसानों के लिए मेदिनीनगर बाजार में सीधी पहुंच और जैविक खेती का मॉडल आत्मनिर्भरता और नियमित रोजगार का नया रास्ता दिखाता है। सवाल-जवाब 1. सुनीता देवी पलामू के किस गांव और प्रखंड की रहने वाली हैं? सुनीता देवी झारखंड के पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत चेडावार गांव की निवासी हैं। 2. सुनीता देवी खेती में मचान तकनीक का इस्तेमाल क्यों करती हैं? वे बांस और रस्सी से मचान बनाकर सब्जियों की बेलों को ऊपर चढ़ाती हैं, जिससे फल मिट्टी व नमी के संपर्क में नहीं आते और फसल खराब होने से बचती है। 3. सुनीता देवी खेतों में कितनी जगह पर कौन-कौन सी मुख्य सब्जियां उगाती हैं? वे लगभग 5 कट्ठे में नेनुआ, 1 कट्ठे में करेला और 1 कट्ठे में टमाटर के साथ भिंडी व कद्दू जैसी अन्य मौसमी सब्जियां उगाती हैं। 4. वे अपनी सब्जियों को बेचने के लिए कहां जाती हैं? वे प्रतिदिन खेतों से ताजी सब्जियां तोड़कर बिना किसी बिचौलिए के सीधे मेदिनीनगर शहर के बाजार में ले जाकर बेचती हैं। 5. सब्जी की खेती से सुनीता देवी को रोजाना और महीने में कितनी कमाई होती है? उन्हें सब्जियों की बिक्री से रोजाना 2,500 से 3,000 रुपये तक और महीने में करीब 50,000 से 60,000 रुपये की कमाई होती है। 6. वे रोजाना खेती के कामों में कितना समय देती हैं? वे सुबह और शाम मिलाकर प्रतिदिन करीब 2 से 4 घंटे खेत में मेहनत करती हैं। प्रेरणा और सबक सुनीता देवी की सफलता से मिलने वाली मुख्य सीख: • समय के साथ बदलाव: पारंपरिक बैंगन की खेती छोड़कर मौसम के अनुसार विविध सब्जियों का चुनाव करना मुनाफे का प्रमुख आधार बना। • आधुनिक तकनीक का प्रयोग: मचान विधि और मल्चिंग जैसी आसान तकनीकों से फसलों का सड़ना बंद हुआ और पैदावार में सुधार आया। • जैविक खाद पर जोर: मिट्टी की सेहत और उर्वरता बनाए रखने के लिए रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद का चयन दीर्घकालिक लाभ देता है। • बिचौलियों से मुक्ति: मेदिनीनगर शहर के बाजार में सीधे उपज बेचने से मेहनत का पूरा और सही दाम मिला। • आत्मनिर्भरता का संकल्प: रोजाना केवल 2 से 4 घंटे की नियमित मेहनत से भी हर महीने 50,000 से 60,000 रुपये तक की कमाई संभव है। https://trendkia.com/success-stories/vaijnanika-tarike-se-sabji-ugakara-atmanirbhara-banin-palamu-ki-sunita-devi-hara-maha-60-000-taka-barha-munapha-19463 TrendKia — Har trend, sabse pehle.