# दिवाली पर जमकर पटाखे खरीदें और फोड़ें, के. अन्नामलाई ने जनता से क्यों की यह बड़ी अपील

> के. अन्नामलाई ने तमिलनाडु के लोगों से दिवाली पर बड़े पैमाने पर पटाखे खरीदने की अपील की है। उनका तर्क है कि इससे शिवकाशी के लाखों श्रमिकों की आजीविका चलती है।

**Type:** article · **Category:** तमिलनाडु · **Published:** 2026-11-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/tamil-nadu/diwali-par-jamkar-patakhe-kharide-aur-phode-k-annamalai-ne-janta-se-kyon-ki-yeh-badi-appeal-57402 · **Language:** Hindi
**Tags:** के. अन्नामलाई, दीवाली 2024, शिवकाशी, पटाखा उद्योग, दिल्ली एनसीआर, वायु प्रदूषण

भारतीय जनता पार्टी के नेता और वी द लीडर्स के अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने आगामी दिवाली के पावन पर्व पर तमिलनाडु की जनता से एक खास अपील की है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वे इस त्योहारी सीजन में बड़ी संख्या में पटाखे खरीदें और उन्हें पूरे उत्साह के साथ फोड़ें। उनके इस बयान के पीछे का मुख्य तर्क यह है कि राज्य का पटाखा उद्योग हजारों गरीब परिवारों के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया है। त्योहार से ठीक पहले जारी किए गए एक वीडियो संदेश के जरिए उन्होंने स्थानीय उत्पादों के समर्थन में आवाज उठाई है, जिससे राज्य के पारंपरिक व्यापारियों और कारीगरों को संबल मिल सके।

इस पूरे कारोबार का मुख्य केंद्र तमिलनाडु का विरुधुनगर जिला स्थित शिवकाशी शहर है, जिसे देश की पटाखा राजधानी भी कहा जाता है। के. अन्नामलाई ने अपने संदेश में इसी क्षेत्र का विशेष जिक्र करते हुए लोगों से लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने को कहा है। उन्होंने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह विशाल उद्योग लगभग तीन लाख लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मुहैया कराता है। इसके अलावा, पांच लाख अन्य श्रमिकों को यह अप्रत्यक्ष रूप से सहायता प्रदान करता है, जिससे कुल मिलाकर करीब आठ लाख लोगों की आजीविका इस सेक्टर से जुड़ी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कोई उपभोक्ता बाजार से पटाखे खरीदता है, तो वह प्रत्यक्ष रूप से किसी जरूरतमंद के घर चूल्हा जलाने में सहयोग कर रहा होता है।

त्योहारों के समय उठने वाले प्रदूषण के मुद्दों पर भी उन्होंने अपनी बात खुलकर रखी। के. अन्नामलाई ने पर्यावरण की रक्षा के महत्व को तो स्वीकार किया, लेकिन इस थ्योरी से पूरी तरह असहमति जताई कि वायु प्रदूषण के लिए अकेले पटाखे ही जिम्मेदार हैं। उनका कहना था कि जब देश में प्रदूषण के कई अन्य बड़े कारण भी मौजूद हैं, तो अकेले पटाखा उद्योग को निशाना बनाकर उस पर अनुचित प्रतिबंध नहीं थोपे जाने चाहिए। अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने अभिभावकों और परिवारों से अपील की कि वे अपने बच्चों का हाथ थामकर आस-पड़ोस की स्थानीय दुकानों का रुख करें और वहीं से स्वदेशी पटाखे खरीदें।

उनका यह भी मानना है कि दिवाली के इस पावन अवसर पर आम जनता का यह सहयोग श्रमिकों के हितों की रक्षा करेगा और तमिलनाडु की इस पुरानी आतिशबाजी परंपरा के अस्तित्व को भी बचाए रखेगा। हालांकि, के. अन्नामलाई का यह बयान ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब देश के कई बड़े महानगर भयंकर प्रदूषण की समस्या का सामना कर रहे हैं। इनमें दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम के साथ-साथ उत्तर भारत के नोएडा और गाजियाबाद जैसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के इलाके शामिल हैं, जहां हवा की गुणवत्ता लगातार चिंता का विषय बनी हुई है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई का स्तर लगभग 400 के खतरनाक आंकड़े तक पहुंच गया है। ऐसी गंभीर स्थिति को देखते हुए विभिन्न हलकों से पटाखों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग जोर पकड़ने लगी है, क्योंकि जानकारों का मानना है कि पहले से ही प्रदूषित हवा दिवाली के बाद और अधिक जहरीली होकर पूरे इलाके को एक गैस चैंबर में तब्दील कर देती है। लगातार बिगड़ते हालात के बीच, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने शुक्रवार को त्योहार से कुछ दिन पहले ही एहतियात के तौर पर दिल्ली-एनसीआर में श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना यानी ग्रैप के तीसरे चरण को लागू कर दिया है।

इस नए और कड़े तीसरे चरण के दायरे के तहत, प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर लगाम कसने के लिए एक नौ सूत्रीय कार्य योजना को जमीन पर उतारा जा रहा है। इन तमाम उपायों में मुख्य रूप से निर्माण कार्यों और विध्वंस गतिविधियों पर रोक, वाहनों के बेधड़क संचालन पर नियंत्रण और औद्योगिक इकाइयों के कामकाज पर सख्त प्रतिबंध शामिल हैं। इसके साथ ही स्कूलों और कार्यालयों के संचालन को लेकर भी कई आवश्यक कदम उठाए गए हैं, ताकि कुल उत्सर्जन में कमी लाई जा सके और पूरे क्षेत्र की आबोहवा में और अधिक गिरावट को रोका जा सके।

## इसका आप पर असर
यह समाचार सीधे तौर पर त्योहारी खरीदारी, आजीविका और पर्यावरण से जुड़े नियमों को प्रभावित करता है।

- **व्यापक असर:** त्योहार के समय पटाखों की खरीद से जुड़े लाखों श्रमिकों को आर्थिक संबल मिलता है। हालांकि, कड़े प्रदूषण नियमों के कारण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लोगों को अतिरिक्त पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है।
- **दिल्ली-एनसीआर में:** ग्रैप का तीसरा चरण लागू होने से निर्माण कार्यों, यातायात और उद्योगों पर कड़े प्रतिबंध लग गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर कामकाज और आम जनजीवन की आवाजाही प्रभावित होती है।
- **व्यापारियों और खरीदार पर:** स्थानीय पटाखा निर्माताओं को अपनी बिक्री बढ़ाने का अवसर मिलता है, जबकि आम नागरिकों को वायु गुणवत्ता और प्रशासनिक प्रतिबंधों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह स्थिति त्योहारी सीजन में बड़े पैमाने पर आतिशबाजी की मांग और सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत में बढ़ने वाले प्रदूषण के कारण पैदा हुई है।

- **आजीविका की निर्भरता:** तमिलनाडु के शिवकाशी क्षेत्र में स्थित पटाखा उद्योग लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष श्रमिकों के लिए आय का मुख्य साधन है।
- **प्रदूषण का संकट:** दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक के 400 के करीब पहुंचने से प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम उठाने की अनिवार्यता बन गई।
- **नियामक कदम:** वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा सर्दियों के दौरान प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना के चरण तीन को लागू किया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. के. अन्नामलाई ने जनता से क्या अपील की है?
उन्होंने तमिलनाडु के लोगों से दिवाली के अवसर पर बड़ी मात्रा में पटाखे खरीदने और फोड़ने का आग्रह किया है।

### 2. देश का मुख्य पटाखा निर्माण केंद्र कौन सा है?
तमिलनाडु का विरुधुनगर जिला स्थित शिवकाशी देश का प्रमुख पटाखा निर्माण केंद्र है।

### 3. पटाखा उद्योग कितने लोगों को रोजगार देता है?
यह उद्योग लगभग तीन लाख लोगों को प्रत्यक्ष और पांच लाख श्रमिकों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करता है।

### 4. दिल्ली-एनसीआर में कौन सा चरण लागू किया गया है?
बढ़ते प्रदूषण के बीच वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रैप का तीसरा चरण लागू किया है।

### 5. दिल्ली और आसपास के इलाकों में एक्यूआई कितना पहुंच गया है?
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक लगभग 400 तक पहुंच गया है।

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