यूट्यूब और इंस्टाग्राम को बनाया गुरु: सुल्तानपुर की अंशिका कूड़े-कबाड़ से सजा रही हैं कला की नई दुनिया, ऑनलाइन मिल रहे ऑर्डर सुल्तानपुर के कूरेभार की रहने वाली बीए की छात्रा अंशिका कसौधन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की मदद से अपनी चित्रकारी और क्राफ्टिंग की कला को निखारा है। आज वे बेकार पड़े सामानों को खूबसूरत कलाकृतियों में बदलकर ऑनलाइन कमाई कर रही हैं। आज के समय में जब तकनीक और सोशल मीडिया को लेकर कई तरह की नकारात्मक बातें की जाती हैं, तब उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की एक बेटी ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर सही दिशा में कदम बढ़ाए जाएं तो इंटरनेट आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है। सुल्तानपुर के कूरेभार की रहने वाली अंशिका कसौधन ने आधुनिक तकनीक का बेहतरीन उपयोग करते हुए खुद को एक बेहतरीन चित्रकार और क्राफ्ट आर्टिस्ट के रूप में स्थापित किया है। किसी बड़े या महंगे संस्थान से कला की औपचारिक शिक्षा लिए बिना, उन्होंने ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से इस हुनर को सीखा और आज वे युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। सोशल मीडिया बना मार्गदर्शक और डिजिटल गुरु अंशिका का मानना है कि रचनात्मकता उनके भीतर बचपन से ही थी, लेकिन उसे सही आकार देने के लिए मार्गदर्शन की जरूरत थी। अपनी एक सहेली से प्रेरित होकर उन्होंने कला के क्षेत्र में कदम रखा और यूट्यूब तथा इंस्टाग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपना गुरु बना लिया। इन प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद ट्यूटोरियल देखकर उन्होंने पेंटिंग और क्राफ्टिंग की बारीकियों को समझा। आज अंशिका पोर्ट्रेट, लैंडस्केप, टी-शर्ट पेंटिंग और विभिन्न प्रकार के क्राफ्ट वर्क बनाने में माहिर हो चुकी हैं। अपनी कला को निखारने के साथ-साथ वह अपनी पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान दे रही हैं और वर्तमान में BA की पढ़ाई कर रही हैं। पारिवारिक संघर्षों के बीच बनाई अपनी पहचान एक साधारण परिवार से आने वाली अंशिका का जीवन आसान नहीं रहा है। उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, और उनकी मां एक गृहणी हैं। ऐसी परिस्थितियों में भी अंशिका ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत के बल पर न केवल अपने परिवार का बल्कि कूरेभार और पूरे सुल्तानपुर जिले का नाम रोशन किया है। वे कई चित्रकला प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं और विभिन्न कार्यक्रमों में उन्हें अपनी उत्कृष्ट कलाकृतियों के लिए पुरस्कार और सम्मान भी मिल चुके हैं। उनकी यह सफलता दर्शाती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो सीमित संसाधनों में भी असाधारण लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। वेस्ट से बेस्ट का फॉर्मूला और ऑनलाइन व्यापार अंशिका की चित्रकारी की एक खास विशेषता यह है कि वे पर्यावरण और स्थिरता को ध्यान में रखकर काम करती हैं। उनका मुख्य ध्यान बेकार हो चुके या फेंक दिए गए सामानों को दोबारा इस्तेमाल के लायक और सजावटी वस्तुओं में बदलने पर रहता है। कबाड़ से खूबसूरत कलाकृतियां बनाने की उनकी इस कला की हर तरफ सराहना हो रही है। अपनी इस प्रतिभा को उन्होंने व्यवसाय से भी जोड़ा है। वे सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बनाई पेंटिंग्स और क्राफ्ट प्रोडक्ट्स को ऑनलाइन प्रदर्शित करती हैं और वहां से उन्हें लगातार ऑर्डर मिलते हैं। कलाकृतियों की ऑनलाइन बिक्री से वे अच्छी आय भी अर्जित कर रही हैं। अंशिका का सपना है कि वे भविष्य में अपनी खुद की एक आर्ट गैलरी खोलें, ताकि वे अपनी कला को समाज के सामने और भी बड़े स्तर पर पेश कर सकें। इसका आप पर असर • उत्तर प्रदेश और सुल्तानपुर में: यह कहानी स्थानीय युवाओं, विशेष रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि की छात्राओं को व्यावसायिक कला और डिजिटल माध्यमों को रोजगार का जरिया बनाने के लिए प्रेरित करती है। • देशभर में: यह आधुनिक युग में पारंपरिक शिक्षा के बिना भी इंटरनेट के माध्यम से कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) और पर्यावरण-अनुकूल 'वेस्ट-टू-वेल्थ' (कबाड़ से जुगाड़) के महत्व को रेखांकित करता है। सवाल-जवाब 1. अंशिका कसौधन कौन हैं? अंशिका कसौधन सुल्तानपुर के कूरेभार की रहने वाली एक युवा आर्टिस्ट और छात्रा हैं, जो पेंटिंग और हस्तशिल्प (क्राफ्ट) का काम करती हैं। 2. अंशिका ने चित्रकारी और क्राफ्टिंग कैसे सीखी? उन्होंने मुख्य रूप से यूट्यूब, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ट्यूटोरियल्स को देखकर यह कला सीखी है। 3. अंशिका वर्तमान में कौन सी पढ़ाई कर रही हैं? वह वर्तमान में बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA) की पढ़ाई कर रही हैं। 4. उनके क्राफ्ट वर्क का मुख्य उद्देश्य क्या है? उनका मुख्य उद्देश्य खराब और बेकार हो चुके सामानों को डेकोरेट करके उन्हें दोबारा इस्तेमाल के योग्य और सुंदर कलाकृति बनाना है। 5. अंशिका अपनी कलाकृतियों को कैसे बेचती हैं और आय अर्जित करती हैं? वे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अपनी कलाकृतियों को प्रदर्शित करती हैं, ऑर्डर लेती हैं और उन्हें बेचकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्रेरणा और सबक • सीखने की कोई सीमा नहीं: अंशिका ने साबित किया कि औपचारिक ट्रेनिंग या महंगे संस्थानों के बिना भी केवल इंटरनेट और दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी कला सीखी जा सकती है। • सकारात्मक प्रेरणा: अपनी दोस्त से मिली प्रेरणा को उन्होंने केवल एक विचार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। • संसाधनों की कमी को चुनौती देना: पिता के न होने और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने परिस्थितियों को अपनी प्रगति की राह में बाधा नहीं बनने दिया। • कबाड़ को कला में बदलना: पर्यावरण के प्रति सचेत रहते हुए खराब सामानों को सुंदर कलाकृतियों में बदलकर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और कला दोनों का अनूठा संगम पेश किया। https://trendkia.com/success-stories/youtube-aura-instagram-ko-banaya-guru-sultanpur-ki-anshika-kure-kabara-se-saja-rahi-hain-kala-ki-nai-duniya-nalaina-mila-rahe-rdar-7121 TrendKia — Har trend, sabse pehle.